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Chapter 11

Dangerous obsession of love - Chapter 11

Dangerous obsession of love

अमन अपनी टीम के साथ होटल में मीटिंग कर रहा था। लावण्या किसी वजह से उससे नाराज हो गई और वहां से चली गई।

अमन उसे मनाने के लिए उसके पीछे गया। लावण्या की गाड़ी आर्टिस्टिक के ऑफिस के आगे जाकर रुकी।

वो गाड़ी से बाहर निकली और सीधे अपने केबिन में गई। अमन भी पीछे-पीछे उसके केबिन में आया।

“क्या बात है लवी? क्या मैं तुम्हारे बीच में उठके आने का रीजन जान सकता हूं?” बोलते हुए अमन लावण्या के पास आया। उसने देखा लावण्या की आंखों में आंसू थे।

“कुछ हुआ है क्या लवी?” अमन ने उसका हाथ पकड़ कर पूछा।

“अमन तुमने कहा था कि तुम सच्चे प्यार में यकीन नहीं करते। अगर तुम प्यार में यकीन नहीं करते इसका मतलब तुम्हें मुझसे प्यार भी नहीं है।” लावण्या ने रोते हुए बताया।

“मैंने कभी इस फीलिंग को एक्सपीरियंस नहीं किया। फिर झूठ कैसे बोल दूं?” अमन ने बेरुखी से जवाब दिया।

“अगर तुम्हें मुझसे प्यार ही नहीं है, तो तुमने मुझे शादी के लिए हां क्यों कहीं?” लावण्या ने हैरानी से पूछा।

“देखो लवी, मैं रिलेशनशिप में बिलीव नहीं करता। बट एट द सेम टाइम आप इससे भाग नहीं सकते। अगर मेरी लाइफ में कोई और लड़की आती है, तो मैं उसे कभी नहीं बता पाऊंगा कि मेरा काम क्या है। साथ ही मैं झूठ के साथ कोई रिश्ता नहीं बनाना चाहता। तुम मेरी अच्छी दोस्त हो और हम दोनों एक ही प्रोफेशन से बिलॉन्ग करते हैं, अच्छे दोस्त अच्छे लाइफ पार्टनर्स भी साबित होते हैं।” अमन ने बिना कुछ छुपाए अपने दिल में जो भी था, वो लावण्या के सामने रख दिया।

अब लावण्या को भी अच्छा महसूस हो रहा था। “पता है तुम्हारी सबसे अच्छी बात क्या है कि तुम कभी झूठ नहीं बोलते। मैं तुम्हारी ऑनेस्टी की रिस्पेक्ट करती हूं अमन। साथ रहते रहते शायद तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार वाली फीलिंग भी ग्रो हो जाए।“ लावण्या ने हल्का मुस्कुरा कर जवाब दिया।

“हां ऐसा हो सकता है लेकिन फिलहाल के लिए तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो। उस दोस्ती की खातिर मैं तुम्हें कभी भी हर्ट नहीं करूंगा।” अमन‌ ने उसके हाथ पर अपना हाथ रख कर वादा किया।

एक हल्की-फुल्की प्यार भरी बातचीत के बाद उन दोनों की तकरार खत्म हो गई।

“अच्छा अगर तुम्हारी मिसअंडरस्टैंडिंग दूर हो गई हो तो तुम काम पर ध्यान दोगी?” लावण्या का मूड देखकर अमन बोला।

लावण्या ने उसकी बात पर हामी भरी। उसके हामी भरते ही अमन ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि तुम विधिक राणा के पास जाओ लेकिन साथ ही ये भी कि तुम उसके बारे में हर एक इंफॉर्मेशन कलेक्ट करोगी। बाय हुक और बाय क्रुक।”

“ठीक है मैं उसके पास पहुंचने का कोई तरीका निकालती हूं। यहां ऑफिस में चीजें कैसे संभालनी है, वो तुम देख लेना। मुझे कुछ दिन के लिए छुपकर इस पर काम करना होगा।” लावण्या ने जवाब दिया।

“डोंट वरी, यहां मैं सब संभाल लूंगा। तुम अपना मेकओवर करवा लेना, मैं तुम्हारे लिए आईडीज का इंतजाम करवा दूंगा।” अमन ने कहा।

