Unknown wife of billionaire - Chapter 7
Unknown wife Of Billionaireइशिका इस वक्त गोवा के आउटर एरिया में एक बूढी औरत के साथ खड़ी थी। उसने उसे अपनी बहू कह कर बुलाया था। इशिका को खुद की सिचुएशन काफी फनी लगी तो उसने मस्ती में उसके पोते का नाम पूछ लिया था।
वो बूढी औरत बडबडाते हुए अभिमन्यु का नाम ले रही थी पर उनकी आवाज काफी धीमी थी और वो ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। ऊपर से अल्जाइमर होने की वजह से उन्हें कुछ याद नहीं आ पा रहा था तो उनके शब्द मुंह में ही अटक गए थे।
उन्हें इतना स्ट्रगल करते देखकर इशिका ने उनका हाथ सहला कर कहा, “डॉन्ट वरी दादी, आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। मैं अभी आपके दिए हुए नंबर पर कॉल करके आपके पोते को बुला देती हूं। वो आपको ले जाएगा।”
उस बूढी औरत ने मुस्कुरा कर इशिका की बात पर हामी भरी। वहीं दूसरी तरफ अभिमन्यु राजवंश इस वक्त अपनी गाड़ी में था। गाड़ी उसका हेड सिक्योरिटी गार्ड ड्राइव कर रहा था तो वही उसके बगल में अभिमन्यु का मैनेजर बैठा हुआ लैपटॉप में कुछ कर रहा था। बैक सीट पर अभिमन्यु बैठा था और इस वक्त काफी गुस्से में लग रहा था।
“मैने तुम्हें एक काम सौंपा था, वो भी तुम ठीक से नहीं कर पाए पृथ्वी।” अभिमन्यु ने अपने मैनेजर पृथ्वी चौहान की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
पृथ्वी ने धीमी आवाज में खेद जताते हुए कहा, “मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी सर पर आजकल उनकी बीमारी काफी बढ़ गई है। केयर गिवर को पता तक नहीं चलता और वो कब अपने ख्यालों में खोई हुई बाहर निकल जाती है।”
“तो तुम अपनी गलती का दोष किसी और पर डालना चाहते हो? तुम अच्छे से जानते हो मुझे ये पसंद नहीं है पृथ्वी ” अभिमन्यु ने सख्ती से जवाब दिया।
पृथ्वी को जैसे ही एहसास हुआ कि उसकी बातों ने अभिमन्यु को गुस्सा दिला दिया है, तो वो तुरंत अपनी गलती मानते हुए बोला, “मुझे माफ कर दीजिए सर। मैं आगे से उनकी सिक्योरिटी बढ़ा दूंगा। हां मेरी ही गलती थी, जिसकी वजह से आपकी दादी मिसेज वसुधा राजवंश अचानक से गायब हो गई। मैंने सारे सीसीटीवी फुटेज वगैरा देख लिए हैं। ऐसे लग रहा है वो किसी ऐसे एरिया में पहुंच गई है जहां पर सीसीटीवी कैमरा नहीं है। आखिरी बार उन्होंने एक बस ली थी, हम उसी तरफ जा रहे हैं। ।”
पृथ्वी लैपटॉप में वसुधा राजवंश की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था। वो लोग बात कर रहे थे तभी अभिमन्यु के नंबर पर एक कॉल आया। अभिमन्यु के सभी कॉल्स वैसे भी सेफ्टी के लिए ट्रैक किए जाते थे। अभिमन्यु के पास कॉल आते ही पृथ्वी सतर्क हो गया।
अभिमन्यु ने कॉल रिसीव किया। वो अननोन नंबर से कॉल था इसलिए उसने स्पीकर ऑन किया। सामने से इशिका की आवाज आई, “आपकी दादी मेरे कब्जे में है।” इशिका ने थोड़ा मजाकिया तरीके से कहा क्योंकि उसका मूड दादी से मिलने के बाद काफी अच्छा हो चुका था।
वही उसकी एक छोटे से मजाक ने अभिमन्यु और पृथ्वी को टेंशन में डाल दिया था। हेड सिक्योरिटी गार्ड ने भी जल्दी से ब्रेक लगाए। अभिमन्यु ने इशारे से पृथ्वी को लोकेशन ट्रैक करने को कहा।
“कौन बोल रही हो तुम? देखो उन्हें कुछ मत करना। तुम्हें इसके लिए जितने पैसे चाहिए मिल जाएंगे।” अभिमन्यु ने हल्की घबराहट के साथ कहा, तभी दूसरी तरफ कॉल से इशिका के हंसने की आवाज आई। वो काफी खुशनुमा और प्यारी सी हंसने की आवाज थी।
इशिका ने आगे बोला, “अरे आप तो डर गए। मैं मजाक कर रही थी। आपकी दादी यहां घूम रही थी। मैंने इनके टैग को देखा तो आपको कॉल कर दिया। आपको अपने बड़े बुढो का ध्यान रखना चाहिए खास करके वो अल्जाइमर के पेशेंट हो तब, मैं आपको लोकेशन भेजती हूं, आप तब तक वहां पहुंच जाइए।”
इशिका ने जैसे ही नॉर्मली पूरी बात बताई तो अभिमन्यु ने राहत की सांस ली। ऊपर से इशिका ने लोकेशन भी भेज दी थी तो शक करने का सवाल ही पैदा नहीं होता था।
इशिका की आवाज सुनकर अभिमन्यु ने मन ही मन कहा, “मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे मैंने ये आवाज पहले भी सुनी है।”
