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Chapter 21

Dangerous obsession of love - Chapter 21

Dangerous obsession of love

मिस्टर जिंदल से बहस होने के बाद आंशी अपसेट हो गई थी। उसके घर से निकलते ही अर्जुन उसके पीछे गया, ताकि उसका मूड सही कर सके।

आंशी थोड़ा आगे चलकर रोड पर ऑटो का वेट कर रही थी, तभी अर्जुन ने अपनी गाड़ी आंशी के पास आकर रोकी।

उसने अपनी गाड़ी का शीशा नीचा कर के कहा, “लिफ्ट चाहिए मिस आंशी जिंदल?”

“नो थैंक्स मिस्टर अर्जुन लूथरा.....” आंशी ने बिना उसकी तरफ देख कर जवाब दिया।

“यार इन सब में मेरी क्या गलती है, जो तू मुझसे गुस्सा हो रही है?” अर्जुन ने जवाब दिया। उसने कार की स्पीड स्लो कर ली ताकि आंशी के साथ स्पीड मैच हो सके।

“तुम्हें यहां मेरे पीछे दादी ने भेजा है ना? या फिर मिस्टर जिंदल ने? वो तुम्हारे जरिए पता लगाना चाहते है ना कि मैं कहां काम करती हूं।” आंशी ने रुककर कहा।

अर्जुन ने भी कार रोकी और जवाब में कहा, “कम ऑन यार आंशी, अब मैं कोई कबूतर तो हुं नहीं, जो लोगों के संदेश इधर उधर पहुंचाता फिरूं?”

“हो सकता है तुम्हारी शक्ल देखकर लोगों ने तुम्हें कबूतर समझ लिया हो और अपने संदेश इधर-उधर पहुंचाने के लिए हायर कर लिया हो।” आंशी ने उसे परेशान करने के लिए कहा।

उसकी बात सुनकर अर्जुन ने उसकी तरफ मुंह बनाया और कहा, “बहुत बेकार जोक था। मेरे पास अंडे और टमाटर होते तो अभी तुम्हारी तरफ फेंक देता।”

“अच्छा इन सब को छोड़ो और बताओ, सच में पापा और दादी ने तुम्हें मेरे पीछे नहीं भेजा ना?” आंशी ने इस बार सीरियस होकर पूछा।

“नहीं.....” जैसे ही अर्जुन ने कहा, आंशी जल्दी से गाड़ी की तरफ बढ़ी और उसमें बैठने लगी लेकिन तभी अर्जुन ने गाड़ी का डोर लॉक कर दिया।

उसके ऐसा करने पर आंशी ने हैरानी से कहा, “मैंने मान ली ना तुम्हारी बात? अब तो लिफ्ट दे दो, मुझे ऑफिस जाने में लेट हो रही है।”

“अच्छी बात है लेकिन अब तुम्हें मैं लिफ्ट नहीं देने वाला। ये तुम्हारे कबूतर वाले जोक की सजा है।” अर्जुन ने मुस्कुराकर जवाब दिया।

“अर्जुन के बच्चे.....” आंशी उस पर चिल्लाने लगी लेकिन अर्जुन उसकी बात अनसुना करके अपनी गाड़ी स्टार्ट कर के वहां से चला गया।

“पता नहीं सबको मुझ से क्या दुश्मनी है? ऑलरेडी मैं लेट हो गई। अब तो भगवान जी से यही दुआ है कि वो अमन कपूर भी लेट आए ताकि मुझे डांट ना सुननी पड़े।” आंशी खुद से बड़बड़ाते हुए बातें कर रही थी, तभी वहां से ऑटो गुजरा।

उसने हाथ के इशारे से ऑटो रोका और उस में बैठते हुए कहा, “भैया अब एरोप्लेन की स्पीड से ऑटो चला कर मुझे जल्दी से आर्टिस्टिक के ऑफिस के आगे छोड़ दो।”

लगभग आधे घंटे के बाद आंशी आर्टिस्टिक के ऑफिस के आगे थी। उसने जल्दी से ऑटो वाले को किराया दिया और ऑफिस में गई।

____________

आंशी ऑफिस पहुंची तब 11:00 बज चुके थे। सारा स्टाफ उसकी तरफ अजीब नजरों से देख रहा था। जैसे ही आंशी अपनी डेस्क पर बैठी, उसकी नजर सामने अमन के केबिन में गई। वो वहां मौजूद था और काम कर रहा था।

