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Chapter 6

The Replaced bride - Chapter 6

The Replaced bride

ध्रुव ने तारा को उसकी नौकरी से निकलवा दिया था। ध्रुव का यह बर्ताव ग्रीष्मा को पसंद नहीं आया। उसने तारा को एक दिन और जोधपुर रुकने के लिए मना लिया।

“तुम लड़कियां सच में बहुत अजीब होती हो! दस मिनट पहले तुम मुझ पर गुस्सा हो रही थीं कि मैंने उसे नौकरी से निकलवा दिया, और अब…”, ध्रुव ने कार ड्राइव करते हुए कहा।

ग्रीष्मा उसके पास वाली सीट पर बैठी थी। उसने जवाब में बोला, “क्या बात है, बेबी? मुझसे ज़्यादा याद तो तुम्हें उसकी आ रही है… वैसे, लड़की सच में बहुत अच्छी थी, और मुझे उसके प्रयास भी काफी पसंद आए।”

उसकी बात सुनकर ध्रुव ने अपनी आँखें घुमाईं। “अच्छा हुआ जो चली गई, वरना मुझे शादी तक उसकी किटकिट झेलनी पड़ती।”

“चलो, वह नहीं तो कोई और सही… वेडिंग प्लानर तुम्हारे लिए कोई दूसरी असिस्टेंट अरेंज कर देगी। अच्छा, ध्रुव, तुम्हारे लिए तो नई असिस्टेंट आ जाएगी, लेकिन तुमने मेरा तो सोचा ही नहीं।” ग्रीष्मा ने बात घुमाते हुए कहा।

ध्रुव ने एक नज़र उसकी तरफ़ देखा और फिर जवाब दिया, “तुम्हें सच में इन सब के लिए असिस्टेंट की ज़रूरत है? तुम्हारे पास ऑलरेडी मेरी ओर तुम्हारी मॉम है, जो दिन-रात तुम्हारी हर एक चीज़ का ख्याल रखती है।”

“हाँ, लेकिन मुझे भी स्पेशल ट्रीटमेंट चाहिए। ऐसा करती हूँ, मैं भी अपने लिए किसी को हायर कर लेती हूँ।” ग्रीष्मा ने कंधे उचकाकर जवाब दिया।

“जैसा तुम्हें ठीक लगे।” ध्रुव ने मुस्कुरा कर कहा।

वह गाड़ी चलाने में व्यस्त था, जबकि ग्रीष्मा तारा के बारे में सोच रही थी। “तुम ध्रुव की ना सही, लेकिन मेरी असिस्टेंट बनकर रह सकती हो, तारा… आई नो, ध्रुव मेरे इस डिसीजन से थोड़ा इरिटेट होगा, लेकिन इसी बहाने मेरे मन में यह गिल्ट तो नहीं रहेगा कि ध्रुव की वजह से तुम्हारी जॉब चली गई।”

ध्रुव को बिना बताए ग्रीष्मा ने तारा को अपने असिस्टेंट के तौर पर हायर कर लिया था। उसने अभी के लिए ध्रुव को कुछ ना बताने का निश्चय किया।

__________

ध्रुव और ग्रीष्मा पूरे दिन साथ में घूमते रहे। रात को डिनर के लिए ग्रीष्मा ने वापस पैलेस चलने की ज़िद की।

“तुम आज सच में बहुत अजीब हरकतें कर रही हो। जोधपुर में और भी अच्छी जगहें हैं। यहाँ का टेस्ट तो हम पहले भी ट्राई कर चुके हैं, कहीं और चलते हैं ना…”, ध्रुव ने गाड़ी रोकने से पहले पूछा।

“मैंने कहा ना, मुझे यहीं का खाना खाना है। दूसरी बात, मेरे यहाँ आने की एक और वजह है।” ग्रीष्मा बोली।

“कौन सी वजह?” ध्रुव ने हैरानी से पूछा।

“बेबी, मैं तुम्हें यहाँ किसी से मिलाने के लिए लाई हूँ। अब चुपचाप मेरे साथ चलो, और हाँ, अपने गुस्से को अपनी पॉकेट में रखना।” ग्रीष्मा ने गाड़ी से उतरकर कहा।

“इसने कभी मुझे बताया नहीं कि जोधपुर में इसके जान-पहचान वाला भी कोई है।” ध्रुव उसके पीछे बड़बड़ाता हुआ आ रहा था।

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इस बार वे दोनों पैलेस में जाने के बजाय पैलेस के होटल में गए। तारा पहले से वहीं पर आई हुई थी और उन दोनों के आने का इंतज़ार कर रही थी।

ग्रीष्मा अंदर पहुँची। उसके साथ ध्रुव भी था। उसकी नज़रें तारा को ढूँढ रही थीं। तारा ने जब ग्रीष्मा को देखा तो वह अपनी जगह से खड़ी हुई और उसकी तरफ़ हाथ हिलाकर जोर से बोली, “ग्रीष्मा मैम… मैं यहाँ हूँ।”

