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Chapter 22

A cruel fairytale - Chapter 22

A Cruel Fairytale

आरोही के प्रेग्नेंट होने की न्यूज़ सुनने के बाद से ही रिदांश उसकी एक्स्ट्रा केयर कर रहा था। वो आरोही के मामले में कोई लापरवाही नहीं बरतना चाहता था। डॉक्टर से चेकअप करवाने के बाद रिदांश आरोही को लेकर घर पर आया।

पहले आरोही रिदांश के कमरे में ही रहती थी और ये रिदांश के लिए जरूरी भी था ताकि जल्द से जल्द आरोही कंसीव कर सके। अब जब आरोही प्रेग्नेंट हो गई थी तो रिदांश ने उसके लिए अलग से कमरा तैयार करवा दिया था। रिदांश आरोही को लेकर उसके कमरे में आया। जैसे ही उसने कमरे का दरवाजा खोला, आरोही की आंखें हैरानी से फटी रह गई तो वही रिदांश भी बिना किसी भाव के उस कमरे को देख रहा था।

आरोही ने रिदांश की तरफ देखकर धीरे से कहा, “ये सब कब किया तुमने? कल रात ही तो मैंने तुम्हें अपनी प्रेगनेंसी बारे में बताया था? सुबह से तुम मेरे साथ हो फिर ये सब...”

“इतना मत सोचो। कल रात नींद नहीं आ रही थी बस तभी प्लान किया। अब अंदर जाकर तब देखोगी या यहां पर खड़ी रहकर मेरी तारीफों के पुल बांधती रहोगी।” रिदांश ने काफी रूड तरीके से जवाब दिया और फिर आरोही का हाथ हल्के से पकड़ कर उसे अंदर लेकर आया।

एक ही रात में कमरे का पूरा इंटीरियर रिदांश ने बदलवा दिया था। वहां आरोही के लिए एक कंफर्टेबल बेड रखा गया था और पूरे कमरे को तरह तरह तैयार किया गया था, जैसे किसी न्यूली मदर के लिए तैयार किया जाता है। चारों तरफ कमरे में रिदांश के बचपन की फोटोज लगी हुई थी। एक तरफ बच्चे का बेड था और साथ में बहुत सारे सॉफ्ट टॉयज।

आरोही ने रिदांश की फोटोज देखने के बाद हैरानी से उसकी तरफ देखा और कहा, “कमरे में बच्चों के फोटोज लगाई जाती है पर तुमने चारों तरफ अपनी तस्वीरें क्यों लगवाई है?”

“क्योंकि मैं चाहता हूं मेरा बच्चा बिल्कुल मेरी तरह दिखे। इसी चक्कर में मैंने कमरे में कोई आईना भी नहीं लगवाया ताकि गलती से भी वो तुम्हारी तरह न दिखे। मैं ये नहीं कह रहा तुम दिखने में खूबसूरत नहीं हो पर तुम सिर्फ और सिर्फ उसकी बायोलॉजिकल मदर होगी। उसे बड़ा मैं ही करूंगा तो वो मेरी तरह ही दिखना चाहिए।” रिदांश ने आरोही को कमरे में अपनी ही फोटोज लगाने का कारण बता दिया था।

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ये सुनकर आरोही का चेहरा उतर गया था। उसने बिना कुछ कहे रिदांश की बात पर हामी भरी।

आरोही का उतरा हुआ चेहरा देखकर रिदांश बोला, “डॉक्टर ने तुम्हें खुश रहने के लिए कहा है तो तुम्हें इस तरह उदास होने की इजाजत नहीं है। वॉर्डरोब में तुम्हारे हिसाब से कंफर्टेबल कपड़े रखे हुए हैं। सामने बोर्ड पर डाइट चार्ट लगाया हुआ है। हर घंटे अलार्म बजेगा और वो तुम्हें याद दिलाएगा कि किस वक्त में क्या खाना है या क्या पीना है। वैसे मैंने तुम्हारे लिए एक अलग से हाउस हेल्पर को लगा दिया है। वो तुम्हारा पूरा ख्याल रखेगी। इसके अलावा भी तुम्हें किसी चीज की कमी हो तो बता देना।”

आरोही ने रिदांश की बातों को अनसुना करते हुए कहा, “फिलहाल तो मुझे आराम के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। तुम जा सकते हो।”

रिदांश ने उसकी बात पर हामी भरी और कमरे से बाहर निकलते हुए बड़बड़ा कर बोला, “कितनी थैंकलेस लड़की है। मैंने इसके लिए इतना सब कुछ किया लेकिन इसके मुंह से फॉर्मेलिटी के लिए भी थैंक्स नहीं निकला। अब इसे कौन समझाए कि रिदांश ठाकुर ने पहली बार किसी के लिए इतने एफर्ट्स किए हैं।”

