Under the mafia moon - Chapter 20
Under the mafia moonकृशा के इग्नोर करने पर युग सारा पर गुस्सा होकर चला गया। वही सारा भी युग के बर्ताव से चिढ़ कर ऊपर कृशा के पास जाने लगी।
सारा जाते हुए खुद से बड़बड़ा कर बात कर रही थी। “व्हॉट द हेल... समझता क्या है वो खुद को? वो डेविल है तो मैं भी कोई आम इंसान नही हूं। आने दो रात को मेरे पास... उसे भी तो पता चले सारा सिंघानिया से रूडली बात करने का क्या नतीजा होता है।”
सारा का ध्यान अपने में ही था तभी वो सामने से आ रहे शब्द से टकरा गई। सारा का सिर शब्द की चेस्ट से टकरा गया।
सारा ने अपना सिर रगड़ते हुए कहा, “दिखता नहीं...” सारा बोलते हुए रुक गई क्योंकि सामने शब्द था। “आई एम सो सॉरी... वो मेरा... तुम्हे लगी तो नही ना...”
“नही, मैं ठीक हूं.. पर तुम ठीक नहीं लग रही।” शब्द ने मुस्कुरा कर कहा।
उसके चेहरे की स्माइल देखकर सारा के फेस पर भी एक छोटी सी स्माइल आ गई। “मैं थोड़ा अपसेट थी और कुछ नही।”
“युग की वजह से ना?” शब्द ने पूछा।
“हां और कौन हो सकता है।” सारा ने आईज रोल करते हुए कहा। फिर उसने बात बदलते हुए कहा, “खैर उसके बारे में बात करके मूड खराब नही करते है। मैं कृशा के रूम में जा रही हूं। तुम चलोगे?”
“मैं वही से आ रहा हूं। कृशा सो रही है।” शब्द ने बताया।
कुछ पल के लिए सारा कुछ नहीं बोली। उसने इधर-उधर देखा तो वहां उन दोनों और सिक्योरिटी गार्ड्स के अलावा इर्द गिर्द कोई नजर नहीं आया। चारों तरफ बिल्कुल शांति छाई हुई थी। ये देखकर सारा का चेहरा उतर गया।
शब्द ने अचानक सारा के चेहरे के बदले हुए एक्सप्रेशंस को देखा तो उससे पूछा, “क्या हुआ? इस 5 मिनट में ये तीसरी बार है जब तुम्हारे चेहरे के एक्सप्रेशंस बदले हैं। मैं टकराया था तब गुस्सा थी, मुझे देखकर मूड काम डाउन हो गया और अब अचानक उदास हो गई। चलो बताओ क्या हुआ है?”
सारा ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और उसकी बात का जवाब देते हुए कहा, “इतनी सिक्योरिटी हमारे मेंशन में भी रहती है पर वहां एक अजीब सी शांति नहीं रहती, जो यहां पर छाई हुई है। ये जगह मुझे लाइफ़लेस लगती है।”
“वो इसलिए क्योंकि ये जगह है लाइफ़लेस। यहां युग के अलावा उसके आदमी होते हैं और तुम्हें पता है वो कैसे काम करते हैं। मैं ये तो नहीं कहूंगा कि तुम इसकी आदत डाल दो पर जब तक यहां हो मैं कोशिश करूंगा तुम्हारा मूड अपसेट ना हो।” शब्द ने काफी फ्रेंडली वे में कहा, जिससे सारा के उदास चेहरे पर हल्की स्माइल आ गई।
सारा के फेस पर स्माइल देखकर शब्द उसे गौर से देख रहा था। सारा को मुस्कुराते देखकर उसने अपने मन में कहा, “जानता हूं तुम एक अलग दुनिया से आई हो। उस दुनिया से जिससे मैने हमेशा से नफरत की है पर न जाने क्यों तुम मुझे अपनी लगने लगी हो। तुम एक माफिया प्रिंसेस हो और युग तुम्हें जिस इरादे से लेकर आया है उसके बाद मैं चाहकर भी तुम्हारे करीब नहीं आ सकता पर तुम्हारे लिए मेरी फिलिंग्स को कोई नहीं रोक सकता।”
शब्द को खोया हुआ देखकर सारा ने उसके सामने चुटकी बजाई और कहा, “कहां खो गए?”
