Dangerous obsession of love - Chapter 16
Dangerous obsession of loveआंशी अमन के ऑफिस में इंटरव्यू देने के लिए आई थी। जब उसने उसकी आवाज सुनी और उसकी आंखों को देखा तो वो उसे पहचान गई थी।
“तुम एक स्पाई हो..... या कोई ऐसे इंसान जो दुनिया की नजरों से छुप कर काम करते हैं। सम रॉ या सीक्रेट एजेंट टाइप्स.....” जैसे ही आंशी ने कहा, अमन हड़बड़ाते हुए इधर उधर देखने लगा। उसका सबसे बड़ा झूठ पकड़ा गया था।
अमन ने गहरी सांस ले कर छोड़ी और फिर आंशी की तरफ देख कर हंसने लगा।
“तुम हंस क्यों रहे हो? मैंने कोई जोक सुनाया है क्या?” आंशी गुस्से में बोली।
“जोक ही तो सुनाया है। मैं और एक सीक्रेट एजेंट? तुम इस वक्त जिस कंपनी में खड़ी हो, वो कोई गली मोहल्ले या नुक्कड़ की दुकान नहीं है, जिसे एक सीक्रेट एजेंट अपना काम संभालते हुए कामयाब कर सके।” अमन ने जवाब में कहा।
अमन की बातों ने आंशी को उलझन में डाल दिया था। वो जो कह रहा था वो सच था। “ऐसे कैसे हो सकता है कि वो तुम नहीं हो..... तुम्हारी आवाज बिल्कुल उसी की तरह है। और तुम्हारी आंखें.....” बोलते हुए आंशी अमन के पास आने लगी। “रूको, मुझे तुम्हारी आंखें एक बार फिर देखने दो।”
जैसे ही आंशी अमन के पास आने लगी, उसने जल्दी से टेबल पर रखे गॉगल्स उठाए और अपनी आंखों पर लगा लिये।
“कंजेक्टिवाइटिस..... मुझे कंजेक्टिवाइटिस हुआ है। मेरी आंखों में मत देखो वरना तुम्हें भी हो जाएगा।” अमन बोला।
“ओके फाइन, जब तुम्हारा कंजेक्टिवाइटिस सही हो जाए, तब देख लेंगे।” आंशी ने भौंहे उठाकर कहा।
“अगर तुम्हें यहां पर जॉब करनी है, तो तुम्हें तमीज से रहना होगा और अपने बॉस से तमीज से बात करनी होगी।” अमन ने सख्त शब्दों में कहा।
“ओके सर..... जब आपका कंजेक्टिवाइटिस सही हो जाए तो आप अपनी आंखें मुझे जरूर चेक करवाइएगा।” आंशी ने काफी पोलाइटली कहा।
“ऑफ कोर्स मिस आंशी..... अब आप जा सकती है।” बोलते हुए अमन ने दरवाजे की तरफ इशारा किया।
आंशी वहां से बाहर आ गई। वो अभी भी अमन की तरफ से देखते हुए याद करने की कोशिश कर रही थी।
“अगर उस दिन मैं बेहोश नहीं हुई होती तो पक्का प्रूफ कर देती कि ये वही लड़का है। पहले मुझे फेयर में बचाया था, उस दिन रेस्टोरेंट में भी यही था। कभी-कभी तो मुझे शक होता है कि क्लब में मैंने जिसका मोबाइल तोड़ा था, वो भी यहीं था।” आंशी खुद से बातें कर रही थी।
वहीं दूसरी तरफ आंशी के जाते ही अमन ने चैन की सांस ली। वो अपनी चेयर पर बैठा और पानी पीकर खुद को रिलैक्स करने लगा।
“थैंक गॉड उसने मुझे नहीं पहचाना, वरना पूरे जगत में चिल्ला चिल्ला कर ढिंढोरा पीट देती, मैं कौन हूं? इसे जॉब देकर मैंने अपने लिए मुसीबत खड़ी कर ली लेकिन उसे मैं जाने भी नहीं दे सकता। अब तो लवी जल्द से जल्द आ जाए तभी अच्छा होगा।” अमन ने खुद से कहा।