जैसे ही ध्रुव ने तारा को देखा, उसके चेहरे पर गुस्सा था। उसने ग्रीष्मा की तरफ़ घूरकर देखा। “क्या तुम मुझे यहाँ इस लड़की से मिलाने के लिए लाई हो?” उसने गुस्से में पूछा।

“मैं तुम्हें यहाँ अपनी नई असिस्टेंट से मिलवाने के लिए लाई हूँ। बाकी तुम किसकी बात कर रहे हो, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।” ग्रीष्मा ने लापरवाही से जवाब दिया।

ध्रुव उसकी बात का कोई जवाब देता, उससे पहले ग्रीष्मा वहाँ से तारा की टेबल के पास चली गई। मजबूरन ध्रुव को भी उसके पीछे आना पड़ा।

“तुम अभी तक गई नहीं यहाँ से?” ध्रुव ने चेयर पर बैठते हुए कहा।

“ओह, हेलो… भले ही मैं यहाँ आपके काम के लिए आई थी, लेकिन जोधपुर आपके पापा जी का तो है नहीं, जो आपने कहा और चली जाऊँ।” तारा ने आँखें तरेरकर जवाब दिया।

“जोधपुर मेरे पापा जी का नहीं है, लेकिन अभी तुम जिससे मिलने आई हो, वह मेरी होने वाली वाइफ है।” ध्रुव चिढ़कर बोला।

“अब तुम दोनों बहस करना बंद करोगे? ध्रुव, मैंने तारा को अपनी असिस्टेंट के तौर पर हायर किया है।” ग्रीष्मा उन दोनों की बहस को बंद कराते हुए बीच में बोली।

“अगर हायर कर लिया है तो वापस निकाल दो। मुझे यह लड़की अपने आसपास नहीं चाहिए।” ध्रुव ने गुस्से में कहा।

“मैं इस बार आपके कहने पर चली जाने वाली नहीं। आपको मुझे काम पर नहीं रखना तो मत रखिए ना… क्या कहा आपने, मैं आपके आसपास नहीं होनी चाहिए… यकीन मानिए, मिस्टर ध्रुव सिंघानिया, मुझे आपके आसपास रहने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं तो चाहती हूँ कि आप मुझसे दूर रहें… दूर से भी दूर… इतना दूर जितना कि…” बोलते हुए तारा रुक गई और कुछ सोचने लगी।

ध्रुव और ग्रीष्मा उसकी तरफ़ देख रहे थे। अचानक तारा ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, “जितना कि ध्रुव-तारा है।”

उसकी बात सुनकर ग्रीष्मा के चेहरे पर मुस्कान थी, जबकि ध्रुव गुस्से से उसे घूर रहा था।

“ध्रुव, तुम्हें यह पसंद आई हो या ना आई हो, लेकिन मुझे यह बहुत अच्छी लगी। अभी-अभी इसकी सेंटेंस से पता चला कि तुम दोनों का नाम भी एक साथ लिया जाता है… ध्रुव-तारा…” ग्रीष्मा ने कहा।

“मेरा नाम कभी इसके साथ नहीं जुड़ सकता।” उसकी बात सुनकर ध्रुव ने गुस्से में जवाब दिया और वहाँ से उठकर चला गया।

“लगता है यह आपसे भी नाराज़ हो गए। मेरे आने के एक ही दिन में आप दोनों के बीच इतना कुछ हो गया। मुझे यहाँ से चले जाना चाहिए। आप किसी और को हायर कर लीजिएगा।” तारा उठकर जाने लगी। ग्रीष्मा ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका।

“तुम उसकी फ़िक्र मत करो। कभी-कभी वह बहुत ज़्यादा इरिटेट हो जाता है। तुम बैठो यहाँ।” ग्रीष्मा ने कहा।

“आपने मुझे काम पर रखा, इस वजह से वह बेवजह आपसे झगड़ा करेंगे। कहीं ना कहीं मैं आप दोनों के बीच में आ गई हूँ।” तारा ने वहाँ बैठते हुए जवाब दिया।

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ग्रीष्मा ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कहा, “हम दोनों के बीच में कोई नहीं आ सकता। रही बात झगड़ा करने की तो ध्रुव मुझसे कभी नाराज़ हो ही नहीं सकता, और तुम मेरे लिए काम कर रही हो। ध्रुव को मैं समझा लूँगी, लेकिन तुम अब पीछे मत हटना।”

तारा ग्रीष्मा के लिए काम नहीं करना चाहती थी, लेकिन ग्रीष्मा ने जैसे-तैसे करके उसे मना ही लिया था।

