A cruel fairytale - Chapter 16
A Cruel Fairytaleआरोही रिदांश के साथ डाइनिंग टेबल पर थी। कल रात उसने रिदांश के मोबाइल से किसी को कांटेक्ट करने की कोशिश की थी। आरोही के हिसाब से वो नंबर उसके पापा के थे लेकिन रियल में वो रिदांश का बिछाया हुआ एक जाल था, जिसमें आरोही फंस गई थी।
रिदांश ने आरोही को उसके किए की सजा दे दी थी लेकिन वो आगे को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था। अगली सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर रिदांश ने आरोही को सरप्राइज देने की बात कही तो आरोही को शॉक सा लगा। वो जानती थी कि रिदांश का सरप्राइज उसके लिए झटका ही साबित होने वाला है।
रिदांश की बातें सुनकर आरोही के चेहरे का रंग उड़ गया। उसके बदले हुए एक्सप्रेशंस देखकर रिदांश ने इविल स्माइल करते हुए कहा, “तुम तो इतनी जल्दी घबरा गई जबकि अभी तो मैंने पूरा सच बताया भी नहीं। खैर छोड़ो, मुझे ज्यादा बातें करना पसंद नहीं है। क्यों ना तुम्हें सब कुछ तुम्हारी आंखों के सामने दिखाया जाए?” बोलते हुए रिदांश ने आरोही को अपनी गोद से उठाया और फिर उठकर टीवी स्क्रीन को ऑन किया।
टीवी पर आ रही न्यूज़ को देखकर आरोही की आंखों में आंसू थे। न्यूज एंकर न्यूज़ पढ़ रहा था और साइड में उसकी छोटी सी फोटो दी हुई थी।
“ये है 22 साल की आरोही श्रीवास्तव, जिसकी कल कोलकाता की हुगली नदी के किनारे लाश मिली है। लाश को देखकर पता चल रहा है कि उनकी मौत को लगभग एक हफ्ता बीत चुका है। चेहरा पूरी तरह खराब हो चुका है लेकिन सामान और उनके पास मिली कुछ चीजों से उनका पहचान की गई है और इस वक्त पुलिस आगे की जानकारी हासिल करने में जुटी हुई है।”
आरोही ने देखा न्यूज़ एंकर पुलिस स्टेशन के आगे खड़ा था, जहां पुलिस के साथ उसे अपने मां-बाप और काजल रोते हुए दिखाई दिए।
रिदांश ने टीवी ऑफ करते हुए कहा, “तुम्हारे लिए इतना देखना काफी है। तुम इस दुनिया के लिए मर चुकी हो आरोही श्रीवास्तव, तो आगे गलती से भी किसी को कांटेक्ट करने की कोशिश मत करना वरना लोग तुम्हें ही गलत समझेंगे। गलत नही... भूत समझेंगे।” रिदांश की बातों से जाहिर था उसे आरोही के आंसुओं से कोई फर्क नही पड़ रहा था।
रिदांश ने आरोही को जीते जी मार दिया था। दुनिया की नजरों में अब वो मृत साबित हो चुकी थी। आरोही बिना कुछ बोले रोए जा रही थी तभी रिदांश ने उसके आंसू अपनी उंगली पर लेकर कहा, “तुम रो क्यों रही हो? ये सब तुमने ही तो लिखा है मिस राइटर। तुम्हें तो पता होना चाहिए था तुम्हारे साथ क्या होने वाला है। वैसे मानना पड़ेगा तुमने कमाल की बुक लिखी है।” बोलते हुए रिदांश हंसने लगा। वो आरोही का मजाक उड़ा रहा था।
आरोही गुस्से में जोर से चिल्ला कर बोली, “मेरे हर एक आंसू का हिसाब होगा रिदांश ठाकुर। जितने आंसू आज मैं बहा रही हूं उससे कहीं ज्यादा तुम बहाओगे। मुझे किडनैप करके अपने साथ रखने की सजा तुम्हें भी भुगतनी होगी।”
आरोही की बातें सुनकर रिदांश के चेहरे के भाव सर्द हो गए। वो आरोही की आंखों में देखते हुए कोल्ड वॉइस में बोला, “इसका मतलब तुम ये एक्सेप्ट करती हो कि तुम्हें मेरे किसी दुश्मन ने भेजा है और मैंने तुम्हें यहां रख लिया तो वो तुम्हारे जरिए मुझे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।” रिदांश आरोही के बिल्कुल करीब आ गया था और उसने उसके बालों को कस के मुट्ठी में पकड़ रखा था।
