A cruel fairytale - Chapter 14
A Cruel Fairytaleकल रात फिर रिदांश आरोही के करीब आया था पर इस बार उसका इरादा कुछ और था। वो जल्द से जल्द आरोही को अपने बच्चे की मां बनाना चाहता था। अगली सुबह रिदांश की आंख खुली तो आरोही उसके बगल में सोई हुई थी। उसने ब्लैंकेट ओढ़ रखा था फिर भी साफ पता चल रहा था कि उसने कपड़े नहीं पहने हैं। उसे देखकर रिदांश की नजरे उसकी गर्दन पर गई, जहां उसके दिए काफी सारे लव बाइट के निशान थे।
रिदांश ने उसे देखकर गहरी सांस लेते हुए कहा, “कुछ तो बात है इस अजीब बात करने वाली राइटर में, वरना आज से पहले भी मैं कई लड़कियों के करीब आया हूं पर किसी ने मुझे इस तरह अपनी तरफ टेंप्ट नहीं किया, जैसे ये करती है। कंट्रोल रिदांश ठाकुर, फिलहाल तुम्हारे लिए फिजिकल नीड्स को पूरा करने से ज्यादा जरूरी अपना बच्चा पैदा करना है।”
रिदांश फिर जल्दी से बिस्तर से उठा और बाथरूम में चला गया। कुछ देर बाद वो नहा कर बाहर निकला तो उसने देखा अभी तक आरोही सोई हुई थी।
“सोने देता हूं वैसे भी बेचारी कल रात के बाद कुछ ज्यादा ही थक गई होगी।” रिदांश ने आरोही की तरफ देखकर कहा और फिर क्लोसेट एरिया में चला गया।
तैयार होने के बाद रिदांश ब्रेकफास्ट टेबल पर था और अकेले की नाश्ता कर रहा था। उसकी आंखों के सामने बार-बार आरोही का चेहरा आ रहा था, मानो वो उसके जेहन में अटक गई हो।
रिदांश खाने के बजाय आरोही के बारे में सोच रहा था, तभी उसके फोन की रिंग बजी। इसी के साथ रिदांश का ध्यान टूटा स्क्रीन पर उसकी मॉम मिसेज निधि ठाकुर का नाम आ रहा था।
रिदांश ने मोबाइल स्क्रीन की तरफ देखकर आईज रोल की और फिर कॉल रिसीव करके सख्त आवाज में कहा, “मेरा लेक्चर सुनने का कोई मूड नहीं है। मुझे पता चल गया है विविध शादी करने जा रहा है। कुछ नया है तो बताइए।”
“नया कुछ नहीं है। विविध की इंगेजमेंट है, बस उसी के लिए कॉल किया है। लंदन पहुंचो, मैं नहीं चाहती प्रेस के सामने फैमिली डिस्प्यूट बाहर आए।” निधि ने सख्त आवाज में कहा।
“मेरे पास टाइम होगा तो आ जाऊंगा वरना उस सो कॉल्ड फैमिली में इंवॉल्व होने का मुझे कोई शौक नहीं है।” इतना कहकर रिदांश ने कॉल कट कर दिया। उसके अपनी फैमिली के साथ बिल्कुल भी रिलेशन अच्छे नहीं थे। ज्यादातर मामलों में ऐसा होता था कि किसी का अपनी फैमिली के साथ रिलेशन अच्छा न भी हो तो उनके मां बाप या भाई बहन के साथ अच्छा बॉन्ड होता है पर रिदांश के मामले में बिल्कुल अलग था।
रिदांश की अपने घर में किसी के साथ नहीं बनती थी। कॉल कट होने के बाद उसने एक नजर ब्रेकफास्ट की प्लेट की तरफ डाली, जिसमें से उसने दो या तीन बाइट ही ठीक खाए होंगे। रिदांश आगे खाने वाला था तभी उसकी नजर दरवाजे पर गई। आरोही उठ चुकी थी और इस वक्त दरवाजे पर खड़ी थी। उसने रिदांश का शर्ट पहना हुआ था और थोड़ा लंगड़ाते हुए बाहर आ गई थी।
रिदांश जल्दी से उठकर आरोही के पास गया और उसे अपनी गोद में उठा लिया। उसके ऐसा करने पर आरोही उसकी तरफ तो घूर कर देख रही थी, तभी रिदांश बोला, “मुझे बुला लेती, मैं आ जाता। तुम्हें चलने में दिक्कत हो रही होगी ना... मेरी कंपैटिबिलिटी मैच करना इतना आसान नहीं है।”
आरोही ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। रिदांश की बात सही भी थी। वो काफी स्ट्रांग था और ये उसने कल रात साबित कर दिया था। आरोही अब ठीक से चल तक नहीं पा रही थी। पिछली बार जब रिदांश उसके करीब आया था तब वो नशे में थी तो उसे दर्द वगैरह इतना कुछ फील नहीं हुआ लेकिन अब तो आरोही की दर्द से जान जा रही थी।
रिदांश ने उसे टेबल पर बिठाया और खाना सर्व करने लगा। आरोही चुपचाप ब्रेकफास्ट कर रही थी तभी रिदांश बोला, “अच्छा तो हम एक नॉवेल में है तो ये चीज भी तुमने लिखी है क्या कि मैं इतना हॉर्नी हूं या इतना स्ट्रांग....”
