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Chapter 14

Dangerous obsession of love - Chapter 14

Dangerous obsession of love

अमन ने अपनी टीम में शामिल होने के लिए दिव्याना को हां कह दी थी। वो उसके इस फैसले से बहुत हैरान थी।

उसके हां कहने के पीछे के कारण का पता लगाने के लिए दिव्याना अमन के पीछे उनके सीनियर मिस्टर तेज प्रकाश दत्त के ऑफिस में गई।

“चलो अच्छा हुआ तुम खुद ही आ गई दिव्याना ।” उसे देखकर मिस्टर दत्त ने कहा, “वैसे मैं तुम्हें बुलाने ही वाला था। अमन चाहता है कि तुम उनकी टीम में काम करो। तुम्हारा क्या डिसीजन है?”

“मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन मिस्टर कपूर के पास उनकी पूरी टीम मौजूद है। फिर मैं कैसे।” दिव्याना ने पूरी बात जानने के लिए पूछा।

“मिस बजाज, मैं अपने मिशन से जुड़ी हुई कोई भी इंफॉर्मेशन आपको नहीं दे सकता, जब तक कि आप मेरी टीम में शामिल नहीं हो जाती।” अमन ने उसे कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।

“देख लो अब डिसीजन तुम पर है। अमन को अपनी टीम में एक और मेंबर चाहिए। स्पेशली कोई फीमेल मेंबर। अगर तुम ना कहती हो तो मैं किसी और को रीकमेंड कर देता हूं।” मिस्टर दत्त बोले।

“उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी सर, मैं मिस्टर कपूर की टीम में शामिल होने के लिए तैयार हूं।” दिव्याना ने ज्यादा सोचे बिना हां कर दी। “अब तो आप मुझे बता सकते हैं कि मुझे अपनी टीम में शामिल करने का क्या कारण है?”

“आप पहले सारे डाक्यूमेंट्स साइन कर दीजिए, उसके बाद मीटिंग में आपको पता चल जाएगा। मीटिंग रात के 2:00 बजे होगी। मैं आपको लोकेशन भेज दूंगा।” अमन ने दिव्याना की तरफ देखकर कहा।

“तब तक मैं बाकी की फॉर्मेलिटीज पूरी करवा देता हूं।” मिस्टर दत्त ने कहा।

दिव्याना और अमन ने उनकी बात पर हामी भरी और वहां से बाहर चले आए। अमन वहां से जाने लगा तभी दिव्याना तेज कदमों से चलते हुए उसके पीछे आई, “मुझे तुमसे बात करनी है अमन।”

“लेकिन मैं आपसे बात करने के मूड में नहीं हूं मिस बजाज। भले ही मैंने आपको अपनी टीम में लेने के लिए हां कह दिया लेकिन इस गलतफहमी में मत रहिएगा कि हमारे बीच अब चीजें सही हो जाएगी। इंसान एक बार ही धोखा खाता है स्पेशली एक सीक्रेट एजेंट।” अमन ने हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा और वहां से चला गया।

उसके इस रवैए से दिव्याना के चेहरे पर गुस्से और उदासी के भाव एक साथ थे। “मैं जानती हूं कि मैंने तुम्हें अपनी गलती की वजह से खो दिया लेकिन अब जब खुद तुम मुझे अपने पास आने का मौका दे रहे हो तो मैं तुम्हें खुद से दूर नहीं जाने दूंगी। जानती हूं रास्ता बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं।” दिव्याना ने सोचा और वहां से वापस अपने कैबिन में आ गई।

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सीक्रेट एजेंसी के ऑफिस से निकलकर अमन आर्टिस्टिक के ऑफिस जा रहा था। दिव्याना से मिलने के बाद उससे जुड़ी पुरानी यादें उसे परेशान कर रही थी।

“सबसे पहले तो मुझे लवी को समझाना होगा कि मैंने दिव्याना को अपनी टीम में क्यों लिया? मैं अच्छे से जानता हूं दिव्याना तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है, लेकिन मैं मॉल में रखी कोई ड्रेस नहीं, जिसे तुम एक बार रिजेक्ट करने के बाद वापस खरीदने चली जाओ।” अमन गाड़ी चलाते हुए खुद से बातें कर रहा था।