“आप गुजरात से हैं ना? क्या मुझे आपके साथ वापस गुजरात चलना होगा?” काम के लिए हाँ कहने के बाद तारा ने पूछा।

“भले ही मैं गुजरात से हूँ, लेकिन ध्रुव की फैमिली जयपुर से है। शादी की तैयारियाँ अच्छे से हो जाएँ, इसलिए दोनों फैमिली एक साथ ध्रुव के घर पर रुकी है। तुम भी हमारे साथ वहीं पर चलना।” ग्रीष्मा ने बताया।

“आपका सही है… मतलब शादी से पहले ही ससुराल वालों को अच्छे से देख-परख लो। दोनों में बहुत प्यार होगा ना… तभी दोनों की लव मैरिज हो रही है।” तारा झट से बोली।

तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा हल्की सी हँसी और फिर जवाब में कहा, “जो हम दोनों से पहली बार मिलता है, उसे पहली बार में यही लगता है। तारा, हम दोनों की लव मैरिज नहीं, अरेंज मैरिज हो रही है। ध्रुव के पापा और मेरे पापा बरसों पुराने दोस्त हैं और साथ में बिज़नेस पार्टनर्स भी… उन्होंने अपनी दोस्ती रिश्तेदारी में बदलना तय किया और हम दोनों की शादी फ़िक्स कर दी।”

“तब तो आप दोनों एक-दूसरे को काफी अच्छे से जानते होंगे।” तारा काफी एक्साइटेड होकर सब पूछ रही थी।

“अब मैं यह भी नहीं कह सकती। हम दोनों एक-दूसरे से पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन मैं पिछले कई सालों से न्यूयॉर्क में स्टडी कर रही थी। इस बीच ध्रुव से मिलना नहीं हुआ। मैं अभी तीन महीने पहले ही वापस लौटी हूँ, तब ही मुझे इस सगाई के बारे में पता चला।” ग्रीष्मा ने अपने और ध्रुव के बारे में तारा को सब कुछ बता दिया था। वह उन दोनों की कहानी बहुत गौर से सुन रही थी।

“क्या आपको इस शादी से कोई एतराज नहीं है?” तारा ने हैरानी से पूछा।

“मुझे क्यों एतराज होगा? ध्रुव अच्छा लड़का है और साथ ही मेरे मॉम-डैड को पसंद है। चलो, अब इन सब के बारे में छोड़ो और तुम खाना ऑर्डर करो। मैं ध्रुव को लेकर आती हूँ।” ग्रीष्मा ने कहा और वहाँ से ध्रुव को बुलाने के लिए बाहर आई।

ध्रुव अपनी गाड़ी के पास खड़ा, ऊपर आसमान की तरफ़ तारों को देख रहा था।

ग्रीष्मा उसके पास जाकर दोनों कान पकड़कर खड़ी हो गई। “आई नो, मैंने तुमसे बिना पूछे उसे काम पर रख लिया, लेकिन जिस तरह से तुमने उसे काम से निकाला था, मेरे मन में गिल्ट था कि हमारी वजह से उसकी नौकरी चली गई।”

“तुम बहुत अच्छी हो, ग्रीष्मा, लेकिन ज़रूरी नहीं दुनिया में लोग इतने ही अच्छे हों।” बोलते हुए ध्रुव ने ग्रीष्मा को गले लगा लिया।

“मुझे पता था तुम मुझसे नाराज़ रहोगे नहीं। वैसे भी, सिर्फ़ पन्द्रह दिन की ही तो बात है। पन्द्रह दिन बाद जब हमारी शादी हो जाएगी तो वह लड़की यहाँ से वापस चली जाएगी।” ग्रीष्मा ने उसे मनाते हुए कहा।

“ठीक है… लेकिन उसे समझा देना कि वह मुझसे दूर रहे।” ध्रुव ने ग्रीष्मा से अलग होकर कहा।

“ओके… अब गुस्सा छोड़ो। चलो ना, अंदर चलते हैं। मुझे बहुत भूख लगी है।” ग्रीष्मा ने ध्रुव के जवाब का इंतज़ार किए बिना ही उसे खींचकर अंदर ले जाने लगी।

अंदर तारा ने खाना ऑर्डर कर लिया था और वह उन दोनों के आने का इंतज़ार कर रही थी। ग्रीष्मा के साथ ध्रुव को देखकर तारा समझ गई थी कि उसने उसे मना लिया होगा।

तीनों ने साथ में डिनर किया। खाना खाते वक़्त ध्रुव ने एक शब्द भी नहीं बोला और वह चुपचाप तारा की तरफ़ घूरकर देख रहा था। उसे ग्रीष्मा का डिसीजन अच्छा नहीं लगा, लेकिन उसकी ज़िद के आगे वह कुछ नहीं कह सका। खाना खाने के बाद वे तीनों साथ में जयपुर के लिए रवाना हो चुके थे।

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