The Replaced bride - Chapter 23
The Replaced brideध्रुव तारा के साथ ऊपर कमरे में मौजूद थी। वो उसको अपना साथ देने के लिए थैंक यू बोलने के लिए आई थी लेकिन ध्रुव की आंखों में उसके लिए नफरत थी।
ध्रुव की बातें सुनकर तारा की बची कुची उम्मीदें भी खत्म हो गई।
“अगर आपके दिल में मेरे लिए इतना सब कुछ चल रहा है तो नीचे वो सब ड्रामा करने की क्या जरूरत थी?” तारा ने पूछा।
“मैंने कोई ड्रामा नहीं किया। मैं नहीं चाहता था कि तुम्हें अपनी सच्चाई प्रूफ करने का मौका भी ना मिले।”
उसकी बातें सुनकर तारा हल्का सा हंसी। उस हंसी में उसका दर्द साफ दिखाई दे रहा था। “तुम सब लोगों को ये क्यों लगता है, कि तुम लोगो की ही लाइफ है, मैं तो यहां एक्जिस्ट ही नहीं करती। किसी ने ये भी सोचा है कि मेरे ऊपर इस वक्त क्या बीत रही है? सबको यहां अपनी पड़ी है। किसी को रिश्तेदारों की..... किसी को खानदान की..... तो किसी को उस लड़की की, जो बिना कुछ बताए यहां से भाग गई है।”
“तुम्हारे साथ जो भी हुआ उसकी जिम्मेदार तुम खुद हो। तुमने अपने साथ गलत किया सो किया, हमारी जिंदगीयों में भी भूचाल ला दिया है।” ध्रुव ने जवाब दिया।
“तुम अच्छे से जानते हो ध्रुव मैं गलत नहीं हूं। सही बात जिंदगी बर्बाद होने की..... तो अकेले तुम्हारे साथ चीजें नहीं बदली है। मेरी भी जिंदगी बर्बाद हो गई है... मेरी एक इंसान से मेरी शादी हो गई, जिसे अपने पैसों और एटीट्यूड के आगे कुछ दिखाई नहीं देता। शायद इसी वजह से ग्रीष्मा तुम्हें छोड़ कर चली गई।”
तारा की बात सुनकर ध्रुव को बहुत गुस्सा आया। वो उठा और उसने तारा को दोनों बाजुओं से कसकर पकड़ लिया। “मुझे मजबूर मत करो कि मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत करूं।”
“इसके अलावा मुझे तुमसे कुछ और की उम्मीद भी नहीं है ध्रुव सिंघानिया.....”
तारा की बात सुनकर ध्रुव को अपनी गलती का तुरंत एहसास हुआ कि वो गुस्से में क्या करने जा रहा था। उसने उसे तुरंत छोड़ दिया। “और किसी चीज की उम्मीद रखना भी मत..... सब कुछ तुम्हारी उम्मीद से परे होगा। तैयार रहना मिसेज तारा ध्रुव सिंघानिया..... भले ही धोखे से तुमने अपने नाम के आगे मेरा नाम जोड़ लिया हो लेकिन ये तुम्हे बहुत महंगा पड़ने वाला है। अगर मैंने अपनी लाइफ में किसी से सबसे ज्यादा नफरत की है, तो वो तुम हो तारा।” ध्रुव ने गुस्से से कहा।
“अगर इतनी ही नफरत है, तो छोड़ क्यों नहीं देते मुझे?”