तभी उसके मोबाइल पर लावण्या का कॉल आया। उसने गाड़ी साइड में रोकी और उससे बात करने लगा।

“क्या मैं जान सकती हूं कि तुमने दिव्याना को हमारी टीम में क्यों लिया?” फोन उठाते ही लावण्या ने पूछा। उसे दिव्याना के उनके टीम में शामिल होने की खबर मिल चुकी थी। उसकी आवाज से साफ पता चल रहा था कि वो अमन के इस डिसीजन से बहुत नाराज थी।

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“ओह तो तुम्हें पता चल ही गया। वैसे मैं तुम्हें बताने के लिए कॉल करने ही वाला था। लवी दिव्याना तुम्हारी बहन है।” अमन उसे समझाने की कोशिश कर रहा था।

लावण्या ने उसकी बात बीच में काटकर कहा, “और साथ ही वो लड़की भी, जिसने तुम्हें यूज़ किया। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा। अमन आई वांट कि तुम दिव्याना को हमारी टीम में शामिल मत करो।”

“डोंट वरी वो हमारी टीम में होगी जरूर लेकिन हमारे साथ काम नहीं करेगी। लोगों के दिलों के साथ खेलना दिव्याना को बहुत अच्छे से आता है। उसकी मासूम शक्ल देख कर कोई भी धोखा खा सकता है तो फिर विधिक राणा क्या चीज है।” अमन ने मुस्कुराहट के साथ कहा।

“समझ गई। विधिक राणा जैसे इंसान के लिए दिव्याना से बेहतर कौन हो सकता है।” अमन की बातो से लावण्या समझ चुकी थी कि अमन ने दिव्याना को विधिक राणा के पास भेजने के लिए चुना है।

“अब तो तुम्हें कोई मिसअंडरस्टैंडिंग नहीं है ना?” अमन ने पूछा।

“तुम मेरे बिना पूछे ही सब बात सामने से क्लियर कर देते हो, ऐसे में हमारे बीच गलतफहमियां हो भी कैसे सकती हैं। फिर भी मैं कहना चाहूंगी कि तुम अवेयर रहना। दिवी को तुम से बेहतर और कोई नहीं जान सकता वह। वो फिर से तुम्हारे पास आने की कोशिश करेगी।” लावण्या ने जवाब दिया।

“अब ऐसा कभी नहीं हो सकता।” अमन ने जवाब दिया।

“मुझे तुम पर पूरा ट्रस्ट है। ठीक है फिर बाद मे बात करते हैं।” लावण्या ने कहा और कॉल कट कर दिया।

अमन वहां से सीधा अपने ऑफिस पहुंचा और जिन कामों को वो अधूरा छोड़ कर गया था, उन्हें पूरा करने में लग गया।

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रात के समय अर्जुन और आंशी हमेशा की तरह बाहर गार्डन में बैठकर बातें कर रहे थे। प्रीतो जी सोने जा चुकी थी।

“अब बताएगी मुझे, ऐसा भी क्या इंपॉर्टेंट काम था जिसकी वजह से तू मेरे ऑफिस तक चली आई।” अर्जुन ने पूछा।

“तुमने मुझे बताया था कि तुमने कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जिस के अकॉर्डिंग तुम एक पर्टिकुलर टाइम पीरियड से पहले जॉब छोड़कर नहीं जा सकते।” आंशी ने पूछा।

“इसमें कौन सी नई बात है। कोई भी बड़ी कंपनी अपने एंप्लाइज के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन करती हैं।” अर्जुन ने कंधे उचकाकर जवाब दिया।

“एक्जेक्टली। मैं भी यही कहना चाहती हूं। मैं किसी कंपनी में जॉब कर लेती हूं और उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद डैड मुझे यहां से भेज नहीं पाएंगे।” आंशी ने अपना आईडिया बताया।

“अरे वाह बंदर। कहना पड़ेगा, इस बार प्लान काफी अच्छा बनाया है। लेकिन तुझे जॉब देगा कौन?” अर्जुन हंसकर बोला।

आंशी ने उसकी तरफ घूर कर देखा और कहा, “व्हाट डू यू मीन मुझे जॉब देगा कौन? अरे वही, जिन्होंने तुम्हें जॉब दी है। मैं तुम्हारी कंपनी में तुम्हारे साथ जॉब करूंगी।”

