Under the mafia moon - Chapter 19
Under the mafia moonकृशा को हॉस्पिटल में एडमिट हुए लगभग दो दिन बीत चुके थे। अब उसकी तबियत में काफी हद तक सुधार आ गया था और डॉक्टर ने उसे डिस्चार्ज दे दिया था। इन दो दिन दिनों में सारा और शब्द ने एक पल के लिए भी कृशा को अकेले नहीं छोड़ा। युग भी अपने कामों में बिजी होने के कारण पिछले दो दिनों में उन में से किसी से भी नही मिला था।
हॉस्पिटल में डिस्चार्ज लेने से पहले डॉक्टर कृशा का फिर से चेकअप कर रहे थे। चेकअप के बाद वो बोले, “नाउ यू आर अब्सोल्यूटली फाइन कृशा... बस हल्का कोल्ड है, वो दो दिन तीन दिन और रह सकता है। प्रॉपर मेडिकेशन फॉलो करना एंड यू विल बी कम्प्लीटली फाइन। बस बाहर की हवा को फिलहाल के लिए इग्नोर करना।”
“थैंक यू सो मच डॉक्टर।” सारा ने मुस्कुरा कर कहा। “कृशा की जो हालत है, उसके बाद लगा नही था कि वो इतनी जल्दी ठीक हो जाएगी।”
“ये सब आपकी केयर की वजह से भी पॉसिबल हो पाया है। नाउ आई एम लीविंग.. कोई इश्यू हो तो आप वापस यहां आकर चेक करवा सकती है... एंड ट्राई टू बी हैप्पी।” कहकर डॉक्टर वहां से चला गया। उसे उनसे ज्यादा बात करने की इजाज़त नहीं थी।
उसके जाते ही शब्द ने कृशा की तरफ देखकर पूछा, “आर यू फाइन नाउ?”
“हम्म्म...” कृशा ने इतना ही जवाब दिया। युग ने उसके साथ जो भी किया उसके बाद से वो काफी चुप सी हो गई थी।
“आई एम सॉरी कृशा.. मैं तेरा ध्यान नही रह पाई।” सारा ने उदास चेहरे के साथ कहा।
“और कही ना कही मैं भी...” शब्द भी नजरें झुका कर बोला। “उस दिन सब मेरी ही बेवकूफी की वजह से हुआ था।”
उस दिन के बाद से शब्द और सारा को कृशा से बात करने का मौका अभी मिला था तो दोनो उससे माफी मांग रहे थे।
कृशा ने उनकी बात सुनने के बाद जवाब में कहा, “डोंट वरी मैं तुम दोनो से नाराज़ नहीं हूं... गलती तुम दोनो की थोड़ी थी। छोड़ो, इस बात को जाने देते हैं। इस हॉस्पिटल की स्मेल से मुझे काफी अजीब लग रहा है... और ज्यादा बीमार वाली फीलिंग आ रही है। मुझे बाहर जाना है।”
सारा ने उसकी बात पर हामी भरी। शब्द और सारा कृशा को लेकर बाहर आए। वहां बाहर आने पर कृशा को बेहतर महसूस हो रहा था। बाहर की हल्की धूप उसे सुकून दे रही थी।
“क्या मैं कुछ देर यहां रुक सकती हूं?” कृशा ने सारा की तरफ देखकर पूछा।
“हां लेकिन अकेले नहीं... मैं तुम्हारे साथ रहूंगी।” सारा ने कहा।
“और मैं भी...” उसके पीछे पीछे शब्द भी बोला।
“लेकिन मुझे अकेले रहना है। प्लीज...” कृशा ने बच्चो की तरह जिद्द करते हुए कहा। सारा को ना कहने का मौका ही नही मिला क्योंकि कृशा प्लीज प्लीज की रट लगाने लगी।
“ठीक है पर हमारे आसपास ही रहना।” सारा बोली।
कृशा ने उस की बात पर हामी भरी और उनसे कुछ दूर जाकर वॉक करने लगी। शब्द और सारा भी उससे कुछ दूरी पर वही पर थे। दोनो आपस में बातें कर रहे थे।
“कृशा कितनी चेंज हो गई है ना इन दो दिनों में... पहले कितनी भी हार्ड सिचुएशन क्यों ना हो, वो खुश रहने की कोशिश करती थी और अब देखो... दो ही दिनों से उसका चेहरा उतरा हुआ ही रहता है।” शब्द ने दूर से कृशा की तरफ देखकर कहा।
“हम्म...” सारा ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाकर कहा, “ये असर उस पर अभी कुछ दिन और रहेगा। वो काफी इमोशनल है। अगर कोई बात दिल पर ले लेती है तो जल्दी से उसका असर इस पर से हटता नहीं है।” सारा ने बताया। उसकी नज़रें भी कृशा पर ही थी।