आरोही दर्द से चिल्लाते हुए बोली, “मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है तो मेरी बातों का दूसरा मतलब मत निकालो रिदांश ठाकुर।”
“फिलहाल तो तुम्हारी बातों और बाकी चीजों में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है। जिस काम के लिए तुम यहां हो, वो जल्दी से खत्म करो। तुम्हें बेवजह जिंदा रखने में मुझे बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं है।” रिदांश ने चिल्ला कर जवाब दिया। उसने आरोही की बाजू पड़ी और उसे खींचते हुए वापस कमरे में लेकर आ रहा था।
रिदांश जिस तरह से आरोही को रूम में खींच रहा था वो समझ गई थी कि वो क्या करने वाला है। आरोही ने चिल्लाकर कहा, “नहीं, प्लीज इतनी जल्दी नहीं... मैं तैयार नहीं हूं। मुझसे नहीं होगा।”
“नहीं होगा तो तुम्हारी प्रॉब्लम है, मेरी नहीं।” बोलते हुए रिदांश आरोही को बेड पर धकेल दिया और अगली ही पल वो उसके ऊपर था।
इस बार रिदांश ने प्यार से पेश आने के बजाय सीधे आरोही के साथ बिना कोई सॉफ्टनेस दिखाते हुए उसके साथ शुरू हो गया था। आरोही की चीखें एक बार फिर से कमरे में गूंज रही थी और बाहर काम करने वाले हाउस हेल्पर को बिल्कुल साफ सुनाई दे रही थी।
आरोही के चीखने चिल्लाने की की आवाज सुनकर एक हाउस हेल्पर ने दूसरे से कहा, “मुझे तो दया आ रही है बेचारी बच्ची पर। वो उम्र में ज्यादा बड़ी नहीं लगती है। सर को उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर उसे कुछ हो गया तो...”
“तो इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तुमने आज की न्यूज़ नहीं देखी क्या? उस लड़की के मरने की खबर आ रखी है। वो रिदांश ठाकुर है, हर चीज के लिए पहले से तैयार रहता है।” दूसरे ने जवाब दिया और फिर चुपचाप अपना काम करने लगा।
रिदांश का पूरा ध्यान फिलहाल अपनी प्रॉपर्टी को पाने में था तो वहीं दूसरी तरफ उसने आरोही की फोटो जिस किसी को भी भेजी थी वो उसे देखकर हैरान थे। खास कर उसका सबसे बड़ा दुश्मन निकोलस जोनस।
निकोलस जोनस रिदांश की ही उम्र का था। गोरा रंग, लंबी हाइट, गहरी नीली आंखें और शार्प जॉलाइन। दिखने में बिल्कुल किसी मॉडल की तरह दिखता था।
इस वक्त निकोलस लंदन में अपने विला पर था और एक लड़की उसे मसाज दे रही थी।
उसके पास भी आरोही की फोटो पहुंची थी। आरोही की फोटो देखने के बाद निकोलस ने सिर हिला कर कहा, “मेरे पास इतना फ्री टाइम नहीं है, जो मैं उस शख्स पर बर्बाद करूं, जो कुछ दिनों में वैसे भी लुटने वाला है। उसका भाई विविध ठाकुर अपनी प्रॉपर्टी मुझे बेचने के लिए तैयार है, तो मैं क्यों खामखा इसके पास किसी लड़की या एजेंट को भेजूंगा।”
फिर निकोलस की नजरे आरोही पर ठहर गई थी, जो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी। निकोलस ने उसे देखकर गहरी सांस लेकर छोड़ी और इविल स्माइल करते हुए कहा, “वैसे मानना पड़ेगा काफी खूबसूरत है। रिदांश ठाकुर की तो लॉटरी लग गई होगी या फिर वो इस लड़की को भी टॉर्चर करने में अपना टाइम वेस्ट कर रहा है।”
निकोलस ने उसी वक्त अपने मैनेजर को कॉल लगाया और उसे कॉल पर कहा, “जेनेलिया, रिदांश ठाकुर के पास ये खबर पहुंचा दो कि उस लड़की को मैंने ही उसके पास भेजा है। मुझे वो लड़की अपने पास चाहिए, अगले 24 घंटे में।”
आरोही को पाने की चाह में निकोलस ने रिदांश के पास ये न्यूज़ पहुंचा दी थी कि आरोही को उसी ने भेजा है। हालांकि ये बात पूरी तरह झूठ थी पर फिर भी अब उसे आरोही अपने पास चाहिए थी।
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