A cruel fairytale - Chapter 3
A Cruel Fairytaleआरोही श्रीवास्तव, जो कि एक राइटर थी, वो अपनी ही नॉवेल में फंस चुकी थी। आरोही को आखरी बार यही याद था कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर निकली थी और उसका एक्सीडेंट हो गया था। अचानक ही उसे ऐसा लगा जैसे वो किसी लंबी नींद से उठी हो। अब वो अपनी ही नॉवेल की दुनिया में पहुंच चुकी थी।
आरोही ने एक्सीडेंट के बाद खुद को अपनी पुश्तैनी हवेली में पाया, जो कि कोलकाता में थी। आरोही बचपन में उस जगह पर रहा करती थी फिर अचानक उसकी मां और फिर नॉवेल में उसकी बेस्ट फ्रेंड काजल के आने पर आरोही समझ चुकी थी कि वो अपनी ही नॉवेल की दुनिया में पहुंच चुकी है।
आरोही इस वक्त बाथरूम में थी जबकि उसकी दोस्त काजल बाहर थी। वो कॉलेज जाने के लिए उसे बुलाने के लिए आई थी। आरोही को अब तक यकीन नहीं हो रहा था कि वो अपनी ही नॉवेल की दुनिया में फंस चुकी है।
सारी बातें उसके सामने आने पर भी आरोही का दिल नहीं कर रहा था कि वो उस पर यकीन करें। उसने गहरी सांस लेकर छोड़ी और कहा, “ओके फाइन, शायद मैं कोई सपना देख रही हूं। मेरा एक्सीडेंट हुआ था। हो सकता है वो भी एक तरह का कोई सपना हो। कही ऐसा तो नहीं, मैं मर गई हूं।” आरोही को समझ नहीं आ रहा था कि अगर वो कोई सपना भी था तो वो बाहर कैसे निकले तभी उसकी नजर बाथरूम में रखी एक छोटा कैंची पर गई। आरोही ने उसे उठाया और अपने कलाई पर एक छोटा सा कट मार लिया। उसके खून निकल रहा था और उसे दर्द भी महसूस हुआ।
“नहीं, ये कोई सपना नहीं है। मैं सच में यहां पहुंच चुकी हूं लेकिन कैसे? ये कैसे हो सकता है।” आरोही खुद से बोली। वो बाहर जाने के लिए तैयार नहीं थी जबकि बाहर खड़ी काजल अब बुरी तरह इरिटेट हो चुकी थी।
काजल ने जोर से दरवाजा पीटते हुए कहा, “देख आरू, तू बाहर आ रही है या अब मैं दरवाजा तोड़कर अंदर घुस जाऊं। तेरा ना बहुत हो रहा है। तेरी वजह से हमें देर हो रही हैं। शायद तू भूल गई होगी लेकिन आज मेरी दक्ष के साथ डेट थी।”
काजल के बताने पर आरोही को याद आया कि उसने नॉवेल में काजल का एक बॉयफ्रेंड दिखाया था, जिसका नाम दक्ष था। आरोही को धीरे-धीरे समझ आ रहा था तो वो खुद को इस सिचुएशन में ढालने की कोशिश कर रही थी।
आरोही ने अपना मुंह धोया और फिर खुद को नॉर्मल करने की कोशिश करने लगी। वो खुद से बोली, “नो आरोही श्रीवास्तव, तुम घबरा नहीं सकती हो। ये तुम्हारी बनाई दुनिया है। लाइफ में जो भी होता है वो हमें पता नहीं होता तो सब अनप्रिडिक्टेबल होता है। यहां अच्छी बात ये है कि तुम सब कुछ जानती हो तो चीजों को अपने हिसाब से हैंडल कर सकती हो। आज ही के दिन मैं पहली बार रिदांश ठाकुर से मिली थी। नॉवेल के हिसाब से मैंने उसे किसी को मारते हुए देख लिया था और फिर पुलिस स्टेशन में गवाही देने के लिए गई थी। रिदांश ठाकुर एक माफिया है, जो सच पता चलने पर आरोही श्रीवास्तव को किडनैप करके उसके साथ टॉर्चर करता है। क्या हो जो मैं यहां से कहानी ही बदल दूं। ना रहेगा बांस, ना ही बजेगी बांसुरी। आज कॉलेज ही नहीं जाऊंगी तो फिर रिदांश ठाकुर को मर्डर करते हुए देखूंगी कैसे।”
