A cruel fairytale - Chapter 9
A Cruel Fairytaleकल की रात आरोही के लिए बहुत भारी थी। रिदांश ने उसके साथ वो सब कुछ कर लिया था, जो वो होश में होते हुए उसे कभी नहीं करने देती। अगली सुबह रिदांश उसे किसी स्पेशल जगह ले जाने के बारे में बोल रहा था।
आरोही को अपनी किस्मत पर अफसोस हो रहा था। वो जानती थी रिदांश उसके साथ कोई नया टॉर्चर करने वाला है और बदकिस्मती से वो उस टॉर्चर होने का इंतजार कर रही थी। लगभग आधे घंटे बाद रिदांश बाथरूम से बाहर निकला। उसने नेवी ब्लू कलर का सूट पहना हुआ था। उसने आरोही की तरफ देखा, जो अभी भी वहीं पर खड़ी थी और उसने रिदांश की शर्ट पहन रखी थी।
आरोही को उस हाल में देखकर रिदांश ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा तो इंतजार किया जा रहा है मेरे लौटने का... यकीन मानो स्वीटहार्ट, तुम्हारे इंतजार को वेस्ट नहीं होने दूंगा।” बोलते हुए रिदांश आरोही के पास आया और उसकी बाजू को पकड़ लिया। आरोही को लगा कि वो उसे कपड़े लाकर देगा या तैयार होने का टाइम देगा लेकिन रिदांश ऐसे ही उसकी बाजू पकड़ कर उसे घसीटते हुए बाहर लेकर जा रहा था।
ऐसा नहीं था कि पहले आरोही ने शॉर्ट ड्रेस ना पहनी हो लेकिन इस वक्त उसे बहुत एंबरिशमेंट फील हो रहा था, जब रुद्राक्ष उसे जबरदस्ती खींचते हुए बाहर ला रहा था। शायद आरोही भी कहीं ना कहीं अपने कैरेक्टर को महसूस करने लगी थी, जो इंडियन ड्रेस पहनने वाली एक सीधी साधी लड़की थी।
रिदांश आरोही को पकड़कर बाहर सबके सामने लेकर आया। उसने क्लैप किया तो सभी गार्ड्स और वहां काम करने वाले इर्द-गिर्द इकट्ठा हो गए थे। आरोही की नज़रें नीची थी। इस वक्त उसकी हालत ठीक नहीं थी। बाल बिखरे हुए थे। चेहरे और गर्दन, यहां तक कि पैर का जो हिस्सा विजुअल था, वहां पर भी रिदांश के लव बाइट के निशान बने हुए थे।
सब उसकी तरफ अजीब नजरों से देख रहे थे। आरोही ने नज़रें उठाकर लाचारी से रिदांश की तरफ देखा। उसने धीरे से कहा, “प्लीज बंद करो ये तमाशा।”
“हो जाएगा बंद, बस बता दो कि किसने भेजा है तुम्हें यहां पर।” रिदांश ने आरोही की आंखों में देखते हुए कहा।
अचानक आरोही वहां फूट-फूट कर रोने लगी। रिदांश का बर्ताव देखकर वो समझ गई थी कि वो नहीं रुकने वाला है।
रिदांश ने सबके सामने आरोही की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने पास खींचा और सख्त आवाज में कहा, “तुम्हारे इन आंसूओ का मेरे ऊपर कोई असर नहीं होने वाला है मिस राइटर। अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं और तुम्हें शर्म आ रही है।”
“मुझे किसी ने नहीं भेजा है। मेरा यकीन करो मैं खुद यहां आकर फंस गई हूं। अगर मुझे किसी ने भेजा होता तो अब तक तुम्हें उसका नाम बता चुकी होती, ना कि यहां खड़ी होकर इन लोगों की जिल्लत भरी नजरों को झेल रही होती।”
आरोही ने अपनी नजरें फिर से झुका ली थी। उसके पास जवाब में कुछ नहीं था तो रिदांश ने आरोही के बालों को अपने मुट्ठी में भरा और उसका चेहरा अपनी तरफ करके सर्द आवाज में कहा, “लगता है मेरी गलती ही है जो तुम्हें लड़की समझ कर तुम पर कोई टॉर्चर नहीं किया, वरना 2 मिनट में तुम सारा सच उगल देती। तुम्हें देखकर साफ पता चल रहा है कि तुम एक थप्पड़ तक नहीं झेल पाओगी, बाकी का टॉर्चर तो दूर की बात है।”
इस बार आरोही को भी उसकी बातें सुनकर गुस्सा आ गया। वो रिदांश की तरफ देखकर नम आंखों से लेकिन सख्त आवाज में बोली, “इतना सब कुछ किया, वो कम था क्या जो तुम और भी कुछ करना चाहते हो। तुमने मेरे साथ जबरदस्ती की है रिदांश ठाकुर। तुम्हें कोई एहसास भी है इस बात का? ये सब करने के बाद अब तुम कुछ भी कर लो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तुमने मेरी आत्मा को मार दिया है।”