“तुम ग्रीष्मा को मुझे वापस लाकर दे दो, मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।”
तारा और ध्रुव ने गहमागहमी बढ़ गई। तारा एक बात अच्छे से समझ गई थी कि ध्रुव उसे तब तक यहां से नहीं जाने देगा, जब तक वो ग्रीष्मा को वहां नहीं ले आएगी।
दोनों की आंखों में एक दूसरे के लिए नफरत थी। तारा ने अपने मन में कहा, “अब तो कैसे भी करके उसे झूठी ग्रीष्मा को ढूंढना पड़ेगा, तभी मुझे इससे छुटकारा मिलेगा।” तारा ने मन ही मन ग्रीष्मा को ढूंढने का निश्चय कर लिया था।
दोनों काफी देर तक चुपचाप एक दूसरे की तरफ देख रहे थे। तभी साक्षी वहां आई। उसके हाथ में एक बॉक्स था। दरवाजा खुला होने के बावजूद साक्षी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया।
“क्या मैं अंदर आ सकती हूं?” उसने पूछा।
साक्षी ने नीचे जो भी किया, उस वजह से तारा उससे गुस्सा थी। उसने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। ध्रुव ने साक्षी को अंदर आने का इशारा किया।
“बोलो डब्बू, कुछ काम है?” ध्रुव ने पूछा।
“मैं तारा भाभी के लिए ये ड्रेस लेकर आई थी। मां ने इन्हें नीचे बुलाया है, लेकिन लगता है ये अब तक मुझसे नाराज हैं।” साक्षी ने तारा की तरफ देख कर कहा, जो उससे नजरें फेरकर खड़ी थी।
तारा ने साक्षी की बात का कोई जवाब नहीं दिया। ध्रुव ने साक्षी की हाथ से वो बॉक्स लिया और कहा, “तुम जाओ, हम आते हैं।”
“लेकिन भाभी.....” साक्षी अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले ध्रुव ने कहा, “मैंने कहा ना डब्बू यहां से जाओ।”
साक्षी तारा से बात करके उसे सॉरी बोलना चाह रही थी लेकिन ध्रुव की आवाज से साफ पता लग रहा था कि इस वक्त वो काफी गुस्से में है। साक्षी ने वहां ज्यादा देर रुकना जरूरी नहीं समझा और वहां से चली गई।
उसके जाते ही ध्रुव ने कमरे का दरवाजा बंद किया और तारा के पास आकर कहा, “इसे पहन कर नीचे आ जाओ।”
“मुझे कहीं नहीं आना। तुम्हें जो कहना था कह दिया ध्रुव, अब मेरी बारी..... तुम चाहते हो ना मैं ग्रीष्मा को ढूंढ कर लाऊं। मुझे मंजूर है। लेकिन ग्रीष्मा के यहां आते ही मैं यहां 1 मिनट भी नहीं रूकूंगी।”
ध्रुव ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया और कहा, “चलो अच्छा है, तुम जल्दी समझ गई।”
तारा ने उसकी बात पर हामी भरी और कमरे से बाहर जाने लगी। उसे बाहर जाता देख ध्रुव ने उसे आवाज लगाकर रोका, “कहां जा रही हो तारा?”
“तुम्हारी ग्रीष्मा को ढूंढने.....” तारा ने जवाब दिया।
“मैंने तुम्हें उसे ढूंढने का कहा है, ये नहीं कहा कि इसी वक्त जाओ।”
“लेकिन मुझे तुम्हारे साथ 1 मिनट भी नहीं रहना। आई विश कि जल्द से जल्द ग्रीष्मा मिल जाए और मुझे तुम से छुटकारा मिले ध्रुव सिंघानिया..... दुआ करुंगी कि इसके बाद हम गलती से भी एक दूसरे के सामने ना आए।”
“मैं भी यही चाहूंगा।”
ध्रुव के कहते ही तारा वहां से जाने लगी। ध्रुव ने उसे फिर रोकते हुए कहा, “रुक जाओ तारा इतनी भी क्या जल्दी है।”
“अब क्या बाकी रह गया?” तारा ने उसकी तरफ मुड़कर कहा।
“इस शादी से हम दोनों से ज्यादा मेरी फैमिली हर्ट हुई है। गलती किसी की भी हो लेकिन खामियाजा हम दोनों को ही भुगतना होगा। थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा साथ दिया, बस इसी तरह तुम भी मेरा साथ देना। भले ही मैं तुमसे कितनी भी नफरत करता होऊंगा लेकिन आज एक वादा करता हूं, कभी तुम्हारे साथ बदसलूकी नहीं करूंगा। ऐसा ही कुछ वादा मुझे तुमसे चाहिए। मैंने देखा तुम साक्षी से नाराज हो।”