आरोही ने अपनी नॉवेल की स्टोरी याद करके चुटकियों में ही हल निकाल लिया था। उसके फेस पर हल्की स्माइल थी और उसने अब बाथरूम का दरवाजा खोल दिया था।
आरोही बाहर आकर काजल से बोली, “काजल आज मुझे ठीक नहीं लग रहा। मां ने तुझे बताया होगा कि मैं अजीब बर्ताव कर रही हूं। कल रात मैंने बहुत बुरा सपना देखा था, जिसके बाद से मेरी तबीयत खराब है तो प्लीज आज अकेली कॉलेज चली जा।”
काजल थोड़ा ज्यादा बोलती थी लेकिन आरोही की फिक्र भी बहुत करती थी। उसने हां में सिर हिलाया और कहा, “अच्छा ठीक है। अगर दक्ष के साथ डेट नहीं होती तो मैं तुझे छोड़कर कॉलेज नहीं जाती।”
आरोही को बाय बोलकर काजल वहां से जाने को हुई तभी आरोही को याद आया कि नॉवेल में आरोही और काजल की बस मिस हो गई थी इसलिए वो कुछ देर पैदल ही चली और बाद में उन्होंने कैब की थी। कैब के रास्ते में खराब होने पर उसने उन्हें सुनसान रास्ते पर ही छोड़ दिया था, जहां पर उन्होंने रिदांश ठाकुर को किसी को मारते हुए देखा था।
आरोही ने काजल को रोकते हुए कहा, “रुको काजल। आज बस मत लेना और ना ही कैब। तुम मेट्रो से क्यों नहीं चली जाती?”
आरोही के ऐसे कहने पर काजल उसे सवालिया नजरों से देख रही थी। वो कुछ पूछती उससे पहले आरोही ने खुद ही मामले को संभालते हुए कहा, “तुम लेट हो गई हो ना इसलिए ऐसा कह रही हूं। आज का मौसम थोड़ा अजीब सा है। बारिश होने के चांसेस है तो प्लीज तुम मेट्रो ले लेना, सेफ रहेगा।”
काजल ने उसकी बात पर मुस्कुरा कर हामी भरी और वहां से चली गई। उसके जाते ही आरोही ने राहत की सांस ली। आज उसने खुद के और काजल के साथ एक बहुत बड़ा हादसा होने से बचा लिया था।
आरोही नॉवेल के एक पहलू को अच्छे से सोचने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था। धीरे-धीरे उसकी असली जिंदगी की यादें धुंधली होती जा रही थी।
“मुझे याद क्यों नहीं आ रहा कि आगे क्या हुआ था।” आरोही सिर पर हाथ रखकर बोली। अचानक ही उसके सिर में तेज दर्द उठा तो उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई।
आरोही को अपने कमरे में सुबह से शाम हो चुकी थी पर वो बाहर नहीं निकली थी। काफी सोचने के बाद भी आरोही को कुछ याद नहीं आया तो वो थककर हार मानते हुए बोली, “छोड़ो जाने देती हूं। कहते हैं जो होता है अच्छे के लिए ही होता है। मैंने आज खुद को और काजल दोनों को ही बचा लिया। असली जिंदगी में मैंने अपनी मां को खो दिया था पर यहां वो मौजूद है, तो क्यों ना उनके साथ उन सब मोमेंट्स को इंजॉय करूं जो मैंने मिस कर दिए थे।”