रिदांश की बात सुनकर आरोही ने गुस्से में उसकी तरफ देखा। रिदांश के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वो नॉवेल का नाम लेकर बार-बार उसका मजाक बना रहा है।
आरोही ने रिदांश की आंखों में देखते हुए सख्त आवाज में कहा, “मैं क्यों तुम्हें कुछ बताऊं? तुम्हें वैसे भी मेरी बात पर यकीन नहीं है। खुद का मजाक बनवाने से बेहतर है कि मैं चुप रहूं।”
रिदांश ने आरोही की गाल पर उंगलियां घूमाते हुए सेडक्टिव वे में कहा, “बहुत जल्दी समझ आ गया तुम्हें। चलो बताओ ना नॉवेल तुमने लिखा है तो मुझे मेरी प्रॉपर्टी मिल जाएगी ना? आई मीन तुम मेरे लिए बच्चा पैदा कर दोगी ना? देखो मुझे बच्चों से कोई प्यार नहीं है। बस मुझे मेरी प्रॉपर्टी चाहिए जो कि उसी के जरिए मुझे मिलेगी।”
आरोही ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया या यू कहे कि वो जवाब देना ही नहीं चाहती थी। ब्रेकफास्ट हो जाने के बाद आरोही ने रिदांश से कहा, “प्लीज मेरे लिए कुछ कपड़े भिजवा दो और कुछ डेली एसेंशियल भी।”
“डेली एसेंशियल मिल जाएंगे लेकिन कपड़े नहीं मिलेंगे। तुम इस शर्ट में काफी टेंपटिंग लगती हो तो यही पहनोगी।” रिदांश ने सिर हिला कर कहा और फिर उठकर जाने लगा। उसके जाने के बाद भी आरोही वहीं पर बैठी हुई थी।
आरोही ने रिदांश की बात का जवाब नहीं दिया था कि वो उसके लिए बच्चा पैदा कर पाएगी या नहीं। उसने अपने सिर पर हाथ रखा और धीरे से कहा, “मुझे... मुझे याद क्यों नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा। रिदांश को उसकी प्रॉपर्टी मिल जाएगी क्या? मुझे सिर्फ यही याद क्यों है कि मैं मरने वाली हूं और मेरे मरने का सबसे ज्यादा दुख इसी को होगा।”
आरोही को अब याद रहा था तो सिर्फ नॉवेल का क्लाइमेक्स, जिसमें उसकी मौत होने वाली थी। आरोही को अब और ज्यादा डर लग रहा था क्योंकि वो चीजे भूल रही थी।
आरोही इस सदमे से बाहर भी नहीं निकली थी कि तभी उसकी नजर न्यूज़ पेपर पर पड़ी, जहां फ्रंट पेज के साइड में उसका छोटा सा फोटो था और जिसमें मिसिंग की न्यूज़ थी।
उसे देखकर आरोही की आंखें नम हो गई। फिर उसकी नजर नीचे लिखे हुए फोन नंबर पर गई। उसने धीरे से पेपर के उस हिस्से को फाड़कर अपने पास रख लिया।
“मौका मिलने पर बात करने की कोशिश करती हूं पापा आपसे। आई नो आपको पता चलेगा कि आपकी बेटी किस हाल में है तो आप मुझे जरूर छुड़ा लोगे।” आरोही ने दुखी मन से कहा।
वो पूरा दिन उस कमरे में थी और रिदांश के आने का इंतजार कर रही थी। शाम के वक्त रिदांश वहां आया और अंदर जाने से पहले उसने अपना मोबाइल बाहर ही छोड़ दिया था। रिदांश का मोबाइल भी अनलॉक था और आरोही जिस मौके की तलाश थी, वो उसे मिल गया था।
वो अच्छे से जानती थी रिदांश नहाए बिना बाहर नहीं आएगा और इसमें उसे लगभग आधे घंटे लग जाएंगे। फिर भी सेफ्टी के लिए उसने 5 से 7 मिनट तक वेट किया। अंदर जब शावर की आवाज आने लगी तब आरोही ने जल्दी से उस नंबर पर कॉल किया, जो न्यूज़ पेपर में थे।
सामने से कॉल रिसीव होते ही आरोही ने रोते हुए कहा, “पापा, पापा प्लीज मुझे बचा लीजिए। मुझे एक आदमी ने किडनैप कर लिया है और वो मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा है। मुझे नहीं पता मैं कहां हूं पर मुंबई में हूं। यहां आस-पास का एरिया खाली है तो आउट एरिया ही है। प्लीज पापा मुझे बचा लीजिए।”
आरोही रोते हुए बोले जा रही थी तभी सामने से एक शख्स आवाज आई, “लेकिन अब तुम्हें उस आदमी से कोई नहीं बचा सकता बेटा। बेहतर होगा कि तुम कॉर्पोरेट करो।”
आरोही हैरानी से मोबाइल स्क्रीन की तरफ देख रही थी। ऐसे लग रहा था जैसे वो किसी जाल में फंस गई हो, जो उसे फसाने के लिए ही बिछाया गया था।
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