Unknown wife of billionaire - Chapter 15
Unknown wife Of Billionaireआयशा लिस्ट से ऊपर पहुंच गई थी। नक्ष के फ्लोर तक जाने के लिए उसे काफी आगे तक चल कर जाना पड़ा। आयशा मिलने तो नक्ष से आई थी लेकिन उसके दिमाग में इशिका चल रही थी, जो थोड़ी देर पहले रिसेप्शनिस्ट से अंदर जाने की जिद कर रही थी।
आयशा मन ही मन बोली, “कितनी बेशर्म लड़की है। इतना सब कुछ हो गया, फिर भी यहां पर खड़ी होकर मिस्टर अभिमन्यु राजवंश से मिलने की जिद कर रही है। उसे क्या लगता है कि वो अपनी खूबसूरती से उसका दिल पिघल देगी। जैसे उसने नक्ष को अपने पीछे पागल किया था, वैसे अभिमन्यु राजवंश उसके पीछे नहीं आने वाला है। नक्ष ने भी एक मोमेंट के बाद उसे छोड़कर मुझसे शादी करने का डिसीजन लिया और वो अभिमन्यु राजवंश को अपने जाल में फंसाने का सोच रही है। बेवकूफ कहीं की...”
आयशा के चेहरे पर गुस्से के भाव थे। जैसे ही वो नक्ष के केबिन के सामने आई। उसने खुद के चेहरे के भावों को नॉर्मल किया और अपने चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट ओढ़ ली। नक्ष से मिलने के लिए आयशा खास तैयार होकर आई थी।
उसने ग्रे कलर का डिजाइनर वन पीस शॉर्ट ड्रेस पहना हुआ था। बालों को कर्ल करके उसमें अच्छा सा हेयर स्टाइल बनाया हुआ था। चेहरे पर हेवी मेकअप और आंखों में कॉन्फिडेंस के साथ आयशा ने नक्ष के केबिन के अंदर कदम रखा।
“इसे काम करने के अलावा और कोई काम नहीं है क्या।” नक्ष को देखकर आयशा ने धीरे से बड़बड़ा कर कहा।
नक्ष काम करने में बिजी था। वो भी दिखने में काफी हैंडसम था। लगभग 5 फुट 10 इंच के आसपास हाइट, गोरा रंग, मस्कुलर बॉडी, गहरी भूरी आंखें और वैसे ही गहरे भूरे सेट किए हुए बाल। नक्ष के होठों से थोड़ा ऊपर एक बड़ा सा तिल था।
अचानक नक्ष का ध्यान आयशा की तरफ गया। उसने कुछ खास खुशी नहीं दिखाई। दिखाता भी कैसे, उसे इशिका से प्यार था पर मजबूरी में आयशा के साथ आना पड़ रहा था।
“कैसे हो तुम बेबी?” आयशा ने मुस्कुराकर सिर हिला कर कहा।
नक्ष उठकर आयशा के पास आया। अचानक उसकी नजर आयशा के गालों पर पड़ी, जो सूजे हुए लग रहे थे।
नक्ष ने आयशा के होठों पर हल्के से हाथ रखकर भौंहे उठाकर पूछा, “ये सब क्या है?”
“इशिका ने मुझे बहुत बुरी तरह से मारा।” आयशा ने जवाब दिया। वो इशिका को नक्ष की नजरों में गिराना चाहती थी।
आयशा को लगा ये सुनकर नक्ष को गुस्सा आएगा पर नक्ष ने बिना किसी भाव के कहा, “मैंने तुम्हें पहले ही कहा था, उससे पंगा मत लेना। डिफेंस आर्ट में अच्छी है वह।”
नक्ष ने इशिका का काफी सालों तक पीछा किया था तो उससे इशिका से जुड़ी हुई बात छुपी कैसे रह सकती थी।
“हां मेरी ही गलती थी। उसके बारे में बात नहीं करते हैं ना...” आयशा ने मासूम बनते हुए कहा।
नक्ष ने हां में सिर हिला दिया। बातचीत का रुख बदलने के लिए आयशा ने कहा, “मुझे पता चला है कि तुम्हारा नया प्रोजेक्ट न्यू एनर्जी से रिलेटेड है। क्या तुम्हें पता है डॉक्टर मर्चेंट हमारे घर पर आने वाले हैं। मेरी मॉम ने उन्हें डिनर पर बुलाया है। अगर तुम कहो तो मैं उनसे बात करूं? वो तुम्हारे प्रोजेक्ट में ज्वाइन कर सके तो?”
