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Chapter 12

A cruel fairytale - Chapter 12

A Cruel Fairytale

आरोही रिदांश के साथ चेकअप करवाने के लिए हॉस्पिटल आई हुई थी। डॉक्टर ने उसका चेकअप किया और फिर वहां से बाहर चला गया। वो अभी भी उसे रूम में अकेली थी। आरोही ने देखा वहां आसपास कोई नहीं है, तो उसने वहां से भागने का सोचा।

आरोही खिड़की में से बाहर निकलने को हुई तभी किसी ने उसे अंदर की तरफ पकड़ कर जोर से खींचा। उसने देखा सामने रिदांश खड़ा था, जो उसकी तरफ गुस्से से देख रहा था।

“यहां तुम्हारी कोई मदद नहीं करेगा मिस राइटर... चुपचाप मेरे साथ चलो। बाकी मरने का इतना ही शौक चढ़ा है तो मेरा काम कर दो, उसके बाद अपने हाथों से तुम्हारी जान लूंगा।” रिदांश ने आरोही के कान के बिल्कुल करीब आकर कहा और फिर आरोही का हाथ पकड़ कर उसे खींचते हुए बाहर ले जाने लगा।

आरोही की आखिरी उम्मीद बस वो रिपोर्ट थी, जो डॉक्टर देने वाला था। वो दिल ही दिल में यही दुआ कर रही थी कि उसकी रिपोर्ट नॉर्मल ना आए।

घर आने के बाद रिदांश ने उसे वापस कमरे में बंद कर दिया। जब से वो उसके पास से आई थी, रिदांश ने जानबूझकर उसे कुछ भी खाने के लिए नहीं दिया था। बस उसके कमरे में पानी की एक बोतल पड़ी हुई थी। भूख के मारे आरोही का बुरा हाल हो गया था।

जैसे-तैसे उसने शाम तक का वक्त निकाल दिया था। शाम को रिदांश उसके कमरे में आया तो आरोही को लगा कि वो उसे खाना देगा लेकिन तभी रिदांश ने सख्त आवाज में कहा, “नीचे डॉक्टर आया है तुम्हारी रिपोर्ट्स लेकर। दुआ करो कि रिपोर्ट अच्छी आए वरना तुम मेरे किसी काम की नहीं हो और रिदांश ठाकुर यूजलेस चीजों को अपने पास नहीं रखता है।”

इतना कहकर रिदांश ने आरोही के हाथ को कसकर पकड़ा और वापस उसे नीचे ले जाने लगा।

आरोही के आगे खाई थी तो पीछे कुआं। दोनों ही सूरत में उसका नुकसान था। अगर रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो रिदांश उसके जरिए अपना बच्चा पैदा करने वाला था, जो वो कभी नहीं चाहती थी और रिपोर्ट नेगेटिव आने पर रिदांश उसकी जान लेने का बोल चुका था।

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आरोही रिदांश के साथ नज़रे झुकाकर नीचे पहुंची। लिविंग रूम में डॉक्टर के अलावा और कोई नहीं था। रिदांश काउच पर जाकर बैठ गया और उसने अपने पास में आरोही को भी बिठा लिया।

रिदांश ने डॉक्टर की तरफ देखा। उसका इशारा समझते हुए डॉक्टर ने हल्का मुस्कुरा कर कहा, “इनकी सारी रिपोर्ट नॉर्मल आई है, इन फैक्ट काफी अच्छी आई है। देखा जाए तो ये परफेक्ट टाइम है, जब आप अपना बच्चा पैदा कर सकते हैं। आप इसे आर्टिफिशियल तरीके करना चाहे तो ये और भी आसान हो जाएगा और सब नेचुरल रखना है तो थोड़ा टाइम लग सकता है... पर हां, शी इज परफेक्ट।”

रिदांश ने आरोही की तरफ तिरछा मुस्कुराता हुए देखा। आरोही की नज़रें झुकी हुई थी। रिदांश ने उसकी चिन को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया और आरोही की आंखों में देखते हुए तिरछा मुस्कुरा कर कहा, “सुना तुमने, डॉक्टर ने क्या कहा? यू आर परफेक्ट। मुबारक हो मिस राइटर, एक साल के लिए तुम्हारी जान बच गई।”

उसके बाद रिदांश ने डॉक्टर की तरफ देखा तो डॉक्टर तुरंत बोला, “आप इन्हें कल हॉस्पिटल लेकर आ जाइएगा। बस 10-15 मिनट का काम है और फिर आपका अंश इनके अंदर...”

