MiniFM
Previous
Next
Chapter 12

The Replaced bride - Chapter 12

The Replaced bride

ध्रुव ग्रीष्मा को लेकर घर आ चुका था। उसके गले पर लगी चोट को देखकर सब परेशान हो गए, और वे ध्रुव से इसका कारण पूछ रहे थे।

अचानक, जब उन्होंने ध्रुव के मुँह से शादी जल्दी करने की बात सुनी, तो सब चौंक गए।

“ये कैसी बातें कर रहे हो तुम? जो शादी १५ दिन बाद होने वाली है, वो अगले ३ दिन में कैसे होगी?” रत्ना जी ने पूछा।

“कुछ हुआ है क्या ध्रुव? जब से तुम आए हो, कुछ नहीं बोल रहे? इधर ग्रीष्मा को भी चोट लगी है। क्या कुछ ऐसा है जो तुम हम सब से छुपा रहे हो?” भावेश जी ने उसके पास आकर पूछा।

“नहीं पापा, ऐसा कुछ नहीं है।” ध्रुव ग्रीष्मा के पापा को पापा कह कर ही बुलाता था। “मैं नहीं चाहता कि शादी में अब और देरी हो। ग्रीष्मा भी मेरे इस डिसीजन से एग्री करती है। है ना, ग्रीष्मा?” ध्रुव ने ग्रीष्मा की तरफ देखकर पूछा।

ग्रीष्मा ने पलकें झपकाईं कर अपनी हामी भरी। हालाँकि वो भी ध्रुव के इस अचानक लिए फैसले से काफी चौंक गई थी, लेकिन उसने चेहरे से ये जाहिर नहीं होने दिया।

उसके हामी भरने पर तारा ने अपने मन में सोचा, “आखिर अपनी मनमानी करोगे तुम ध्रुव सिंघानिया? बेचारी ग्रीष्मा अपने मम्मी-पापा की वजह से तुम्हारे साथ फँस गई है। वो तो तुमसे शादी भी नहीं करना चाहती, और तुम जबरदस्ती शादी को प्रीपोन कर रहे हो, वो भी उसका नाम लेकर.....”

“लेकिन बेटा, इतनी जल्दी तैयारियाँ कैसे हो पाएंगी? अभी तक तो कुछ नहीं हुआ। रिश्तेदारों को क्या कहेंगे?” रत्ना जी परेशान होकर बोलीं।

“डोंट वरी माँ, हम सब मिलकर कर लेंगे। मैं वेडिंग प्लानर को यहाँ आने का बोल देता हूँ। एक और प्लानर हायर कर लेंगे, और तारा भी तो है।” ध्रुव ने उन्हें समझाया।

“मुझे तो आपकी जल्दबाजी का कारण बिल्कुल समझ नहीं आ रहा बेटा, जहाँ हम पिछले इतने सालों से रुके हुए हैं, वहाँ १५ दिन और रुक जाएँगे तो क्या हो जाएगा?” सरिता ने कहा।

वे सब ध्रुव के इस डिसीजन का कारण नहीं समझ पा रहे थे। वे लोग परेशान न हों, इसलिए ध्रुव ने भी उन्हें कुछ नहीं बताया। सब लोग उससे बहस कर रहे थे, और कोई भी इस फैसले से खुश नहीं था। ध्रुव उनको समझाने की पूरी कोशिश कर रहा था, लेकिन कोई भी उसकी बात मानने को तैयार नहीं था।

“अच्छा अच्छा, अब बस भी करो।” गायत्री जी ने तेज आवाज में कहा, “जब छोरा-छोरी राजी है, हमें शादी से कोई दिक्कत नहीं है, तो शादी ३ दिन बाद हो या १५ दिन बाद, क्या फर्क पड़ता है।”

गायत्री जी के बीच में बोलने की वजह से उन लोगों को ध्रुव के डिसीजन पर हामी भरनी पड़ी।

