The Replaced bride - Chapter 10
The Replaced brideध्रुव, तारा और ग्रीष्मा जयपुर के फ़ेमस बुटीक में मौजूद थे। ग्रीष्मा वहाँ अलग-अलग ड्रेसेस को ट्राई करके देख रही थी।
ध्रुव भी उसकी ड्रेस से मैच करते कपड़े लेकर उन्हें पहनकर देख रहा था। तारा उन दोनों की हेल्प कर रही थी।
“तारा, मैं ग्रीन ड्रेस में कैसी लग रही हूँ? मेहँदी वाले दिन मैं यही ड्रेस पहनने वाली हूँ।” ग्रीष्मा ने खुद को सामने लगे आईने में देखा। वह एक लाइट ग्रीन लहँगा था।
ध्रुव भी उसी तरह की ग्रीन ड्रेस पहनकर आया। वह उसके पास आकर खड़ा हो गया।
“हम दोनों साथ में कितना परफेक्ट लग रहे हैं।” ध्रुव ने आईने में देखकर कहा।
“ग्रीष्मा, आपके ऊपर तो यह ड्रेस बहुत अच्छी लग रही है, लेकिन ध्रुव सर के ऊपर यह कलर थोड़ा सेट नहीं हो रहा।” तारा ने ध्रुव को परेशान करने के लिए कहा।
“व्हाट डू यू मीन बाय सेट नहीं हो रहा? क्या ख़राबी है इस ड्रेस में… इतना अच्छा कलर तो है।” ध्रुव ने सिर हिलाकर पूछा।
“मिस्टर सिंघानिया, ख़राबी कलर और ड्रेस में नहीं, आप में है। आपके कलर कॉम्प्लेक्शन के हिसाब से अगर आप थोड़ा डार्क कलर लेंगे, तो ज़्यादा अच्छा लगेगा।” तारा ने बताया।
“ओह, रियली? अब तो मैं यही कलर लूँगा।” ध्रुव ने मुँह बनाकर कहा और फिर वहाँ काम करने वाली एक लड़की को आवाज़ लगाई। “एक्सक्यूज़ मी, मिस… आप मेहँदी के लिए हम दोनों के लिए यह ड्रेस फ़ाइनल कर दीजिए।”
“जी, ज़रूर सर, यह कलर आप दोनों के ऊपर ही बहुत अच्छा लग रहा है।” उस लड़की ने जवाब दिया।
“देखा, क्या कहा उसने? यह कलर हम दोनों के ऊपर ही बहुत अच्छा लग रहा है।” ध्रुव ने तारा की तरफ़ देखकर कहा।
तारा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। ध्रुव वहाँ से चेंज करने के लिए चला गया। उसके जाते ही ग्रीष्मा ने तारा से कहा, “तुम वह सब ध्रुव को परेशान करने के लिए बोल रही थी ना?”
तारा ने हँसते हुए हामी भरी। “लगता है आपके होने वाले पति को अपनी गलतियाँ सुनना पसंद नहीं है।”
“हाँ, और वह इसलिए क्योंकि ध्रुव हर एक काम परफेक्टली करता है। हम दोनों के लिए ये ड्रेसेज़ भी उसी ने फ़ाइनल की थीं।” ग्रीष्मा ने बताया।
“आपकी कोई खुद की चॉइस नहीं है क्या? आप सारे काम उनके हिसाब से ही क्यों करती हैं?” तारा ने हैरानी से पूछा।
“ध्रुव को हर एक काम अपने हिसाब से चाहिए। देखा नहीं तुमने, जब मैंने उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर तुम्हें जॉब पर रखा था, तो वह कितना नाराज़ हो गया था। तुम तो अंदर थीं। तुम्हें नहीं पता, मुझे उससे मनाने के लिए कितनी मिन्नतें करनी पड़ीं। तारा, मैं नहीं चाहती कि ध्रुव मुझसे नाराज़ हो, इसलिए मैं वह सब करती हूँ, जो उसे पसंद हो। अब तुम यहीं रुको, मैं दूसरी ड्रेस ट्राई करके आती हूँ। ध्रुव ने सेलेक्ट कर ली होगी।” ग्रीष्मा ने मुस्कुराकर कहा और वहाँ से ध्रुव के पास चली गई।
तारा ने देखा, ध्रुव डिज़ाइनर के पास खड़ा था और उसने उन दोनों के लिए काफ़ी सारी ड्रेसेज़ सेलेक्ट कर रखी थीं।
“यह ऐसे लड़के से शादी क्यों कर रही है, जो इसे इसकी पसंद के कपड़े तक नहीं पहनने दे रहा। यह तो इतनी पढ़ी-लिखी है। फैमिली भी अच्छी-खासी रिच है। फिर शादी के लिए मना क्यों नहीं कर देती।” तारा ने अपने मन में सोचा। ग्रीष्मा की बातों ने उसे परेशान कर दिया था।