“हां क्योंकि जब मुझे उसकी जरूरत थी, तब उन दोनों ने मेरा साथ देने के बजाय झूठ बोला। उनके इस झूठ की वजह से बात इतनी बिगड़ गई कि ग्रीष्मा के पापा ने पुलिस तक बुलवा ली।” उन सब बातों के बारे में सोच कर तारा के चेहरे पर उदासी थी।
“मैं तुम्हारी तकलीफ समझ सकता हूं। तभी उस वक्त तुम्हारा साथ दिया। भले ही हम परफेक्ट कपल ना हो और मजबूरी में इस शादी को निभा रहे हो लेकिन मैं नहीं चाहता हमारी वजह से हमारी फैमिली और हर्ट हो। तुम्हें ग्रीष्मा को ढूंढने में जितना टाइम लेना है ले सकती हो, पर प्लीज कभी मेरी फैमिली के साथ रूड बिहेव मत करना।” ध्रुव ने नरमी से कहा। इतनी देर तक वो तारा से गुस्से में बात कर रहा था लेकिन अपने परिवार का सोचकर वो परेशान था।
“बहुत प्यार करते हो ना तुम उन सब से?” तारा ने पूछा।
“हां क्योंकि हमारा एक दूसरे के अलावा कोई नहीं है। पापा के जाने के बाद मैंने मां और दादी को बहुत मुश्किल से संभाला। ऊपर से बिजनेस को भी ऊपर लाना था। साक्षी और साहित्य बहुत छोटे हैं, नादान है, उन्हें नहीं पता कब क्या करना होता है। लेकिन जो भी हो, दोनों तुमसे बहुत प्यार करते हैं। उनकी इंटेंशंस गलत हो ही नहीं सकती। जब तक तुम मेरे साथ हो, मैं तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। बदले में तुम्हें मेरी फैमिली को वो प्यार और इज्जत देनी होगी, जो वो अपनी बहू से एक्सपेक्ट करते हैं।”
“लेकिन इस झूठे रिश्ते का क्या फायदा है ध्रुव?”
“नहीं जानता..... बस तुमसे एक रिक्वेस्ट की है, हो सके तो उनका मान रखना। तुम मेरी फैमिली का ख्याल रखना, मैं तुम्हारा और तुम्हारी फैमिली का..... आई प्रॉमिस मैं तुम्हारी फैमिली के सामने सारी चीजें अच्छे से हैंडल कर लूंगा।”
ध्रुव की बात सुनकर तारा की आंखें नम हो गई। “उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।” उसने इतना ही कहा और साक्षी का लाया हुआ बॉक्स उठाकर बाथरूम में चली गई।
ध्रुव ने उसकी बातों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने भी अपने लिए कपड़े निकाले और तैयार होने के लिए किसी दूसरे कमरे में चला गया।
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साक्षी तारा के लिए लाल रंग की साड़ी लेकर आई थी और साथ में कुछ कीमती जेवर भी थे। तारा ने उसकी लाउ साड़ी पहनी, लेकिन उन गहनों को हाथ तक नहीं लगाया। उसने गले में ध्रुव के नाम का मंगलसूत्र पहन रखा था। ध्रुव के कहने पर घरवालों की खुशी के लिए उसने मांग पर हल्का सा सिंदूर लगाया और नीचे गई।
ध्रुव वहीं पर मौजूद था। घर वाले देव पूजा के लिए उनका इंतजार कर रहे थे। अब तक शादी में आए रिश्तेदारों को ध्रुव और तारा की शादी के बारे में पता चल चुका था।
तारा को देखकर ध्रुव की मामी लक्ष्मी ने मुंह बनाकर कहा, “क्या बात है जीजी, इस खानदान की बहू और जेवर के नाम पर गले में सिर्फ एक मंगलसूत्र डाल रखा है। माना की शादी जबरदस्ती हुई है, लेकिन हमें धन दौलत की कमी थोड़ी ना है। जहां इतनी महंगी साड़ी दी है, वहां कुछ गहने भी दे देते तो क्या हो जाता।”
तारा ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। रत्ना जी उसकी तरफ गुस्से से देख रही थी। ध्रुव ने बात को संभालते हुए कहा, “मैंने ही तारा से गहने पहनने को मना किया था। वो काफी महंगे थे और तारा के हिसाब से वो इन्हें संभाल नहीं पाती.....इसलिए मैंने मना कर दिया।”
