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Chapter 1

A cruel fairytale - Chapter 1

A Cruel Fairytale

दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम के बाहर एक बड़ा सा होर्डिंग लगा था, जिस पर लिखा था, "अ क्रुएल फेरीटेल" हां, यही नाम था उस नॉवेल था, जिसे लिखा था, राइटर आरोही श्रीवास्तव ने।

इस ऑडिटोरियम में आज उसी फेमस राइटर आरोही श्रीवास्तव की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली थी। वो पहली बार इंटरव्यू के लिए मानी थी इसलिए वहां काफी भीड़ जमा थी। बहुत सारे रिपोर्टर, स्टूडेंटस, सोशल वर्कर्स या जो भी उसे अपना आइडल मानते थे, वो उस इंटरव्यू को देखने के लिए आए थे। वहां कुछ लोग ऐसे भी थे, जो उससे जलते थे।

आरोही श्रीवास्तव ने आज से पहले कभी इंटरव्यू नहीं दिया था और ना ही वो पब्लिक के बीच में आई थी। इस बार पब्लिक के बीच में आने का कारण था, उसकी लिखी पिछली बुक, जो पूरे इंडिया में तहलका मचा रही थी और उसकी अब तक की सबसे हिट बुक थी। बुक फेमस होने के साथ ही कंट्रोवर्शियल भी थी। बुक का कंटेंट ही ऐसा था कि कुछ लोगों ने उसे बहुत ज्यादा पसंद किया तो क्रिटिक्स और कुछ फेमिनिस्ट आरोही के खिलाफ हो गए थे। मजबूरन आरोही के मैनेजर को ये कॉन्फ्रेंस बुलानी ही पड़ी।

अब तक सबने आरोही श्रीवास्तव की फोटो ही देखी थी। वो भी उसकी बुक के पीछे छोटी सी प्रिंट होती थी। किसी ने आरोही को आज तक सामने से नहीं देखा था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर भी सिर्फ बुक्स की ही पिक्चर्स थी।

रिपोर्टर्स और बाकी लोगों को आए हुए काफी टाइम हो गया था। लगभग आधे घंटे इंतजार करने के बाद भी आरोही नहीं आई तो उनमें से एक ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि आरोही श्रीवास्तव आज यहां आने वाली है। वो इतने लोगों को फेस नहीं कर पाएगी। उसके बारे में अक्सर यही सुना है कि उसका भीड़ में दम घुटने लगता है।”

उसकी बात सुनकर दूसरे रिपोर्टर ने कहा, “लेकिन मुझे कुछ और ही लग रहा है। लगता है वो घबरा गई है। ऐसा कॉन्टेंट कौन लिखता है? आई मीन एक लड़की होकर किसी दूसरी लड़की के साथ टॉर्चर जैसे सीन देखना। ओ माय गॉड... पढ़ते भी है तो दिल कांप उठता है। ऊपर से आखिर में उसने नॉवेल की लीड को इतनी बेदर्द मौत दी।”

उन दोनों की बात सुनकर एक 16 साल की लड़की, जो आरोही की फैन थी, वो वहां पर आई। उसने तेज आवाज में कहा, “आप बिना उन्हें जाने जज कैसे कर सकते हैं? आपने बुक ठीक से पढ़ी भी है या नहीं? बुक में जो हीरोइन है, उसने उसे खुद का रूप दिया है और खुद ही का नाम। फिर आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि उसने किसी दूसरी लड़की के बारे में गलत लिखा है। मैने वो स्टोरी पढ़ी है और बहुत अच्छी लव स्टोरी है, बहुत यूनिक भी। आप जैसे लोग बस जज करना जानते हो और आरोही मैम आज यहां जरूर आएगी।” लड़की गुस्से में उन्हें काफी कुछ सुना कर वहां से चली गई।

उसकी बातें सुनकर उन दोनों के मुंह से एक ही बात निकली, “ये आजकल के बच्चे भी ना। ठीक से किसी को जानते बूझते भी नहीं और बस उनके फैन बन जाते हैं।”

उनके बीच खड़ी एक फेमिनिस्ट सोशल वर्कर ने कहा, “हां सही कहा। वैसे आरोही श्रीवास्तव भी काफी कम उम्र की है। इस उम्र में ठीक से समझ नहीं होती तो लड़कियां कुछ भी लिख देती है। सुना है ज्यादा पढ़ी लिखी भी नही है। अब बस यही उम्मीद है कि आज वो इस कांफ्रेंस में सबके सामने माफी मांग लें और इस बुक का पब्लिशिंग यहीं पर रुकवा दे। वो अपनी घटिया सोच को यही पर रोक दे, तो हमारे समाज और संस्कृति के लिए अच्छा होगा।”

सब लोग अलग-अलग तरह की बातें कर रहे थे। इन सब के बीच आरोही श्रीवास्तव प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंची। उसे देखते ही सब दंग रह गए। उसने नॉवेल में अपनी लीड हीरोइन को खुद का ही रूप रंग, यहां तक की नाम भी अपना ही दिया था। अब तक सबको यही लगता था कि आरोही ने कुछ ज्यादा ही बढ़ा चढ़ाकर लड़की के बारे में लिख दिया है पर जब उन्होंने आरोही को देखा तो यही लगा आरोही ने अपनी तारीफ में गिने-चुने शब्दों का ही उपयोग किया है।

