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Chapter 19

The Replaced bride - Chapter 19

The Replaced bride

ध्रुव के सामने यह सच्चाई आ चुकी थी कि उसकी शादी ग्रीष्मा से नहीं, बल्कि तारा से हुई थी। वह इन सब का कसूरवार तारा को समझ रहा था।

बंद कमरे में तारा वहाँ लगे काउच पर लेटी थी, तो वहीं ध्रुव बेड पर सो रहा था। जो भी हुआ था, उससे दोनों की आँखों से नींद कोसों दूर थी।

ध्रुव ग्रीष्मा के बारे में सोच रहा था। “कहाँ कमी रह गई थी मेरे प्यार में, जो तुम मेरे साथ ऐसा करके चली गई? दिल तो चाहता है कि तारा की सारी बातें झूठी निकलें। तुम जहाँ भी हो, सही-सलामत हो… लेकिन दिमाग चाहकर भी तुम पर यकीन नहीं कर पा रहा। आज पहली बार तुम्हारे बजाय किसी अनजान लड़की पर यकीन कर रहा हूँ।” ध्रुव की आँखें नम थीं।

तारा ने एक नज़र ध्रुव की तरफ़ देखा जो बेड पर करवटें ले रहा था। “अब तक मैं तुम्हारे बारे में गलत समझती रही। तुम्हें गलत मानती रही। हो सकता है कि तुम एक घमंडी, पैसे वाला बिज़नेसमैन हो, लेकिन फिर भी तुम्हारे साथ अच्छा नहीं हुआ। अब ग्रीष्मा ने यह किसी मजबूरी की वजह से किया है या शादी होने से पहले उसे यह रियलाइज़ हो गया कि वह तुम्हारे साथ अपनी पूरी लाइफ़ नहीं बिता सकती… यह सब तो वही बता सकती है। शायद यही सोचकर शादी से चली गई हो। मैं उसे गलत नहीं कहती… जब उसे तुमसे प्यार ही नहीं था, तो वह तुम्हारे साथ कैसे पूरी ज़िंदगी बिता सकती थी? तुम जैसे इंसान के साथ तो बिलकुल नहीं… जो हर एक चीज़… हर एक इंसान को अपने हिसाब से चलाना चाहता है। जो भी हो, उसने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। वह डायरेक्ट शादी से भी मना कर सकती थी। उससे मुझे तुम्हारे साथ फँसा दिया।” तारा के चेहरे पर गुस्से के भाव थे। वह ध्रुव को एकटक देख रही थी। वह काफी बेचैन था।

अचानक ध्रुव की नज़र तारा पर पड़ी जो उसकी तरफ़ देख रही थी। वह बेड से उठकर बैठ गया।

“तुम्हें मेरे लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। तुम अपनी फ़िक्र करो… रात बीतने में अब कुछ ही समय बाकी है और कल… कल का दिन तुम्हारे लिए भारी होने वाला है।”

“क्या तुम मेरा साथ नहीं दोगे?” तारा ने पूछा।

“और मैं तुम्हारा साथ क्यों दूँ?”

“क्योंकि हमारी शादी हुई है और तुमने मुझे वादा किया था कि हर परिस्थिति में मेरा साथ दोगे।” तारा भी उठकर बैठ गई।

“तुम किस शादी की बात कर रही हो? तुमसे यह शादी धोखे से हुई है, तारा… इस बात के लिए मेरी फ़ैमिली का पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें कभी माफ़ नहीं करूँगा।”

“लेकिन आप अच्छे से जानते हैं मैंने यह जानबूझकर नहीं किया। कल आप साक्षी से बात लीजिएगा… वह आपको मेरी बात पर यकीन दिला देगी।”

उसकी बात सुनकर ध्रुव ने गहरी साँस लेकर छोड़ी। “अगर साक्षी तुम्हारी बात पर यकीन दिला भी देगी तो क्या फ़ायदा? साक्षी पूरे टाइम तुम्हारे साथ नहीं थी। हो सकता है तुमने पहले उसे किडनैप करवा लिया हो… और वह तो बच्ची है। कोई भी आसानी से उसके सामने इमोशनल ड्रामा करके उसे मैनिपुलेट कर सकता है।”

“हद हो गई… आप बार-बार मुझ पर इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं। आपको ग्रीष्मा की गलती दिखाई नहीं देती। आप देखना ही नहीं चाहती कि उसने आपको धोखा दिया है।” तारा ने सख्त आवाज़ में कहा।

ध्रुव ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसे चुप देखकर तारा फिर बोली, “कल मैं आपकी फ़ैमिली वालों को सब कुछ सच-सच बता दूँगी। बाकी आप जानें और आपकी फ़ैमिली… मुझे आप लोगों से कोई लेना-देना नहीं है। मैं कल ही यहाँ से वापस चली जाऊँगी।”

“तुम्हें सच में यह लगता है मैं तुम्हें ग्रीष्मा का पता बताए बिना यहाँ से जाने दूँगा?”

