Under the mafia moon - Chapter 14
Under the mafia moonकृशा ने अनजाने में युग और शब्द की बातें सुन ली थी और युग को इस बात का पता चल गया था। कृशा शब्द के रूम से निकल कर अपने कमरे में जा रही थी तभी युग ने उसे पकड़कर अपने पास खींचा और दीवार के लगा दिया।
इस वक्त युग और कृशा एक दूसरे के बेहद करीब थे और युग का हाथ कृशा के मुंह पर था। उसे देखकर डर से कृशा की आंखें फैल गई तो वही युग के चेहरे पर इविल स्माइल थी।
युग ने सर्द लहजे में कहा, “तुम पता है अगर कोई जान बूझकर या अनजाने में भी मेरी बातें सुन लेता है तो मैं उसे क्या सजा देता हूं?”
कृशा ने ना में सिर हिलाया। युग का हाथ अभी भी उसके मुंह पर था। युग ने आगे कहा,“उसके कानों को इस लायक नही छोड़ता कि आगे वो कभी कुछ और सुन सके।”
युग की बात सुनकर कृशा की आंखें नम होने लगी। उसकी आंखों में आंसू देख युग ने बिना किसी भाव के कहा, “डर लग रहा है?”
कृशा ने हां में पलकें झपकाई। युग ने उसका मुंह छोड़ दिया और अपने दोनो हाथो से उसे पकड़ लिया। कृशा ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा, “प्लीज लेट मी गो... मेरा तुम दोनों की बातें सुनने का कोई इरादा नहीं था।”
“इरादा नहीं था फिर भी सुन ली? तुम पर्दे के पीछे छुपी हुई थी। इससे मैं क्या समझूं?” युग ने भौंहे उठाकर पूछा।
“मैं डर गई थी। मैं और शब्द बातें कर रहे थे और अचानक तुम आ गए और... और...” कृशा बोलते हुए रुक गई क्योंकि युग ने उसके ऊपर अपनी पकड़ को टाइट कर दिया था।
“तुम? तुम मुझे तुम कह रही हो?” युग ने सर्द लहजे में कहा। उसकी आंखों में देखकर कृशा को डर लग रहा था। युग ने आगे कहा, “तुम्हारी इतनी औकात नहीं है कि तुम मुझे तुम कह कर बात कर सको। सारा की वजह से तुम्हें झेल रहा हूं।”
“हां जानती हूं वरना तुम मुझे कब का मार चुके होते।” कृशा ने धीमी आवाज में कहा। बोलते हुए उसकी आंखों से आंसू का कतरा बह गया।
“तो बताओ तुम्हें तुम्हारी इस गलती की क्या सजा दी जाए? अगर मैंने सारा से वादा नहीं किया होता तो इस वक्त यहां तुम्हारी लाश पड़ी होती लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हें तुम्हारी गलती की कोई सजा नहीं मिलेगी।” युग ने सख्त आवाज में कहा। अभी भी उसके दिल में कृशा के लिए कोई दया का भाव नहीं था।
“जब सजा देने का सोच लिया है तो सजा भी तुम ही डिसाइड कर लो ना?” कृशा ने गुस्से में जवाब दिया।
उसकी बात सुनकर युग ने कुछ पल सोचा और फिर कृशा की तरफ देखा। विला के अंदर हीटिंग सिस्टम अच्छा होने की वजह से इतनी ठंड में भी कुछ पहनने की जरूरत नहीं पड़ती थी इसलिए कृशा ने नॉर्मल लोंग स्लीव की क्रॉप टी-शर्ट और नीचे शॉर्टस् डाल रखे थे।
युग ने उसे छोड़ और फिर इविल स्माइल करते हुए कहा, “परफेक्ट।”
युग के परफेक्ट कहने पर कृशा ने सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखा। वो कुछ पूछ पाती उससे पहले युग ने खुद ही क्लियर करते हुए कहा, “मैं तुम्हें जो पनिशमेंट देने वाला हूं उसके लिए तुम्हारी ड्रेस बिल्कुल परफेक्ट है।”
युग ने कृशा की बाजू पकड़ी और उसे खींचते हुए विला के बाहर ले आया। बाहर काफी ठंड थी और हवाएं भी चल रही थी। वहां आते ही कृशा का ठंड के मारे बुरा हाल होने लगा और कुछ मिनट में उसका चेहरा ठंड से लाल हो गया।
“5 मिनट में ये हाल है तो सोचो पूरी रात तुम बाहर बिताओगी तो क्या होगा?” जैसे ही युग ने कहा कृशा रो पड़ी।
“नहीं, प्लीज ये मत करो। मैंने जानबूझकर नहीं सुनी सारी बातें, तुम भी जानते हो।” कृशा उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी पर युग का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था।
उसे वही छोड़ने से पहले युग ने गार्ड से कहा, “अगर ये ठंड से मर भी जाए तो भी सुबह होने से पहले इसे अंदर मत आने देना।”
गार्ड ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया। जाने से पहले युग ने कृशा की तरफ देखकर कहा, “हैव फन बेबी...”