“ठीक है, हम देख लेंगे। आप लोग पैकिंग कीजिए। हम कल सुबह जल्दी ही उम्मेद भवन के लिए निकलते हैं।” भावेश जी ने कहा।

ध्रुव के शादी जल्दी करने की बात सुनकर उन सब लोगों का ध्यान ग्रीष्मा की चोट से हट गया था। वह चुपचाप, उदास खड़ी, उन सब लोगों की बातें सुन रही थी। तारा का ध्यान भी ग्रीष्मा में लगा था। उसके चेहरे से साफ लग रहा था कि शादी जल्दी होने की वजह से ग्रीष्मा बिल्कुल खुश नहीं थी।

सब लोग वहाँ से जाने को हुए, तभी साहित्य ने पूछा, “वैसे भैया, आपने बताया नहीं कि होने वाली भाभी को चोट कैसे लगी? और तारा दीदी वाला जवाब भी अभी अधूरा है।”

उसके अचानक पूछने पर सबका ध्यान वापस ग्रीष्मा पर चला गया। ध्रुव ने उसकी तरफ घूर कर देखा।

साहित्य ने अपने मुँह पर अंगुली लगाते हुए कहा, “मैं तो बस पूछ रहा था।”

“हाँ ध्रुव, तुमने बताया नहीं कि तारा को तुम लोग अकेले छोड़कर कहाँ चले गए थे? और ग्रीष्मा, उसे चोट कैसे लगी?”

ध्रुव ने ग्रीष्मा की तरफ देखा और कहा, “एक ड्रेस ट्राई करते वक़्त, उसमें लगे मैटेलिक डिज़ाइन से ग्रीष्मा को चोट लग गई। तारा बाहर थी, इस वजह से उसे बताने का मौका नहीं मिला। ग्रीष्मा के चोट लगने की वजह से मैं इतना घबरा गया था कि मुझे कुछ और सूझा ही नहीं, और मैं उसे सीधा हॉस्पिटल लेकर चला गया।”

Advertisement

जैसे ही ध्रुव ने अपनी बात खत्म की, तारा उसकी तरफ आँखें बड़ी करके देखने लगी। “झूठा कहीं का.....” उसने धीरे से कहा।

“अब आप लोगों की कचहरी लगना हो गया हो तो रिश्तेदारों को फ़ोन करके बता देते हैं। सिंघानिया परिवार के सबसे बड़े बेटे की शादी है, ऐसे ही ४ लोगों के बीच थोड़े ना होगी। अरे, धूमधाम से शादी करेंगे, और सबको बुलाएँगे।” गायत्री देवी ने कहा।

ध्रुव ने कुछ सोचा और फिर खोए हुए स्वर में कहा, “नहीं दादी..... ये शादी एक प्राइवेट अफ़ेयर होगी, जहाँ पर हमारे घरवालों के अलावा और कोई मौजूद नहीं होगा। हम शादी के बाद एक रिसेप्शन थ्रो कर लेंगे, जिसमें सब आ जाएँगे, और वही आप ग्रीष्मा की मुँह-दिखाई कर दीजिएगा।”

“हो क्या गया है तुझे? आज एक के बाद एक झटके दिए जा रहा है। कभी शादी जल्दी करनी है, तो कभी रिश्तेदारों को नहीं बुलाना। अरे, क्या जवाब देंगे हम उन्हें?” रत्ना जी गुस्से में बोलीं।

“आप देख लीजिएगा कि आपको क्या जवाब देना है, लेकिन इस शादी में हमारी और ग्रीष्मा की फैमिली के अलावा और कोई मौजूद नहीं होगा, यहाँ तक कि तारा भी नहीं... आपको मेरा डिसीजन मंज़ूर है, तो कहिए, वरना मैं अभी ग्रीष्मा को अपने साथ कोर्ट ले जाता हूँ। हम दोनों वहीं शादी कर लेंगे।”

सब लोग ध्रुव की तरफ हैरानी से देख रहे थे। अब तक वह हर एक बात शांति से बता रहा था, लेकिन इस बार उसने गुस्से में अपना फैसला सुनाया। सब के पास उसे मानने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।