सारा के चुटकी बजाने पर शब्द का ध्यान टूटा। उसने ना में सिर हिलाया और कहा, “चलो वॉक करते हुए बातें करते हैं। इसी बहाने तुम्हारा टाइम पास भी हो जाएगा और थोड़ी एक्सरसाइज भी।”
सारा ने उसकी बात पर हामी भरी। वो दोनों ऊपर के कॉरिडोर पर चलते हुए बातें कर रहे थे। शब्द को आए हुए ज्यादा टाइम नहीं हुआ था फिर भी उसकी सारा से अच्छी दोस्ती हो गई थी। इनफैक्ट कहीं ना कहीं उसे दिल ही दिल में वो अच्छी भी लगने लगी थी। तभी वो उसे अपसेट देखकर उसका मूड सही करने की कोशिश करने लगा।
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दूसरी तरफ युग अपने जिम एरिया में था और ट्रेडमिल पर दौड़ रहा था। उसके जेहन से वो सब नहीं निकल रहा था जब कृशा ने उसे इग्नोर किया और उसे देखते ही वहां से चली गई।
“पता नहीं लोगों को खुद की गलतियां दिखाई देगी या नहीं... मैंने उसे बेवजह पनिशमेंट नहीं दी थी। उसने जो किया उसके बाद कोई भी सजा देता... इनफैक्ट आई एम सो कांइड हार्टेड जो उसे एक मामूली सी सजा दी... उसके लिए डॉक्टर और प्रॉपर ट्रीटमेंट अवेलेबल करवाया वो भी उसी टाइम पर... मुझे नहीं पता था दुनिया में इतने थैंकलेस लोग भी मौजूद है। उसकी हिम्मत कैसे हुई युग राणा को इग्नोर करने की? वो इस वक्त जिस जगह पर मौजूद है वो मेरी है और किसी को हक नहीं है मुझे इग्नोर करने का...” युग काफी गुस्से में था।
फिर वो ट्रेडमिल से उतरा और कुछ देर रेस्ट करने के बाद उसने बाथ लिया। तैयार होने के बाद युग कृशा के फ्लोर पर पहुंचा।
वहां जाकर युग ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। अंदर से जवाब नहीं आया तो युग ने खुद से बड़बड़ा कर कहा, “कई बार समझ नहीं आता कि मैं इन जैसे लोगों पर दया दिखाता ही क्यों हूं और ये मैंनर्स... ये सब ये डिजर्व भी नहीं करती। मैं क्यों इसके कमरे का दरवाजा नॉक कर रहा हूं। मुझे तो इस डोर को तोड़कर डायरेक्ट अंदर चले जाना चाहिए।”
फिर उसने घड़ी में टाइम देखा तो रात के दस बज रहे थे। “जरूर सो गई होगी इस वजह से दरवाजा नहीं खोल रही।” सोचते हुए युग वहां से जाने को हुआ लेकिन तभी कृशा ने दरवाजा खोल दिया।
कृशा नींद से सोकर उठी थी इसलिए उसने नाइट सूट पहना हुआ था। उसकी आंखें थकी हुई थी और बाल बिखरे हुए थे। युग को देखते ही कृशा की आंखें बड़ी हो गई। वो वापस दरवाजा बंद करने को हुई लेकिन युग ने दरवाजा पकड़ लिया।
“एक बार इग्नोर करके तुम गलती कर चुकी हो पर ये करके दूसरी गलती मत करो। मुझे गलतियां इग्नोर करने की आदत नहीं है और लगता है तुम्हें सजा झेलने की नहीं है।” बोलते हुए युग कमरे के अंदर आ गया। उसकी हेजल ब्लू आईज में गुस्सा था।
कृशा ने युग की बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो भी कमरे के अंदर आ गई। कृशा ने युग की तरफ देखे बिना धीमी आवाज में कहा, “कुछ काम है क्या?”
“तुम दोनों को ये क्यों लगता है कि तुम दोनों युग राणा के किसी काम आ सकती हो? सारा सिंघानिया ये पूछे तो फिर भी समझ आता है पर तुम पर तो ये बिल्कुल सूट नहीं करता कृशा... कृशा चौधरी।” बोलते हुए युग के फेस पर हल्की इविल स्माइल थी।
युग के मुंह से अपना पूरा नाम सुनकर कृशा समझ गई थी कि उसने उसके बारे में सारी डिटेल्स निकलवा ली है।
“जब तुम्हें मुझसे कोई काम ही नहीं है तो फिर मेरी डिटेल्स निकलवाने का क्या मतलब हुआ युग राणा?” कृशा ने पूछा। पूरे टाइम में वो युग को इग्नोर कर रही थी और उसने उसके चेहरे की तरफ भी नहीं देखा था।
ये सब चीजें युग के गुस्से को बढ़ा रही थी। उसने कृशा के दोनों कंधों को पकड़ा और उसे कसकर पकड़ते हुए दीवार से लगा दिया।
“लुक इन टू माय आईज...” युग ने सर्द लहजे में कहा लेकिन कृशा की नजरे अभी भी दूसरी तरफ थी।
उसके इस तरह इग्नोर करने पर युग ने कहा, “यू नो व्हाट यू ओनली डिजर्व माय पनिशमेंट और तुम जो कर रही हो उसकी सजा भुगतने के लिए अब तैयार रहना।”
युग एक पल के लिए इस बात को भूल गया था कि पिछली बार उसने जो भी किया था, उससे कृशा की तबीयत अब तक नहीं सुधरी थी और वो उसे अगली सजा देने के लिए तैयार था।
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ओके तो क्या लगता है आपको युग कृशा को अगली सजा क्या देगा?