The Replaced bride - Chapter 1
The Replaced brideजोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में एक शादी चल रही थी। पूरे पैलेस को काफी खूबसूरती से सजाया गया था, लेकिन वहाँ ज्यादा मेहमान नहीं थे। इससे एक बात साफ़ थी, वह शादी आम लोगों की नहीं थी, और न ही वहाँ हर किसी को आने की इजाज़त थी।
पैलेस के मेन हॉल के बीचों-बीच शादी का मंडप लगा था। यह शादी सिंघानिया फैमिली के बड़े बेटे, ध्रुव सिंघानिया की थी, जो इंडिया की सबसे बड़ी डिज़ाइनिंग कंपनी का मालिक था।
ध्रुव सिंघानिया, उम्र 27 साल, ऊँचाई 6 फ़ीट 3 इंच, फ़िट मस्क्युलर बॉडी और गहरी काली आँखें। ध्रुव सिंघानिया जैसे हैंडसम बिज़नेसमैन की शादी इस तरह प्राइवेट फ़ंक्शन में हो रही थी, यह बात किसी को पता नहीं थी।
वहीं, उसके पास में दुल्हन के जोड़े में सजी एक लड़की बैठी थी। सुर्ख लाल जोड़ा, जिस पर असली सोने और चाँदी से काम किया हुआ था; हैवी रियल ज्वैलरी में वह बिल्कुल किसी महारानी की तरह लग रही थी। लेकिन उसके चेहरे के आगे घूँघट था, जिसकी वजह से उसका खूबसूरत चेहरा अभी भी कोई नहीं देख पा रहा था।
शादी के बीच में एक औरत ने मुस्कुराकर कहा, “ग्रीष्मा, इतनी मॉडर्न होने के बावजूद हमारे खानदान की रस्मों का मान रख रही है। इसी से पता चलता है, वह हमारे घर को जोड़कर रखेगी।” वह रत्ना सिंघानिया थीं, ध्रुव की माँ। उन्होंने लाइट पिंक साड़ी पहनी थी, जिसकी एक तरफ़ व्हाइट कलर का लंबा शॉल था, और उसके साथ रियल पर्ल ज्वैलरी।
रत्ना जिनसे बात कर रही थीं, वह ध्रुव की सास, सरिता जी थीं। उन्होंने बिना कुछ बोले, मुस्कुराकर हामी भरी।
इस शादी में सभी खुश नज़र आ रहे थे, लेकिन घूँघट के पीछे दुल्हन के चेहरे पर पसीने की बूँदें थीं। वह मन ही मन बड़बड़ा कर बोली, “कहाँ हो तुम? आज यहाँ फेरों में मुझे नहीं, तुम्हें होना चाहिए था। अगर इन्हें पता चल गया कि दुल्हन के जोड़े में तुम्हारे बजाय मैं यहाँ पर बैठी हूँ, तो हंगामा मच जाएगा। तुमने तो कहा था कि फेरे होने तक तुम आ जाओगी, पर तुम अब तक आई क्यों नहीं...” दुल्हन के जोड़े में ग्रीष्मा के बजाय कोई और थी। घूँघट में होने की वजह से सबको यही लग रहा था कि ध्रुव की शादी उसकी मंगेतर, ग्रीष्मा मेहता के साथ हो रही है।
वह लड़की अपनी उधेड़बुन में खोई हुई थी, तभी पंडित जी ने कहा, “अब आप कन्या का घूँघट उठाकर उसे सिंदूर दान कीजिए। उससे पहले भगवान के सामने अपनी खुशी और मंगल जीवन की प्रार्थना कीजिए।”
ध्रुव ने हाथ जोड़े और आँखें बंद करके प्रार्थना करने लगा। उसकी आँखें खोलने पर रत्ना जी ने उसे सिंदूर की डिब्बी पकड़ाई।
इसी के साथ उस लड़की की दिल की धड़कनें इतनी तेज हो गईं, जैसे उसका दिल फटकर बाहर आ जाएगा। उसने मन ही मन कहा, “सिंदूर लगाने के लिए ध्रुव मेरा घूँघट उठाएगा, तब सबको पता चल ही जाएगा कि यहाँ ग्रीष्मा के बजाय मैं मौजूद हूँ। हे भगवान, अब क्या करूँ मैं?”
