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Chapter 5

Dangerous obsession of love - Chapter 5

Dangerous obsession of love

आँशी की दादी प्रीतो जी उसके कमरे में थी और उसे वापस जाने का कह रही थी। वापस जाने का नाम सुनकर आँशी के चेहरे पर डर और उदासी के भाव थे। आँशी उठकर बाथरूम में चली गई थी। कुछ देर बाद वो वापिस आई तो प्रीतो जी अभी भी वही थी।

इससे पहले कि वो कुछ कहती आँशी पहले ही बोल पड़ी,“प्लीज दादी, मुझे किसी भी हाल में वहां वापस नहीं जाना। आप लोग समझते क्यों नहीं हो कि मुझे आपके बिना नहीं रहना है।”

“मैं जानती हूं बच्चे लेकिन तुम्हारी पढ़ाई भी तो उतनी ही जरूरी है। मैं तुम्हारे पापा से अब और नहीं छुपा सकती।” प्रीतो जी ने धीमी आवाज में कहा।

“क्या दादी, कौन सा आपको डैड से कोई इंपॉर्टेंट खुफिया फाइल छुपानी है। पिछले 2 महीने से सब कुछ ठीक चल रहा है। अब अचानक आपको वापस जाने की बात कहां से याद आ गई।” आँशी मुंह बनाकर बोली।

“अचानक कुछ याद नहीं आया है आँशी, रात को तुम्हारे पापा का कॉल आया था। वो 3 दिन में यहां आ रहे हैं। अब तक तो मैंने सारी बातें उससे छुपा ली लेकिन जब वो यहां आएगा तो उसे सच का पता चल ही जाएगा।” प्रीतो जी ने बताया।

उनकी बात सुनकर आँशी मुंह बनाते हुए सिर पकड़ कर बैठ गई। “अब ये अजीब मुसीबत है। वो यहां क्यों आना चाहते हैं?” उसने पूछा।

“कैसी बच्चों जैसी बातें कर रही हो तुम, ये घर है उसका, यहां नहीं आएगा तो कहां जाएगा।” प्रीतो जी ने उसे डांटते हुए कहा।

“वही जाएंगे जहां पिछले 12 सालों से रह रहे हैं।” आँशी ने गुस्से में कहा और वापिस बाथरूम में चली गई।

उसके इस तरह नाराज होने पर प्रीतो जी उदास हो गई। उनकी आंखें नम थी। वो आँशी के कमरे से बाहर आ गई। बाहर आकर उन्होंने देखा कि अर्जुन ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था।

प्रीतो जी को उदास देखकर अर्जुन उनके पास आकर बोला, “आज इस खूबसूरत से चेहरे पर उदासी क्यों छाई हुई है? कुछ हुआ है क्या दादी?”

प्रीतो जी ने उसकी बात पर हां मे सिर हिलाते हुए कहा, “रात को शिव का कॉल आया था। वो वापस आ रहा है।”

“तब तो मैं आपकी परेशानी का कारण समझ सकता हूं। लेकिन शिव अंकल अचानक यहां कैसे आ रहे हैं? कहीं उन्हें पता तो नहीं चल गया कि आँशी।”

“नहीं, उसे अभी तक इस बारे में कुछ पता नहीं है। उसे अभी भी यही लगता है कि आँशी लंदन में अपने आगे की पढ़ाई कर रही है।” प्रीतो जी ने उदास होकर कहा। “लेकिन मैं भी इस सच को कब तक छुपा पाऊंगी। आँशी वापस नहीं जाना चाहती। ऐसे में शिव को पता चल ही जाएगा कि वो पिछले 2 महीने से यहां पर है।”

“आप बेवजह टेंशन ले रही हैं। आप उन्हें बोल दीजिएगा कि आँशी घूमने के लिए यहां पर आई हुई है।” अर्जुन ने आईडिया दिया।

आँशी अपने कमरे से बाहर आ रही थी और तभी उसने अर्जुन की बात सुनी। उसकी बात सुनकर वो और गुस्सा हो गई।

“तो क्या हो जाएगा अगर उन्हें पता चल जाएगा कि मैं यहां रहना चाहती हूं? मुझे समझ नहीं आता कि आप लोग मुझे खुद से दूर क्यों रखना चाहते हैं?” आँशी बाहर आकर चिल्लाई।

किसी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर वहां पर चुप्पी छाई रही। वहां की चुप्पी ने आँशी को और भी चिढ़ा दिया था।

“ओके फाइन.. अगर मैं आप लोगों को बोझ लगती हो तो चली जाती हूं यहां से लेकिन एक बात क्लियर कर देती हूं कि अब मैं वापस लंदन नहीं जाऊंगी। मम्मा की डेथ हुई थी, तब मैं भले ही छोटी थी और उस वक्त डैड के डिसीजन के आगे मैंने कुछ नहीं कहा था पर अब नहीं। आप लोग इतने क्रुएल कैसे हो सकते हो। एक 11 साल की बच्ची जिसने अपनी मां को खोया हो, जिसे सबसे ज्यादा प्यार और अपनेपन की जरूरत थी, उसे खुद से इतनी दूर भेज दिया।” आँशी एक सांस में सब कुछ बोल गई। बोलते बोलते उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वो वही काउच पर बैठ गई।