ना चाहते हुए भी सब ने हामी भरी, और वहाँ से अपने-अपने कमरे को चले गए।

________

ग्रीष्मा अपने कमरे में आराम कर रही थी। चोट लगे होने की वजह से तारा उसकी पैकिंग कर रही थी। शादी जल्दी करने के डिसीजन से ग्रीष्मा बिल्कुल भी खुश नहीं थी। वह चुपचाप चेयर पर बैठी, वहाँ लगे एक शोपीस को देख रही थी।

“मैं जानती हूँ आप इस शादी से खुश नहीं हैं, ग्रीष्मा।” तारा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा।

“नहीं तारा..... मैं इस शादी से खुश हूँ, लेकिन मैं जल्दी शादी करने के डिसीजन से बिल्कुल खुश नहीं हूँ। ऊपर से ध्रुव ने ये भी कह दिया कि घरवालों के अलावा और कोई शादी में नहीं आ सकता। तुम नहीं जानती, मेरे सारे फ्रेंड्स इस शादी को अटेंड करने के लिए एक्साइटिड हो रहे थे। कुछ तो न्यूयॉर्क से भी आने वाले थे।”

“उन्होंने तो मुझे भी शादी अटेंड करने से मना कर दिया।” तारा ने मायूस होकर कहा।

“तुम उसकी फ़िक्र मत करो। मैं तुम्हारे लिए ध्रुव को मना लूँगी।” ग्रीष्मा ने मुस्कुरा कर कहा।

जवाब में तारा भी मुस्कुरा दी। “हमें मिले अभी सिर्फ़ दो ही दिन हुए हैं, फिर भी ऐसा लगता है जैसे कितने वक़्त से एक-दूसरे को जानते हैं। आप बहुत अच्छी हैं, ग्रीष्मा..... आप ध्रुव सिंघानिया से कुछ कहें या न कहें, लेकिन मैं उनसे बात करके रहूँगी।”

“उसका कोई फ़ायदा नहीं है तारा.....वो नहीं मानने वाला। उल्टा तुम दोनों की एक और लड़ाई हो जाएगी।”

“जब इतनी लड़ाइयाँ हुई हैं, वहाँ एक और सही। बात तो मैं उनसे करके रहूँगी। उन्हें सब लोगों को बता देना चाहिए था कि बुटीक में क्या हुआ था।”

तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा ने जवाब में कहा, “इस बात से तो मैं भी हैरान हूँ कि ध्रुव ने सबसे सच क्यों छुपाया। वह मुझे सीधा यहाँ ले आया, जबकि हमें तो पुलिस स्टेशन जाना चाहिए था।”

“उस आदमी के बारे में उन्होंने कुछ बताया, जो हमें लिफ़्ट में मिला था?”

ग्रीष्मा ने ना में सिर हिलाते हुए कहा, “उसने कहा उसे कुछ याद नहीं है।”

“ठीक है, मैंने आप की पैकिंग कर दी है। अब मैं चलती हूँ, आप आराम कर लीजिएगा।” ग्रीष्मा को गुड नाईट बोलकर तारा अपने कमरे में जाने लगी।

Advertisement

उसने देखा गार्डन में ध्रुव किसी से कॉल पर बात कर रहा था, वह उससे बात करने के लिए गार्डन में गई।

“मैं कुछ नहीं जानता। मुझे उस आदमी के बारे में हर एक डिटेल चाहिए।” फ़ोन पर बात करते हुए ध्रुव दूसरी तरफ़ मुड़ा, तो उसे तारा दिखाई दी। “मैं तुमसे बाद में बात करता हूँ।” कहकर ध्रुव ने कॉल कट कर दिया।

“क्या मैं जान सकता हूँ तुम इस वक़्त मेरे पीछे क्या कर रही थी?” उसने पूछा।

“जी ज़रूर..... बिल्कुल जान सकते हैं। मैं यहाँ आपसे बात करने के लिए आई थी। आपने घरवालों को झूठ क्यों बोला?”

