Unknown wife of billionaire - Chapter 23
Unknown wife Of Billionaireवसुधा अपने कपड़े लाने के लिए घर जाना चाहती थी, जिसके लिए इशिका ने अभिमन्यु से उसके घर का एड्रेस मांगा। अभिमन्यु ने इशिका को अपने घर का एड्रेस भेज दिया था। उसे देखने के बाद वो हैरान रह गई। इशिका ने राजवंश विला का एड्रेस भेजा था।
इशिका ने एड्रेस देखने के बाद अपने मन में कहा, “इसने राजवंश विला का एड्रेस क्यों भेजा है? क्या दादी राजवंश विला में रहती है? नहीं, ये नहीं हो सकता है। दादी का पोता काफी सेंसिबल और अच्छा इंसान है जबकि वो अभिमन्यु राजवंश एक नंबर का अकड़ू और एरोगेंट शख्स है।”
इशिका काफी कन्फ्यूज हो रही थी। राजवंश विला शहर की भीड़भाड़ से दूर आउटर एरिया में बना हुआ था और काफी बड़े हिस्से में भी था। उसके आसपास और भी कई छोटे विला थे।
इशिका ने गहरी सांस ली और मन ही मन कहा, “जरूर दादी वही किसी आसपास के छोटे विला में रहती होगी। मैं रास्ता ना भटक जाऊं इसलिए उनके पोते ने मेन एरिया को एड्रेस के तौर पर राजवंश विला का एड्रेस लिखा होगा। ऐसा करती हूं एक बार फिर से पूछ लेती हूं।”
इशिका ने तुरंत अभिमन्यु को मैसेज करते हुए लिखा, “हम टैक्सी में है। यहां काफी सारे घर हैं। मुझे लगता है मैं गलत रास्ते पर पहुंच गई हूं।”
अभिमन्यु अपनी गाड़ी में था। उसने तुरंत जवाब में लिखा, “अच्छा ठीक है, तुम बाहर खड़ी रहना। मैं अभी पहुंच रहा हूं।”
इशिका टैक्सी से बाहर उतरी और वहां लगी एक बेंच पर बैठ गई। उसने वसुधा को भी अपने पास बिठा लिया। इशिका ने वसुधा से पूछा, “दादी क्या आपको याद है कि आपका घर कौन सा है?”
“नहीं, मुझे ठीक से कुछ याद नहीं आ रहा है।” वसुधा ने इधर-उधर देखते हुए कहा। थके होने की वजह से उनकी गाड़ी में आंख लग गई थी।
“ठीक है हम थोड़ी देर वेट कर लेते हैं। उतनी देर में आपका पोता आ जाएगा।” इशिका ने जवाब दिया। वो वसुधा के पास बैठकर इधर-उधर देखने लगी।
वो पूरा इलाका राजवंश फैमिली का था, जो कई एकड़ में फैला हुआ था। आसपास के छोटे विला भी उनके कॉन्ट्रैक्ट के अंदर बने हुए थे और ज्यादातर उसमें उनके फैमिली के लोग ही रहते थे। सामने एक बड़ा सा विला था। उस विला तक जाने के लिए भी एक लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। मेन डोर पर काफी सारे गार्ड्स खड़े हुए थे और उसका मेन डोर काफी शानदार तरीके से बनाया हुआ था।
इशिका खोई हुई नजरों से घर को देख रही थी, तभी वहां एक गाड़ी आकर रूकी। उसमें से आयशा और मालविका बाहर निकली। आयशा आज शाम वसुधा से मिलने के लिए घर आने वाली थी, तो मालविका उसके साथ उसकी नैनी के तौर पर आई थी।
जैसे ही आयशा और मालविका ने इशिका को सामने देखा तो वो जल्दी से उसके पास गई। मालविका ने गुस्से में कहा, “तुम बेशर्म लड़की, तुम्हें कितना समझा दिया फिर भी तुम यहां तक चली आई? साथ में ये किस औरत को लेकर घूम रही हो तुम?”