आरोही को रिदांश की बात सुनाई दे गई थी। वो उसकी बात के जवाब में बोली, “ये सब तुमने मेरे लिए नहीं अपने होने वाले बच्चे के लिए किया है। जब वो पैदा हो जाएगा तो तुम्हें इसके लिए थैंक्स बोल देगा।”

रिदांश ने मुड़कर आरोही की तरफ सर्द निगाहों से देखा और फिर बिना कुछ बोले वहां से चला गया। उसके जाते ही आरोही ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और बिस्तर पर जाकर आराम से लेट गई।

रिदांश के सामने आरोही ने कमरे को लेकर कोई एक्साइटमेंट नहीं दिखाई थी लेकिन रिदांश से अलग होने पर वो उस कमरे में आकर काफी खुश थी। उसके जाने के बाद वो अकेले ही कमरे का टूर लेने लगी। वहां एक तरफ बहुत सारी अच्छी किताबें रखी हुई थी। रिदांश को पता था कि आरोही को किताबें पढ़ने का शौक है इसलिए उसने अलग से कलेक्शन तैयार करवाया था। साथ में कुछ खाली डायरीज भी थी ताकि आरोही कुछ लिखना चाहे तो लिख सके।

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कमरे में एक तरफ मिनी रेफ्रिजरेटर रखा हुआ था, जहां फ्रेश फ्रूट, पानी की कुछ बोतले और जूस रखा हुआ था।

“अगर इतना सब कुछ कोई और लड़का मेरे लिए करता, जिसे मैं प्यार करती तो शायद मैं खुद को बहुत लकी समझती। खुद को लकी तो नहीं समझ सकती पर थोड़े टाइम के लिए ही सही मुझे रिलीफ तो मिला, वरना तुम्हारे साथ सोना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। ज्यादा नहीं तो एट लिस्ट 9 महीने की बची कुची जिंदगी तो आराम से बीता पाऊंगी।” आरोही ने हल्के से मुस्कुरा कर कहा और फिर बिस्तर पर जाकर लेट गई। सिकनेस होने की वजह से उसे थोड़ी ही देर में नींद आ गई थी।

आरोही को लेटे हुए अभी 1 घंटे भी नहीं हुआ था कि उसके कमरे में जोर से अलार्म बजा। उसके साथ ही वो उठी। उसे रिदांश पर गुस्सा आ रहा था। अलार्म बजने के साथ ही एक मेड उसके कमरे में दाखिल हुई और वो बोली, “शेड्यूल के हिसाब से आपको इस वक्त बीटरूट का जूस पीना है और साथ में सलाद खाना है। खाने के बाद आप 5 मिनट के लिए वॉक करेगी और उसके बाद में रेस्ट कर सकती हैं।”

“अजीब जबरदस्ती है। साथ नहीं रह रहा फिर भी इसे मुझ पर पूरा कंट्रोल चाहिए।” आरोही गुस्से में बड़बड़ा कर बोली।

फिर उसने मेड की तरफ देखकर जबरदस्ती की छोटी सी मुस्कुराहट दी और उसके हिसाब से डाइट चार्ट को फॉलो किया। उसके जाने के बाद आरोही वहां बैठी हुई थी। उसने टाइम पास के लिए एक किताब निकाली थी और उसी को पढ़ रही थी। हैरानी की बात था, जब आरोही ने उस बुक को पढ़ा तो वो उसी की लिखी किताब थी। उस किताब को उसकी आंखों में आंसू आ गए। आरोही जल्दी से उस किताब को लेकर रिदांश के पास पहुंची ताकि उसे ये साबित कर सके कि वो झूठ नहीं बोल रही है।

रिदांश उस वक्त एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर मीटिंग कर रहा था। जैसे ही उसने आरोही को देखा तो मीटिंग बंद कर दिया। आरोही रिदांश के पास आई और वो किताब उसे दिखाते हुए बोली, “देखो मैं सच कह रही थी। मैं एक राइटर हूं। ये किताब मेरी ही लिखी हुई है। तुम इसके पीछे राइटर का नाम देख सकते हो।”

आज इतने दिनो में पहली बार आरोही के हाथ में कोई प्रूफ लगा था, जिससे वो ये साबित कर सकती थी कि वो झूठ नहीं बोल रही थी। रिदांश बुक को देख रहा था तो आरोही की आंखों में उम्मीद के आंसू थे।

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