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Chapter 13

Unknown wife of billionaire - Chapter 13

Unknown wife Of Billionaire

राधिका ने इशिका को मिलने के लिए बुलाया था। हालांकि इशिका उससे मिलना तो नहीं चाहती थी लेकिन राधिका की तबीयत अक्सर खराब रहती थी और उसी का सोचकर इशिका ने मिलने के लिए हां कह दी थी।

राधिका की तबीयत के आगे इशिका ने ये भी नहीं सोचा कि अगर वो डॉक्टर मर्चेंट बनकर सिंघानिया विला में गई तो उसकी आइडेंटटी सबके सामने रिवील हो जाएगी।

इशिका अपनी सोच में गुम थी, तभी राधिका का एक और मैसेज आया।

“ठीक है, फिर हम इस वीकेंड पर मेरे घर पर डिनर पर मिलते हैं। उम्मीद है आपके पास मेरे लिए टाइम होगा।” राधिका ने जवाब में कहा।

मैसेज देखने के बाद इशिका धीरे से बोली, “राधिका आंटी इतना लेट मिलना चाहती है, इसका मतलब कारण कुछ और है। नहीं मुझे सिंघानिया विला में उनसे नहीं मिलना। मुझे बेवजह उनकी लाइफ में प्रॉब्लम क्रिएट नहीं करनी है।” इशिका ने गहरी सांस ली और तुरंत राधिका को मैसेज टाइप करके लिखा, “हम कब से आपके साथ डिनर करने का सोच रहे थे। हम आपको लोकेशन सेंड करते हूं, हम बाहर किसी रेस्टोरेंट में मिल लेंगे।”

राधिका ने उसकी बात पर हामी भर दी थी। उसने जवाब में थम्स अप भेजा तो वहीं इशिका मोबाइल रखकर पुरानी बातें सोच रही थी।

इशिका खुद से बोली, “मैंने कभी आप लोगों को पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहा। बेवकूफ थी तभी घर छोड़ने के एक हफ्ते बाद सबसे मिलने के लिए गई।”

सोचते हुए इशिका पुरानी यादों में खो गई। जब वो घर छोड़ने के एक हफ्ते बाद सिंघानिया विला पहुंची थी। वो अंदर जाती उससे पहले मालविका ने उसे पकड़ लिया था और उसे दूसरी तरफ लेकर गई। उसने कांच की खिड़की से सामने की तरफ इशारा किया।

अंदर की तरफ आदर्श और राधिका आयशा के साथ खेल रहे थे। वो दोनों काफी खुश थे।

मालविका ने इशिका का कंधा दबा कर कहा, “पहले कभी मिसेज सिंघानिया को इतना खुश देखा है तुमने?”

इशिका ने नम आंखों से ना में सिर हिला दिया।

मालविका आगे बोली, “देखोगी भी कैसे? तुम्हारी वजह से वो हंसना भूल गई थी। देखा, तुम्हारे जाते ही उनकी सारी प्रॉब्लम अपने आप खत्म हो गई। उम्मीद है तुम इतनी समझदार तो हो गई होगी। अब वापस यहां मत आना।”

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इशिका उस दिन के बाद वहां वापस नहीं लौटी, जब तक खुद मालविका ने उसे वहां जबरदस्ती नहीं बुलाया। राधिका से वो इमोशनली कनेक्ट थी, इस वजह से वो हर बर्थडे पर उनके लिए गिफ्ट जरूर भिजवाती थी लेकिन उसका भी राधिका की तरफ से कभी कोई जवाब नहीं आया।

इशिका पुरानी बातें सोच कर खुद को हर्ट नहीं करना चाहती थी इसलिए टाइम पास करने के लिए उसने अपना मोबाइल ऑन किया। उसने देखा कि अभिमन्यु के काफी सारे मैसेज आए हुए थे।

“आप मेरी दादी का ख्याल तो रख रही है ना, देखिए उन्हें दिन में डॉक्टर के बताए अनुसार मेडिसिन लेने की जरूरत होती है। वो ठीक से सो भी नहीं पाती और गुस्से में काफी अग्रेसिव हो जाती है। कई बार वो बच्चों की तरह ज़िद करने लगती है तो कभी बड़ी बनकर आपको डांटने लगेगी। किसी भी तरह की कोई भी इमरजेंसी होगी तो आप सबसे पहले मुझे कॉल करेगी।” अभिमन्यु ने इतने सारे मैसेज भेज दिए थे, जिसे देखकर इशिका ने अपना सिर पकड़ लिया।

इशिका ने खुद से कहा, “अगर इतनी परवाह है तो खुद के पास क्यों नहीं रख लेता। लापरवाह कहीं का...” इशिका उठी और उसने वसुधा का एक वीडियो बनाकर अभिमन्यु को भेजा।

दूसरी तरफ राजवंश विला से कुछ दूर दो गाड़ियां खड़ी हुई थी। दोनों ही किसी तरह की वैनिटी वैन लग रही थी। एक के अंदर अभिमन्यु बैठा हुआ था। वो मिनी वैन किसी लग्जरियस घर से काम नहीं लग रही थी। दूसरी वैन एक मिनी हॉस्पिटल की तरह थी।

अभिमन्यु के सामने वसुधा के डॉक्टर बैठे हुए थे। जैसे ही इशिका का मैसेज आया, अभिमन्यु ने उसे देखा और हैरानी से उसकी आंखें बड़ी हो गई।

अभिमन्यु के चेहरे के एक्सप्रेशंस देखकर डॉक्टर माथुर ने पूछा, “मिस्टर राजवंश सब ठीक है ना?”