“तो चलो तुम्हारे इस बचे हुए इस शरीर का भी अंतिम संस्कार कर दिया जाए और आरोही श्रीवास्तव।” रिदांश ने गुस्से में जवाब दिया और उसके बालों से पकड़कर उसे खींचते हुए अंदर ले गया।
बाहर खड़े लोगों को अब कहीं ना कहीं आरोही पर दया आ रही थी। उनमें से एक आदमी बोला, “ये लड़की आखिर बता क्यों नहीं देती कि इसे किसने भेजा है? दिखने में भले ही नाजुक सी हो लेकिन मानना पड़ेगा काफी सख्त दिल है।”
“हां तो इसकी मासूमियत पर जा ही क्यों रहे हो? किसी दुश्मन ने भेजा है तो दिखने में अच्छी लड़की को ही चुनेगा ना और मेरी बात लिख कर ले लेना, ये लड़की ये रोने धोने का दिखावा कर रही है। पता नहीं किसने यहां जासूसी के लिए भेजा है? ये हिमाकत जिसने भी की है, वो आज नहीं तो कल पकड़ा ही जाएगा। फिर ये लड़की और उसका बॉस दोनों रिदांश ठाकुर के हाथों बहुत बुरी मौत मरने वाले हैं।” उसके पास खड़े दूसरे आदमी ने जवाब दिया।
वहां खड़े लोग आपस में बातें कर ही रहे थे कि उन्हें अंदर से आरोही के जोर से रोने चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। अंदर रिदांश ने अपना बेल्ट निकाल रखा था और वो बेरहमी से आरोही को मार रहा था।
रिदांश ने अपना हाथ दो से तीन बार ही उठाया था कि उसने देखा आरोही की स्किन इतनी सॉफ्ट थी कि बेल्ट का निशान जहां पड़ा था, वो तुरंत लाल हो गया। उसने बेल्ट नीचे फेंक दिया और फिर आरोही के पास आकर उसका गला पकड़ कर कहा, “तुम्हारे इस नाजुक शरीर को चोट पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। पहले ही बता दो इससे पहले कि तुम्हारी चमड़ी तुम्हारे शरीर से अलग हो जाए।”
रिदांश ने जब आरोही को छुआ तो उसने महसूस किया डर से उसे बुखार हो गया था। वो आगे कुछ कहता उससे पहले आरोही का सिर उसके कंधे पर था और वो बेहोश हो चुकी थी।
रिदांश को इस वक्त आरोही पर इतना गुस्सा आ रहा था कि वो गुस्से में गहरी सांसें ले रहा था और उसने आरोही को नीचे पटका और उसकी फोटो क्लिक की।
रिदांश ने आरोही के चेहरे की तरफ देखकर कहा, “आखिर ये लड़की बता क्यों नहीं देती कि इसे किसने भेजा है? क्यों बेवजह का टॉर्चर झेल रही है, जबकि ठीक से मैंने इस पर हाथ भी नहीं उठाया और इसकी डर के मारे ये हालत हो गई कि कांप रही है। पहली बार मुझे किसी के लिए बुरा क्यों लग रहा है जबकि इसे मेरे दुश्मन ने भेजा है। खैर, ये कुछ उगले या ना उगले लेकिन जिसने इसे भेजा है, उसे तो बाहर आना ही होगा।”
उसने फिर आरोही को अपनी गोद में उठाया और कमरे में ले जाने लगा। रिदांश ने भी कहां सोचा था कि जिस आरोही को थोड़ी देर पहले उसी ने दर्द दिया है वहीं अब उसके दर्द पर मलहम लगा रहा था।
वो रिदांश ठाकुर था, जिसे आरोही ने खुद बनाया था। दया नाम की कोई चीज नहीं थी उसके दिल में। वो आरोही के चोट पर ऑइंटमेंट जरूर लग रहा था पर ये साथ ही ये भी प्लान कर रहा था कि जल्द से जल्द आरोही से कैसे सच्चाई उगलवाए।
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नॉवेल के कुछ सीन हार्ड हो सकते हैं। देखा जाए तो ये भी एक नॉवेल ही है, जिसे मैंने नहीं आरोही ने लिखा है😂
जोक्स अपार्ट, कहानी की डिमांड की वजह से ऐसे सीन लिखे हैं। बाकी जो इंसान इतनी शिद्दत से गुस्सा निकाल रहा है सोचो उसका प्यार कितना शिद्दत वाला होगा पर उसके लिए थोड़ा वेट करना होगा।