आंशी की बात सुनकर अर्जुन जल्दी से बोला, “बिल्कुल नहीं। तुझ से पीछा छुड़ाकर कुछ देर तो मैं सुकून से अपने ऑफिस में काम करता हूं। अब क्या तू वहां पर भी मेरे सिर पर रहेगी। मानता हूं तेरा प्लान अच्छा है और मैं तेरी जॉब ढूंढने में हेल्प कर दूंगा लेकिन मेरी कंपनी में बिल्कुल नहीं।”

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अर्जुन ने आंशी को साफ मना कर दिया। उसके ऐसा करने पर वो उसकी तरफ मुंह बनाकर देखने लगी।

“मैं भी तेरे साथ जॉब करने में इंटरेस्टेड नहीं हूं लेकिन मुझे कहीं और अच्छी वैकेंसी मिली ही नहीं।” आंशी ने मुंह बनाकर कहा।

उसकी बातें गौर से सुनने के बाद अर्जुन ने उसे आइडिया देते हुए कहा, “पागल लड़की, वैकेंसी के चक्करो में मत पड़ो। तुम अपना सीवी लो और किसी भी बड़ी कंपनी में वॉक ऑन इंटरव्यू में चली जाओ। क्या पता वहां एंप्लॉय की जगह खाली हो।”

“आईडिया तो काफी अच्छा है। चलो फिर यही काम करते हैं। हॉप सो कि जॉब मिल जाए वरना मैं कुछ नहीं जानती। मैं तो तेरी ही कंपनी में आऊंगी।” आंशी ने अपना आखिरी फैसला सुना दिया।

उसके बाद दोनों सोने जा चुके थे। रेस्टोरेंट में हुए हादसे के बारे में आंशी ने किसी से कुछ नहीं कहा।

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अगले दिन अर्जुन अपने ऑफिस जा चुका था। आंशी भी इंटरव्यू के लिए तैयार हो गई। इंटरव्यू पर जाने से पहले आंशी प्रीतो जी के पास गई।

“आज तुम्हारे पापा आने वाले हैं। याद है ना तुम्हें?” प्रीतो जी ने आंशी को देखते ही कहा।

“मै ये भूल भी कैसे सकती हूं।” आंशी ने उदास चेहरे के साथ कहा।

“मैं उसे समझाने की पूरी कोशिश करूंगी लेकिन फिर भी वो नहीं माना, तो मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। आंशी तुम्हें वापस लंदन जाना ही होगा।” प्रीतो जी ने प्यार से कहा।

“आई होप कि उसकी नौबत ना आए दादी। चलिए इन सबको छोड़िए और अपनी पोती को आशीर्वाद दीजिए कि वो अपने मिशन में सक्सेसफुल होकर आए।” बोलते हुए आंशी ने प्रीतो जी के पैर छुए।

“मैं तो हमेशा तुम्हारी कामयाबी की दुआ करती हूं। भगवान तुम्हें हर बुरी बला से दूर रखें मेरी बच्ची।” प्रीतो जी ने आशीर्वाद दिया। “लेकिन तुमने बताया नहीं कि तुम जा कहां रही हो?” प्रीतो जी हैरानी से पूछा।

“वो तो मैं अपने काम के सक्सेसफुल होने पर ही आपको बताऊंगी। चलिए, मैं चलती हूं पापा आ जाए तो एक बार कॉल कर दीजिएगा।” आंशी ने जवाब दिया और जल्दबाजी में वहां से जाने लगी।

उन्हें बाय बोलने के बाद आंशी वहां से जा चुकी थी। वहां से निकलने के बाद उसने अपने बैग से एक पेपर का टुकड़ा निकाला।

“इसमें मैंने चंडीगढ़ की टॉप फाइव कंपनीज के नाम लिख रखे हैं। सबसे पहले उन में जाकर अप्लाई करती हूं।” आंशी ने खुद से कहा और ऑटो को रुकवाया।

“कहां जाना है मैडम?” ऑटो वाले ने पूछा।

“मुझे आर्टिस्टिक के ऑफिस ले चलो।” एड्रेस बताते हुए आंशी ऑटो में बैठी। उसने इंटरव्यू देने के लिए सबसे पहले आर्टिस्टिक को चुना था।

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अमन और दिव्याना का क्या रिश्ता है, any idea?

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