आरोही श्रीवास्तव दिखने में काफी खूबसूरत थी। उम्र 22 साल, 5 फुट 4 इंच हाइट, कमर तक के आलमंड ब्राउन हेयर, गोरा चेहरा, छोटी गहरी भूरे रंग की आंखें, छोटी सी नाक और उभरे हुए होंठ। बिना किसी मेकअप के भी आरोही बहुत खूबसूरत लग रही थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस बड़ी होने की वजह से उसने काफी सलीके के कपड़े पहने थे। हमेशा से अलग आज आरोही ने सिंपल सफेद कलर का अनारकली सूट पहना हुआ था। कानों में झुमके और खुले बालों में वो काफी खूबसूरत दिख रही थी। आरोही के वहां आते ही भीड़ अपने आप चुप हो गई और उसे देखने लगी।

सबने यही सोचा था आरोही 22 साल की है तो काफी चुलबुली और अपनी उम्र के हिसाब से होगी, जैसा कि उसके नॉवेल की लीड होती थी लेकिन आरोही उनसे अलग थी। बिल्कुल शांत चेहरा और एक सादगी। वो चुपचाप जाकर अपनी जगह पर बैठी और माइक को सही करके शांत लहज़े में कहा, “मैं आरोही श्रीवास्तव... आज आप सबके साथ यूं रूबरू होकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। काश हम किसी अच्छी वजह के चलते मिलते।” बातों ही बातों में आरोही ने उन सब को ताना मार दिया था।

उसके तीखे लहजे से उसके फैंस ने क्लैपिंग करनी शुरू कर दी तो जो उसके खिलाफ थे, वो मुंह बनाते हुए इधर-उधर देखने लगे।

मौका पाकर एक रिपोर्टर खड़ी हुई और उसने अपना सवाल पूछा, “आरोही मैम, आप काफी कम उम्र की है। क्या आपके घर वालों ने आपकी नॉवेल नहीं पढ़ी? आई मीन आपकी नॉवेल की हीरोइन आरोही श्रीवास्तव, जिसको आपने अपना नाम दिया है, उसके साथ बहुत बुरा किया है आपने। एक लड़की होकर आप दूसरी लड़की के लिए ऐसे सीन कैसे लिख सकती हैं।”

आरोही ने कुछ पल उसे देखा और फिर जवाब में कहा, “वो सिर्फ एक नॉवेल था। कंट्रोवर्सी ना हो इसलिए मैंने खुद का नाम यूज किया। उस लड़की को खुद की पहचान दी, खुद का अस्तित्व दिया फिर आप कैसे कह सकती हैं कि मैंने किसी दूसरी लड़की के खिलाफ कुछ लिखा है।” आरोही ने सधे हुए लहजे में जवाब दिया।

फिर दूसरी रिपोर्टर खड़ी हुई, जो आरोही की फैन थी। वो मुस्कुरा कर बोली, “सबसे पहले तो आपकी नॉवेल इतनी हिट गई उसके लिए कांग्रेचूलेशंस। मैम इस नॉवेल में आपने बहुत सी चीजे दिखाई है, जो आपकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी है। जैसे कि आपकी मां का होना। आपकी ट्रू फैन होने के नाते मैं जानती हूं कि 5 साल पहले आपकी मां की मौत हो चुकी है। क्या आप उन्हें अभी भी मिस करती है इसलिए आपने नॉवेल में उनका रोल लिखा।”

अपनी मां का जिक्र आते ही आरोही के चेहरे पर हल्की उदासी आ गई। फिर उसने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “कुछ लोग आपकी लाइफ में बहुत स्पेशल होते हैं और आप उन्हें भूल ही नहीं पाते हैं, तो फिर मिस करना कहां से आ गया। हां मैने काफी कुछ अपनी प्राइवेट लाइफ के बारे में लिखा है, क्योंकि मैं चाहती हूं, मेरे फैन्स मेरे बारे में जाने।”

“और रिदांश ठाकुर?” पीछे से किसी लड़के की आवाज आई। वो भी रिपोर्टर था। उसने खड़े होकर कहा, “रिदांश ठाकुर के बारे में आपका क्या कहना है? क्या वो कैरेक्टर भी असली है? अगर आप सर्च करें तो इस नाम से बहुत सारे लोग आपको मिल जाएंगे।”

“ये कॉमन नाम है किसी का भी हो सकता है। बस मैंने भी ऐसे ही एक नाम लिया है। बाकी कुछ लोग कहानियों और हकीकत में फर्क नहीं कर पाए तो ये उनकी प्रॉब्लम है।” आरोही ने इतना ही कहा।

उसके बाद उसने काफी सारे सवालों के जवाब दिए। कुछ उसके फैंस ने पूछे थे तो ज्यादातर वहां नॉवेल के खिलाफ ही बहसबाजी हुई।

आखिर में आरोही ने यही कहकर प्रेस कांफ्रेंस खत्म की, “जिसे मेरे नॉवेल से दिक्कत से है, वो मुझे ना पढ़े।”