अभिमन्यु ने ज्यादा नहीं सोचा और इशिका की बताई हुई लोकेशन पर पहुंच गए। लगभग 15 मिनट बाद वो मिसेज वसुधा राजवंश के पास पहुंच चुके थे। अपनी दादी को ठीक-ठाक पुलिस वाले के साथ देखकर अभिमन्यु ने राहत की सांस ली।
पुलिस ने आते ही वसुधा राजवंश को अभिमन्यु को सौंप दिया और फिर वहां से चली गई।
अभिमन्यु ने आंखें छोटी की और वसुधा जी को घूरते हुए कहा, “दादी आप कहां चली गई थी? यहां इतनी दूर नहीं आना चाहिए आपको।”
“मैं... मैं अपनी बहू से मिलने के लिए आई थ। तुम्हारी पत्नी.. वो यहीं आसपास रहती है। लेकिन वो बहुत बुरी है। उसने मुझे पुलिस के पास छोड़ दिया और खुद चली गई। उसे कहना आगे से ऐसा मत करें।” वसुधा जी ने बिल्कुल धीमी आवाज में जवाब दिया।
“कोई बहू नहीं है और आप आगे से यहां नहीं आएंगी।” अभिमन्यु ने थोड़ा सख्ती से कहा।
उसके ऐसा कहने पर वसुधा जी ने उसे घूर कर देखा और फिर कहा, “तुम झूठ बोल रहे हो। मैं उससे मिली हूं और वो बहुत खूबसूरत है। छोड़ो.. मुझे अपना मोबाइल दो।”
वसुधा के अचानक मोबाइल मांगने पर अभिमन्यु हैरान था लेकिन फिर भी उसने अपना मोबाइल अनलॉक करके वसुधा के हाथ में दे दिया था। वसुधा ने कॉल हिस्ट्री से इशिका का नंबर लिया और उसे अपने नोटपैड में लिख लिया था। उनके पास एक बैग हमेशा रहता था। वो बातें भूल जाती थी लेकिन अगर पहले की बात करें तो उनके पर्सनेलिटी काफी रौबदार थी। जैसे ही उन्हें सब याद आता था तो वो बिल्कुल पहले की तरह हो जाती थी।
अपनी बहू का नंबर लेने के बाद वसुधा जी के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। अभिमन्यु ने इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वसुधा जी को वहां से लेकर निकल गया।
वहीं दूसरी तरफ जब पुलिस वाले ने वसुधा जी को अभिमन्यु को सौंप दिया था, तब उसने इशिका को एक मैसेज छोड़ा। इशिका ने हीं उसे ऐसा करने के लिए कहा था।
मैसेज मिलते ही इशिका के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। वो बोली, “थैंक गॉड, वो क्यूट सी दादी सही सलामत पहुंच गई। पता नहीं मुझसे क्यों नहीं होता। नए लोगों से बात करना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। वो तो अच्छा हुआ मुझे पास में पुलिस दिख गई और मैंने उन दादी को उसके पास छोड़ दिया।”
उसके बाद इशिका वहां से अपने घर पहुंच गई थी। उसका अलग छोटा सा घर था, जो गोवा के आउट एरिया में बना हुआ था। उसका घर बाहर से दिखने में किसी कॉटेज की तरह लगता था लेकिन अंदर उसमें सभी तरह की सुख सुविधा अवेलेबल थी।
अगली सुबह इशिका की जैसे ही आंख खुली, उसके यूनिवर्सिटी से मैसेज आया हुआ था, जिसमें उसे अर्जेंटली कॉलेज बुलाया गया था।
“अब इन्हें क्या हो गया, जो इतनी अर्जेंट में मुझे कॉलेज बुलाया है? मैं रिसर्च घर से ही कर रही थी। अब खामखा वहां गई, तो टाइम वेस्ट होगा। आई होप सब ठीक हो।” इशिका ने मन ही मन बड़बड़ा कर कहा और तैयार होने चली गई।
इशिका जल्दी से तैयार हुई। उसने व्हाइट कलर का घुटनों से थोड़ा सा लंबा फ्रॉक पहना हुआ था, जो स्लीवलेस था। बालों को पिगटेल में बांधकर और आगे के बालों को थोड़ा सा फैलाकर इशिका कॉलेज पहुंची। उसे अपने रिसर्च इंचार्ज मिस्टर मिलर के केबिन में जाना था लेकिन वहां जाते ही इशिका हैरान रह गई क्योंकि वहां मालविका और आयशा पहले से बैठी हुई थी।
आयशा और इशिका ओसियन यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी, जो कि गोवा की टॉप यूनिवर्सिटी थी।
उन्हें देखकर इशिका को समझते देर नहीं लगी कि वो कोई अच्छा काम करने तो वहां पर आई नहीं होगी। ऊपर से मालविका और आयशा के चेहरे पर एक अजीब मुस्कुराहट थी।
इशिका ने गहरी सांस ली और मन ही मन कहा, “पता नहीं कब तक मेरी किस्मत में इन्हें झेलना लिखा है।” इशिका धीमे कदमों से अंदर चली गई। उसने प्रोफेसर के चेहरे की तरफ देखा तो उनके चेहरे के भाव भी सख्त थे। इशिका पर एक नया बम फूटने वाला था, जिसके लिए वो खुद को तैयार कर रही थी।
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