शाम के लगभग 6 बजे के करीब आरोही अपने रूम से बाहर निकली। उसे देखते ही संध्या ने कहा, “आरू बेटा, पूरे दिन से कमरे के अंदर है। तूने ठीक से दवाई ली या नहीं। सॉरी बेटा, काम के चक्कर में तुम्हें देखने ना आ सकी। ऊपर से पास वाली बुआ की तबीयत खराब हो गई तो उनके यहां जाना पड़ा।”
“कोई बात नहीं मां, मैं ठीक हूं।” आरोही ने मुस्कुरा कर जवाब दिया और संध्या के गले लग गई। वो उसके एहसास को महसूस कर रही थी, जिसे उसने पिछले काफी सालों तक बहुत मिस किया था। संध्या के गले लगे हुए आरोही की आंखों में आंसू आ गए। अचानक उसके मुंह से निकला, “मां मैंने आपको बहुत मिस किया।”
उसकी बात सुनकर संध्या हंसते हुए उससे अलग हुई और कहा, “आज कैसी बातें कर रही है तू। पूरे दिन तो हम साथ रहते हैं और तू मुझे मिस कर रही थी।”
आरोही ने उसकी बात के जवाब में कुछ नहीं कहा बस मुस्कुरा कर रह गई। वो कहती भी क्या। फिर संध्या ने अपने सिर पर हाथ रख कर कहा, “हे राम, मैं तो भूल ही गई थी। आज सब्जी वाला मोहल्ले में आया नहीं और तेरे पापा का बैंगन का भर्ता खाने का बहुत मन कर रहा था। तू बाजार से जाकर सब्जियां ले आएगी क्या? थोड़ा बाहर घूमेगी तो अच्छा लगेगा।”
आरोही ने उनकी बात पर हामी भरी और चेंज करने के लिए रूम में आ गई। वैसे भी अब वो एक बड़े खतरे को टाल चुकी थी इसलिए उसे डर नहीं था। आरोही भी अपने ही नॉवेल की दुनिया को एक्सप्लोरर करना चाहती थी।
आरोही ने अलमारी खोली तो वहां सिर्फ इंडियन ड्रेस ही पड़े हुए थे, जो उसे पसंद नहीं थे। मजबूरन आरोही को उनमें से ही एक ड्रेस सेलेक्ट करनी पड़ी। उसने व्हाइट कलर के पेंट्स के ऊपर बेबी पिंक कुर्ती पहनी था, जिसके बीच में लंबा स्लिट था और उस वजह से उसका पेट थोड़ा सा दिख रहा था। आरोही ने अपने बालों को खुला छोड़कर आगे की तरफ कर रखा था।
तैयार होने के बाद उसने खुद को आईने में देखते हुए कहा, “नॉट बेड, इसमें भी अच्छी ही लग रही हूं।”
आरोही काफी खुश होकर नीचे पहुंची। उसकी मां ने उसे देखकर हंसते हुए कहा, “सब्जी खरीदने जाने के लिए इतना तैयार कौन होता है।”
उन्होंने आरोही के हाथ में एक बैग और कुछ पैसे दिए, जिन्हें लेकर आरोही बाहर आ गई थी। आश्चर्य की बात ये थी कि पूरे मार्केट में आरोही को बैंगन कहीं नहीं मिले और वो घूमते हुए एक अनजान रास्ते में पहुंच चुकी थी, जो घर से काफी दूर था। आरोही को वो जगह जानी पहचानी लग रही थी। वहां आसपास ज्यादा आबादी नहीं थी और एरिया लगभग सुनसान था। वो रास्ता उसे किसी सब्जी वाले ने ही बताया था। उस तक पहुंचने के लिए आरोही एक बंद गली से होकर गुजरी ही थी, तभी उसे कुछ आवाज सुनाई दी। उसने मुड़ कर देखा तो आरोही के चेहरे पर पसीने की बूंदे थी। सुबह उसने जिस इंसिडेंट को टालने की कोशिश की थी, अनजाने में वो खुद ही उस जगह पर पहुंच चुकी थी। वही जगह जहां पहली बार उसकी मुलाकात रिदांश ठाकुर से हुई थी और उसकी जिंदगी नरक बन गई थी।
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क्या आरोही रिदांश से बच पाएगी, या होगा वही जो उसने नॉवेल में लिखा है?