इशिका ने मालविका को घूर कर देखा और कोई जवाब नहीं दिया। वो वसुधा को संभालने में लगी हुई थी।
आयशा ने मालविका की बात के जवाब में कहा, “आंटी ये बूढी औरत आपकी समधन लगती है, आई मीन ये औरत इशिका के सड़क छाप पति की दादी है।”
“अरे दादी है तो इसे लेकर यहां क्यों आई है? राजवंश फैमिली में इन जैसे लोगों का क्या काम?” मालविका ने मुंह बनाकर कहा।
इशिका ने उन्हें शांति से जवाब देते हुए कहा, “आप अपना काम कीजिए। मैं बस दादी को उनके घर छोड़ने के लिए आई हूं।”
“मजाक कर रही हो क्या तुम?” आयशा ने सिर हिला कर कहा, “यहां नौकरों के लिए बना हुआ आउट हाउस का एक छोटा सा कमरा तक तुम लोग अफोर्ड नहीं कर सकते और इस बूढी औरत को, जिसे तुम दादी कहती हो, जो तुम्हारे पति की दादी है, वो राजवंश विला के आसपास रहती है?”
“क्यों तुम्हें कोई दिक्कत है क्या?” इशिका ने भौहें उठाकर कहा।
“नहीं हमें कोई दिक्कत नहीं है। बस हम नहीं चाहते कि तुम्हारी वजह से हमारी एक बार फिर से इंसल्ट हो।” आयशा ने जवाब दिया।
मालविका वसुधा को गौर से देख रही थी। वो फिर उसके पास जाकर बोली, “अब ये तुम्हारे परिवार की बहू बन गई है तो तुम इसे कुछ समझाती क्यों नहीं? ये अमीर आदमियों के आगे पीछे घूमती रहती है। कहीं ऐसा तो नहीं कि पूरी प्लानिंग करने वाले तुम्हारे पोते और तुम हो। इसकी खूबसूरती को जरिया बनाकर मिस्टर अभिमन्यु राजवंश को ब्लैकमेल करके पैसे हड़पने के इरादे है ना तुम्हारे?”
“बकवास बंद करो और मेरी बहू के बारे में कुछ मत कहो।” वसुधा ने सख्ती से जवाब दिया।
इशिका इस मामले को बढ़ाना नहीं चाहती थी। वो वसुधा को बेंच से उठाने लगी तभी वसुधा ने सामने राजवंश विला की तरफ देखकर कहा, “बहु मुझे याद आ गया है, मेरा घर कौन सा है। वो सामने वाला बड़ा सा घर मेरा है। हम चलते हैं।”
इशिका जानती थी कि वो घर वसुधा का नहीं हो सकता लेकिन फिलहाल के लिए उनसे पीछा छुड़ाने के लिए इशिका ने कुछ नहीं कहा। वो वसुधा को उस तरफ ले जाने लगी तभी मालविका बीच में आ गई।
मालविका ने इशिका का बाजू पकड़ कर उसे लगभग खींचते हुए कहा, “तुम इस बूढी औरत को सहारा बना कर अपनी इमोशनल कहानी के जरिए राजवंश फैमिली में घुसना चाहती हो ना? आज आयशा का खास दिन है, तो मैं तुम्हें ऐसा कभी नहीं करने दूंगी।”
इशिका ने मालविका का हाथ झटका। जब मालविका का इशिका पर बस नहीं चला तो वो वसुधा से बोली, “तुम्हारी तो उम्र हो गई है। तुम ही समझाओ इसे कुछ? कहीं ऐसा तो नहीं कि जवानी में तुम भी ऐसे ही काम करती थी। अमीर आदमियों को फसाना और फिर उनसे पैसे ऐंठना।”
वसुधा एक बहुत ही अच्छे खानदान से ताल्लुक रखती थी। राजवंश फैमिली की बहू होने से पहले भी उसके मायके वाले एक प्रतिष्ठित परिवार थे। ऐसे में वो ये सब सहन नहीं कर पाई। मालविका की बातें सुनकर उसका सर चकराने लगा और वो चक्कर खाकर नीचे गिर गई।
वसुधा की खराब हालत देखकर इशिका गुस्से में मालविका पर जोर से चिल्लाई, “तुमने सबको अपने जैसा समझा है क्या? तुम लोगों को जहां जाना है, निकलो यहां से लेकिन कम से कम हमें अकेला छोड़ दो।” इशिका नीचे बैठकर वसुधा को संभालने लगी।
