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Chapter 3

The Replaced bride - Chapter 3

The Replaced bride

उम्मेद भवन पैलेस के आगे खड़ा ध्रुव अपनी मंगेतर, ग्रीष्मा के आने का इंतज़ार कर रहा था। हड़बड़ाहट में वह वहाँ से बाहर निकला और एक लड़की से टकरा गया।

ध्रुव कुछ बोलता, उससे पहले लड़की ने अपने सिर को उसके सिर से फिर से टकरा दिया।

उसकी इस हरकत से ध्रुव ने गुस्से में कहा, “आर यू मैड? व्हाट द हेल हैव यू डन...?” ध्रुव को आसानी से गुस्सा नहीं आता था, पर उस लड़की की हरकत ही कुछ ऐसी थी।

“एक साथ इतनी सारी अंग्रेज़ी? इतनी तो हमें क्लास में भी नहीं सिखाई जाती होगी। आप प्लीज़ हिंदी में बात करेंगे? या थोड़ा धीरे-धीरे बोलिए ना, ताकि मैं आपकी बात को समझ सकूँ।” लड़की ने सिर पकड़कर जवाब दिया।

“तुमने फिर से मेरा सिर अपने सिर से क्यों टकराया?” ध्रुव ने चिढ़कर कहा।

“ओह... वह तो इसलिए क्योंकि बचपन में सुना था कि एक बार आपका सिर किसी से टकरा जाए, तो उसे फिर से उसके सिर से भिड़ाना चाहिए।” उस लड़की ने हल्का हँसते हुए कहा।

“और ऐसा करने का लॉजिक?” ध्रुव ने हैरानी से पूछा।

“अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो सिर पर सींग निकल आते हैं। मैं तो फिर भी दुपट्टा लगाकर काम निकाल लूँगी, लेकिन आप सींगों के साथ अच्छे नहीं लगेंगे।” लड़की ने जवाब दिया।

उसकी बात सुनकर ध्रुव हैरान था, और उसके चेहरे पर गुस्सा था।

“पता नहीं तुम कौन से स्कूल में पढ़ी हो, जहाँ तुम्हें यह सब सिखाया गया होगा। मेरा ध्यान सामने की तरफ़ नहीं था, लेकिन तुम तो देखकर चल सकती थी ना? दिखता नहीं तुम्हें?” ध्रुव अपनी गलती मानने के बजाय अभी भी उस लड़की पर चिल्ला रहा था।

उसकी बात सुनकर लड़की की आँखें बड़ी हो गईं, और उसने अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर कहा, “अरे वाह... यह सही है। खुद की गलती मत मानो और सामने वाले पर ही चिल्ला दो। तुम्हारे इस तरह टकराने की वजह से मेरी याददाश्त चली जाती, तो?”

“मेरे एक बार टकराने की वजह से तुम्हारी याददाश्त जाए या ना जाए, लेकिन दूसरी बार टकराने की वजह से ज़रूर चली जाती। लगता है तुम किसी से एक बार टकराने के बाद दूसरी बार टकराना भूल गई होगी, तभी तुम्हारे सिर पर सींग निकल आए हैं, लेकिन तुम्हें दिखाई नहीं दे रहे हैं।” ध्रुव ने चिल्लाकर कहा। थोड़ी देर पहले जो ध्रुव इतनी सादगी और सलीके से बात कर रहा था, अब उसके चेहरे पर गुस्सा था। उस लड़की ने पहली ही मुलाक़ात में उसे बुरी तरह इरिटेट कर दिया था।

“खुद को ज़्यादा ओवरस्मार्ट मत समझो। मैं सब समझती हूँ।” लड़की ने पूरे एटीट्यूड से जवाब दिया।

दोनों वहाँ खड़े होकर आपस में बहस कर रहे थे। तभी वहाँ एक बड़ी सी काली गाड़ी आकर रुकी। गाड़ी में से एक लड़की बाहर निकलकर आई। वह भी दिखने में गोरी, एवरेज हाइट की, वेल-मेंटेंड 25 साल की लड़की थी। वह बिल्कुल किसी मॉडल की तरह लग रही थी। उसने रेड कलर का वन-शोल्डर ड्रेस पहना था। साथ में मैचिंग हील्स, ब्राण्डेड बैग और डायमंड एक्सेसरीज़ के साथ वह अच्छी लग रही थी।

