A cruel fairytale - Chapter 19
A Cruel Fairytaleआरोही को पीरियड्स आ गए थे। इससे एक बात तो साफ़ थी कि रिदांश की इतनी कोशिशें के बावजूद वो प्रेग्नेंट नहीं हो पाई थी। रिदांश ने ऑनलाइन अपने डॉक्टर से कंसल्ट किया तो उसने उसे मेंस्ट्रुअल टाइम में आरोही के साथ रिलेशन बनाने को कहा। रिदांश ऐसे में उसके साथ जबरदस्ती नहीं करना चाहता था तो पहली बार उसने आरोही का कॉन्सेट लिया और उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाएं।
आज रिदांश आरोही के पास में भी नहीं सोया था। आरोही उससे अलग दूसरे रूम में सो रही थी जबकि रिदांश अपने ही रूम के काउच पर लेटा हुआ था।
रिदांश की नजर ऊपर सीलिंग पर थी लेकिन उसके दिमाग में काफी कुछ चल रहा था। उसने मन ही मन कहा, “मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है... और मैं अपनी फैमिली को अच्छे से जानता हूं। अगर मिस राइटर प्रेग्नेंट नहीं हुई तो मैं चांस नहीं ले सकता। ऐसे में मुझे किसी और को ढूंढना होगा या फिर सब कुछ आर्टिफिशियली करना होगा।”
अपनी उधेड़बुन में खोए हुए रिदांश को नींद आ चुकी थी। वही जब अगली सुबह आरोही की आंख खुली तो एक हाउस हेल्पर उसके पास खड़ी थी। उसके पास आरोही की जरूरत का सारा सामान था और साथ में ब्रेकफास्ट भी।
आरोही के उठते ही वो धीरे से बोली, “गुड मॉर्निंग मैम। सर ने मुझे आपका पूरा ख्याल रखने के लिए कहा है और साथ ही उन्होंने ये भी बोला है कि उन्हें आज रात के लिए कोई ड्रामा नहीं चाहिए।” इतना बोलकर वो चुप हो गई।
आरोही को रिदांश पर बहुत गुस्सा आ रहा था। एक तो उसने इतनी पर्सनल बात कही थी, वो भी खुद कहने की बजाय उसने मेड को भेजा था। उसने एक नजर उसकी तरफ देखा और फिर गुस्से में बोली, “जाकर बोल दो अपने सर को, मुझे किसी की जरूरत नहीं है। ये सारा सामान भी यहां से हटा दो। मैं अपनी केयर खुद से कर सकती हूं।”
आरोही उठकर बाथरूम में चली गई। थोड़ी देर बाद वो तैयार होकर वापस आ चुकी थी। यहां आरोही के पास करने को कुछ नहीं था। ना टाइम पास के लिए मोबाइल था और ना ही उसके रूम में कोई टीवी लगा हुआ था। फिर आरोही की नजर एक डायरी पर गई।
“मैं एक राइटर हूं... नहीं जानती कि मैं जिंदा हूं या मर गई लेकिन ये एक्सपीरियंस मैं लिख सकती हूं।” आरोही ने खुद से कहा और डायरी पर उठाकर उसमें एक कहानी लिखने लगी। एक ऐसी कहानी, जो इस बार सच में हो रही थी।
कुछ ही देर में आरोही थक गई थी और वो सोने जा चुकी थी। दोपहर में लंच के वक्त रिदांश कमरे में आया तो उसने बेडसाइड के पास में पड़ी डायरी को देखा। उसे देखकर रिदांश ने क्यूरियोसिटी से उसे उठा लिया।
रिदांश डायरी लिखकर अपने कमरे में आया और उसे पढ़ने लगा।
डायरी में ऊपर कहानी को एक टाइटल भी दिया हुआ था। रिदांश उसे पढ़ते हुए बोला, “अ क्रुएल फेयरीटेल।” उसे पढ़ कर रिदांश के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट थी और वो खुद से बोला, “मतलब इतना सब कुछ होने के बावजूद भी इस लड़की को यही लगता है कि ये किसी नॉवल में फंस गई है। कहीं मैंने इसे चुनकर कोई गलती तो नहीं की। इसकी वजह से मेरे होने वाले बच्चे की मेंटल हेल्थ खराब हुई तो?”