अमन ने आंशी का रिज्यूमे उठाया और उसे फिर से देखने लगा।
“आंशी जिंदल..... उम्र 22 साल.... ओह तो चिल्लाने वाली लड़की का नाम आंशी है। लेकिन इसने लंदन छोड़ने की वजह नहीं बताई। कहीं उसके बैकग्राउंड में तो कोई प्रॉब्लम नहीं है।” अमन आंशी के रिज्यूमें के जरिए उसके बारे में पता लगाने की कोशिश करने लगा।
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लावण्या विधिक राणा के होटल में मौजूद थी। उसने वेट्रेस की ड्रेस पहन रखी थी और आंखों पर मोटा चश्मा लगा रखा था। चेहरे पर डार्क मेकअप करने के बाद किसी के लिए भी लावण्या को पहचानना मुश्किल था।
वो सुबह से विधिक राणा के आने का इंतजार कर रही थी। सुबह से रात हो चुकी थी लेकिन विधिक राणा के बारे में पता लगाना तो दूर वो उससे मिल भी नहीं पाई थी।
“ए सुनो.....” हेड वेटर ने उसे आवाज लगाई।
उसके इस तरह आवाज लगाने पर लावण्या ने उसकी तरफ घूर कर देखा। उसने तुरंत अपने चेहरे के भावों को बदला और उसके पास गई।
“यस सर..... बोलिए।” लावण्या ने उसके पास जाकर पूछा।
“ये खाना तुम्हें ऊपर लास्ट फ्लोर में विधिक सर के लिए लेकर जाना है।” वेटर के कहते ही लावण्या चौकन्नी हो गई।
“क्या वो यहां पर रुके हुए हैं?” लावण्या ने तुरंत पूछा।
“देखो तुम यहां नई हो इसलिए वार्निंग देकर छोड़ रहा हूं। आगे से सिर्फ अपने काम से मतलब रखना। ज्यादा सवाल पूछने की कोशिश की तो तुम खुद एक सवाल बन कर रह जाओगी।” वेटर ने उसे सख्त लहजे में कहा।
“ज.....जी..! आप बता दीजिए क्या लेकर जाना है। मैं चली जाऊंगी।”लावण्या घबराहट के साथ बोली।
“नहीं..... अब तुम रहने दो। मैं किसी और को भेज दूंगा।” वेटर ने सिर हिलाकर कहा।
लावण्या के सवाल पूछने की वजह से वेटर ने उसे ऊपर जाने से मना किया और वहां से चला गया। वेटर के जाने के साथ ही उसके हाथ से एक सुनहरा मौका भी चला गया जिसके जरिए वो विधिक राणा के बारे में पता लगा सकती थी।
“मुझे कुछ भी कर के ऊपर जाना होगा।” लावण्या ने अपने मन में कहा और दौड़कर वेटर के पीछे गई। “मुझे माफ कर दीजिए सर, मैं आगे से ध्यान रखूंगी। आपके कहे हुए हर काम को मैं बिना किसी सवाल के पूरा करूंगी और साथ ही किसी से उसके बारे में भी नहीं कहूंगी।” लावण्या ने रिक्वेस्ट की।
वेटर ने उसकी तरफ घूर कर देखा और फिर कहा, “ठीक है। ऊपर जाओ तो वहां भी कुछ मत पूछना। बस सर के सामने खाना रख देना। और हां..... उन्हें कुछ चाहिए तो कॉल कर देना। वो जब तक वो खाना नहीं खा लेंगे, तुम तब तक नीचे नहीं आओगी।”
वेटर ने उसे सब कुछ समझा दिया। लावण्या ने उसकी बात पर हामी भरी। उस वेटर ने खाने की अलग-अलग कई प्रकार की डिशेस सर्विंग प्लेट में रखी।