“दादी, आप लोगों को समझना होगा कि मुझे भी प्यार और फैमिली की जरूरत है। मुझे भी आप लोगों के साथ रहना है ना कि वहां अजनबीयों के साथ।” आँशी सिसकते हुए बोली।

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“ओए बंदर, तेरी ये हो हल्ला करके तमाशा करने की आदत जाएगी नहीं। डोंट वरी, हम शिव अंकल को मना लेंगे।” अर्जुन ने उसे चुप कराते हुए कहा।

“लेकिन तुम्हें भी प्रॉमिस करना होगा, जब तक शिव मान ना जाए, तुम उसे यही कहोगी कि तुम यहां पर घूमने के लिए आई हुई हो।” प्रीतो जी ने कहा।

“मैं ऐसा कुछ नहीं कहने वाली। आप अभी अपनी पोती को जानती नहीं। मैं यहां रहने का कोई ना कोई जुगाड़ तो लगा ही लूंगी।” आँशी ने जवाब दिया।

प्रीतो जी और अर्जुन दोनों ही उसके कहने का मतलब नहीं समझे। “तू क्या कह रही है, थोड़ा क्लीयरली समझाएगी?” अर्जुन ने पूछा।

“वो सब बाद में... मैं अभी रेडी हो कर आती हूं। मेरे बिना कहीं जाना मत।” कहकर आँशी जल्दी से अपने कमरे में गई।

उसने जल्दी से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम में नहाने के लिए चली गई, जबकि बाहर अर्जुन और दादी अभी तक आँशी के इरादे समझ नहीं पा रहे थे।

“दादी, आँशी अपनी नादानी में कुछ गलत ना कर दे। आप शिव अंकल से बात करके क्यों नहीं देखती?” आँशी के अंदर जाते ही अर्जुन ने कहा।

“तुम्हें क्या लगता है कि मैंने उसे समझाया नहीं होगा?” प्रीतो जी ने गहरी सांस ले कर छोड़ी और कहा, “मुझे भी उसके फैसले पर ऐतराज था, जब अनु के जाने के बाद उसने आँशी को बाहर पढ़ने भेजा। आँशी को भेजने के बाद उसने अपना सारा काम मुंबई में सेटल कर लिया।“

“आप कह दीजिएगा ना, कि आपको अकेलापन महसूस होता है इसलिए आपने आँशी को अपने पास रख लिया।“ अर्जुन बोला।

“शिव के बाऊजी के जाने के बाद मैंने कहा था उससे लेकिन उसने उल्टा मुझे भी मुंबई आने का बोल दिया था। मुझे समझ नहीं आता कि वो आँशी को इंडिया क्यों नहीं आने देना चाहता।” प्रीतो जी ने हैरानी के साथ कहा।

वो लोग अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते, उतने में आँशी वहां पर आ गई। उसे वहां देखकर दोनों चुप हो गए।

“अब बताएगी कि आगे क्या सोचा है?” अर्जुन ने पूछा।

“अभी तो ब्रेकफास्ट करने के बाद थोड़ा शॉपिंग करने का सोचा है और उसके बाद सोच रही हूं कि तेरे ऑफिस में आकर साथ में लंच करेंगे, लंच के बाद... लंच के बाद भी कुछ देख लूंगी।” आँशी ने अपना पूरा स्केड्यूल बता दिया।

“मतलब तुम्हें बाहर घूमने जाना था, इसलिए तुमने मुझे रोका। आँशी की बच्ची, मुझे ऑफिस जाने में देर हो जाएगी।” अर्जुन इरिटेट होकर बोला।

“हां जिस हिसाब से यहां से गई थी, मुझे लगा कुछ बड़ा प्लान कर रही होगी।” प्रीतो जी ने भी अर्जुन की हां में हां मिला कर कहा।

“मैंने अभी ज्यादा कुछ नहीं सोचा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कुछ नहीं करूंगी। अच्छा अर्जुन, जब मैं लंच के लिए तुम्हारे ऑफिस आऊंगी तो प्लीज तुम मुझे अपने ऑफिस का टूर करवा देना। मैं भी तो देखूं ऐसी कौन सी कंपनी है जो नालायको को भी जॉब देती है।” आँशी ने अर्जुन की तरफ देख कर हंस कर कहा।

जवाब में उसने मुंह बनाया। अर्जुन और आँशी ब्रेकफास्ट करके वहां से जा चुके थे जबकि उनके जाने के बाद प्रीतो जी हमेशा की तरह टीवी सीरियल देखने में व्यस्त हो गई।

__________

विधिक राणा उसी होटल में मौजूद था। रात को उस लड़के और लड़की को मारने के बाद उसने अपना कमरा बदल दिया था।