दोनों के बीच सारी बात फाइनल हो चुकी थी। अमन को बाय बोल कर लावण्या वहां से उसके बताए हुए काम पर निकल गई। ऑफिस आने के बाद अमन भी अपने ऑफिस के कामों में व्यस्त हो चुका था।

_________

दूसरी तरफ आंशी अपने घर से निकलकर अर्जुन के ऑफिस गई। अर्जुन वहां अपने कामों में व्यस्त था। ऑफिस टाइम में किसी से मिलने की इजाजत ना होने के कारण रिसेप्शनिस्ट ने आंशी को बाहर ही रोक लिया।

“आप समझ क्यों नहीं रही, मुझे उससे सिर्फ 2 मिनट का काम है। मैं उससे मिलते ही वापस आ जाऊंगी।” आंशी ने रिसेप्शनिस्ट के आगे रिक्वेस्ट की।

“सॉरी मैम बट ऑफिस ऑर्स में किसी भी फैमिली मेंबर को मिलना अलाउ नहीं है। 1 घंटे बाद लंच ब्रेक हो जाएगा, आप तब सर से मिल सकती हैं।” रिसेप्शनिस्ट ने काफी फॉर्मली जवाब दिया।

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रिसेप्शनिस्ट के मना करने पर आंशी का मुंह बन गया। उसने एक आखिरी कोशिश करते हुए कहा, “आप मुझे रोक कर अच्छा नहीं कर रही है। अर्जुन को पता चला तो वो बहुत गुस्सा करेगा।”

“सॉरी मैम मैं कुछ नहीं कर सकती। ये मेरा काम है। अर्जुन सर का तो पता नहीं लेकिन हमारे बॉस मिस्टर मेहरा को पता चला तो उनके साथ साथ मुझे भी काम से निकाल देंगे। आप चाहे तो उनका वेट करने के लिए ऑफिस के कैंटीन या वेटिंग रूम में बैठ सकती हैं। नाऊ एक्सक्यूज मी प्लीज।” कहकर रिसेप्शनिस्ट वापस अपने कामों में लग गई थी।

आंशी रिसेप्शन टेबल से अलग हुई और वहां लगे काउच पर बैठकर सोचने लगी। “क्या हो जाता जो मिलने देती। मैं उसे सिर्फ 5 मिनट ही तो मिलती। 5 मिनट में ऐसा कौन सा इंपॉर्टेंट काम रह जाता उसका। एक तो ऐसे ही डैड के आने से टेंशन हो रही है, ऊपर से ये भी बात करने नहीं दे रही।”

आंशी रिसेप्शनिस्ट की तरफ घूर कर देख रही थी। उसका ध्यान आंशी पर गया तो उसने नरमी से कहा, “मैम आप कैंटीन में चले जाइए। वहां खाने पीने को काफी सारा सामान होगा। आपका मूड भी ठीक हो जाएगा।”

“मेरा मूड तो अब अर्जुन से मिलने के बाद ही ठीक होगा। अगर आपको मेरे मूड की इतनी ही पड़ी है तो मुझे मिलने दीजिए ना।” आंशी ने मुंह बनाकर कहा।

रिसेप्शनिस्ट ने सॉरी बुदबुदाते हुए कंधे उचकाए। “ऑफिस का कैंटीन सेकंड फ्लोर पर है।” बोलते हुए उसने लिफ्ट की तरफ इशारा किया।

आंशी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कैंटीन में जाने के लिए निकल पड़ी। उसने देखा कुछ इंप्लाइज लिफ्ट की तरफ जा रहे थे तो वो भी उनके साथ अंदर चली गई।

“देखा आज बॉस कितने गुस्से में थे। आज तो गलती से भी कोई गलती ना कर दे वरना नौकरी ही चली जानी है।“ एक लड़की ने फुसफुसाकर कहा।

उसके पास खड़े लड़के ने जवाब में कहा, “मैं तो आज लंच भी स्किप करने वाला हूं। सोच रहा हूं लंच ब्रेक में भी थोड़ा काम कर लूं ताकि सर खुश हो जाए।”