रिदांश ने इसे जस्ट एक थिंकिंग समझ कर जाने दिया और फिर डायरी पढ़ने लगा। डायरी में आरोही की प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला हिस्सा और फिर उसके एक्सीडेंट की बात लिखी हुई थी। उस कांफ्रेंस के दौरान आरोही से जो भी सवाल पूछे गए थे, उसने उसे डायरी में लिखे थे। आरोही ने उसे किसी कहानी के पार्ट की तरह लिखा था, जिसकी लीड हीरोइन वो खुद थी।
उसे पढ़ने के बाद रिदांश ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और कहा, “बड़ी अजीब बात है। कोई राइटर ऐसी कहानी क्यों लिखेगा, जिसके बाद इतनी कंट्रोवर्सी हो जाएगी और इतना बेवकूफ राइटर कोई कैसे हो सकता है कि अपने साथ ही टार्चर सीन लिखे। अच्छा हुआ जो उसका एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई।” रिदांश ने सिर हिला कर कहा। उस डायरी मे आरोही ने अपने एक्सीडेंट तक की ही कहानी लिखी गई थी। रिदांश ने उसे बंद किया और उस पर ज्यादा गौर भी नही किया।
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आरोही को रिदांश के घर पर आए हुए लगभग डेढ़ महीने से भी ज्यादा का वक्त हो चुका था। रिदांश के इतनी मेहनत करने के बावजूद भी आरोही प्रेग्नेंट नहीं हुई थी।
रिदांश भी इन सब में थोड़ा केयरलैस था क्योंकि उसके पास अभी थोड़ा टाइम था। दोपहर के वक्त आरोही को घर पर छोड़कर रिदांश एक मीटिंग पर आया हुआ था, तभी उसके पास उसकी मॉम निधि ठाकुर का कॉल आया।
निधि उसे बेवजह फोन नहीं करती थी, ये सोचकर रिदांश ने कॉल रिसीव किया। उसके कॉल रिसीव करते ही निधि ने लगभग चिल्लाते हुए कहा, “तुम कर क्या रहे हो रिदांश? अब तक एलए क्यों नहीं आए हो? इतने वक्त से इंडिया में हो, यहां तुम्हारी दुनिया लुटने वाली है और तुम हो कि वहां आराम से अपने बिजनेस संभालने में लगे हुए हो।”
“क्या हुआ मॉम? आप इतना ओवर रिएक्ट क्यों कर रही है और मेरी दुनिया लुटने में अभी टाइम है।” रिदांश ने सिर हिला कर कहा।
“बेटा जी, टाइम निकल चुका है क्योंकि अगले 15 दिन में विविध की सगाई नहीं शादी होने वाली है। डैडी जी की विल के हिसाब से ज्यादा प्रॉपर्टी पहले बच्चे को मिलने वाली है। अब सोच लो कि तुम्हें क्या करना है क्योंकि मुझे नहीं लगता कि 15 दिन में तुम बच्चा पैदा कर पाओगे। किसी लड़की को ढूंढो और शादी करो। बाकी काम हमारा डॉक्टर अपने आप देख लेगा।” निधि ने रिदांश पर प्रेशर बनाते हुए कहा।
रिदांश ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कॉल कट कर दिया। उसके कॉल कट करते ही निधि ने तुरंत उसके लिए मैसेज छोड़ा, जिसमे एक हफ्ते बाद से विविध की शादी की रस्में शुरू होने वाली थी और उसके लिए रिदांश को वहां जाना जरूरी था।
रिदांश गुस्से में जोर से चिल्लाया। उसने तुरंत अपने डॉक्टर को कॉल किया और कहा, “क्या कर रहे हो तुम डॉक्टर? तुमने कहा था उस लड़की के सारे रिपोर्ट्स नॉर्मल है पर अब तक वो प्रेग्नेंट क्यों नहीं हो पाई है? और तुम मुझ में भी कमी नहीं निकाल सकते क्योंकि मेरे सारे मेडिकल टेस्ट क्लियर है। अब तुम बताओगे कि वो लड़की अब तक प्रेग्नेंट क्यों नहीं हुई है।”
“मैंने आपको पहले ही कहा था सब नेचुरल रखेंगे तो थोड़ा टाइम लग सकता है। हम चाहे तो इस प्रक्रिया को अभी आर्टिफिशियल कर सकते हैं। हां एक डेढ़ महीने का टाइम और...” डॉक्टर बोल रहा था तभी रिदांश ने उसके बाद बीच में काटते हुए जोर से चिल्लाकर कहा, “टाइम ही तो नहीं है मेरे पास। अगर वो नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंट नहीं हो पाई है तो आगे क्या खाक कुछ करेगी? तुम किसी और लड़की को ढूंढो और उसके साथ क्या करना है मैं अच्छे से जानता हूं।”
डॉक्टर से बात करने के बाद रिदांश ने कॉल कट कर दिया। पिछले डेढ़ महीने में आरोही और रिदांश के बीच कुछ नहीं बदला था। उनके बीच सिर्फ एक ही रिश्ता था और वो था फिजिकल रिलेशन। इसके अलावा ना तो रिदांश आरोही को पसंद करता था तो उसकी हरकतों के बाद आरोही उसे पसंद करेंगी, ये तो सवाल ही पैदा नहीं होता था।
रिदांश अपनी गाड़ी में बैठा और तुरंत घर जाने के लिए निकल गया। घर के अंदर एंटर होते हुए उसके हाथ में एक गन थी और वो मन ही मन बोला, “योर टाइम इज ओवर मिस राइटर... तुमने डेढ़ महीने में सिर्फ एक ही काम किया है और वो है मेरी फिजिकल नीड्स को पूरा करना। इसके अलावा यू आर गुड फॉर नथिंग और रिदांश ठाकुर कभी यूजलेस चीजों को अपने पास नहीं रखता।”
रिदांश इस वक्त आरोही को जान से करने के लिए उसकी तरफ बढ़ रहा था और उसके चेहरे पर अफसोस का एक छोटा सा भाव भी नहीं था।
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