सुबह के लगभग 11:00 बजे अपना रूटीन पूरा करने के बाद वो कमरे में बैठकर नाश्ता कर रहा था। उसके पास में एक वेटर खड़ा था।

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“उन दोनों की डेड बॉडी हटवा दी है ना?” उसने पूछा।

“जी सर, दोनों के ही शरीर का अंतिम संस्कार भी हो चुका है।” वेटर ने जवाब दिया।

“वेरी गुड... अब तुम यहां से जा सकते हो। मुझे कुछ चाहिए होगा तो मैं तुम्हें कॉल कर दूंगा।”

“सर, मेलिसा मैम का कॉल आया हुआ था। वो अब तक होटल पहुंच चुकी होगी। क्या मैं उन्हें आपके कमरे में भेज दूं?” उसने डरते हुए पूछा।

विधिक ने उसकी बात पर हामी भरी। उसके हां कहते ही वेटर वहां से बाहर चला गया। वेटर के जाते ही वो जिस की बात कर रहा था, वो लड़की अंदर आई। वो लगभग 35 साल की थी, जिसने बिल्कुल शॉर्ट ड्रेस पहन रखी था। उसके बालों का कलर ब्लॉन्ड था।

“मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी। हमारा इतना बड़ा काम नाकामयाब हो गया और तुम यहां पर बैठकर मज़े से ब्रेकफास्ट कर रहे हो।” अंदर आते ही वो उस पर चिल्लाई।

विधिक ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और आराम से नाश्ता कर रहा था।

“मैं तुमसे बात कर रही हूं। तुमने अभी तक इस मामले में कुछ किया क्यों नहीं है?” मेलिसा ने फिर पूछा।

“पहली बात तो ये कि हमारा मिशन नाकामयाब नहीं हुआ। बस उसका फर्स्ट स्टेप कामयाब नहीं रहा। जिन लोगों ने मुझे मिशन फेल होने की बात बताई थी, वो अब इस दुनिया में नहीं रहे। अब इससे ज्यादा और क्या कर सकता हूं?” विधिक ने लापरवाही से कहा।

“तुम अपने शौक के लिए किसी की जान नहीं ले सकते।” मेलिसा गुस्से में उसके पास आई और उसका कॉलर पकड़ लिया।

“उफ्फ... मेलिसा...अगर तुम मेरी दुश्मन नहीं होती तो सच में मुझे तुमसे प्यार हो जाता।” विधिक ने इंटेंस वॉइस में बोला।

“क्या तुम 2 मिनट के लिए हमारे बीच की दुश्मनी को भूल नहीं सकते? भले ही हम दुश्मन हो लेकिन इस काम के लिए हम ने एक मोटी रकम वसूल की है और ये हम साथ में करने वाले हैं। जो आदमी वहां पर बॉम्ब प्लांट कर रहा था, उससे मुझे पता चला कि एक लड़की की वजह से सारा प्लान चौपट हो गया। मतलब एक नॉर्मल सी लड़की ने हमारा इतना बड़ा काम शुरू होने से पहले ही बर्बाद कर दिया और तुम यहां आराम से बैठकर ब्रेकफास्ट कर रहे हो।” मेलिसा लगातार गुस्से में उस पर चिल्लाए जा रही थी।

“हां, उस लड़की के बारे में तो मैं भूल ही गया था। कल रात उन दोनों ने मुझे उसके बारे में बताया था। अच्छा मुझे उस आदमी से मिलना है, जो बॉम्ब प्लांट कर रहा था।” विधिक बोला।

“तुम उससे नहीं मिल सकते। वो बहुत काम का आदमी है और मैं तुम्हें उसकी जान लेने नहीं दूंगी।” मेलिसा ने जवाब दिया।

मेलिसा की बात सुनते ही विधिक मुस्कुराया और बोला, “लगता है पिछले 6 महीनों में काफी अच्छे से जानने लगी हो। तुम मुझे उसे मारने से रोक नहीं सकती लेकिन उससे पहले मुझे किसी और की जान लेनी है।”

“क्या मतलब?” मेलिसा ने हैरानी से पूछा।

“उस लड़की को सिर्फ उस आदमी ने हीं देखा है। उसे बोलो कि अगर उसे अपनी जान प्यारी है तो वो लड़की सही सलामत मुझे अपने सामने चाहिए। उसके किए की उसे ऐसी सजा दूंगा कि उसकी रूह तक कांप जाएगी।” विधिक की आवाज से एक सनक और उस लड़की के लिए नफरत झलक रही थी।

मेलिसा उसका ये रूप देख कर मुस्कुराई। “वेरी गुड... तुम्हें ऐसा करते हुए मैं खुद अपनी आंखों से देखूंगी।”

मेलिसा ने उसी वक्त उस आदमी को कॉल किया और उसे आँशी को लाने को कहा। उससे बात करने के बाद विधिक और मेलिसा वहां से कहीं जाने के लिए निकल पड़े।

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Aanshi तो खतरे में आ गई। देखते है आगे क्या है। मिलते है अगले पार्ट पर।

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