“हां अब इस ने तो कभी इतने महंगे गहने देखे भी नहीं होंगे, पहनना तो दूर की बात है..... फिर भी अब सिंघानिया परिवार की बहू बन गई है, तो आदत डाल लेनी चाहिए।” लक्ष्मी ने कहा।
“ये हमारी कहां सुनेगी भाभी, शादी भी अपनी मर्जी से की है और तैयार भी अपनी ही मर्जी से होकर आई है।” रत्ना जी ने उदास होकर कहा। उन्होंने पूजा की थाली तारा को देते हुए कहा, “अपने हाथों से दिया जलाओ और भगवान के आगे आने वाले जीवन के लिए प्रार्थना करो।”
“इसे प्रार्थना करने की क्या जरूरत है जीजी? इसकी तो सारी प्रार्थनाएं ध्रुव की शादी के साथ ही पूरा हो गई।” लक्ष्मी बार-बार तारा को ताने मार रही थी।
ध्रुव और तारा ने साथ में पूजा की। पूजा के बाद ध्रुव की दादी के हाथ में एक किताब थी। उन्होंने तारा से कहा, “इस किताब में इस घर के बेटे और बहू का नाम लिखा जाता है। साथ में दोनों के परिवारों और गोत्र का नाम भी..... ये एक तरह से हमारे घर की रिवाज का हिस्सा है, जहां आने वाली पीढ़ी अपने पूर्वजों को नाम सहित जान सके। इसमें ध्रुव और ग्रीष्मा के नाम को साथ लिखा गया था, साथ ही उनके परिवारों का भी... लेकिन अब मैं नया पन्ना शुरू करके यहां तुम्हारा नाम लिख रही हूं।”
“तुम हमें अपने माता-पिता और अपने गोत्र के बारे में बताओ ताकि इस रस्म को भी पूरा किया जा सके।” रत्ना जी ने उनकी बात को आगे बढ़ाया।
उनकी बात सुनकर तारा चुपचाप बैठी थी। उसकी आंखें डबडबा गई। उसे चुप देख कर ध्रुव ने इशारे से उसे सब कुछ बताने का कहा।
काफी देर तक तारा कुछ नहीं बोली तो लक्ष्मी को फिर से बोलने का मौका मिल गया। उन्होंने वहां से खड़े होकर कहा, “जीजी आपकी नई बहू का कुछ बताने को मन कर जाए तो बुला लीजिएगा। मेरे तो बैठे-बैठे कमर में दर्द होने लगा है।” कहकर वो वहां से जाने लगी।
रत्ना जी ने उन्हें रोकते हुए कहा, “बैठ जाइए भाभी, गिने-चुने एक दो लोगों को ही तो शादी में बुलाया है, वो भी किसी रस्म में शामिल नहीं होंगे तो क्या फायदा आने का?”
उनकी बात सुनकर ध्रुव की मामी लक्ष्मी को वहां पर बैठना ही पड़ा। रत्ना जी ने गुस्से में तारा की तरफ देखा और कहा, “देखो हमारे सब्र का इम्तिहान मत लो। इतना सब कुछ होने के बावजूद हम तुम्हें इस घर में जगह देने के लिए तैयार हुए हैं, तुम हो कि हमारा दिल जीतने के बजाय चीजों को और मुश्किल बना रही हो।”
“अगर तुम इस बात से डर रही हो कि हम तुम्हारे घर वालों को कुछ भला बुरा कहेंगे, तो चिंता मत करो हम सब संभाल लेंगे। ये शादी जैसे भी हुई हो लेकिन अब तुम सिंघानिया खानदान की बहु हो। अपने घरवालों का नाम बताओ...” गायत्री देवी ने नरमी से कहा।
“मुझे नहीं पता मेरे घर वाले कौन है या उनका नाम क्या है।” तारा ने बिल्कुल धीमी आवाज में कहा।
“क्या मतलब नहीं पता? क्या वो दुनिया में नहीं है? इस दुनिया में नहीं है, तो क्या हुआ? उनका नाम तो बताओ... कहां से हो तुम?” रत्ना जी ने पूछा।
“मैं किसी को नहीं जानती। मेरे पैदा होते ही मेरी मां या पापा जो भी थे, उन्होंने मुझे हॉस्पिटल में ही छोड़ दिया। मैं एक अनाथ आश्रम में पली-बढ़ी हूं।” तारा ने भारी आवाज में जवाब दिया।
उसकी बात सुनकर ध्रुव को उसकी कही बात याद आई, जब उसने ये कहा था कि उसे उसके परिवार वालों से बात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ध्रुव को तारा के लिए बहुत बुरा लग रहा था लेकिन उसके बाकी का परिवार अब तारा को अजीब नजरों से देख रहे थे।
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