जैसे ही ध्रुव सिंदूर लगाने से पहले तारा का घूँघट उठाने लगा, उसकी दादी, गायत्री जी बोलीं, “अरे ध्रुव, दुल्हन का चेहरा नहीं देखना। घूँघट के अंदर से ही सिंदूर लगा दो।”
उनकी बात मानते हुए ध्रुव ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी माँग में सिंदूर लगा दिया। उसके बाद उसने मंगलसूत्र पहनाया।
“आज से आप दोनों पति-पत्नी हैं।” जैसे ही पंडित जी ने कहा, ध्रुव का ध्यान टूटा।
ध्रुव ने दुल्हन की तरफ़ देखा, जिसे वह ग्रीष्मा समझ रहा था, और अपने मन में कहा, “थैंक गॉड, सब कुछ बिना किसी खतरे के हो गया। अब मैं तुम्हें उस इंसान से सेफ़ रख पाऊँगा और अपनी फैमिली को भी।”
अनजाने में ध्रुव की शादी किसी और लड़की से हो चुकी थी।
उस लड़की के साथ क्या हो रहा था? उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। ध्रुव की माँ, रत्ना जी उसे एक कमरे में लेकर गईं, जो ध्रुव और उसके लिए सजाया गया था।
“मेरे ध्रुव को अब मैं तुम्हारे हाथों में सौंपती हूँ। उसे हमेशा प्यार करना। भले ही सामने से सब पर चिल्ला देता होगा, लेकिन दिल का बहुत अच्छा है।” रत्ना जी ने उसके सिर पर हाथ फेरकर कहा।
इसके बाद वह वहाँ से चली गईं। ध्रुव अभी तक अंदर नहीं आया था। आने वाले पल के बारे में सोचकर उसकी आँखों में आँसू थे। वह डर से काँप रही थी।
“मैं कैसे इन सब का सामना कर पाऊँगी? इतने कम वक़्त में इन्होंने मुझे इतना अपनापन दिया, और मैंने इनके साथ धोखा किया। तुम क्यों नहीं आ पाईं, ग्रीष्मा? तुम्हारी वजह से आज मैं इन सब की नज़रों में गिर जाऊँगी...” उसके चेहरे पर उदासी थी।
उसे ज़्यादा सोचने का मौका नहीं मिला, तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। उसने देखा, ध्रुव अंदर आया था। उसके चेहरे पर खुशी थी। अंदर आते ही उसने सबसे पहले कमरे का दरवाज़ा बंद किया और उसके पास आकर बैठ गया। उसके चेहरे पर लंबा घूँघट था, लेकिन अगले ही पल उसकी सच्चाई सामने आने वाली थी।
सच से अनजान ध्रुव कमरे में आया, तो उसे देखकर वह अंदर ही अंदर सिमटने लगी। अगले ही पल क्या होने वाला था, यह सोचकर उसका दिल जोरों से धड़क रहा था।
ध्रुव उसके पास आकर बगल में बैठा। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कराहट थी।
ध्रुव को लगा ग्रीष्मा अभी भी घूँघट में है। उसे कम्फ़र्टेबल फील कराने के लिए उसने कहा, “मुझे नहीं पता था तुम इन रीति-रिवाजों को इतना सीरियसली लेती हो। अब तो यहाँ कोई नहीं है, और माँ ने कहा था शादी के बाद मैं तुम्हें देख सकता हूँ। फिर हमारे बीच यह पर्दा क्यों?”
उस लड़की ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आँखों में आँसू थे। “पता नहीं मैं इनका सामना कैसे कर पाऊँगी? कि आज यहाँ ग्रीष्मा के बजाय मैं यहाँ पर क्यों बैठी हूँ? इस बात की सफ़ाई कैसे दे पाऊँगी।” उसने अपने मन में कहा।
“कहीं इस रूम में कोई छुपा हुआ तो नहीं है?” ध्रुव ने पूछा और इधर-उधर देखने लगा। जब उसे तसल्ली हो गई कि कमरे में कोई नहीं है, तब वह उसके नज़दीक खिसका और हल्के से उसका घूँघट उठाया।
उसने देखा, सामने ग्रीष्मा के बजाय कोई और लड़की थी, जिसने डर के मारे अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं।
उसे देखते ही ध्रुव के शब्द उसके गले में अटक गए। वह जैसे-तैसे बोलने की कोशिश कर रहा था। “न... नहीं... यह नहीं हो सकता। घूँघट के पीछे तुम... तुम नहीं हो सकती। मैं... मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता।” अगले ही पल ध्रुव ने गुस्से में उस लड़की के दोनों कंधों को पकड़ा और जोर से चिल्लाकर कहा, “हाउ डेयर यू, तारा! तुम... तुम मेरी लाइफ़ को बर्बाद नहीं कर सकती हो।”
ध्रुव को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की से वह कुछ दिनों पहले मिला था, जिसे वह सख्त नापसंद करता था, वह उससे शादी कैसे कर सकता है।
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