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Chapter 5

A cruel fairytale - Chapter 5

A Cruel Fairytale

आरोही की लाख कोशिशों के बावजूद रिदांश ने उसे देख ही लिया था। रिदांश अपने किसी दुश्मन को जान से मार रहा था और उसे ये करते हुए आरोही ने देख लिया था। आरोही ने उससे छुपने की पूरी कोशिश की पर रिदांश ने उसका कुर्ता गाड़ी के साइड में देखा और फिर उसे घसीट कर अपने साथ लेकर चला गया।

आरोही इस वक्त रिदांश के साथ उसकी गाड़ी में थी। गाड़ी उसका मैनेजर डेनियल ड्राइव कर रहा था जबकि आरोही रिदांश के साथ पीछे बैठी हुई थी। उसके मुंह पर टेप लगी हुई थी और हाथ बंधे हुए थे। आरोही की आंख में आंसू थे।

रिदांश बिना किसी भाव के आरोही की तरफ देख रहा था। फिर उसने अचानक से आरोही के मुंह से टेप हटाकर कहा, “सच-सच बताओ तुम्हें यहां किसने भेजा है। मेरे किसी दुश्मन का काम है ना यह? पीटर के यहां से आई हो या फिर रॉबर्ट के? कहीं तुम्हें जायद खान ने तो नहीं भेजा?” रिदांश ने एक-एक करके अपने सभी दुश्मनों के नाम आरोही के सामने लेने शुरू कर दिए थे। आरोही ने उन सब के बारे में नॉवेल में थोड़ा बहुत लिखा था। इस वजह से उसे उनके नाम पता थे।

आरोही मासूमियत से रोते हुए बोली, “मेरा यकीन करो। मैं तुम्हारे खिलाफ कुछ नहीं करूंगी। प्लीज मुझे जाने दो। मुझे किसी ने नहीं भेजा, पीटर, रॉबर्ट और जायद खान में से किसी ने नहीं। यहां तक कि निकोलस ने भी मुझे नहीं भेजा है।”

निकोलस का नाम आरोही के मुंह से सुनकर रिदांश की आंखें हैरानी से बड़ी हो गई। “बेवकूफ समझा है तुमने मुझे?” रिदांश ने सिर हिला कर कहा, “तुम मेरा नाम जानती हो। मेरे बारे में सब कुछ जानती हो और मैं तुम्हें ऐसे ही जाने दूं? तुम्हारे मुंह से निकोलस का नाम निकला है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि हम दोनों के बीच दुश्मनी हैं और तुम्हें लगता है कि मैं फिर भी यकीन कर लूं कि तुम अनजाने में वहां पहुंच गई थी और तुमने मुझे किसी को मारते हुए देख लिया। तुम जैसी खूबसूरत लड़कियां आज से पहले भी मेरे पास भेजी गई है। उन्हें लगता है कि मैं वूमेनाइजर हूं। किसी भी लड़की को देखकर फिसल जाऊंगा। इस बार तुम्हें ऐसी मौत दूंगा ना कि उनकी रूह तक कांप जाएगी और आगे से वो मेरे पास किसी लड़की को भेजने की गलती तो बिल्कुल नहीं करेंगे।”

आरोही ने आगे कुछ नहीं कहा। गलती से उसके मुंह से निकोलस का नाम निकला था और अब ये गलती उसके लिए बहुत भारी पड़ने वाली थी। यहां वो सब हो रहा था, जो आरोही ने लिखा भी नहीं था। उसके हिसाब से नॉवेल में जब आरोही पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखाने गई थी तब पुलिस वाले ने रिदांश को आरोही के बारे में बताया और फिर आरोही को वो किडनैप करके अपने पास लेकर चला गया। आरोही को एक बात तो समझ आ गई थी कि होगा वही, जो उसने लिखा है चाहे तरीका कुछ भी रहा हो।

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आरोही को अपनी किस्मत पर तरस आ रहा था। वो मन ही मन बोली, “शायद मुझे अपने ही किये गुनाहों की सजा मिल रही है। उन सब लोगों ने ठीक कहा था कि मुझे ऐसा नहीं लिखना चाहिए था। किसे पता था कि मेरा लिखा हुआ सच हो जाएगा।”

आरोही को चुप देखकर रिदांश को इरिटेशन होने लगी। उसने आरोही का गला पकड़ा और उसकी आंखों में देखकर कोल्ड वॉइस में बोला, “जितनी जल्दी मुझे बताओगी, उतनी ही आसान मौत मिलने वाली है तुम्हें।”