ध्रुव की बात सुनकर तारा झुँझला गई। वह चिढ़कर बोली, “मैंने कह दिया ना मुझे उसका नहीं पता। मैं कल आपके घरवालों से बात करके उन्हें सब कुछ समझा दूँगी। आपको मेरी कोई भी मदद की ज़रूरत पड़े, तो मुझे कॉल कर लीजिएगा।”

“किस गलतफ़हमी में जी रही हो तुम? जब तक ग्रीष्मा का पता नहीं चल जाता, वापस अहमदाबाद जाना तो दूर की बात है, राजस्थान से एक कदम बाहर नहीं रखने दूँगा।” ध्रुव ने गुस्से में कहा।

“आप कुछ नहीं कर पाएँगे, मिस्टर ध्रुव सिंघानिया… आपको मुझे यहाँ रोकने का कोई हक़ नहीं है।”

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“हक़ की बात तो अब तुम मत ही करो। हम दोनों हस्बैंड-वाइफ़ हैं… याद है या भूल गई? घूँघट के पीछे तुम ही थीं, ना कि ग्रीष्मा।”

“घूँघट के पीछे कोई भी हो, किसी को क्या पता चलता है? आपके पास कोई प्रूफ़ नहीं है कि मैं आपकी वाइफ़ हूँ। आप मुझे नहीं रोक पाएँगे, मिस्टर सिंघानिया…”

“तुम मुझे चैलेंज मत करो, तारा, वरना बहुत भारी पड़ेगा।” ध्रुव ने गुस्से में कहा, “मैंने तुम्हें ज़्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन ग्रीष्मा के मॉम-डैड… मेरी फ़ैमिली और बाकी रिश्तेदार… वह तुम्हारा जीना हराम कर देंगे। सही-सही कसर पुलिस पूरी कर देगी। ग्रीष्मा का पता तो तुम्हें बताना ही पड़ेगा।”

तारा ने ध्रुव की बात का कोई जवाब नहीं दिया और करवट पलटकर सो गई। ध्रुव भी उसकी तरफ़ पीठ करके लेट चुका था। दोनों एक-दूसरे से बात नहीं कर रहे थे। दिन निकलने में अभी थोड़ा ही टाइम बचा था। बाकी लोगों के बारे में सोचकर तारा को काफी घबराहट हो रही थी, जबकि ध्रुव बार-बार ग्रीष्मा को कॉल लगा रहा था।

_________

अगली सुबह सिंघानिया परिवार शादी के बाकी रस्मों की तैयारी कर रहा था। ध्रुव और तारा अभी तक अंदर थे।

रत्ना जी और सरिता जी साथ मिलकर देव पूजा की तैयारी कर रही थीं। साक्षी भी वहीं पर मौजूद थी। सच पता होने की वजह से वह खोई हुई सी वहाँ बैठी थी।

अचानक रत्ना जी का ध्यान उसकी तरफ़ गया। उन्होंने उसका हाथ पकड़कर कहा, “ध्यान कहाँ है, डब्बू तुम्हारा? यह देखो, नीचे सिंदूर गिरा दिया। तुम आजकल के बच्चे कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते।” उन्होंने साक्षी को डाँटा।

“जाने दीजिए ना, बहन जी… बच्ची है।” सरिता जी ने उन्हें चुप करवाने की कोशिश की।

“क्या बच्ची है… अब इतनी भी बच्ची नहीं रही कि कोई काम ठीक से ना कर पाए। कितने दिनों से मुँह बनाकर घूम रही है। शादी की किसी भी रस्म में उसने ठीक से हिस्सा नहीं लिया। अभी नहीं समझेगी तो कब समझेगी?” रत्ना जी ने कहा।