बात करते हुए उन दोनों ने आंशी की तरफ देखा और आंखों ही आंखों में चुप रहने का इशारा किया।

“कहीं आप हमारे बॉस मिस्टर करण मेहरा की कोई रिश्तेदार तो नहीं?” लड़की ने हिचकिचाते हुए पूछा।

“अरे नहीं। डरिए मत, मैं तो खुद यहां पर विजिटर हूं। आप मेरे सामने अपने बॉस की बुराई कर सकती है।” आंशी ने हंसते हुए जवाब दिया। ‌“लगता है आपके बॉस बहुत खड़ूस है, तभी आप लोग कितने परेशान और थके हुए लग रहे हो।”

“हां सही कहा। कभी-कभी तो मुझे लगता है कि वो इंसान कभी खुश नहीं हो सकता।” लड़के ने जवाब दिया।

“वैसे आप कौन है?” लड़की ने एक बार फिर पूछा।

“मैं। मैं तो अर्जुन लूथरा की फ्रेंड हूं और उससे मिलने आई थी।” आंशी ने जवाब दिया।

“और ऑफिस ऑर्स में रिसेप्शनिस्ट ने आप को मिलने के लिए ऊपर भेज भी दिया।” लड़की ने हैरानी से पूछा।

आंशी अर्जुन से मिलने के बजाय कैंटीन में जा रही थी और लड़की की बातों से वो समझ गई थी कि उसे गलतफहमी हुई है। आंशी ने भी उस गलतफहमी को दूर करना सही नहीं समझा।

“हां।और नहीं तो क्या? लेकिन मैं फ्लोर नंबर भूल गई कि अर्जुन कहां काम करता है? अगर आप जानते हो तो प्लीज मुझे बता सकते हैं कि अर्जुन लूथरा कौन से फ्लोर पर काम करते हैं?” आंशी ने झूठ बोला।

लड़की ने आंशी की तरफ एक नजर भर देखा और फिर पास वाले लड़के को दबी आवाज में कहा, “लगता है ये लड़की अर्जुन की गर्लफ्रेंड है। देखो ना बेचारी कितनी मासूम लग रही है। हो सकता है कोई जरूरी काम होगा, तभी रिसेप्शनिस्ट ने इसे ऊपर भेज दिया हो।”

“हमें इसकी मदद करनी चाहिए।” लड़का उस लड़की से दबी आवाज में बोला और फिर हल्का खांसते हुए आंशी की तरफ देख कर कहा, “डोंट वरी भाभी जी। मैं भी उसी फ्लोर पर जा रहा हूं। आप मेरे साथ चल सकती है और अर्जुन से मिल सकती है। वो मेरा दोस्त है।”

“क्या कहा? भाभी जी?” उसके मुंह से भाभी जी सुनकर आंशी ने अपनी आंखें बड़ी की।

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“तुम भी ना मोह, आजकल की लड़कियां कहां भाभी सुनना पसंद करती है। अब मुझे भी कोई भाभी बोले तो कितना ऑकवर्ड फील होता है। वैसे आपका नाम क्या है, होने वाली भाभी जी?” लड़की ने उसे छेड़ते हुए कहा।

“मेरा नाम आंशी है। लेकिन आप लोग मुझे भाभी जी क्यों बोल रहे हैं, ये मुझे समझ नहीं आ रहा।” आंशी ने उलझन भरे स्वर में कहा।

“कोई बात नहीं। आप ऐसे ही अनजान बने रहिए लेकिन हम सब समझ गए।” मोह ने अपनी एक आंख दबाकर कहा।

उसके पास खड़ी लड़की उसकी इस बात पर हंसी और दोनों ने हाई-फाई की। आंशी ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो लोग फिफ्थ फ्लोर पर थे, जहां पर अर्जुन काम करता था।

मोह उसे अर्जुन के क्यूबिकल तक छोड़ने गया। अर्जुन आंशी को देखकर हैरान था।

“वैसे चॉइस बहुत अच्छी है तुम्हारी। तुमने तो हमें नहीं मिलवाया छुपे रुस्तम। किस्मत ने हमें हमारी होने वाली भाभी से मिलवा ही दिया।” मोह अर्जुन के कंधे पर हल्का सा मारते हुए बोला।