“क्या तुम ऐसा कर सकती हो?” नक्ष ने भौहें उठाकर पूछा। उसकी आंखों में चमक आ गई थी।
“हां क्यों नहीं? तुम बस अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा टाइम निकाल लेना ताकि तुम भी उस डिनर में प्रजेंट रह सको।” आयशा ने खुश होकर बताया।
डॉक्टर मर्चेंट का प्रोजेक्ट में शामिल होने का सुनते ही नक्ष का बिहेवियर बदल गया था। उसने आयशा को कमर से पकड़ कर अपने करीब खींचा और उसके गाल को अपने गालों से सहलाते हुए कहा, “इशिका सच में बहुत बदतमीज और रूड है। उसे तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था।”
“हां अब क्या कर सकते हैं? अच्छा हुआ ना उसकी सच्चाई वक्त रहते सामने आ गई और तुम्हारी लाइफ बर्बाद नहीं हुई।” आयशा ने मुस्कुरा कर कहा।
नक्ष ने हां में सिर हिलाया। उसने फिर आयशा के होठों को अपने होठों से हल्का सा छूते हुए कहा, “तुम्हें पता है मेरे पास तुम्हारे इस दर्द का एक अच्छा सा इलाज है। एक प्यारा सा किस...जिसके बाद तुम्हारा सारा दर्द दूर हो जाएगा।”
किस करने से पहले नक्ष ने आयशा की परमिशन मांगी तो आयशा ने मासूम बनते हुए अपने पलके झपका दी थी। अगले ही पल नक्ष ने उसके होठों को अपने गिरफ्त में ले लिया। वो उसे काफी सॉफ्टली किस कर रहा था।
आयशा ने अपने मन में कहा, “क्या फर्क पड़ता है कि तुम किस से प्यार करते हो? फर्क इस बात से पड़ता है कि हमारी शादी होने वाली है और उससे भी बड़ी बात मैं तुम्हारे ड्रीम प्रोजेक्ट में तुम्हारी मदद करने वाली हूं। देखा तुमने इशिका, अमीर लोगों के लिए प्यार का कोई मतलब नहीं होता है। उन्हें बस अपनी सक्सेस से लेना देना होता है। जो लड़का कल तक तुम्हारे पीछे पागलों की तरह घूमता था, आज वो डॉक्टर मर्चेंट का नाम सुनते ही मेरा दीवाना होकर खुद से किस करने की पहल कर रहा है।”
आयशा को भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कभी नक्ष इशिका से प्यार करता था। उसे मतलब था तो राजवंश खानदान की बहू बनने से। वो बहुत अमीर थे। उनकी लाइफ स्टाइल काफी लग्जीरियस थी और आयशा को वही चाहिए था।
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वही नीचे लॉबी में इशिका आराम से काउच पर बैठी हुई थी। उसने अभिमन्यु को अपना एड्रेस भेज दिया था। वो काफी देर से वहां पर बैठी थी। जब रिसेप्शनिस्ट की नजर वापिस उस पर पड़ी तो वो गुस्से में आग बगुला हो गई।
रिसेप्शनिस्ट ने सिक्योरिटी गार्ड को अपने साथ आने का इशारा किया और इशिका के पास लेकर पहुंची। वो इशिका को देखते हुए काफी एटीट्यूड से बोली, “मिस सिंघानिया आप यहां से गई नहीं अभी तक? आपकी वजह से मुझे डिस्टर्बेंस हो रहा है। बेहतर होगा कि यहां से चली जाइए वरना ये लोग आपको धक्के मार कर निकाल देंगे?”
