The Replaced bride - Chapter 9
The Replaced brideतारा और ग्रीष्मा शॉपिंग के लिए बाहर जाने वाले थे। वे ध्रुव के आने का इंतज़ार कर रही थीं। वहीं, ध्रुव घर पर आते ही सबसे पहले ग्रीष्मा के कमरे में आया। ग्रीष्मा अंदर बाथरूम में थी, और कमरे में तारा मौजूद थी।
ग्रीष्मा की जगह उसे वहाँ देखकर ध्रुव का मुँह बन गया।
“नाउ, डोंट टेल मी कि तुम हम दोनों के साथ चल रही हो?” ध्रुव ने इरिटेट होकर पूछा।
“अब मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती।” तारा ने कंधे उचकाकर जवाब दिया।
“इसका मतलब तुम हम दोनों के साथ चल रही हो?” ध्रुव ने दोहराते हुए कहा।
“इसका कोई और भी मतलब निकल रहा है, तो आप मुझे समझा दीजिए, मिस्टर सिंघानिया…” तारा ने हल्का मुस्कुराकर कहा।
“मैंने ग्रीष्मा के साथ टाइम स्पेंड करने का सोचा था, लेकिन तुम हर बार हम दोनों के बीच में आ जाती हो।” ध्रुव ने सीधे-सीधे तारा को कहा।
“पन्द्रह दिन की बात है, मिस्टर सिंघानिया, फिर आप दोनों के बीच में कोई नहीं आएगा। और वैसे भी, मैंने आपको उनके साथ टाइम स्पेंड करने के लिए मना नहीं किया है। शॉपिंग होने के बाद आप दोनों साथ में रह सकते हैं। मैं अपना देख लूँगी।” तारा ने भी एटीट्यूड से जवाब दिया।
ध्रुव ने उसकी तरफ़ देखकर सिर हिलाया और फिर कहा, “प्रॉब्लम तो यही है ना कि तुम हर जगह हमारे साथ रहोगी। मैं कैसे भूल सकता हूँ, मिस तारा, कि आपके रहते हुए कोई भी चीज़ सही कैसे हो सकती है?”
“तो ठीक है, मिस्टर सिंघानिया, आप यही बात ग्रीष्मा मैम को समझा दीजिए। मैं नहीं आऊँगी आप दोनों के साथ। वैसे भी, मैंने उन्हें पहले ही मना कर दिया था।” तारा ने धीरे से कहा।
वे दोनों आपस में बहस कर रहे थे, तभी ग्रीष्मा बाथरूम से बाहर आई। उसे देखते ही तारा ने कहा, “मैम, प्लीज़, इन्हें समझा दीजिए कि मेरे होते हुए उनकी प्राइवेसी में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। मैं आपके साथ जाने के लिए पहले ही मना कर चुकी हूँ, लेकिन आपने…”
तारा एक साँस में बोले जा रही थी, तभी ग्रीष्मा ने उसे चुप कराते हुए कहा, “अब बस भी करो, तुम दोनों। मैं चाहती थी कि तुम दोनों के बीच गहरी ना सही, लेकिन नॉर्मल फ़्रेंडशिप हो जाए, ताकि मेरे लिए चीज़ें आसान हों।”
“यह तो इस जन्म में बिल्कुल पॉसिबल नहीं है।” ध्रुव ने कहा।
“चलो, पहली बार ही सही, लेकिन हम किस बात पर एग्री तो करते हैं। सही कह रहे हैं यह, एक बार के लिए टॉम एंड जेरी की दोस्ती हो सकती है, नोबिता और जियान दोस्त बन सकते हैं… सूरज पूरब के बजाय पश्चिम में निकल सकता है, लेकिन हम दोनों की दोस्ती… हम दोनों की दोस्ती कभी नहीं हो सकती।” तारा ने ध्रुव की तरफ़ देखकर कहा।
“अच्छा-अच्छा, अब एग्ज़ांपल्स देना बंद करो। दोस्त नहीं बन सकते, लेकिन बहस तो मत किया करो। एंड, ध्रुव, तुम, मैं जहाँ भी जाऊँगी, तारा मेरे साथ रहेगी। एटलीस्ट शादी तक तो हर जगह…” ग्रीष्मा ने कहा।
“थैंक यू सो मच, मैम, आपने आसान शब्दों में समझा दिया। वरना, इन्हें तो मेरी बात समझ ही नहीं आती।” तारा ने कहा।
