Under the mafia moon - Chapter 10
Under the mafia moonहरलीन से बात करने के बाद युग सोने जा चुका था। अगली सुबह सारा की आंख खुली तो वो मूवी थिएटर में अकेली थी उसने आसपास देखा तो उसके अलावा वहां कोई नहीं था।
युग की उसे कोई फिक्र नहीं थी पर कृशा को अपने पास न देखकर सारा घबरा गई।
“कृशा कहा गई? कही मेरी एब्सेंस में युग ने उसे मार तो नही दिया?” सारा ने घबराई आवाज कहा और जल्दी से उठकर बाहर गई।
बाहर सिक्योरिटी गार्ड्स हमेशा की तरह अलर्ट पोजिशन पर थे। उन्हें देखकर सारा ने सिर हिलाकर कहा, “ये तो इस तरह सिक्योरिटी में रहता है जैसे किसी देश का पीएम हो।”
खुद से बात करते हुए सारा लिफ्ट की तरफ बढ़ी। सारा अपने रूम में पहुंची तो कृशा सोई हुई थी। उसे सही सलामत देखकर सारा ने राहत की सांस ली।
सारा कृशा के पास गई और उसे कसकर हग कर लिया। “थैंक गॉड तुम ठीक हो वरना मैं अमु का सामना कभी नहीं कर पाती।”
सारा की आवाज से कृशा की नींद टूटी। वो आंख बन्द किए हुए ही बोली, “मुझे भी अमु की बहुत याद आ रही है। हम यहां से नहीं निकल पाए तो क्या होगा सारा?”
कृशा की बातों से सारा के चेहरे पर परेशानी के भाव थे। “तुम ओवरथिंकिंग कर रही हो कृशा... चलो उठो।” सारा उसको उठाने लगी।
कृशा उठी तो सारा ने देखा उसकी आंखें लाल थी। सारा ने कृशा के दोनो कंधो को पकड़कर पूछा, “क्या हुआ? तुम रो रही थी?”
“हां... क्योंकि मुझे घर जाना है सारा। मुझे डर लगता है उससे।” बोलते हुए कृशा सारा के गले लग गई।
“फिर तुम ऐसा करना कि कमरे से बाहर मत निकलना। मैं सब देख लूंगी।” सारा ने उसे सहला कर कहा।
कृशा ने उसकी बात पर हामी भर दी और उससे अलग हो गई। कुछ देर बाद सारा और कृशा दोनों ही नहा कर तैयार हो चुकी थी सारा ने उन दोनों का ब्रेकफास्ट रूम में ही मंगवाया था लेकिन मैन मेड सिर्फ कृशा के ब्रेकफास्ट के साथ ही पहुंची थी।
“ मैंने तुमसे कहा था कि मुझे मेरा ब्रेकफास्ट भी रूम में हीं चाहिए।” सारा उसे अपनी ग्रे आइज से घूरते हुए बोली।
उसकी बात सुनकर मेड ने नज़रे नीचे करके जवाब में कहा, “सर ने आपको नीचे बुलाया है।”
सारा ने उसे इशारे से वहां से जाने को कहा। मेड के जाते ही वो कृशा से बोली, “मैं आती हूं।”
सारा वहां से जाने को हुई तभी उसके पीछे से कृशा ने तेज आवाज में कहा, “संभालकर सारा, वो तुमसे प्यार नहीं करता... जानती हो ना उसे क्या चाहिए।”
“और उसे जो चाहिए, वो उसे कभी नही मिलेगा।” सारा ने बिना मुड़े कहा और वहां से चली गई।
कृशा ब्रेकफास्ट करने में बिजी थी तो वही सारा युग के साथ डाइनिंग एरिया में थी। दोनो चुपचाप ब्रेकफास्ट कर थे।
युग को शांत देखकर सारा को भी हैरानी हो रही थी क्योंकि पिछले दो दिनों से वो उसे इंप्रेस करने के लिए कुछ ना कुछ किए जा रहा था जबकि अब उसका चेहरा बिल्कुल शांत था।
उन दोनों के बीच एक अजीब चुप्पी छाई हुई थी। उस चुप्पी को तोड़ते हुए सारा ने पूछा “तो क्या सोचा है तुमने?”