साक्षी उनकी तरफ़ चुपचाप देख रही थी। वह तारा के लिए परेशान थी, इसलिए उसने कुछ नहीं कहा और वहाँ से उठकर चली गई।

उसके वहाँ से उठकर जाने की वजह से रत्ना जी और नाराज़ हो गईं। “देखो… इन्हें बस कुछ मत कहो। थोड़ा सा डाँट दिया तो नाराज़ होकर चली गई।”

ध्रुव की दादी, गायत्री देवी वहाँ पर मौजूद थीं। उन्होंने रत्ना को चुप कराते हुए कहा, “तुम्हारी छोटी-छोटी बातों पर टेंशन लेने की आदत जाएगी नहीं, रत्ना बहू… कुछ बताओगी, क्या हुआ है?”

“कुछ नहीं, माँ… पता नहीं, सुबह से घबराहट हो रही है। अंदर ही अंदर एक डर लग रहा है कि कुछ गलत होने वाला है।” रत्ना ने परेशान स्वर में कहा।

“अब तो शादी हो गई है। फिर किस बात की घबराहट? चिंता मत करो, सब सही होगा।” गायत्री ने उसे आश्वासन दिया और काम में ध्यान देने को कहा।

उनसे कुछ दूरी पर मौजूद साक्षी ने उनकी सारी बातें सुन ली थीं। “यह मम्मी के पास कोई सुपर पावर है क्या, जो उन्हें पहले ही इंट्यूशन्स हो जाते हैं कि कुछ गलत होने वाला है? अब तक तो ध्रुव भैया को पता चल गया होगा कि ग्रीष्मा के बजाय उनकी शादी तारा दीदी, आई मीन तारा भाभी से हो गई है। वह इतने शांत क्यों हैं? अब तक तो उन्हें यहाँ हंगामा मचा देना चाहिए था। भाभी भी मुझ पर गुस्सा करेंगी कि मैंने शादी क्यों नहीं रुकवाई। घरवाले अलग से उन पर नाराज़ होंगे… प्लीज़, भगवान जी, संभाल लीजिएगा। इन सब का गुस्सा मुझ पर ही आना है।” साक्षी परेशान होकर इधर-उधर चहलकदमी कर रही थी।

रत्ना की नज़र उस पर पड़ी, तो उसने आवाज़ लगाकर कहा, “साक्षी, कुछ और नहीं कर सकती तो कम से कम अपने भैया और भाभी को उठने को बोल सकती हो।”

“मुझे भी हैरानी हो रही है कि अभी तक ग्रीष्मा उठी क्यों नहीं। उसे तो सुबह जल्दी उठने की आदत है।” ग्रीष्मा की माँ, सरिता जी ने कहा।

“आज की सुबह हमेशा की तरह नहीं है, सरिता… अब तक ग्रीष्मा अकेली थी, अब उसके साथ ध्रुव है।” गायत्री देवी ने कहा। फिर उन्होंने साक्षी को आवाज़ लगाई, “साक्षी, कोई ज़रूरत नहीं है उन्हें उठाने की… देव पूजा में अभी वक़्त है। तू जा, जाकर तेरे काम कर ले।”

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साक्षी उनकी तरफ़ देखकर मुस्कुराई और मन ही मन कहा, “थैंक गॉड, दादी ने बचा लिया। लेकिन कब तक… मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा है। ऐसे लग रहा है कि अभी ब्लास्ट हो जाएगा। ऐसा करती हूँ, साहित्य को सब कुछ बता देती हूँ। शायद वह मेरी कुछ हेल्प कर पाए।”

साक्षी जल्दी से साहित्य के पास गई। वह अभी तक सो रहा था। साक्षी ने उसे जगाने के लिए उसके मुँह पर पानी के छींटे मारे।

अचानक मुँह पर पानी गिरने से साहित्य झुँझलाकर उठा। “क्या कर रही हो, साक्षी… घरवाले कम हैं जल्दी उठाने के लिए, जो अब तुम भी आ गई।”

“अभी सोने का नहीं, जागने का टाइम है। मुझे तुमसे बहुत इम्पॉर्टेन्ट बात शेयर करनी है।”

साहित्य बेमन से उठकर बैठा। “अब कौन सी इम्पॉर्टेन्ट बात रह गई? हमारा मिशन तो वैसे भी फ़्लॉप हो गया, ग्रीष्मा और भाई की शादी हो गई। तारा दीदी वापस जा रही है क्या?” साहित्य ने अंदाज़ा लगाया।

“नहीं, साहित्य… मुझसे एक बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई। इस वजह से मुझसे सारे घरवाले, यहाँ तक कि तारा दीदी भी नाराज़ हो जाएँगी।”

“ऐसा क्या कर दिया तुमने?”