रिदांश ने डॉक्टर की बात बीच में काटते हुए कहा, “मुझे नेचुरल प्रोसेस को फॉलो करना है।”

डॉक्टर ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया और फिर थोड़ा बहुत कुछ समझाने के बाद वहां से चला गया। आरोही ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। वो कही और ही खोई हुई थी। जैसे ही रिदांश ने सब कुछ नेचरली करने का कहा, आरोही की सांसे तो वहीं पर थम गई थी।

डॉक्टर के जाते ही रिदांश ने आरोही से कहा, “चलो तैयार हो जाओ मिस...।” रिदांश बोलते हुए रुक गया। उसने आरोही के चेहरे की तरफ देखा। उसका चेहरा कमजोर और पीला लग रहा था।

रिदांश ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर बात को बदलते हुए कहा, “काफी वीक लग रही हो। इतना बड़ा काम करने जा रही हो तो स्ट्रांग होना जरूरी है। पहले कुछ खा लो।”

शाम का वक्त था तो वैसे भी डिनर तैयार हो रहा था। आरोही को बहुत जोरों से भूख भी लगी थी इसलिए उसने इस मामले में कुछ नहीं कहा। थोड़ी ही देर में रिदांश और आरोही दोनों डाइनिंग टेबल पर थे।

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आरोही और रिदांश दोनों चुपचाप खाना खा रहे थे। आरोही की नजरे झुकी हुई थी जबकि रिदांश उसी की तरफ देख रहा था। रिदांश ने आरोही की तरफ देखते हुए अचानक कहा, “नो डाउट कि तुम्हें इस मिशन के लिए क्यों चुना गया होगा। तुम काफी खूबसूरत हो लेकिन उन्होंने जल्दबाजी दिखाई और तुम्हें अच्छे से ट्रेड नहीं किया।” रिदांश का कहना भी सही था। वो बहुत खूबसूरत थी। अगर आरोही रिदांश से नॉर्मल तरीके से पार्टी में मिली होती तो वो उसे काफी प्यार से अडोर करता।

“मुझे किसी ने नहीं भेजा है।” आरोही ने रिदांश की तरफ देखकर गुस्से से कहा।

रिदांश ने फिर आगे कहा, “जब मैं लास्ट नाइट तुम्हारे साथ था आई केन फील दैट यू आर वर्जिन... कहीं उन्होंने तुम्हारे घर वालों को किडनैप करके तो तुम्हें जबरदस्ती यहां नहीं भेजा?”

आरोही ने इस बात रिदांश की बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो जानती थी कि उसकी सफाई देने का कोई फायदा नहीं है।

उसे चुप देखकर रिदांश फिर बोला, “चलो एक बार के लिए नॉवेल वाली बात को इग्नोर कर देते हैं और इस बात को भी कि तुम्हें किसी ने भेजा होगा लेकिन फिर भी मैं तुम्हें जाने नहीं दे सकता क्योंकि तुमने मुझे किसी की जान लेते देखा है। रिदांश ठाकुर को अपने साये पर भी यकीन नहीं है फिर तुम पर कैसे कर ले। ऊपर से तुम तो मेरे बारे में वो भी जानती हो जो तुम्हें नहीं जानना चाहिए।”

“ये सब कोइंसिडेंसली हुआ। मै नॉवेल की कहानी जानती हूं क्योंकि मैंने वो लिखा है। मैंने इसे टालने की बहुत कोशिश की। मैं धीरे-धीरे सब कुछ भूल रही हूं लेकिन ये अच्छे से याद है कि तुम उस आदमी को मारने के लिए सुबह गए थे। मैंने सुबह वहां जाना इग्नोर किया तो आपने उसे शाम को मारा और अनजाने में मैं वहां पहुंच गई।” आरोही ने एक बार फिर उसे सब समझाने की कोशिश की। इस बार रिदांश उसकी बात गौर से सुन रहा था।

वो सच कह रही थी रिदांश उस आदमी को मारने के लिए सुबह निकला था। रिदांश जिस तरह से आरोही को देख रहा था, आरोही को लगने लगा कि रिदांश को उसकी बात पर यकीन हो रहा है।

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क्या लगता है रिदांश को यकीन हो गया आरोही सच में किसी नॉवेल की दुनिया में आकर फंस गई है, जिसे उसने खुद ने बनाया है। ये तो अगले पार्ट में ही पता चलेगा।

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