“लेकिन... लेकिन मुझे किसी ने नहीं भेजा है।” आरोही ने अटकते हुए कहा।

रिदांश ने एक झटके में उसका गला छोड़ दिया था। वो गाड़ी में बेतरतीब तरीके से पड़ी हुई थी।

रिदांश ने किसी को कॉल पर कनेक्ट करके कहा, “मैं अपने लोनावला वाले घर में जा रहा हूं। इस लड़की को लेकर मैं इंडिया से बाहर नहीं जा सकता। जब तक ये सच नहीं बता देती मैं इसे छोड़ भी नहीं सकता और ना ही इसे मार सकता हूं। पता नहीं किस दुश्मन ने इसे मेरे पास भेजा है।” बोलते हुए रिदांश ने आरोही की तरफ देखा, जो चुपचाप उसकी बातें सुन रही थी।

रिदांश ने कॉल कट कर दिया था। वही आरोही ने एक बार रिदांश के सामने सारी बात रखने का फैसला लिया। उसने रिदांश से कहा, “अगर मैं तुम्हें बताऊंगी, मैं यहां कैसे पहुंची तो तुम क्या मेरी बात का यकीन करोगे?”

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रिदांश ने बिना कुछ बोले हां में सिर हिला दिया। आरोही ने कुछ पल रुकने के बाद कहा, “ये नॉवेल की दुनिया है। मैं एक राइटर हूं, आरोही श्रीवास्तव नाम है मेरा। मैंने एक नॉवेल लिखा था, उसी की कहानी का हिस्सा हो तुम। लीड कैरेक्टर हो तुम। मेरा एक्सीडेंट हुआ था और पता नहीं मैं कैसे इस दुनिया में पहुंच गई। मेरा यकीन करने की कोशिश करो। मैं वहां जानबूझकर नहीं गई थी। मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है। तुम रिदांश ठाकुर हो, तुम्हारी एज 27 वर्ष है और तुम्हारा बर्थडे 5 जुलाई को आता है। तुम रॉयल फैमिली से बिलॉन्ग करते हो। तुम्हारी बाकी की फैमिली अलग घर में रहती है लेकिन तुम उनसे अलग घर में रहते हो क्योंकि बाकी की फैमिली लीगल बिजनेस करती है और तुम ईलीगल। तुम्हारे और तुम्हारी फैमिली के बीच रिश्ता अच्छा नहीं है। तुम माफिया के लिए वेपंस बनाते हो, अपनी लैंड में उनके लिए ड्रग्स ग्रो करते हो, बाकी सब चीजें भी... अब तो तुम्हें यकीन हो गया ना कि मैंने ही तुम्हें बनाया है।”

आरोही को जो भी याद आ रहा था उसने रिदांश के सामने रखा। पूरी बात सुनने के बाद रिदांश ने उसे सर्द निगाहों से देखते हुए कहा, “अब तो सच में तुम मेरे लिए खतरनाक हो आरोही श्रीवास्तव और मैं तुम्हें किसी भी कीमत पर जाने नहीं दे सकता। तुम मेरे बारे में जो बातें जानती हो, वो कोई नहीं जानता। किसने भेजा है तुम्हें यहां, सच-सच बता दो वरना तुमसे जुड़े हर शख्स को तबाह कर दूंगा।”

“मैं झूठ नहीं बोल रही हूं प्लीज मेरा यकीन करो।” आरोही हाथ जोड़ते हुए बोली।

“ठीक है फिर प्रूफ करो कि तुम सच बोल रही हो हालांकि तुम्हारी बातें पूरी तरह से बेबुनियाद है जिस पर कोई यकीन नहीं करेगा कि तुम किसी और दुनिया से यहां पर आई हो। फिर भी तुम्हें एक मौका देता हूं। खुद को प्रूफ करो।” रिदांश ने जवाब दिया। उसने आरोही को खुद को साबित करने का एक मौका दिया था।

रिदांश ने उसे मौका तो दे दिया था लेकिन आरोही को समझ नहीं आ रहा था कि वो इस दुनिया में किसकी मदद ले और कैसे अपना सच साबित करें। अगर उसने ये मौका खो दिया तो फिर रिदांश उसे अपने घर ले जाएगा और वही से उसकी जिंदगी की तबाही शुरू होगी।

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क्या आरोही खुद को साबित कर पाएगी या फंस जाएगी हमेशा के लिए यहां पर? कहानी कैसी लग रही है, ये जरूर बताना। Thanks for your love and support

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