“मेरे मैटर्स में टांग अड़ाना बंद करो। मैं अपने घरवालों से झूठ बोलूँ या सच.....इट्स नन ऑफ़ योर बिज़नेस..... इट वुड बी बेटर फ़ॉर यू कि तुम जिस काम के लिए आई हो, वह करो और यहाँ से अपने पैसे लेकर चली जाओ।” ध्रुव ने तीखे शब्दों में जवाब दिया।

“सही कह रहा था वह लिफ़्ट वाला आदमी..... आप हर एक चीज़ पैसों से तोलते हैं। आपके लिए इमोशंस की कोई वैल्यू नहीं है। क्या आपने एक बार भी ग्रीष्मा से पूछना ज़रूरी समझा कि वह आप के इस फैसले से खुश भी है या नहीं?”

“ग्रीष्मा मेरे हर एक फैसले से खुश है।”

“वह आपके फैसले से खुश नहीं है। आप जबरदस्ती अपनी बात उन पर थोपते हैं। जैसे कि उनके घरवालों और आप ने मिलकर यह शादी जबरदस्ती उन पर थोपी है।” तारा एक साँस में सब कुछ बोल रही थी।

“ये क्या बकवास कर रही हो तुम?” ध्रुव ने आँखें दिखाकर कहा।

“ये जो आपकी दो बड़ी-बड़ी बटन जैसी आँखें हैं, मैं इनसे डरती नहीं हूँ। अभी आप नहीं जानते तारा को, वह हर एक सिचुएशन से निपटना जानती है। अरे, आप जैसे लाखों लोग मिलते हैं मुझे दिन में.....”

“लाखों लोग?” ध्रुव ने हल्का हँसते हुए कहा। “तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। अब मेरा रास्ता छोड़ो और मुझे जाने दो। लोगों को तुम्हारी तरह बात करने के अलावा और भी काम होते हैं।” ध्रुव ने उसे साइड किया और वहाँ से जाने लगा।

तारा उसके पीछे से चिल्लाई, “हाँ हाँ, चले जाओ ध्रुव सिंघानिया..... मैं ग्रीष्मा की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ तुम्हारी शादी उससे बिल्कुल नहीं होने दूँगी। मैं उसके साथ अन्याय नहीं होने दूँगी।”

“लगता है यह लड़की पागल हो गई है, जो कुछ भी बकवास किए जा रही है।” ध्रुव ने खुद से कहा और वहाँ से सोने के लिए चला गया।

उसके जाने के बाद तारा भी वहाँ से अपने कमरे में चली गई। वह अपने कमरे में आई, तो साहित्य और साक्षी वहाँ उसका इंतज़ार कर रहे थे।

“थैंक गॉड पार्टनर, आप यहाँ आ गई। हमें आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी थी।” साक्षी ने कहा।

“बात तो मुझे भी तुम दोनों से करनी थी, और वह तुम्हारे भाई से जुड़ी हुई है। अच्छा, पहले तुम बताओ, तुम्हें क्या बात करनी थी?” तारा ने पूछा।

“हमारी बात ग्रीष्मा से जुड़ी हुई है, और वह भी बहुत ज़रूरी... ग्रीष्मा... वह ग्रीष्मा भाई को धोखा दे रही है।” जैसे ही साहित्य ने बताया, तारा उसकी तरफ़ आँखें बड़ी करके देखने लगी।

अब तक वह ध्रुव को ग़लत समझती थी, जबकि साहित्य और साक्षी उसे ग्रीष्मा के बारे कुछ अलग ही बता रहे थे।

★★★★

हैलो रीडर्स....

पार्ट कैसा लगा? समीक्षा में ज़रूर लिखिएगा। अच्छा, आपको कहानी में अब तक कौन-सा कैरेक्टर अच्छा लगा, यह भी ज़रूर बताइएगा।

कीप सपोर्टिंग ऑलवेज

Was this chapter good?