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“ये यहां कब आया? जरूर अभी पहुंचा होगा। इसका ध्यान काम में लगा है। ऐसा करती हूं मैं भी काम करने का दिखावा करती हूं। इसे लगेगा कि मुझे यहां आए हुए काफी टाइम हो गया।” आंशी ने अपने मन में कहा। उसने जल्दी से वहां रखी फाइल उठाई और उसे पढ़ने लगी।

उसने फाइल को खोला ही था तभी उसके डेस्क पर मौजूद फोन की घंटी बजी। “ये क्या मेरे ही आने का वेट कर रहा था जो आते ही टिंग टिंग करने लग गया।” आंशी ने जल्दी से फोन उठाया।

“मिस आंशी जिंदल, अभी इसी वक्त मेरे केबिन में आइए।” दूसरी तरफ से अमन बोल रहा था। आंशी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और केबिन की तरफ देखा।

उसने फोन रखा और अमन के केबिन में जाने लगी। “लगता है मेरा आज का दिन अच्छा नहीं है। पहले पापा की वजह से मूड खराब था। अब अगर इसने डांटा तो पूरे दिन की वाट लग जानी हैं।”

आंशी ने दरवाजा नॉक किया। “यस कम इन.....” सामने से अमन की आवाज आई।

जैसे ही आंशी अंदर गई, अमन ने उसे देखा उसने क्रॉप टॉप और शॉर्टस पहन रखे थे। आंशी अमन की तरफ देख कर मुस्कुराई लेकिन अमन ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसका बर्ताव देखकर आंशी ने सोचा, “इसकी शक्ल देख कर साफ पता चल रहा है कि ये अच्छे मूड में नहीं है। कुछ सोच आंशी, लेट आने के लिए क्या बोलना है।”

“बैठो.....” अमन ने उसे बैठने के लिए कहा। आंशी उसके सामने लगी चेयर पर बैठ गई। उसके बैठते ही उसने कहा, “जानता हूं मिस आंशी ये आपकी पहली जॉब है। लेकिन ऑफिस आने के लिए आपको फॉर्मल वियर पहन लेना चाहिए था।”

“तो आप मुझे मेरे कपड़ों को लेकर जज कर रहे हैं?” आंशी ने जवाब दिया।

“आप अभी नीचे सेकंड फ्लोर पर जाकर मिस डेजी से मिलेंगी। वो आपकी ड्रेस का मेजरमेंट ले कर कल तक आपके पास ड्रेस भिजवा देंगी। आपको यहां काम करने के लिए ड्रेस कोड को फॉलो करना होगा।”

“बस यही कहने के लिए आपने मुझे यहां बुलाया था?” आंशी ने चिढ़कर कहा।

“नहीं..... अगली बार 11:00 बजे ऑफिस आना हो, तो उस दिन छुट्टी ले लीजिएगा।” अमन ने सख्त लहजे में कहा।

“आप कहे तो मैं अभी घर चली जाऊं?” आंशी ने सिर हिलाकर कहा।

“अगर आपको घर ही जाना था तो फिर आप ऑफिस आई ही क्यों?” अमन ने थोड़ा गुस्से में जवाब दिया।

आंशी ने इस बार नरमी से कहा, “लगता है सर कल रात आप ठीक से सोए नहीं, उसका गुस्सा आप इस वक्त मुझ पर निकाल रहे हैं। मैंने क्या किया? अभी हमारा कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं हुआ है, तो आप इस तरह मुझे डांट नहीं सकते।”

“आप अपनी गलती मानने के बजाय मुझसे बहस कर रही है?” अमन ने खड़े होकर कहा।

“मैंने कब अपनी गलती नहीं मानी। मुझे पता है मैं देरी से आई हूं, तभी आते ही अपने काम पर लग गई। लेकिन यहां किसी को कुछ दिखाई कहां देता है, उन्हें तो बस सामने वाले को डांटना होता है।” आंशी ने मुंह बना कर जवाब दिया।

उसकी बात सुनकर अमन ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर लैपटॉप में कुछ देखने लगा। ‌उसने लैपटॉप की स्क्रीन आंशी की तरफ की और कहा, “मुझे नहीं पता था फाइल को उल्टा पढ़ना काम करने में आता है।”

स्क्रीन पर खुद को देखकर आंशी की आंखें बड़ी हो गई।‌ उसकी डेस्क के ऊपर कैमरा लगा था, जिसके जरिए अमन उसे देख रहा था।

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“आप मुझ पर नजर रख रहे हो?” आंशी ने उसे घूरते हुए कहा।

“आप पर नहीं बल्कि कंपनी के हर एंप्लॉय की डेस्क पर कैमरा लगा है। एनी प्रॉब्लम?” अमन ने जवाब में कहा।