इशिका ने हैरानी से रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखा। वो तो चुपचाप बैठी हुई थी। वेटिंग एरिया में कोई भी आकर बैठ सकता था। ऊपर से इशिका तो शोर भी नहीं बचा रही थी, फिर वो उसका काम कैसे डिस्टर्ब कर रही थी, ये उसे समझ नहीं आया।
इशिका ने बोरियत भरे लहजे में रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखकर कहा, “लगता है आपका अपने काम पर फोकस नहीं है, तभी काम करते वक्त बार-बार आपकी नजरे मुझ पर आ रही थी। आप ऐसा क्यों नहीं करती कि यहां पर अपने लिए एक अलग से केबिन बनवा लीजिए। फिर आपको डिस्टर्बेंस नहीं होगा।”
“अब तुम अपनी लिमिट क्रॉस कर रही हो और बहुत हो गया।” रिसेप्शनिस्ट गुस्से में बोली। फिर उसने सिक्योरिटी गार्ड को ऑर्डर देते हुए कहा, “इस लड़की को यहां से धक्के मार कर बाहर निकाल दो। वैसे भी पृथ्वी सर ने मना किया था कि इसे यहां नहीं आने देना है।”
रिसेप्शनिस्ट के ऑर्डर देते ही सिक्योरिटी गार्ड्स हरकत में आ गए थे। वो कुछ करते तभी अचानक पूरी लॉबी शांत हो गई, क्योंकि प्राइवेट लिफ्ट के रुकने की आवाज आई। वो प्राइवेट लिफ्ट सिर्फ अभिमन्यु के यूज के लिए थी, तो सिक्योरिटी गार्ड अपना काम छोड़कर बिल्कुल सीधे खड़े हो गए।
लिफ्ट में से अभिमन्यु पृथ्वी के साथ बाहर निकला। वो चारों तरफ इधर-उधर देख रहा था, मानो किसी को ढूंढने की कोशिश कर रहा हो।
जैसे ही अभिमन्यु की नजर नजर इशिका पर गई, वो आईज रोल करके बोला, “नॉट अगेन... ये लड़की फिर से यहां पर आ गई।”
पृथ्वी ने उसकी नजरों को फॉलो करके इशिका को देखा तो उसे भी बहुत गुस्सा आया। उसने अभिमन्यु से कहा, “मैं देखता हूं उसे।”
अभिमन्यु फिर से इशिका से उलझना नहीं चाहता था इसलिए वो वहीं पर खड़ा रहा, जबकि पृथ्वी इशिका के पास आ गया।
पृथ्वी को देखकर रिसेप्शनिस्ट घबरा गई। वो जल्दी से अपना पक्ष रखते हुए बोली, “सर मैंने आपके ऑर्डर्स अच्छे से फॉलो किए थे और इसे अंदर नहीं जाने दिया। ये फिर से पार्सल देने का बहाना बनाकर आई थी लेकिन मैंने फिर भी इसे अंदर नहीं जाने दिया। मैंने इसे यही कहा कि आज हमारा कोई पार्सल नहीं आने वाला है।”
इशिका थे रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखकर बेपरवाही से कहा, “लेकिन मैंने कब कहा कि मैं कोई पार्सल देने के लिए आई हूं?”
“देखा सर आपने, कितनी बेशर्मी से ये मान भी रही है कि ये यहां बेवजह आकर बैठ गई है। इसे फिर से ऊपर जाकर किसी से मिलना था। खामखां हंगामा मचा रही है, बस तभी मैंने सिक्योरिटी गार्ड्स को बुला लिया।” रिसेप्शनिस्ट ने मासूम बनते हुए कहा।
इशिका ने उसकी तरफ देखकर कंधे उचकाकर कहा, “अच्छा तो मैं यहां चुपचाप बैठ कर तुम्हारा काम डिस्टर्ब कर रही थी? मुझे नहीं पता था कि यहां लॉबी में बैठना अलाउड नहीं है। वेटिंग एरिया में चुपचाप वेट करना इतना बड़ा गुनाह हो गया। हंगामा मैं नहीं, तुम कर रही थी।”
इशिका और रिसेप्शनिस्ट की फाइट से पृथ्वी इरिटेट हो गया था। वो बीच में तेज आवाज में बोला, “ठीक है, इसे जितनी देर बैठना है बैठे रहने दो। वैसे भी इस पर कोई ध्यान नहीं देने वाला है।” इशिका के मामले को निपटाकर उसने रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखकर कहा, “मैंने तुम्हें कहा था कि मिस्टर राजवंश के प्राइवेट कंप्यूटर में कुछ ग्लिच आ गया है। मैंने इंजीनियर को कॉल किया था तो तुम्हें किसी को ठीक करने के लिए भेजने वाला था। वो अब तक आया क्यों नहीं है? मैंने इंजीनियर को कॉल किया तो उसने कहा कि उसका भेजा हुआ टेक्नीशियन यहां आ चुका है और उसे अंदर नहीं आने दिया गया। क्या इसका जवाब है तुम्हारे पास?”
