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Chapter 15

Under the mafia moon - Chapter 15

Under the mafia moon

सारा भी युग के डर से वहां से भाग गई थी तो वही युग अब तक डाइनिंग टेबल पर बैठा था। शब्द को वहां देखने के बाद युग के चेहरे के भाव सर्द हो गए थे। ऊपर से सारा की हरकत से उसका गुस्सा और भी बढ़ गया था।

“जरूर बुआ ने ही उसे यहां भेजने के लिए मनाया होगा। मैने उन्हें मना किया... और साथ ही ये भी बताया था कि मुझे किसी की जरूरत नही है। शब्द से डील करना मेरे लिए मुश्किल है। हम तो बात तक नहीं करते।” युग खुद से बातें कर रहा था।

फिर युग अचानक उठा और अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ाए। बाहर जाते हुए उसने अपने कान में लगा ब्लूटूथ ऑन किया और कॉल पर कहा, “जेनी शब्द कौनसे रूम में है?”

“मैने उन्हें भेजने की पूरी कोशिश की थी पर...” जेनी अपनी तरफ से सफाई दे रही थी। वो अच्छे से जानती थी युग को शब्द का यहां आना बिल्कुल पसंद नहीं है।

जेनी बोल रही थी तभी युग ने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा, “नो एक्सक्यूजेस जेनी... यू नो वेल आई हेट दिस। जो पूछा है बस वही बताओ।”

“जी सर...” जेनी ने धीमी आवाज में कहा, “वो शब्द सर ग्राउंड फ्लोर के गेस्ट रूम में है।”

युग ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और कॉल कट कर दिया। युग लिफ्ट की तरफ बढ़ा और जेनी के बताए अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर जाने लगा।

शब्द वहां कृशा के साथ मौजूद था। जैसे ही उसे वहां के किसी के आने की आहट हुई, उसने कृशा से कहा, “शायद युग आ रहा है। तुम्हें यहां से चले जाना चाहिए।”

“मुझे उससे डर लगता है। मैं उसके सामने गई तो वो फिर मुझे भी डांटेगा... और क्या पता मैंने उसके बारे में जो भी कहा उसके बाद वो मुझे गोली से उड़ा दे।” कृशा ने मूंह बनाकर कहा।

उसकी बात सही भी थी। शब्द जानता था युग को काफी गुस्सा आता है। शब्द ने इधर-उधर देखा और फिर कृशा का हाथ पकड़ कर उसे दरवाजे के पास लगे पर्दे के पास लेकर गया।

उसे पर्दे के पीछे छुपाते हुए शब्द ने कहा, “जैसे ही युग अंदर आए और उसका ध्यान मुझ पर हो, तुम बाहर निकल जाना।”

कृशा ने हां में सिर हिलाया। शब्द ने उसे अच्छी तरह से कवर कर दिया था। उसने सही टाइम पर कृशा को छुपाया था क्योंकि अगले ही पल युग उनके कमरे में था।

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युग को अपने सामने देखकर शब्द ने स्माइल पास की और उसे गले लगने को हुआ तभी युग उससे कुछ कदम पीछे हो गया।

“डॉन्ट...” युग ने ऊपर हाथ उठाकर कहा, “क्यों आए हो यहां पर? मेरी जासूसी करने के लिए... या ये देखने के लिए कि मैं अपना काम ठीक से कर रहा हूं या नहीं। दादू ने भेजा है या बुआ ने?”

“मुझे यहां किसी ने नहीं भेजा है। मैं अपनी मर्जी से आया हूं।” शब्द ने जवाब दिया। वो घूमते हुए परदे के पास आया और कृशा को बाहर निकलने का इशारा करने वाला था कि तभी युग ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ किया।

“डोंट एक्ट स्मार्ट विथ मी...” युग ने सर्द लहजे में कहा, “अपना लगेज पैक करो... और सुबह ही निकल जाना।”

“कितना रूड है ये... ये तो सच का डेविल है। मुझे लगा था ये अपनी फैमिली के साथ तो अच्छे से पेश आता होगा... लेकिन देखो अपने भाई को कैसे डरा धमका रहा है।” कृशा ने मुंह बनाते हुए अपने मन में कहा। उसके दिमाग से ये ख्याल निकल गया था कि शब्द ने उसे बाहर जाने के लिए कहा था। वो उन दोनों की बातें सुन रही थी और परदे की खाली जगह से बाहर की तरफ झांक रही थी।

“मैं कहीं नहीं जाने वाला। ना तो किसी के कहने से आया हूं और ना ही किसी के कहने पर जाऊंगा। दादू और तुम हमेशा से चाहते थे ना कि मैं भी इस फील्ड को जॉइन करूं तो ये समझ लो, ट्रेनिंग लेने आया हूं।” शब्द ने उसे अपने वहां रुकने की वजह बताई।

शब्द की बात सुनकर युग ने हल्के से स्माइल दी और फिर कहा, “ओह रियली? पर मैंने तो तुम्हें कभी कुछ नहीं कहा? कभी तुम्हारी लाइफ में इंटरफेयर नहीं किया। तुम जो करना चाहते थे कर रहे हो।”