“इसे सर्विंग ट्रॉली के जरिए ऊपर ले जाना। मैंने जो कहा है, उसे याद रखना।” वेटर ने कहा और वहां से चला गया।
लावण्या ने जल्दी से सर्विंग ट्रॉली को लिया और लिफ्ट के जरिए टोप फ्लोर पर गई। उसने लिफ्ट में इधर-उधर देखा।
“हो सकता है होटल के हर एक कोने की तरह यहां भी कैमराज लगे हो। विधिक से मिलने का मौका तो फिर मिल सकता है लेकिन पहले ही बार पकड़ी गई तो कुछ पता नहीं चलेगा।“ लावण्या ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की और बिना कुछ एक्स्ट्रा प्रिपरेशन के विधिक के फ्लोर पर पहुंची।
ऊपर के फ्लोर पर किसी का भी आना जाना मना था। वहां विधिक की स्पेशल परमिशन के साथ ही कोई आ सकता था। लावण्या ऊपर पहुंची तो उसने देखा कि ऊपर के फ्लोर पर विधिक का घर बना हुआ था।
“ओह तो यही वजह है कि आज तक किसी को पता नहीं चल पाया कि विधिक राणा रहता कहां है?” लावण्या ने सोचा और अपने कदम आगे बढ़ाए।
वहां कोई मौजूद नहीं था। लावण्या ने चारों तरफ देखा तो घर काफी लग्जरियस था, जहां महंगे महंगे फर्नीचर्स और शोपीस लगाए हुए थे।
“क..... कोई है?“ लावण्या ने आवाज लगाकर पूछा।
जवाब में कोई आवाज नहीं आई। लावण्या ने एक बार से इधर-उधर देखा, उसे कोई दिखाई नहीं दिया। फिर अचानक बैडरूम से शाॅवर चलने की आवाज आई।
वो बैडरूम का दरवाजा खटखटा कर बोली , “विधिक सर..... मैं आपके लिए डिनर.....”
उसकी बात खत्म होने से पहले विधिक जवाब में चिल्लाया, “ठीक है। मैं आ रहा हूं। ऐसा करो बाहर बेड पर मेरा टॉवल पड़ा होगा। मुझे पकड़ा दो।”
“ज.....जी सर.....” लावण्या ने जवाब दिया और अपने कदम बेडरूम में बढ़ाए। उसने बेड पर रखा टॉवल उठाया और बाथरूम का दरवाजा खटखटा कर बोली, “सर..... टॉवल.....”
“अंदर आ जाओ।” विधिक ने अंदर से जवाब दिया। लावण्या के दिल की धड़कनें बढ़ गई।
“पता नहीं मिशन के चक्कर में क्या-क्या करना पड़ रहा है।” लावण्या अपने मन में बुदबुदाई।
लावण्या टॉवल लेकर अंदर पहुंची तो उसने देखा कि बाथरूम में नहाने के लिए एक अलग सेक्शन बना था, जो कि पूरा कांच का था। विधिक अंदर नहा रहा था। लावण्या की एक नजर उस पर पड़ी। उसे बिना कपड़ों के देखकर उसने तुरंत अपनी नजरें झुका ली।
“इसे वहां रख दो और बाहर डाइनिंग टेबल पर मेरा वेट करो।” विधिक ने कहा।
जवाब में लावण्या ने कुछ नहीं कहा और टॉवल रख कर जल्दी से बाहर आ गई। कुछ देर बाद विधिक भी बाहर आ चुका था। उसने कपड़े पहनने के बजाय कमर से तौलिया लपेट रखा था। लावण्या उसे पहली बार देख रही थी।
“दिखने में तो इतना शरीफ और अच्छा खासा है, फिर ऐसे उलटे काम क्यों करता है। इसका फेस इसके काम पर बिल्कुल भी सूट नहीं होता। कौन कह सकता है कि माफिया का जाना माना नाम विधिक राणा दिखने में इतना हैंडसम है।“ लावण्या ने सोचा।