“वह एक्चुअली, मेरी वजह से ध्रुव भैया और तारा दीदी की शादी हो गई। हमारी भाभी ग्रीष्मा नहीं, तारा दीदी हैं।” जैसे ही साक्षी ने कहा, साहित्य एक झटके में खड़ा हुआ।

उसने आँखें बड़ी करके कहा, “देख, साक्षी… ऐसे भी मज़ाक मत किया कर कि सामने वाले को हार्ट अटैक आ जाए। सुबह-सुबह तुझे बेवकूफ़ बनाने के लिए मैं ही मिला?”

“मैं झूठ नहीं बोल रही… कल रात शादी से पहले ग्रीष्मा किसी काम से बाहर चली गई थी और उसने अपने पीछे तारा दीदी को बिठा दिया था। उसने प्रॉमिस किया था कि वह शादी होने से पहले आ जाएगी, लेकिन वह नहीं आई। तारा दीदी ने मुझे कहा था कि अगर ग्रीष्मा टाइम पर नहीं आए तो मैं सबको सच बता दूँ और इस शादी को रुकवा दूँ। पर ना जाने क्यों मेरा शादी रुकवाने का मन ही नहीं हुआ और…”

“और तूने अपने हाथों अपनी लंका लगवा ली।” साहित्य सिर पकड़कर बोला, “तू कौन है… मैं तुझे नहीं जानता। आज से तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं है, बहन… चल, निकल यहाँ से…” साहित्य साक्षी को पकड़कर कमरे से बाहर निकालने लगा।

“प्लीज़, यार, साहित्य, ड्रामा मत कर। इस वक़्त मुझे सबसे ज़्यादा तुम्हारी ज़रूरत है।” साक्षी उसे दूर धकेलकर बोली।

“तूने यह कांड करने से पहले मुझसे पूछा था… इस बारे में कुछ-कुछ बताया था? अब जब सब गड़बड़ हो गया, तब तुझे मैं याद आ रहा हूँ। घरवाले हमारी जान लें या ना लें, उससे पहले ध्रुव भैया हमें ज़िंदा निगल लेंगे।”

“यही तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि सच जानने के बाद भी ध्रुव भैया ने अभी तक कुछ कहा क्यों नहीं? कहीं… कहीं ग्रीष्मा वापस तो नहीं आ गई, साहित्य।”

“देखो, जो हो गया सो हो गया, लेकिन अब शुभ-शुभ तो बोलो। मुझे तारा दीदी के लिए फ़िक्र हो रही है। घरवाले उन्हें गलत समझेंगे। हमने उन्हें समझाया था कि ग्रीष्मा पर यकीन ना करे, लेकिन…”

“हाँ, सही कहा। अब हमें ही तारा दीदी के लिए कुछ करना होगा। जानते हैं हम छोटे हैं, इसलिए घरवाले हमारी बात नहीं सुनेंगे, लेकिन फ़िलहाल के लिए तारा दीदी का सच प्रूफ़ करने के लिए हमें ही कुछ करना होगा। उनके पास और कोई सबूत नहीं है।”

“डोंट वरी, साक्षी, हम सब संभाल लेंगे। मैं बाहर जाकर बोलूँगा कि मुझे भी इस बारे में सब पता था।” साहित्य ने हल्का मुस्कुराकर कहा।

“क्या सच में?” उसकी बात सुनकर साक्षी के चेहरे पर चमक आ गई और उसने उसे जल्दी से गले लगा लिया। “यू आर द बेस्ट भाई… देखना… हम तारा दीदी को इस मुसीबत से बाहर निकाल लेंगे और फिर घरवाले भी उन्हें आराम से एक्सेप्ट कर लेंगे।”

साहित्य ने उसकी बात पर हामी भरी। दोनों ने ध्रुव और तारा से बात करके उन्हें सब समझाने का सोचा। साक्षी और साहित्य ध्रुव और तारा से बात करने के लिए उनके कमरे के आगे खड़े थे।

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