“लेकिन मैने तो इंटरफेयर किया था ना भाई? तुम्हें रोकने की कोशिश की थी... ये सब करने से रोकने के लिए रिक्वेस्ट की थी... आज भी रोकने हीं आया हूं।” बोलते हुए शब्द इमोशनल हो रहा था वही युग पर उसकी बातों का कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

युग के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। उसके बिना किसी भाव के जवाब में कहा, “तब भी तुम नाकाम हुए थे और अब भी होने वाले हो। बार-बार तुम्हारी उम्मीदें टूटते देखकर इंजॉय करूं, अब मैं इतना भी बुरा नहीं हूं। मेरी बात मानो और यहां से चले जाओ। मैंने जो काम हाथ में लिया है, उससे मैं पीछे नहीं हटूंगा।”

“तुम्हे पीछे हटने का कोई नहीं कह रहा। बस तुम उसे जाने दो। शी इज इनोसेंट... यू नो व्हाट आई मीन।” शब्द यहां कृशा की बात कर रहा था।

“अच्छा तो इतने कम टाइम में उस लड़की ने तुम्हें भी मैनिपुलेट कर लिया। उसकी मासूम शक्ल पर बिल्कुल मत जाना। सब तुम्हारी तरह साफ दिल के नही होते है। भले ही वो माफिया फैमिली से बिलॉन्ग नहीं करती लेकिन माफीयाज के बीच पली बढ़ी है। मुझे नहीं लगता वो इनोसेंट है बल्कि ड्रामा कर रही है और कुछ नहीं।” बोलते हुए युग के चेहरे पर गुस्से के भाव थे। उसने कृशा का नाम नहीं लिया था लेकिन शब्द और कृशा दोनों ही समझ गए थे कि वो किसकी बात कर रहा है।

“हाववव ये कितना बड़ा जलकुक्कडु है।” उसकी बात सुनकर कृशा ने हैरानी से आंखें बड़ी की और कहा, “मैं ड्रामा कर रही हूं? इसे ना जलन हो रही है मुझसे... ये खुद तो शैतान है और दिखता भी शैतान ही है और अब मेरा इनोसेंट फेस देखकर इसे ये लग रहा है कि मैं दिखावा कर रही हूं।”

“इतने टाइम से तुम ये काम कर रहे हो तो तुम्हें लोगों की मुझसे ज्यादा परख है। अपने दिल पर हाथ रख कर बताओ कि क्या सच में वो ड्रामा कर रही है?” बोलते हुए शब्द ने युग का हाथ पकड़ कर उसके दिल पर रख दिया।

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युग ने उसका हाथ झटका और गुस्से में कहा, “डोंट क्रॉस योर लिमिट्स। मैं यहां तुम्हारे सामने खड़े होकर ठीक से बात कर रहा हूं इट डजन मीन कि मुझे तुम्हारी बातों से कोई फर्क पड़ता है।”

“अगर फर्क नहीं पड़ता तो मुझे यहां रहने से रोक क्यों रहे हो? रहने दो मुझे...” शब्द ने कंधे उचका कर कहा।

शब्द ने युग को अपने बातों के जाल में फंसा लिया था। अगर वो शब्द को जाने का बोलना तो इसका मतलब ये होता कि उसे शब्द की बातों से फर्क पड़ता था।

ना चाहते हुए भी युग को उसे वहां रुकने के लिए हां कहना ही पड़ा। “ठीक है तुम रुक सकते हो पर अपनी लिमिट्स में रहना। सबसे जरूरी बात, अपनी उस मासूम चिड़िया से तो दूर ही रहना। मैं नहीं चाहता कि वो तुम्हें अपनी मासूमियत के जाल में फंसाए।”

“तुम्हें नहीं लगता कि आजकल तुम्हें मेरी कुछ ज्यादा ही केयर होने लगी है।” शब्द ने मुस्कुराते हुए अपने बालों में हाथ घुमा कर कहा, जिस पर युग ने जवाब में अपनी आइज रोल की।

युग वहां से जाने को हुआ तो शब्द भी सीटी बजाते हुए बाथरूम में चला गया। युग जाते हुए दरवाजे के पास रूका और पर्दे को देखकर इविल स्माइल दी।

युग के रुकने पर कृशा के दिल की धड़कने बढ़ गई। उसे लगा वो पकड़ी गई तभी युग वापिस बाहर चला गया।

युग के जाते ही कृशा ने राहत की सांस ली। वो खुद को शांत करते हुए बोली, “बच गई। अगर वो पकड़ लेता तो भगवान जाने क्या करता मेरे साथ...”

लगभग पांच मिनिट बाद कृशा बाहर निकली। उसने बाहर झांककर इधर उधर देखा तो कोई नही था। युग को आस पास ना देखकर कृशा बाहर निकली।

कृशा रिलैक्स होकर आगे की तरफ जा रही थी तभी किसी ने उसने पीछे की तरफ खींचा और दीवार के लगा दिया।

वो युग था, जिसका हाथ कृशा के मुंह पर था।

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हाए पकड़ी गई हमारी मासूम चिड़ियां.. क्या लगता है ये मिस्टर डेविल क्या करेगा इसके साथ? वैसे भी उसे मौका चाहिए कृशा को तंग करने का। थैंक्स फॉर योर कमेंट्स एंड सपोर्ट...

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