“क्या चल रहा है यहाँ?” उसने उन दोनों के पास जाकर पूछा।

उस लड़की को देखकर ध्रुव ने राहत की साँस ली और कहा, “थैंक गॉड, बेबी, तुम आ गई। वरना इस पागल लड़की के साथ अगर मैं 5 मिनट और रुकता, तो खुद पागल हो जाता।” ध्रुव ने अपनी बात ख़त्म करके उसे गले से लगा लिया। वह ग्रीष्मा थी, जिससे ध्रुव की शादी होने वाली थी।

ग्रीष्मा ने ध्रुव से अलग होकर कहा, “लेकिन यह लड़की है कौन?”

“मैं नहीं जानता इसे। तुम्हारा वेट करते हुए मैं बाहर की तरफ़ आ रहा था, तो यह मुझसे टकरा गई, और तब से ना जाने क्या-क्या बकवास बोले जा रही है।” ध्रुव ने इरिटेट होकर कहा।

ग्रीष्मा ने उसकी तरफ़ सवालिया नज़रों से देखा, तो लड़की ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपना परिचय देते हुए कहा, “हेलो... मेरा नाम तारा है।”

“तुम क्या यहाँ के स्टाफ़ से बिलॉन्ग करती हो?” ग्रीष्मा ने पूछा। “जानती हो ना, जिसके साथ बहस कर रही हो, वह कौन है?”

ग्रीष्मा के कहते ही ध्रुव के चेहरे पर भी एक गर्व भरी मुस्कान थी।

लेकिन अगले ही पल तारा ने मासूमियत से जवाब दिया, “नहीं, मैं नहीं जानती कि यह कौन हैं?” तारा के जवाब ने ध्रुव को और भी गुस्सा दिला दिया।

“तुम... तुम मुझे नहीं जानती?” ध्रुव ने हैरानी से पूछा। उसे ऐसा पहले सुनने को नहीं मिला था।

“तुम्हें कम दिखाई देने के साथ-साथ सुनाई भी कम देता है क्या? बोला ना कि नहीं जानती तुम कौन हो?” तारा ने काफ़ी बेरुखी से जवाब दिया।

“इस वक़्त तुम इंडिया के सबसे बड़े ज्वेलरी हाउस के मालिक, ध्रुव सिंघानिया के सामने खड़ी हो।” जैसे ही ध्रुव ने अपना परिचय दिया, तारा ने एक बड़ी सी मुस्कराहट दी और कहा, “अच्छा, तो आप ध्रुव सिंघानिया हैं। आपसे मिलने के लिए तो मैं अहमदाबाद से राजस्थान तक पूरे 8 घंटे 30 मिनट का सफ़र तय करके आई हूँ। काश मैं यह कह पाती कि मुझे आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई।”

“ध्रुव, यह लड़की कौन है और तुमसे मिलने क्यों आई है?” ग्रीष्मा ने हैरानी से पूछा।

ध्रुव कोई जवाब दे पाता, उससे पहले तारा ने ग्रीष्मा की बात का जवाब देते हुए कहा, “आपको नहीं पता, इन्होंने अपनी होने वाली बीवी को सरप्राइज़ देने के लिए अहमदाबाद से वेडिंग प्लानर हायर किया है। मैं वहीं से, ‘ड्रीम वेडिंग इवेंट्स’ से यहाँ आई हूँ।”

“लो, कर दिया मेरे सरप्राइज़ का सत्यानाश। पता नहीं इस लड़की को यहाँ किसने भेजा होगा। अगर यह यहाँ मेरी शादी में रही, तो हर एक चीज़ को रूइन कर देगी।” ध्रुव सिर पकड़कर धीरे से बड़बड़ाया।

“ओह, तो तुम इस सरप्राइज़ की बात कर रहे थे। बेबी, आई एम सो हैप्पी फ़ॉर दिस... मॉम-डैड को पता चलेगा, तो वह भी बहुत खुश होंगे।” तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा के चेहरे पर मुस्कान थी, और उसने झट से ध्रुव को गले लगा लिया।

उन्हें एक-दूसरे के करीब आता देखकर तारा ने अपने दोनों हाथों से आँखों को बंद कर लिया। ध्रुव उसकी तरफ़ गुस्से से घूर रहा था। जिस सरप्राइज़ की वह पिछले 1 महीने से तैयारी कर रहा था, तारा ने एक झटके में उससे ख़राब कर दिया था।