“कौन भाभी? किसकी भाभी?” अर्जुन ने हैरानी से पूछा।

“हां हां सब समझते हैं। चिल कर किसी को पता नहीं चलेगा। बॉस को हम देख लेंगे लेकिन दोनों अपनी बात जल्दी खत्म कर लेना। पता है ना आज वैसे ही सड़े हुए हैं। हैव फन।” मोह ने थम्सअप किया और वहां से चला गया।

उसके जाते ही आंशी ने पूछा, “ये मुझे भाभी जी क्यों बुला रहा था?”

“क्योंकि इसे लगता है कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो। हद है यार आंशी कम से कम ऑफिस में तो मुझे अकेला छोड़ दिया कर। यहां भी आ गई।” अर्जुन हल्के से चिल्लाकर बोला।

“तू ऐसे चिल्ला क्यों रहा है? तेरा बॉस सुन लेगा तो तुझे नौकरी से निकाल देगा। मुझे तुमसे बहुत जरूरी बात करनी थी इसलिए यहां आ गई।” आंशी ने सिर हिलाकर कहा।

“तेरी जरूरी बात तू कॉल पर भी बता सकती थी। अगर उस मेहरा के बच्चे ने मुझे तुझसे बात करते हुए देख लिया तो मेरी वाट लग जानी है।“ अर्जुन ने मुंह बनाकर कहा।

“मिस्टर मेहरा के बच्चे भी यहां पर काम करते हैं?” आंशी आंखें बड़ी करके बोली, “डोंट वरी हम उसे चॉकलेट देकर मना लेंगे।”

आंशी की बातों से अर्जुन चिढ़ते हुए बोला, “तेरे इस फालतू से जोक पर मुझे बिल्कुल भी हंसी नहीं आई। अब जल्दी बता यहां क्यों आई है?”

“मैं तो तुम्हें ये बताने के लिए आई थी कि मैंने शादी करने का प्लान ड्रॉप कर दिया है। इट वाॅज वेरी बैड प्लान। 1 दिन में मुझे लड़का कहां से मिलेगा?” आंशी ने जवाब दिया।

“वेरी गुड।” उसकी बात सुनकर अर्जुन ने धीरे से ताली बजाई और उसे पकड़ कर वहां से ले जाने लगा। “होप सो कि तुम्हारी इंपॉर्टेंट बात खत्म हो गई होगी। अब निकलो यहां से।”

आंशी ने जाने से मना कर दिया और वो वहीं पर खड़ी होकर अर्जुन से बात करने लगी, “अरे तुम मुझे ऐसे धकेल क्यों रहे हो? चली जाऊंगी ना, कौन सा मैं यहां रहूंगी तो तुम्हारे ऑफिस को खा जाऊंगी।”

“तुम तो ऑफिस को नहीं खाओगी लेकिन बॉस ने तुम्हें यहां देख लिया तो वो मुझे जरूर खा जाएगा। तुम्हें नहीं पता जॉब ज्वाइन करने से पहले कॉन्ट्रैक्ट में साफ लफ्जो में लिखा हुआ था कि ऑफिस आर्स में कोई भी फैमिली मेंबर यहां मिलने नहीं आएगा।” बोलते हुए अर्जुन आंशी को पकड़कर वहां से ले जाने लगा।

“ये क्या बकवास सा रूल हुआ? मैं तो कहती हूं कि तुम्हें ये नौकरी आज ही छोड़ देनी चाहिए।” आंशी ने रुककर कहा।

“हां ऑफिस तो मेरे पापा का है, जो छोड़ दूंगा। कॉन्ट्रैक्ट में ये भी लिखा था कि मैं 2 साल से पहले ये नौकरी नहीं छोड़ सकता। अगर मैंने ये नौकरी छोड़ी तो मुझे कंपनी को एक अच्छा खासा कंपनसेशन देना पड़ेगा।” अर्जुन ने बताया।

जैसे ही अर्जुन की बात खत्म हुई आंशी के चेहरे पर चमक आ गई। उसने चुटकी बजाई और कहा, “मिल गया आईडिया।”

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