“हाँ, वह तो ठीक है, लेकिन तुम मुझे मैम मत बुलाया करो। ध्रुव और तुम्हारी दोस्ती नहीं हो सकती, तो क्या हुआ? हम दोनों तो फ़्रेंड बन ही सकते हैं ना… तुम मुझे मेरे नाम से बुलाया करो।” ग्रीष्मा ने मुस्कुराकर कहा।
तारा ने भी उसकी बात पर हामी भरी। उसने एक नज़र ध्रुव की तरफ़ देखा, जिसके चेहरे से गुस्सा साफ़ झलक रहा था। उसे देखकर तारा ने अपने मन में सोचा, “पता नहीं इस शैतान को यह राजकुमारी कहाँ से मिल गई? इसके लिए तो भगवान को अलग से टाइम निकालकर एक दुष्ट आत्मा को बनाना चाहिए था। नरक की सबसे ख़तरनाक डायन और चुड़ैल के कॉम्बो से बनी लड़की ही इसे हैंडल कर सकती है।”
“ठीक है, तुम दोनों आ जाओ। मैं माँ को बता देता हूँ।” ध्रुव ने कहा और वहाँ से नीचे चला गया।
उसके जाने के बाद ग्रीष्मा ने कहा, “तुम ध्रुव को गलत मत समझना, तारा, वह दिल का बहुत अच्छा है। लेकिन हाँ, जल्दी से किसी पर विश्वास नहीं कर पाता।”
“विश्वास ना करें, लेकिन सामने वाले से ठीक से बात तो कर ही सकते हैं। इनके एटीट्यूड को देखकर मुझे लगता नहीं कि इनका कोई दोस्त भी होगा।” तारा ने सिर हिलाकर कहा।
ग्रीष्मा ने हाँ में सिर हिलाकर कहा, “सही कहा तुमने, ध्रुव का कोई दोस्त नहीं है। इसकी एक वजह यह है कि बहुत कम उम्र में इसके ऊपर सारे बिज़नेस की ज़िम्मेदारी आ गई थी। ध्रुव के डैड की डेथ होने के बाद उसी ने सारा बिज़नेस संभाला था।”
“सुनकर बुरा लगा, लेकिन इंसान को इतना भी सख्त नहीं होना चाहिए कि वह अपनी ज़िंदगी जीना ही भूल जाए। यह तो मुझसे ऐसे पेश आते हैं, जैसे मैंने इनका ख़ज़ाना लूट लिया हो।” तारा ने जवाब दिया।
तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा खिलखिलाकर हँस पड़ी। “तुम सच में बहुत क्यूट हो। चलो, अब जल्दी से नीचे चलते हैं, वरना ध्रुव फिर से गुस्सा हो जाएगा।” वह बोली।
तारा ने उसकी बात पर हाँ में सिर हिलाया। दोनों नीचे आईं। ध्रुव उन्हीं का इंतज़ार कर रहा था। वे तीनों वहाँ से निकल रहे थे, तभी साक्षी और साहित्य ने इशारों से तारा को अपने पास आने के लिए कहा।
“मैं दो मिनट में आती हूँ।” तारा ने कहा।
“अब कहाँ जाना है तुम्हें? मैं अपना काम छोड़कर यहाँ आया हूँ, और तुम…” ध्रुव गुस्से में बोला।
“अब क्या मैं वॉशरूम भी नहीं जा सकती?” तारा ने मासूम चेहरा बनाकर ग्रीष्मा की तरफ़ देखा।
“ठीक है, जाओ, लेकिन जल्दी आना।” ध्रुव ने कहा और ग्रीष्मा के साथ बाहर जाने लगा। “यह लड़की सच में मेरा दिमाग़ ख़राब कर देगी। थैंक गॉड… थैंक गॉड, मैंने इसे काम से निकाल दिया, वरना यह तो मुझे शादी से पहले पागल कर देती।” ध्रुव ग्रीष्मा से बोला।
जवाब में ग्रीष्मा मुस्कुराकर रह गई। दूसरी तरफ़, तारा दौड़कर साहित्य और साक्षी के पास गई।
“जो भी कहना है, जल्दी कहो। तुम्हारा वह खड़ूस भाई मुझ पर चिल्ला रहा है।” भागने की वजह से तारा थोड़ा हाँफ रही थी।
“यही कि उन दोनों से बचकर रहना। दो शैतान एक साथ होते हैं, तो वे अच्छे लोगों पर हावी होने की कोशिश करते हैं।” साक्षी ने कहा।
उसकी बात सुनकर तारा ने आँखें तरेरकर उन दोनों को देखा और कहा, “यह बात कहने के लिए तुम दोनों ने मुझे यहाँ पर बुलाया है?”