लावण्या उसे वैसे देखकर नजरे चुरा रही थी। उसे देख कर विधिक मुस्कुरा दिया। वो वापस अंदर गया और कपड़े पहन कर बाहर आया।
“लगता है तुम यहां पर नई आई हो।” विधिक ने टेबल पर बैठते हुए पूछा।
“जी सर.....” लावण्या ने नजरें झुका कर कहा।
“चलो जल्दी से खाना सर्व करो। मुझे बहुत भूख लगी है।” विधिक बोला।
विधिक के कहते ही लावण्या जल्दी-जल्दी खाना परोसने लगी। उसके हाथ हल्के कांप रहे थे और वो हड़बड़ाहट में खाना इधर-उधर बिखेर रही थी।
अचानक विधिक ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “रहने दो, मैं कर लूंगा।”
“लेकिन हेड वेटर ने मुझे आपको खाना सर्व करने के लिए कहा था।” लावण्या ने जवाब दिया।
“हां तो मुझे सर्व करने के लिए कहा था, ना कि नीचे गिराने के लिए..... तुमने डिनर किया?” विधिक ने पूछा। वो काफी सामान्य तरीके से बात कर रहा था। उसे देख कर कोई नही बता सकता था कि वो इतना खतरनाक माफिया है।
लावण्या ने बिना कुछ बोले ना में सर हिला दिया। विधिक ने उसे पास की टेबल पर बैठने का इशारा किया और दो प्लेट में खाना डालने लगा।
“थैंक यू सर लेकिन मैं नीचे जाकर खा लूंगी।” लावण्या ने मना करते हुए कहा।
“मैंने जितना कहा है उतना ही करो।” विधिक ने उसे घूरते हुए देखा और कहा।
उसकी बात मानकर लावण्या चुपचाप खाना खाने लगी। विधिक खाना खाने के बजाय उसे खाते हुए देख रहा था।
“सर आप कुछ खा क्यों नहीं रहे?” लावण्या ने हिचकीचाते हुए पूछा।
“खा लूंगा लेकिन मुझसे ज्यादा खाने की जरूरत तुम्हें है।” विधिक ने जवाब दिया।
“मैं कुछ समझी नहीं सर?” लावण्या ने हैरानी से पूछा।
“डोंट वरी मैं सब समझा दूंगा। हां तो तुम अच्छे से खाना खाओ। इसके बाद तुम्हें मेरा एक ऐसा काम करना है, जिसमें तुम्हारी बहुत सी एनर्जी लगेगी।” विधिक ने उसकी तरफ रहस्यमई मुस्कुराहट के साथ देखा।
उसके ऐसा कहते ही लावण्या चौक कर अपनी जगह से खड़ी हुई और अपने कपड़े सही करने लगी।
उसे ऐसा करता देख विधिक जोर से हंस पड़ा और फिर अपनी हंसी कंट्रोल करते हुए कहा, “डरो मत, मेरा टेस्ट इतना भी खराब नहीं है। मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा..... काम कुछ और है।”
“लेकिन सर.....” लावण्या अपनी बात खत्म कर पाती उससे पहले विधिक ने डाइनिंग टेबल के ड्रोर से रिवाल्वर निकाली और उसकी तरफ तान कर बोला, “चुपचाप बैठ कर खाना खाओ।”
लावण्या घबराकर जल्दी से बैठ गई और खाना खाने लगी। विधिक उससे क्या करवाना चाहता था, वो समझ नहीं पा रही थी।
वो विधिक राणा के साथ थी जो कि उस पर बंदूक तान कर बैठा था। अगले ही पल उसके साथ कुछ भी हो सकता था।
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