Under the mafia moon - Chapter 22
Under the mafia moonकृशा ने युग को इग्नोर किया था इसलिए युग ने कृशा को नई पनिशमेंट दी थी। उस पनिशमेंट के तहत युग कृशा के कमरे में रुक रहा था और उसे पूरी रात उसी को देखना था।
युग अपने लिए कॉफी बना रहा था जबकि कृशा बेड पर परेशान बैठी थी। रूम में एक ही बेड होने की वजह से वो उलझन में थी कि वो युग के साथ एक बेड पर कैसे पूरी रात बिताएगी।
अपनी कॉफी लेकर युग कृशा की तरफ मुड़ा तो वो अपने ख्यालों में खोई हुई थी। युग ने उसके सामने जाकर चुटकी बजाई और कहा, “क्या सोच रही हो?”
“कुछ... कुछ भी तो नहीं।” कृशा ने हड़बड़ा कर जवाब दिया। “तुम मुझे कुछ और पनिशमेंट नहीं दे सकते क्या?” अचानक कृशा ने पूछा।
उसकी बात का जवाब देने से पहले युग काउच पर जाकर बैठ और फिर कॉफी का शिप लेकर कहा, “क्यों? तुम्हें मेरे यहां रुकने से प्रॉब्लम हो रही है क्या?”
“प्रॉब्लम तो हो रही है क्योंकि ये मेरा रूम...” कृशा बोल रही थी तभी युग ने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा, “आआ... यू आर रॉन्ग। ये पूरा विला मेरा है फिर इसका एक ये छोटा सा कमरा तुम्हारा कैसे हो गया?”
“फिलहाल के लिए मैं यहां पर रुकी हूं, तो मेरा ही हुआ ना।” कृशा ने जवाब दिया।
“अपने ये फालतू लॉजिक कहीं और जाकर लगाना। मैं अपनी पनिशमेंट नहीं बदलने वाला। चुपचाप पूरी रात यही बैठी रहो और मेरी शक्ल देखती रहो।” युग बोला। वो आराम से कॉफी पी रहा था।
“लेकिन पूरी रात जागने की बात नहीं हुई थी।” कृशा ने हैरानी से कहा।
“शायद तुमने मेरी बात ठीक से सुनी नहीं। मैंने ये कहा था सुबह तक तुम्हें मेरा चेहरा देखना होगा। मुझे तुम्हारे इस छोटे से कमरे में रुकने का कोई शौक नहीं है।” युग ने उसे फिर से याद दिलाया, जिस पर कृशा लाचारी से उसकी तरफ देख रही थी।
“ये तुम मुझे सजा दे रहे हो या खुद को? आई मीन इस सजा के चक्कर में तुम्हें पूरी रात जागना पड़ेगा।” कृशा सजा से बचने के लिए हर संभव कोशिश कर रही थी।
“और तुम्हें किसने कहा मैं जगाने वाला हूं?” युग के फेस पर इविल स्माइल थी। उसने उसी लहजे में कहा, “मैं सोऊंगा और तुम पूरी रात मुझे देखोगी। यहां के हर एक रूम में सीसीटीवी कैमराज लगे हुए हैं। अगर तुम थोड़ी देर के लिए भी सोई तो...” बोलते हुए युग कुछ पल के लिए रुका और फिर आगे कहा, “तो बी रेडी फॉर वन अनदर पनिशमेंट।”
“अजीब जबरदस्ती है यार...” कृशा ने बड़बड़ा कर कहा। उसे नींद आ रही थी पर युग की वजह से वो सो नहीं सकती थी।
युग काउच पर बैठकर अपने टैबलेट में गेम खेल रहा था। वही मजबूरन कृशा को उसका चेहरा देखना पड़ रहा था। वो उसे देखकर मन में काफी कुछ बोल रही थी।
“इस इंसान को सॉरी इस डेविल के दिल के अंदर एक परसेंट भी फीलिंग नहीं है, ऊपर से सारा का दिल जीतने की बात करता है। ये एक नंबर का सेल्फिश डेविल है। बस इसके सिर पर सींग नहीं है... वरना है तो ये पूरा पक्का वाला डेविल।” कृशा ने युग की तरफ मुंह बनाते हुए अपने मन में कहा।
गेम खेलते हुए युग की नजर कृशा पर पड़ी तो उसने हल्का मुस्कुरा कर कहा, “हां हूं मैं डेविल और मेरे दिल में कोई फीलिंग नहीं है। किसी के लिए भी नही है और ना ही कभी होने वाली है। अगर तुम चाहती हो कि तुम्हें बार-बार मेरे गुस्से का सामना न करना पड़े तो मुझसे दूर रहा करो।”
कृशा हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी। उसने अभी जो भी अपने मन में कहा वो युग को कैसे पता चला, ये सोचकर कृशा की आंखें बड़ी हो गई।