उसकी इस बात वहां बैठे उसके दुश्मनों और साथी राइटर्स को काफी गुस्सा आया और उन्हें इसके खिलाफ बोलने का एक और मौका मिल गया।

कांफ्रेस के बाद आरोही ने कुछ फैंस के साथ फोटोस खिंचवाई और उन्हें ऑटोग्राफ दिया।

जो लोग, यहां आरोही के खिलाफ यहां खड़े हुए थे। उन्होंने बहुत कोशिश की कि वो आरोही की बुक पर रोक लगा सके लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

फैन मीटअप खत्म होने के बाद आरोही वहां से जाने लगी। वो अपनी गाड़ी में अकेली थी क्योंकि इसके बाद आरोही को कुछ देर अकेले रहना था। वो खुद ही गाड़ी ड्राइव कर रही थी।

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एलए, यूएस

सुबह के दस बज रहे थे। एक बड़ी सी लग्जरियस बिल्डिंग में एक लगभग 27 साल का लड़का कॉफी मग के साथ बैठा था। उसके चेहरे के भाव सर्द थे। उसकी गहरी काली आंखों में गुस्सा था। उसने इस वक्त ब्लैक कलर का नाइट सूट पहन रखा था और सोफे पर अपने पैर चढ़ाकर बैठा था।

उसके सामने एक लड़की खड़ी थी, जो लगभग 25 साल के करीब थी। उसने एक बुक सामने की टेबल पर फेंकी। वो आरोही श्रीवास्तव की बुक थी।

वो लड़का उस बुक को गुस्से में घूर रहा था। वो बुक को उठाता उससे पहले वो लड़की बोल पड़ी, “रिदांश ठाकुर, यही नाम है इस कहानी के हीरो का। ये लड़की तुम्हें जानती है क्या? इसने बुक में तुम्हारा कैरेक्टर लिया है। मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा। फिजिकल फीचर्स से लेकर कैरेक्टर तक हर एक चीज सेम कैसे हो सकती है? यहां तक कि तुम्हारी पर्सनल इनफॉरमेशन इसे कैसे पता चल सकती है। अगर किसी ने ज्यादा दिमाग लगाया तो तुम्हारा किंग्स एम्पायर बर्बाद हो सकता है।”

वो रिदांश ठाकुर था। उम्र 27 साल, 6 फीट 1 इंच हाइट, गोरा चेहरा, जिस पर हल्की दाढ़ी थी और गहरी काली आंखें, जिसमें एनीटाइम गुस्सा रहता था।

रिदांश ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और बुक को उठाकर देखने लगा। उसने बुक के कुछ पेज पलट कर पढ़े और फिर बुक को फेंकते हुए कहा, “खत्म कर दो इस बुक को और इसे लिखने वाली को भी। इसकी एक भी कॉपी आगे मार्केट में नहीं आनी चाहिए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी ये बुक नहीं दिखनी चाहिए वेरोनिका।” रिदांश ने अपनी तरफ से ऑर्डर पास कर दिए थे और फिर वहां से चला गया।

उस लड़की का नाम वेरोनिका था। वो रिदांश ठाकुर की मैनेजर थी। रिदांश के जाने के बाद उस लड़की ने किसी को कॉल पर कनेक्ट किया और फिर कमांड देते हुए कहा, “उन्होंने ऑर्डर पास कर दिया हैं। लड़की को मार दो। मैंने तुम्हें उसका पीछा करने के लिए कहा था। तुम वही हो ना?”

“हां वही हूं और मेरी नज़रें उस पर टिकी हुई है। इस वक्त वो गाड़ी में है और उसके साथ कोई नहीं है।” एक आदमी ने जवाब दिया, जो एक ट्रक ड्राइव कर रखा था। उसने उसे सामान से फुल्ली लोड कर रखा था। वो आरोही के पीछे था। जैसे ही ऑर्डर पास हुआ, उसने आरोही की गाड़ी को एक जोरदार टक्कर मारी। इस वक्त गाड़ी फ्लाईओवर के ऊपर थी तो आरोही की गाड़ी अपना बैलेंस खोकर फ्लाईओवर से नीचे उतर चुकी थी। गाड़ी 3 से 4 बार पलटी। टक्कर काफी जोरदार थी और आरोही की गाड़ी का दरवाजा टूटकर गिर गया और वो घायल हालत में गाड़ी में पड़ी थी।

आरोही की हालत देखकर लग रहा था। उसकी कुछ चंद आखिरी सांसें बची थी। उसमें भी उसके चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट थी। आरोही की आंखों के सामने अचानक उसकी किताब आकर गिरी, और उसी पल में उसकी आँखें बंद हो गई थी।

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हैलो guys,

कहानी काफी यूनिक है। आई होप आपको पसंद आए। प्लीज थोड़ा सपोर्ट कीजिएगा। स्टोरी के पार्ट को अपना रिव्यू दीजिएगा। बाकी आरोही का नॉवेल इतना कॉन्ट्रोवर्शियल क्यों है, वो आगे आपको समझ आ जाएगा।

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