उन दोनों ने हाँ में सिर हिलाया। तारा ने जवाब में कहा, “अभी तुम लोग तारा को नहीं जानते हो। वह अच्छे-अच्छे शैतान और चुड़ैलों से निपट लेती है। फिर तुम्हारे भाई की क्या औक़ात है? वह तो अभी शैतानों की दुनिया में नया-नया एंटर हुआ है। अरे, मैं तो वहाँ की क्वीन हूँ।”
“लेकिन आप तो हमें एंजेल लगती हैं। ओके, एजेंट तारा, आपका पहला मिशन यह होगा कि आप हम दोनों को भी शॉपिंग पर जाने के लिए परमिशन दिला सकें। अगर घरवालों के साथ गए, तो इनके हिसाब से कपड़े लेने होंगे।” साहित्य ने कहा।
“डोंट वरी, पार्टनर्स… मैं सब देख लूँगी।” तारा ने उन दोनों की तरफ़ आँख मारते हुए थम्सअप किया और बाय बोलकर बाहर आ गई।
बाहर ध्रुव और ग्रीष्मा तारा का इंतज़ार कर रहे थे। उसके आते ही जल्दी से दोनों गाड़ी में बैठे और वहाँ से जयपुर के सबसे फ़ेमस बुटीक में गए।
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एक लगभग अट्ठाईस साल का आदमी एक बड़े से हॉल के अंदर मौजूद था। उसने चेहरे पर मास्क लगा रखा था और फ़ॉर्मल कपड़े पहने हुए थे। उस हॉल की दीवारों पर चारों तरफ़ ध्रुव सिंघानिया की फ़ोटो लगी हुई थीं।
उन सभी तस्वीरों पर काले रंग से क्रॉस का निशान बना हुआ था। ध्रुव के साथ-साथ वहाँ उन सभी लोगों की तस्वीरें मौजूद थीं, जो किसी न किसी तरीके से उससे जुड़ा हुआ था।
उस आदमी के हाथ में तारा की एक बड़ी सी तस्वीर थी, और उसने उसे ध्रुव के परिवार के बाकी लोगों की तस्वीरों के पास लगा दिया। फ़ोटो लगाने के बाद उसने तस्वीर पर बड़ा सा क्रॉस का निशान लगा दिया।
“ध्रुव सिंघानिया, मैं तुमसे जुड़े हर इंसान को बर्बाद कर दूँगा। फिर तुम भी मेरी तरह अकेले हो जाओगे… बिल्कुल अकेले…” उस आदमी की आवाज़ से ध्रुव के लिए नफ़रत झलक रही थी।
उसने एक नज़र तारा की तरफ़ देखा और फिर कहा, “मैं नहीं जानता तुम कौन हो, लेकिन तुम्हें ध्रुव सिंघानिया से नहीं जुड़ना चाहिए था। वह इंसान अपने साथ-साथ खुद से जुड़े हर इंसान की बर्बादी का कारण बनेगा।” अपनी बात ख़त्म करके वह जोर से चिल्लाया। उसकी आँखों में आँसू थे।
“क्यों, ध्रुव सिंघानिया, क्यों? हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था, जो तुम… तुमने हम सबको बर्बाद कर दिया। तुम्हारी वजह से मेरे अपने ख़ून के आँसू रोए हैं। वे अपने हालातों से इतने मजबूर हो गए कि उन्होंने खुद अपने हाथों से अपनी जान ले ली। इतना ही मजबूर मैं तुम्हें कर दूँगा। एक-एक करके तुम्हारे अपने तुम्हारी आँखों के सामने मर जाएँगे। फिर तुम्हारे पास भी खुद को मार डालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहेगा।”
वह शख़्स, जो भी था, इतना साफ़ था कि वह ध्रुव से बहुत नफ़रत करता था। काफ़ी देर तक वहाँ रोने के बाद उस इंसान ने हॉल की लाइट्स बंद की और वहाँ से चला गया।
कुछ देर बाद वह उसी बुटीक के आगे खड़ा था, जहाँ ध्रुव, तारा और ग्रीष्मा गए थे। उसने अपने चेहरे पर मास्क लगाया और हाथ में चाकू लेकर उसे छुपा लिया। उसके क़दम तेज़ी से बुटीक के अंदर बढ़ रहे थे।
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