उसके बाद ध्रुव और ग्रीष्मा एक-एक करके कई सारे कपड़े ट्राई किए, लेकिन तारा ने कोई ख़ास रिस्पॉन्स नहीं दिया। वह अभी भी ग्रीष्मा की बातों में खोई हुई थी।
तारा को खोया हुआ देखकर ध्रुव ने सोचा, “इसे अचानक क्या हो गया? थोड़ी देर पहले तो हर एक चीज़ में एक्साइटेड होकर इंवॉल्व हो रही थी, और अचानक… अचानक से इतनी परेशान हो गई।”
ध्रुव ग्रीष्मा को लेकर दूसरी तरफ़ गया। तारा के चेहरे की चुप्पी उसे परेशान कर रही थी।
“क्या हुआ, ध्रुव? तुम इस तरह मुझे साइड में लेकर क्यों आए हो? तारा वहाँ अकेली है।” ग्रीष्मा ने पूछा।
“उसे क्या हुआ? अचानक से वह इतनी परेशान क्यों हो गई? उसे बोलो, अगर उसे भी ड्रेस लेने का मन कर रहा है, तो वह ले सकती है। मैं पे कर दूँगा।” ध्रुव ने धीमी आवाज़ में कहा।
ध्रुव की बात सुनकर ग्रीष्मा मुस्कुराई और उसके गाल पर प्यार से हाथ फेरकर कहा, “बाहर से तुम कितना भी स्ट्रिक्ट हो जाओ, लेकिन अंदर से… तुम्हारा दिल बहुत अच्छा है, ध्रुव, और तुम इसे चाहकर भी नहीं बदल सकते। तुम उस लड़की की केयर कर रहे हो, जो तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं थी। यह देखकर मुझे अच्छा लगा।”
ध्रुव ने ग्रीष्मा की बात का कोई जवाब नहीं दिया और वहाँ से दूसरी तरफ़ चला गया। ऐसे बहुत कम मौके होते थे, जहाँ वह अपने जज़्बात ज़ाहिर करता था।
ग्रीष्मा तारा के पास गई और कहा, “अच्छा, तारा, तुम मेरे और ध्रुव की तरफ़ से कोई भी अच्छी सी दो ड्रेस सेलेक्ट कर लो।”
“नहीं, मैम, इसकी कोई ज़रूरत नहीं है।” तारा ने हल्का मुस्कुराते हुए मना कर दिया।
“मैंने कहा ना तुम्हें, तुम मुझे मैम नहीं, मेरे नाम से बुलाओगी।” ग्रीष्मा ने उसे डाँटते हुए कहा, “बहुत हो गया। मैं तुम्हारी एक नहीं सुनने वाली। चलो, चुपचाप कोई भी दो ड्रेसेज़ सेलेक्ट कर लो।”
“मैंने कहा ना, ग्रीष्मा, इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। मेरे पास हर एक फ़ंक्शन की ड्रेस अवेलेबल है। अच्छा, आप लोग शॉपिंग कीजिए, मैं रेस्टरूम करके आती हूँ।” तारा ने बहाना बनाकर बात को टाला और वहाँ से चली गई।
“मैं अच्छे से जानती हूँ, तुम यहाँ से क्यों गई हो? लगता है तुम्हारे लिए भी मुझे ही ड्रेस सेलेक्ट करनी पड़ेगी।” ग्रीष्मा ने खुद से कहा और तारा के लिए कपड़े सेलेक्ट करने लगी।
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उन लोगों को शॉपिंग करते हुए सुबह से शाम हो गई थी। लगभग सभी फ़ंक्शन के हिसाब से कपड़े लेने के बाद वे लोग वहाँ से बाहर निकल रहे थे।
ध्रुव, ग्रीष्मा और तारा तीनों एक साथ लिफ़्ट में थे। बीच में लिफ़्ट किसी फ़्लोर पर रुकी, और वह आदमी अंदर आया, जो ध्रुव को बर्बाद करने की बात कर रहा था।
उसने एक नफ़रत भरी नज़र ध्रुव पर डाली और फिर तारा और ग्रीष्मा की तरफ़ देखा। ध्रुव अपने मोबाइल में लगा था, जबकि तारा और ग्रीष्मा आपस में बात कर रही थीं।
अचानक उस आदमी ने तारा को ध्रुव की तरफ़ धकेला और ग्रीष्मा की गर्दन पर चाकू रख दिया। अचानक हुए इस हमले की वजह से वे तीनों घबरा गए।
“कौन हो तुम? देखो, तुम्हें पैसे, ज्वेलरी, जो भी चाहिए, वह तुम ले सकते हो… लेकिन उसे छोड़ दो।” ध्रुव ने हल्की काँपती आवाज़ में कहा।
“तुम्हें क्या लगता है कि सब कुछ पैसे, ज्वेलरी ही होते हैं, ध्रुव सिंघानिया? कुछ चीज़ें पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं।” उस आदमी ने जवाब दिया।