कुछ देर गले लगे रहने के बाद ग्रीष्मा ध्रुव से अलग हुई और तारा की तरफ़ देखकर कहा, “देखो, अब जब तुम आ गई हो, तो हर एक चीज़ का अच्छे से ख़्याल रखना। मेरे ध्रुव का सरप्राइज़ ख़राब नहीं होना चाहिए।”

“जी जी मैडम, ज़रूर। अब से 24 घंटे मैं इनके साथ रहूँगी।” तारा ने जवाब दिया।

“पिछले 24 मिनट से इसे झेल रहा हूँ, वह कम है क्या, जो मैं 24/7 इसके साथ रहूँ। काफ़ी रात हो गई है। सुबह उठते ही सबसे पहले तुम्हारा पिकअप होगा, मिस तारा।” ध्रुव ने तारा की तरफ़ देखकर गुस्से से अपने मन में कहा।

“अब अंदर चलते हैं। ग्रीष्मा, हम आज रात को यहीं पर रुकेंगे। फ़िलहाल मिस्टर सिसोदिया ने हमारे लिए डिनर का इंतज़ाम किया है। तारा, तुम चाहो तो हमें ज्वाइन...” ध्रुव ने अपनी बात ख़त्म भी नहीं की थी कि तारा ने झट से कहा, “हाँ हाँ, क्यों नहीं। पिछले साढ़े 8 घंटे में ट्रैवल करके मैं सच में बहुत थक गई हूँ। जब आप दोनों यहाँ पर रुक रहे हैं, तो मेरे लिए भी एक कमरे का इंतज़ाम करवा दीजिए। वैसे यह महल काफ़ी ख़ूबसूरत है।” तारा अपनी बात ख़त्म करके उन दोनों से पहले ही आगे की तरफ़ बढ़ने लगी।

“शी इज़ सो क्यूट ना...” ग्रीष्मा ने तारा को जाते हुए देखकर कहा।

ध्रुव ने मुँह बनाते हुए उसकी बात पर हामी भरी। तारा पूरे पैलेस को देखते हुए चल रही थी। उसके पीछे-पीछे ध्रुव और ग्रीष्मा बातें करते हुए आ रहे थे। ध्रुव का ध्यान अभी भी तारा में ही लगा था।

“सब कुछ कितना अच्छे से प्लान किया था, लेकिन इस लड़की ने सब बर्बाद कर दिया। पहले मेरा सरप्राइज़ और फिर ग्रीष्मा के साथ टाइम स्पेंड करने का प्लान।” ध्रुव ने सोचा।

अचानक ग्रीष्मा ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “ध्यान कहाँ है तुम्हारा? मैं कब से तुमसे पूछ रही हूँ कि तुमने यह सब कब और कैसे प्लान किया।”

“इन सब के बारे में बाद में बताऊँगा।” ध्रुव ने ख़राब मूड होने की वजह से रूडली जवाब दिया।

“मैं समझ सकती हूँ, तारा के इस तरह बताने की वजह से तुम्हारा मूड ऑफ़ हो गया है। बट स्टिल, मुझे इस बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा कि तुमने मेरे बारे में सोचा और उसके अकॉर्डिंग शादी प्लान की। अब अपना गुस्सा छोड़ो और मूड सही करो।” ग्रीष्मा ने हल्का मुस्कुराकर कहा।

ग्रीष्मा की बात सुनकर ध्रुव ने छोटी सी मुस्कान दी। तारा उन दोनों की आँखों से ओझल हो चुकी थी। वह आगे गई, तो उसे मिस्टर सिसोदिया मिले।

उन्होंने तारा को देखकर पूछा, “आप मिस्टर ध्रुव सिंघानिया के साथ हैं?”

“हाँ, वह भी आ ही रहे हैं।” तारा ने कहा और वहाँ सामने लगे राजघराने के फैमिली पोर्ट्रेट को देखने चली गई।

“काफ़ी अच्छी पसंद है मिस्टर सिंघानिया की। यह उनकी मंगेतर है... उनका अच्छे से ख़्याल रखना।” मिस्टर सिसोदिया ने अपने असिस्टेंट से कहा। उन्होंने तारा को ध्रुव की मंगेतर समझ लिया था।

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