वही कृशा ने वॉक करते हुए उन दोनों को बात करते देखा तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई। उसने खुद से बड़बड़ा कर कहा, “सारा और शब्द एक साथ कितने अच्छे लग रहे हैं।” उसने कुछ पल उन दोनों को एकटक देखा और फिर वापस वॉक करने लग गई।
उन लोगों को वहां पर आए हुए लगभग आधे घंटे से भी ज्यादा का टाइम हो गया था, तब सारा ने कृशा के पास जाकर कहा, “कृशा तुम्हें डॉक्टर ने बाहर की हवा में रहने से मना किया है। चलो अब बहुत हो गया तुम्हारा... तुम्हारे रूम में चलते हैं। यू नीड रेस्ट।”
“नहीं सारा, मुझे यहां अच्छा लग रहा है। प्लीज थोड़ी देर और रहने दो ना...” कृशा ने मासूमियत से कहा।
उसके इस तरह जिद करने पर शब्द के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट आ गई। उसकी जिद में उसे पहले वाली कृशा नजर आ रही थी।
शब्द ने सारा से कहा, “अगर इसे अच्छा लग रहा है तो क्या दिक्कत है? वैसे भी डॉक्टर ने इसे खुश रहने के लिए कहा है। इसे यहां रहने से खुशी मिल रही है तो थोड़ी देर और रुकते हैं।”
“देखो अब तो ये भी मान गया। तुम भी मान जाओ ना सारा। प्लीज...” कृशा सारा के सामने प्लीडिंग वे में बोली, जिस पर सारा ने हां में सिर हिला दिया।
“अच्छा, तुम दोनों यहां रुक सकती हो पर मुझे जाना होगा। आई नीड टू टॉक माय फैमिली। काफी टाइम हो गया।” शब्द ने कहा और वहां से चला गया।
उसके जाते ही सारा ने कृशा से कहा, “अच्छा तो इनकी भी फैमिली है। आई होप इसकी फैमिली इसकी तरह हो ना कि उस डेविल की तरह...”
कृशा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। युग का जिक्र होते ही उसका चेहरा फिर से उतर गया था और उसे अजीब फीलिंग आने लगी।
वही युग इस वक्त मीटिंग के लिए बाहर जा रहा था लेकिन जब उसने सारा और कृशा को वहां देखा तो वो बाहर जाने के बजाय उनकी तरफ बढ़ने लगा। पिछले दो दिनों से उसकी उन दोनों से बात नहीं हुई थी।
उनके पास जाते हुए युग ने धीरे से बड़बड़ा कर कहा, “थैंक गॉड, ये लड़की ठीक हो गई वरना सारा तो मेरा जीना हराम कर देती।”
जैसे ही युग उनके पास पहुंचा, कृशा ने उसे उनकी तरफ आते देख किया। उसने अपनी नजरे तुरंत सारा की तरफ करके कहा, “सारा मुझे अजीब लग रहा है। मैं यहां से जा रही हूं।”
कृशा वहां से जाती उससे पहले सारा ने उसका हाथ पकड़कर उससे पूछा, “अगर तुम्हें ठीक नहीं लग रहा है तो मैं तुम्हारे साथ चलती हूं।”
कृशा ने ना में सिर हिला दिया। उसने सारा को वहीं छोड़ा और वहां से जाने लगी। इस बीच उसने एक बार भी युग की तरफ नहीं देखा था।
“सीरियसली? शी इज इगनोरिंग मी?” कृशा को इग्नोर करते देखा युग ने खुद से बड़बड़ा कर कहा। एक्चुअली वो कृशा को देखने ही उसके पास आ रहा था।
कृशा के जाते ही सारा ने युग की तरफ देखा और रुखे तरीके से कहा, “बोलो क्या काम है?”
“रियली सारा सिंघानिया? तुम्हें लगता है कि तुम मेरा कोई काम कर पाओगी?” कृशा के इग्नोर करने की वजह से युग गुस्सा था तो उसने अपना सारा गुस्सा सारा पर उतार दिया।
सारा जवाब में उसे कुछ कह पाती उससे पहले युग वहां से चला गया तो वही सारा उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी।
“अब इसे क्या हुआ? अच्छा खासा बात करने के लिए आया था और अब मुंह बनाकर चला गया? कभी-कभी समझ नहीं आता कि मैं यहां सबके मूड स्विंग्स झेलने के लिए आई हूं क्या?” युग के गुस्सा करने पर सारा को भी बुरा लग रहा था। वो पैर पटकते हुए वहां से चली गई।
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