“ध्रुव, प्लीज़, मुझे बचाओ।” ग्रीष्मा चिल्लाकर बोली। वह उस आदमी की पकड़ से छूटने के लिए हाथ-पैर मार रही थी, लेकिन उसने उसे कस के पकड़ रखा था।
“अरे, हिलना बंद कर… तेरे हिलने की वजह से अगर तेरी गर्दन थोड़ी सी भी कटी, तो उसकी ज़िम्मेदार तू खुद होगी।” वह आदमी बोला।
“प्लीज़… प्लीज़, उसे कुछ मत करना। तुम बताओ मुझे… तुम्हें क्या चाहिए। मैं वह सब देने के लिए तैयार हूँ, लेकिन उसे एक ख़रोच भी नहीं आनी चाहिए।” ध्रुव ने कहा। ग्रीष्मा को उसकी पकड़ में देखकर वह घबरा गया था; ऊपर से वे लोग लिफ़्ट में बंद थे, जहाँ वह मदद के लिए किसी को बुला भी नहीं सकता था।
“अच्छा, तो तुम मुझे कुछ भी देने के लिए तैयार हो। ठीक है, फिर मैं इस लड़की को छोड़ दूँगा। बदले में मुझे वह दूसरी वाली लड़की दे दो।” उसका इशारा तारा की तरफ़ था।
“कौन हो तुम, और हमें नुकसान क्यों पहुँचाना चाहते हो? हम तो तुम्हें जानते तक नहीं हैं।” ध्रुव ने हैरानी से पूछा। उसका नेचर काफ़ी डिसेंट था, तो उसका आज कोई दुश्मन नहीं था।
ध्रुव के पूछने पर उस आदमी ने जवाब में कहा, “अच्छा, जानते नहीं हो? थोड़ा याददाश्त पर ज़ोर दो और सोचो, ध्रुव सिंघानिया, कोई अनजान इंसान तुम्हें नुकसान पहुँचाने के बारे में क्यों सोचेगा? यह तुम्हारे ही कर्मों का फल है, जो घूम-फिरकर तुम्हारे पास आया है।”
उस आदमी की बात सुनकर ध्रुव चौंक गया। तारा ने उसकी तरफ़ देखा। “देखो, भाई साहब, आप जो भी हो, आपकी दुश्मनी इस आदमी से है, तो इसे लेकर जाओ ना? हमें क्यों नुकसान पहुँचा रहे हो?” बोलते हुए तारा ने अपने दोनों हाथों से ध्रुव को पकड़कर उस आदमी के आगे कर दिया।
“यह क्या कर रही हो? तुम पागल तो नहीं हो गई हो।” ध्रुव गुस्से में चिल्लाया।
“हाँ, तो क्या करूँ? गलती आपकी है, और सज़ा ग्रीष्मा को मिल रही है। नहीं, आप बताइए, गुंडे भाई साहब, गलती किसकी है?” बोलते हुए तारा उस आदमी के पास आ गई।
“ध्रुव सिंघानिया की।” उस आदमी ने जवाब में कहा।
“एग्ज़ैक्टली, गलती इस ध्रुव सिंघानिया की है, तो इसी को सज़ा मिलनी चाहिए।” तारा ने कहा।
“तारा, यह तुम कैसी बातें कर रही हो? ध्रुव किसी का बुरा नहीं सोच सकता, उसने कुछ नहीं किया है।” ग्रीष्मा ने घबराई आवाज़ में कहा।
“हाँ, कोई समझाओ इस पागल लड़की को, जो बेवजह मेरे पीछे पड़ी है। देखो, तुम जो भी हो, मैं तुम्हें मुँह माँगी कीमत देने के लिए तैयार हूँ, लेकिन इस लड़की को मेरी नज़रों के सामने से लेकर जाओ। यह मुझे पागल बना देगी।” ध्रुव ने गुस्से में कहा। तारा की हरकतों से वह इरिटेट हो गया था।
“तुम पहले से ही पागल हो। तुम्हें और पागल बनाने की क्या ज़रूरत है?” तारा बोली।
“रियली? हाँ, सही कहा तुमने। मैं पागल हूँ, जो तुम जैसी लड़की को झेल रहा हूँ।” ध्रुव ने चिल्लाकर कहा।
“अरे, आपने झेला ही कहाँ? आपने तो मुझे नौकरी से निकलवा दिया। यह तो ग्रीष्मा थी, जिसने मुझे काम पर रखा।” तारा ने अपने दोनों हाथ कमर पर रखते हुए कहा।
ध्रुव और तारा आपस में बहस करने लगे। उन दोनों की आवाज़ से झुंझलाकर वह आदमी जोर से चिल्लाया, और उसने ग्रीष्मा की गर्दन पर रखा चाकू उसके बिल्कुल करीब ले आया। उसके ऐसा करने से ग्रीष्मा की गर्दन पर ख़ून निकल रहा था।
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