आंशी ने ना में सिर हिलाया। “अभी भी टाइम है। कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं हुआ है। मुझे यहां से चले जाना चाहिए। ये हिटलर अब क्या चौबीसों घंटे मुझ पर नजर रखेगा। अगर कभी मेरा काम करने का मन नहीं हुआ और मैंने चिल करने का सोचा तो..... नहीं, मुझे यहां काम नहीं करना।” आंशी ने सोचा और फिर अमन की तरफ देखा। “सर मुझे आपसे कुछ कहना था।”

“मैं जानता हूं अब आपको ये नौकरी नहीं करनी होगी।” अमन बोला।

“तो मैं जाऊं?” आंशी अपनी चेयर से खड़ी हो गई।

“सोच लीजिए मिस जिंदल इतनी जल्दी आपको दूसरी नौकरी नहीं मिलने वाली..... वैसे मैं आपको इससे भी बैटर आईडिया दे सकता हूं।” अमन ने कहा।

“और वो क्या?” आंशी ने झट से कहा।

“आपको प्रोफेशनलिज्म सीखने की जरूरत है। आपकी एजुकेशन भी अभी कंप्लीट नहीं हुई है। ऐसा कीजिए आप वापस लंदन चली जाइए और अपनी स्टडी कंप्लीट करने के बाद ही किसी जॉब के बारे में सोचिएगा।” अमन ने हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा।

अमन के मुंह से वापिस लंदन जाने की बात सुनकर आंशी जल्दी से बोली, “न.....नहीं। मैं आपकी हर बात अच्छे से ध्यान रखूंगी। कल से ऑफिस भी टाइम से आऊंगी... और..... ड्रेस... मैं लंच में जाकर शॉपिंग कर लूंगी। फिर तो ठीक है ना?” आंशी एक सांस में बोले जा रही थी।

उसकी बातें सुनकर अमन का गुस्सा एक पल में छू हो गया। वो मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रहा था।

“इतना सब करने की कोई जरूरत नहीं है मिस आंशी..... आज आपका पहला दिन है तो मैं कुछ नहीं कह रहा।” अमन ने कहा।

“इतना सब कुछ तो बोल दिया और अब कह रहा है मैं कुछ नहीं कह रहा।” आंशी ने बड़बड़ा कर कहा।

अमन ने कहा, “जाइए मिस डेजी से मिल लीजिए। उसके बाद जाकर मिस्टर सिंह से अपना कॉन्ट्रैक्ट लेकर साइन कर दीजिएगा।”

आंशी ने उसकी बात पर हामी भरी और वहां से बाहर चली गई।‌ “बिल्कुल झल्ली है ये भी..... लेकिन ये लंदन जाने के नाम से इतना घबरा क्यों रही है?” अचानक अमन ने गौर किया जब उसने आंशी से लंदन जाने के बात की, तब उसने बिना जिद किए उसकी सारी बातें मान ली थी।

वो अपनी चेयर पर बैठा और उसने जस को कॉल किया।

उसका फोन उठाते ही जस ने कहा, “लिसन ब्रो, अब मेरे पास कोई मैनिक्विन नहीं है , जो आप अंतिम संस्कार करने के लिए मंगवाना चाहते हैं।”

“नहीं..... मैंने किसी और काम के लिए कॉल किया था। जस, मुझे वो चिल्लाने वाली लड़की मिल गई है। उसका नाम आंशी है।” अमन ने बताया।

“ये तो अच्छी बात है ना, आप जल्दी से उस लड़की से उस टेरेरिस्ट का स्केच बनवा लीजिए। मैं लावण्या और मिस्टर गुप्ता को बाकी की डिटेल्स भेज दूंगा।” जस ने जवाब दिया।

“नहीं जस, तुम इस बारे में किसी से कुछ नहीं कहोगे।‌ मैं तुम्हें उस लड़की की डिटेल्स भेज रहा हूं और मुझे तुम उसके बारे में हर एक बात पता लगा कर बताओगे। वो लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी। उसने बीच सेशन में अपनी स्टडी छोड़ दी। इसका कारण जानना है मुझे।” बात करते हुए अमन जस को सारी डिटेल्स भेजने लगा।

जस ने उसकी बात पर हामी भरी और फोन कट कर दिया। अमन भी अपने कामों में लग गया। वो आर्टिस्टिक के ऑफिस में बैठकर अपने सीक्रेट एजेंसी से जुड़े हुए कामों को कर रहा था।

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