“किस बारे में?” युग ने सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखकर पूछा।
“उस चीज के बारे में जिसके लिए तुमने हम दोनों को किडनैप किया है। तुम्हें उन सातों पड़ावों को पार करना है। तुम कृशा को छोड़ दो तो शायद मैं तुम्हारी हेल्प कर सकती हूं। वो इनोसेंट है। उसको इन सब में ट्रेप मत करो।” सारा ने कहा। कृशा को डरा हुआ देखकर उसने ये डिसीजन लिया था।
“हर चीज वक्त के साथ हो तभी अच्छी लगती है सारा सिंघानिया। मैंने कहा ना पहले मैं तुम्हें 10 दिन का टाइम दूंगा, जिसमें से 2 दिन बीत चुके हैं। बचे 8 दिन। इन आठ दिनों में खुद को मुझसे शादी करने के लिए तैयार कर लो। प्यार से करोगी तो अच्छी बात है वरना मैं जबर्दस्ती करने से भी पीछे नहीं हटूंगा।” युग ने सख्त आवाज में कहा।
उसकी बात सुनकर सारा के चेहरे पर तंज भरी मुस्कराहट थी। उसने उसी लहजे में जवाब देते हुए कहा, “मुझे कोई हैरानी नहीं होगी अगर तुम ऐसा करोगे भी... तुमसे और कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। पहले जबरदस्ती हमें यहां किडनैप करके ले आए और अब शादी की बात कर रहे हो।”
“इतना मासूम मत बनो। जबरदस्ती जैसा शब्द तुम्हारे मुंह से अच्छा नहीं लगता। तुम कृशा नहीं हो सारा सिंघानिया, जो मासूम बनने का दिखावा कर रही हो... या इतनी इनोसेंट हो कि तुमने कभी अपनी जिंदगी में किसी का मर्डर होते तक नहीं देखा।” युग ने कहा।
“चलो तुमने माना तो सही कृशा इनोसेंट है। उसे जाने दो युग।” सारा बोली। वो शांति से बात कर रही थी ताकि वो सारा को जाने दे।
“ठीक है जाने दूंगा... प्रॉमिस करता हूं उसे कुछ नहीं करूंगा। माफिया वर्ल्ड से बिलॉन्ग करती हो तो डेविल के वादे के बारे में सुना ही होगा। मैं कितना भी बुरा हुं लेकिन कभी किसी को धोखा नहीं देता... और मेरा वादा वो पत्थर की लकीर होती है।” युग ने सख्त शब्दों में कहा।
सारा ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया। वो दोनों पहली बार जरूर इस विला में मिले थे पर सारा पहले से उसके बारे में काफी कुछ जानती थी और उनमें से एक था, डेविल का वादा, जो वो कभी नहीं तोड़ता था।
“ठीक है। फिर बताओ मुझे क्या करना होगा? मैं तैयार हूं।” सारा ने कहा।
सारा के सब कुछ करने पर तैयार होने पर युग के चेहरे पर एविल स्माइल थी। कुछ भी कहने से पहले उसने सारा से एक बार फिर पूछा, “अच्छे से सोच लो सारा सिंघानिया। युग राणा धोखा देने वालों को माफ नहीं करता। तुमने कुछ करने का सोचा है तो तुम्हें वो करना होगा जो मैं कहूं। जैसे मैं कहूं।”
उसे हां कहने से पहले सारा ने आंखें बंद करके एक बार फिर सोचा तो उसकी आंखों के सामने कृशा का मासूम चेहरा आ रहा था। फिर उसने अमृता के बारे में सोचा जिसने कभी उन दोनों में फर्क नहीं किया। उसे भी उतना ही प्यार किया जितना वो कृशा से करती थी।
युग को हां कहना अंधेरे कुएं में कूदने जैसा था फिर भी सारा ने आंखें खोली और हां में सिर हिलाया। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर कहा, “ठीक है मैं तुम्हारी हर बात मानने के लिए तैयार हूं। जैसे तुम कहो जिस हिसाब से तुम कहो... लेकिन तुम कृशा को सही सलामत सिंघानिया मेंशन पहुंचाओगे।”
“ठीक है लेकिन एक हफ्ते बाद। मैं उसे कुछ नहीं करूंगा, ना ही कुछ कहूंगा। इन फैक्ट उसे प्रिंसेस वाला ट्रीटमेंट दूंगा... पर एक हफ्ते उसे यहां रहना ही होगा।” युग ने अपना हाथ सारा के हाथ पर रखकर वादा किया।
“और इस एक हफ्ते रुकने का कारण?” सारा ने हैरानी से पूछा। “कहीं तुम मुझे धोखा तो नही देने का सोच रहे?”
“नहीं। मुझे धोखे वाले शब्द से सख्त चिढ है। इसलिए मैं ऐसा नहीं करूंगा। रही बात एक हफ्ते रुकने की तो एक बात साफ है वो वापस जाकर वहां सब कुछ बताएगी। उसे भी पता चलना चाहिए युग राणा की होने वाली वाइफ सारा सिंघानिया को कितने अच्छे से यहां पर रखा गया है।” युग ने इविल स्माइल करते हुए कहा।
सारा ने इस बारे में ज्यादा सोचा नहीं और उसने हां कह दी। उसे किसी और बात पर यकीन हो या ना हो लेकिन एक बात पर उसे पुरा विश्वास था युग कृशा को अब कुछ नहीं करेगा।
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क्या सच में युग ने कृशा को एक हफ्ता यही सोचकर रोका है या कुछ और बात है। अब डेविल है तो इतना सीधा साधा तो होने से रहा। पर हां वादा किया है तो कृशा को कुछ नहीं करेगा। कहानी कौन सा दिलचस्प मोड़ लेती है इसके लिए बने रहे मेरे साथ। मिलते हैं अगले पार्ट पर।