“लेकिन यहां तो कोई नहीं आया?” रिसेप्शनिस्ट ने हैरानी से कहा, “मेरा यकीन मानिए सर, मैं अपना काम बहुत सीरियसली करती हूं और यहां पर कोई नहीं आया, जिसे मैने रोका हो।”
“तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूं या वो झूठ बोल रहा है?” पृथ्वी गुस्से में बोला और अपना मोबाइल निकाला। वो इंजीनियर को कॉल करने ही वाला था कि तभी उसे इशिका की आवाज सुनाई दी।
इशिका ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा, “हां इसने मुझे रोका था। मेरी बात तक नहीं सुनी कि मैं यहां पर क्यों आई हूं। मुझ पर इल्जाम लगाया कि मैं यहां हंगामा मचा रही हूं और न जाने क्या कुछ नहीं कहा मुझे?”
पृथ्वी हैरानी से इशिका की तरफ देख रहा था। कल वो यहां पर एक पार्सल डिलीवर करने के लिए आई थी तो आज एक टेक्नीशियन बनकर। ऐसा कैसे पॉसिबल था? वो कुछ पूछता उससे पहले इशिका ने उसके हाथ में एक पेपर थमा दिया। जो पेपर उसने पृथ्वी को दे दिया, उस पेपर के हिसाब से वो उस इंजीनियर के अंडर पिछले 5 सालों से काम कर रही थी।
रिसेप्शनिस्ट की तरह इशिका ने भी सब कुछ काफी बढ़ा चढ़ा कर बताया था। फिर उसकी नज़रें अभिमन्यु पर टिकी हुई थी। उसे देखना था कि अभिमन्यु क्या फैसला लेता है।
सब कुछ सुनने के बाद अभिमन्यु ने सर्द निगाहों से रिसेप्शनिस्ट को देखा और तेज आवाज में कहा, “यू आर फायर। अभी तक की अपनी जितनी भी सैलरी है, लो और निकलो यहां से।”
“लेकिन निकालने की क्या जरूरत है सर? इससे एक छोटी सी गलती हुई है। इसे कुछ दिनों के लिए सस्पेंड कर दीजिए। ये अपना काम काफी अच्छे से कर रही है।” पृथ्वी ने रिसेप्शनिस्ट का साथ देते हुए कहा, जबकि रिसेप्शनिस्ट की तो हिम्मत भी नहीं पड़ रही थी कि इतनी बड़ी गलती के बाद वो सॉरी बोल सके।
रिसेप्शनिस्ट के बाद अभिमन्यु ने गुस्से से पृथ्वी की तरफ देखा, मानो वो आगे कुछ और बोला तो अभिमन्यु उसे भी काम से निकाल देगा।
इशिका इन सब में काफी ज्यादा हैरान थी। अब तक उसने सुना था कि अभिमन्यु काफी क्रुएल है लेकिन आज उसने देखा भी लिया। एक छोटी सी गलती पर उसने रिसेप्शनिस्ट को काम से निकाल दिया था, जो न जाने कितने सालों से उनके यहां काम कर रही थी।
इशिका ने मन ही मन बड़बड़ा कर कहा, “कम ऑन इशिका, तुम्हें इससे डरना नहीं है। तुम्हारी असली पहचान भी कुछ कम पावरफुल नहीं है पर मुझे इसका बिहेवियर देखकर अजीब क्यों लग रहा है।”
इशिका ने रिसेप्शनिस्ट का साथ देने के लिए कुछ कहना चाहा लेकिन अभिमन्यु फिर से बीच में बोल पड़ा, “अपना काम करो और निकलो यहां... मुझे तुम्हारी शक्ल भी नही देखनी है मिस सिंघानिया।”
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भाई इशिका का पाला सच में एक ऐसे इंसान से पड़ा है, जो क्रुएल, रूड और एरोगेंट है पर अभी असली बातें सामने आई ही कहां है। पार्ट पढ़ कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं। देखते हैं आज इशिका अपनी बात अभिमन्यु से कह पाती है या नहीं।