युग स्माइल पास करते हुए वहां से चला गया जबकि कृशा अभी तक वहां पर खड़ी थी। उसकी निगरानी करने के लिए युग ने खास एक गार्ड को खड़ा किया था।
कृशा वहां सिमट कर बैठ गई। उसके पैर उसके सीने से लगे हुए थे और वो हाथों से उन्हें सहला रही थी। नीचे शॉर्ट्स पहने होने की वजह से उसे पैरों को कुछ ज्यादा ही ठंड लग रही थी। गार्ड को उसे इस हालत में देखकर दया आने लगी तो उसने भी अपनी नज़रें फेर ली।
कृशा रोते हुए बोली, “अब समझ आ रहा है कि लोग तुम्हें डेविल क्यों कहते हैं युग राणा। तुम सच के डेविल हो। तुम आज जो भी कर रहे हो देखना उसके लिए बहुत पछताओगे... लेकिन तब तुम्हारे पास पछताने के अलावा और कुछ नहीं होगा। आज तुमने जो भी किया है उसके लिए मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी। तुम बहुत बुरे हो... सारा... प्लीज सेव मी।” कृशा हिचकियां लेते हुए रो रही थी।
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वही सारा इन सब से बेखबर अब युग के रूम में थी। उसे खुद के लिए डर लग रहा था कि युग ने उसे अपने कमरे में क्यों सेटल किया है। परेशानी में सारा कमरे में इधर से उधर चक्कर लगा रही थी।
“डर के मारे नींद भी नहीं आ रही... पता नहीं वो क्या करेगा। सोने का दिखावा भी नहीं कर सकती क्योंकि उसका कोई भरोसा नहीं है मुझे... वो एक ऐसा इंसान है जो किसी को सोते हुए भी जगा दे। काश मैं अपने कमरे में होती तो इस वक्त कृशा की तरह उसके साथ आराम से सो रही होती।” कृशा का ख्याल आते की सारा के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट आ गई। फिर उसने उसी लहजे में कहा, “कृशा ठीक है, मेरे लिए यही काफी है। बाकी मैं उस डेविल को अपने पास बिल्कुल नहीं आने दूंगी।” बोलते हुए सारा के चेहरे के भाव सर्द हो गए।
वो बिस्तर पर लेटी और सोने की कोशिश करने लगी, तभी कमरे का दरवाजा खुला। युग अपने कमरे में आया था और अंदर आते ही उसने लाइट ऑन की। युग को वहां देखते ही सारा खड़ी हो गई।
“तुम सोई नहीं अब तक?” युग ने उसे जगे हुए देखकर पूछा।
“तुम्हारा ही वेट कर रही थी।” सारा ने जवाब दिया, जिसे सुनकर युग के चेहरे पर तंज भरी मुस्कराहट थी।
“तुम फिर से झूठ बोल रही हो। तुमने सोने की पूरी कोशिश की लेकिन तुम्हें नींद नहीं आई। तुम परेशान हो रही हो ये सोचकर कि आज की रात तुम मेरे साथ कैसे एडजस्ट करोगी।” युग ने सारा के चेहरे के भावों को पढ़ते हुए कहा।
उसकी बात सुनकर सारा इधर-उधर देखने लगी और फिर जवाब में कहा, “ऐसा कुछ नहीं है।”
“ऐसा ही है।” बोलते हुए युग ने अपना ब्लेजर निकाल कर काउच पर फेंका और फिर वो अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए सारा के पास आकर बैठ गया। उसके फेस पर एक सिडक्टिव स्माइल थी।
“मुझे... मुझे पता है तुम कुछ नहीं करोगे।” सारा ने हड़बड़ाते हुए कहा। युग की करीबी उसे बैचेन कर रही थी।
“लेकिन मेरा तो बहुत कुछ करने का मूड है।” युग ने अपना शर्ट निकाल कर भी फेंक दिया था। उसकी फिजिक कमाल की थी। इसके बाद सारा ने अपनी नज़रें घुमा ली।
“देखो... तुमने कहा था कि तुम मेरा दिल जीतने की कोशिश करोगे। ऐसे किसी के साथ जबरदस्ती करके दिल नहीं जीता जाता है।” युग को अपने पास आने से रोकने के लिए सारा को जो भी समझ में आया, उसने कह दिया।
“लेकिन मैं तो तुम्हें उठाकर ही जबरदस्ती लाया हूं। तुम मुझसे अच्छी चीज़ें एक्सपेक्ट मत करो। मैं डेविल हूं कोई एंजेल नहीं।” युग ने जवाब दिया। जिसे सुनकर सारा चुप हो गए।
सारा के चेहरे पर लाचारी के भाव थे। कुछ ऐसे ही भाव उसने कुछ देर पहले कृशा के चेहरे पर देखे थे। अचानक युग के चेहरे के भाव सख्त हो गए और उसने उठ कर सर्द लहजे में कहा, “सो जाओ... फिलहाल मेरा कुछ भी करने का मूड नहीं है लेकिन ये मत सोचना कि मैं कुछ कर नहीं सकता।”
अपनी बात कह कर युग चेंज करने के लिए बाथरुम में चला गया तो वही सारा हैरानी से उसकी तरफ देख रहे थी। अचानक उसके मूड का बदलना उसे हैरान कर रहा था।
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अब युग को कोई भी भला बुरा नहीं कहेगा। मैंने पहले ही कहा था वो डेविल है और माफिया से भी है तो इस तरह की सजा देना और किसी के प्रति दया का भावना ना रखना उसके नेचर में है। देखते हैं कृशा वहां से निकल पाती है या सुबह तक उसकी हालत खराब हो जाएगी। पार्ट पढ़कर कमेंट जरुर करिएगा। मिलते हैं अगले भाग पर।