अभिमन्यु ने बिना कुछ बोले अपने मोबाइल की स्क्रीन डॉक्टर के सामने कर दी। डॉक्टर ने जब वो वीडियो देखा तो वो भी हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “अजीब बात है, हम यहां एमरजैंसी सिचुएशन के लिए तैयार बैठे हैं और वहां कुछ और ही चल रहा है। जहां तक मुझे याद है वसुधा जी पिछले कई सालों से रात के दो बजे से पहले नहीं सोई है और इतने सुकून से तो मैंने उन्हें सोते हुए कभी नहीं देखा।”

अभिमन्यु को तसल्ली देने के लिए इशिका ने वसुधा का वीडियो बनाकर भेजा था, जिसमें वो सुकून से सो रही थी। इतने आराम से कि वो खर्राटे तक ले रही थी।

डॉक्टर आगे बोले, “वैसे मानना पड़ेगा। इस यंग लेडी के साथ में रहते हुए मिसेज राजवंश में काफी बदलाव आए हैं। अगर ये हमेशा उनके पास रहे तो इस उम्र में भी मिसेज राजवंश अच्छा इंप्रूव कर सकती है।”

अभिमन्यु ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और वापस अपने काम पर लग गया।

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अगले दिन इशिका जल्दी ही तैयार हो गई। उसने ब्लू पैंट्स के ऊपर व्हाइट क्रॉप टॉप पहना और गले में स्कार्फ ले रखा था, जो ब्लैक एंड व्हाइट था। इशिका ने हमेशा की तरह अपने बालों को पिग टेल में बांधा और आगे से कुछ लटे उसके चेहरे पर बिखरी थी।

इशिका तैयार होकर ब्रेकफास्ट टेबल पर आई। उसने जल्दबाजी में कुछ टोस्ट बनाए और फिर वसुधा के लिए लेकर आई।

इशिका ने उन्हें ब्रेकफास्ट और दवाइयां देते हुए कहा, “आप इन्हें टाइम से ले लीजिएगा। थोड़ी देर बाद में दिशांक आ रहा है। वो आपका ख्याल रखेगा, अच्छा लड़का है। आपका उसके साथ मन लग जाएगा।”

वसुधा ने उसकी बात पर हामी भरी और कहा, “तुम कहीं जा रही हो बहू?”

वसुधा के मुंह से बहु सुनकर इशिका नाराजगी जताते हुए बोली, “दादी मेरा नाम इशिका है और आप मुझे प्लीज मेरे नाम से ही बुलाइए।”

“एक तो आजकल की लड़कियां, इनका कुछ नहीं हो सकता। अब बहु सुनने में क्या प्रॉब्लम है। मैं तो तुम्हें बहू ही कहूंगी।” वसुधा ने सख्ती से कहा और फिर कुछ पल रुक कर बोली, “अच्छा बताओ, कहां जा रही हो तुम?”

“एक बहुत बड़े आदमी के पास इंपॉर्टेंट मीटिंग पर जाना है।” इशिका ने जवाब दिया।

“बहुत बड़ा आदमी है तो रुको, मैं अपने पोते को बोलती हूं। वो तुम्हारी अपॉइंटमेंट फिक्स करवा देगा। उसकी काफी लोगों से जान पहचान है।” वसुधा ने मुस्कुरा कर कहा।

उनकी बात सुनकर इशिका के चेहरे पर भी स्माइल आ गई। वो सिर हिला कर बोली, “दादी आपका पोता भी इस मामले में कुछ नहीं कर पाएगा। आप ब्रेकफास्ट कीजिए और मेरी टेंशन मत लीजिए।”

वसुधा ने आगे कुछ नहीं पूछा और चुपचाप नाश्ता करने लगी। वही इशिका नाश्ता करते हुए अभिमन्यु के बारे में सोचने लगी। वो धीरे से बोली, “अब आपको कैसे बताऊं दादी कि आपका लापरवाह पोता कितना भी अमीर क्यों ना हो लेकिन वो अभिमन्यु राजवंश जितना अमीर नहीं हो सकता। मेरी अभिमन्यु से मीटिंग में आपका पोता मेरी कोई हेल्प नहीं कर सकता।”

इशिका अभिमन्यु से मिलने जा रही थी। दिशांक के आते ही इशिका वहां से निकली और अपनी स्कूटी स्टार्ट की। वो खुद से बोली, “जो भी हो जाए डिवोर्स के लिए तो मैं तुम्हें मना कर रहूंगी अभिमन्यु राजवंश।”

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इशिका वैसे है तो बहुत जिद्दी। अब कहा है तो अभिमन्यु को मना कर ही रहेगी। देखते हैं उनकी अगली मीटिंग कैसे रहती है। अगर कहानी अच्छी लग रही है तो प्लीज समीक्षा किया करो।

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