फिर उसने देखा युग ने टेबलेट साइड में रख दिया है और उसी की तरफ देख रहा था।
“मैं तुमसे दूर ही रहती हूं। अब तुम खुद मेरे पास आए हो। इसमें मैं क्या कर सकती हूं।” कृशा ने कंधे उचका कर जवाब दिया।
युग ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया। रात काफी हो गई थी। सोने से पहले युग ने अपनी जैकेट और वेस्टकोट निकाल दिया। फिर उसने अपना शर्ट भी खोला तो कृशा ने अपनी नज़रें घूमा ली।
“तुम एक बार फिर वही गलती करने जा रही हो।” बोलते हुए युग बेड पर आकर लेट गया। उसने कृशा का मुंह पकड़ा और जबरदस्ती अपनी तरफ कर दिया। उसके बाद युग ने कहा, “मैंने कहा ना सिर्फ मेरी तरफ देखो, तो मुझे ही देखना है।”
“ठीक है देख रही हूं।” कृशा ने चिढ़कर जवाब दिया।
जब कृशा ने युग की आंखों में देखा तो एक पल के लिए उन दोनों का आई कांटेक्ट हो गया। कृशा से आंखें मिलते ही युग ने तुरंत अपनी आंखों को बंद करते हुए कहा, “याद रहे, सोना नहीं है।”
कृशा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। थोड़ी देर में उसने महसूस किया युग को नींद आ गई है तो उसने अपना हाथ युग के चेहरे के सामने घुमाया। सामने से युग की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो कृशा ने राहत की सांस ली और अपना सिर पीछे की तरफ टिका लिया।
फिर उसने युग के चेहरे की तरफ देखा जो सुकून से सोया हुआ था। उसे देखकर कृशा ने अपने मन में कहा, “इंसान की शक्ल अच्छी होने से कुछ नहीं होता उसकी सीरत भी अच्छी होनी चाहिए... और ये तुम्हें देखकर कोई भी कह सकता है युग राणा। मुझे नहीं लगता कि तुम सारा से किया हुआ वादा निभाओगे। वो तुम्हारी बातों में आ सकती है लेकिन मैं नहीं... सिर्फ शब्द ही है जो हमारी यहां से निकलने में हेल्प कर सकता है। मुझे कल उससे ठीक से बात करनी होगी। एक बार मैं यहां से निकल जाऊं, फिर दादू सारा को भी यहां से निकाल ही लेंगे। उसके बाद तुम अपने अंजाम के लिए तैयार रहना युग राणा।” सोचते हुए कृशा को नींद आ गई।
युग ने कृशा सोने से मना किया लेकिन फिर भी थके होने की वजह से वो बैठे बैठे ही सो चुकी थी। सोते हुए खुद को कंफर्टेबल पोजीशन में लाने के लिए कृशा ने करवट बदली तो युग की बाहों में थी।
सोने से पहले जिस युग को कृशा उसके अंजाम तक पहुंचाने के बारे में सोच रही थी वहीं अब उसी की बाहों में वो बेफिक्र होकर सो रही थी।
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वहीं दूसरी तरफ सारा शब्द के साथ उसके रूम में थी। दोनों शब्द के लैपटॉप पर मूवी देख रहे थे। उन्हें मूवी देखते हुए थोड़ा टाइम ही हुआ था कि सारा को नींद आ गई और वो शब्द के कंधे पर आराम से सो रही थी।
शब्द ने सारा के बालों को सहलाते हुए कहा, “मैं नहीं जानता मैं जो करने जा रहा हूं, उसका अंजाम क्या हो सकता है। शायद इसके बाद मेरे और युग के बीच जो थोड़ा बहुत रिश्ता बचा है वो भी खत्म हो जाए पर आई प्रॉमिस मैं तुम दोनों को यहां से सही सलामत निकल कर रहूंगा। जो दुश्मनी पीढ़ियों से चलती आ रही है, उसका शिकार मैं तुम्हें नहीं होने दूंगा।” उसने सारा के फॉरहेड पर हल्के से किस किया।
उसके बाद शब्द ने सारा को बेड पर सुला दिया और लैपटॉप ऑफ करने के बाद खुद भी काउच पर जाकर सो गया।
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Hey lovely readers,
शब्द और सारा का तो पता नहीं लेकिन कृशा और युग की कल की सुबह धमाकेदार होने वाली है। चलिए मिलते है अगले पार्ट पर। Thanks for love and support 🫰