“देखो तो कैसी बदतमीज लड़की है। अपनी मां तक से बात करने की तमीज नहीं है।” मालविका ने मुंह बनाकर कहा।
इशिका वसुधा को संभाल रही थी। वसुधा का शरीर कांपने लगा था और चेहरा पीला पड़ने लगा था। इस वक्त उन्हें उनकी दवाइयां की सख्त जरूरत थी। इशिका ने बैग में चेक किया तो वहां दवाई नहीं थी।
“डोंट वरी दादी, मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगी।” इशिका ने कहा और फिर वसुधा को उठाने लगी। उसने मन ही मन कहा, “जानती हूं दादी को गलतफहमी हो गई कि राजवंश फैमिली उनकी अपनी फैमिली है। वो कितनी भी बुरे क्यों ना हो लेकिन एक बूढी औरत की मदद जरूर करेंगे। फिलहाल हमसे राजवंश विला ही सबसे करीब है। मुझे दादी को वहां लेकर जाना होगा।”
इशिका ने वसुधा को जैसे तैसे करके उठाया और उसे राजवंश विला की तरफ ले जाने लगी, तभी आयशा आगे आ गई वो गुस्से में बोली, “कहीं तुम राजवंश विला के अंदर जाने का तो नहीं सोच रही? मैं तुम्हें बता दूं कि मैं मेरे ससुराल में कोई केओस क्रिएट नहीं करना चाहती। तुम्हारी वजह से तो बिल्कुल नहीं। जानती हो ना तुम कौन हो?”
“अच्छे से जानती हूं। फिलहाल मेरा रास्ता छोड़ो वरना तुम्हें भी बता दूंगी कि मैं कौन हूं और क्या कर सकती हूं।” इशिका ने गुस्से में कहा।
आयशा अभी भी पीछे नहीं हटती थी। इशिका से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने आयशा को जोर से दूसरी तरफ धकेल दिया। उसका धक्का इतना तेज था कि आयशा नीचे गिर गई थी उसके घुटनों पर और कपड़ों पर हल्की मिट्टी लग गई और उसके परफेक्टली सेट किए हुए बाल बिखर गए थे।
मालविका ने जल्दी से आयशा को संभाला और फिर इशिका के पास आकर वसुधा का बाजू पकड़ कर उसे खींचने लगी। वो चिल्लाकर बोली, “तुम इतनी एहसान फरामोश हो जाओगी मुझे नहीं पता था। पहले पता होता तो तुम जैसी लड़की को मैं पैदा ही नहीं करती। बूढी औरत की वजह से तुमने आयशा को मारा ना, इसे तो मैं छोडूंगी नहीं।”
“हाथ लगाने के बारे में सोचना भी मत वरना राजवंश विला बाद में पहुंचोगी, पहले हॉस्पिटल पहुंचा दूंगी।” इशिका ने वार्निंग देते हुए कहा।
“अच्छा तो अब इस बूढी औरत के लिए तुम अपनी मां के हाथ पैर तोड़ोगी? बिल्कुल सही जा रही हो तुम। तुम जैसी लड़की से और उम्मीद क्या की जा सकती है। बस तभी आदर्श तुम्हें अपनी औलाद तक कहने से शर्म महसूस करते हैं।” मालविका ने इशिका की सबसे कमजोर कड़ी पर वार करते हुए कहा।
मालविका वसुधा को छू भी पाती उससे पहले इशिका दूसरी तरफ आई और मालविका का हाथ पकड़ कर पीछे की तरफ मरोड़ दिया। वो दर्द से जोर से चिल्लाई।
इन सब ड्रामों बीच एक बड़ी सी का ब्लैक लग्जीरियस गाड़ी आकर रुकी। मालविका के चिल्लाने की आवाज सुनकर वो जोर से चिल्लाया, “ये क्या तमाशा लगा रखा है तुम लोगों ने यहां पर?”
वो अभिमन्यु की गाड़ी थी और वही बाहर निकाला था। अभिमन्यु उनकी तरफ बढ़ रहा था तभी मालविका ने झूठे आंसू निकाल कर कहा, “कुछ नहीं मिस्टर राजवंश। ये इशिका है, जो एक बूढी औरत के जरिए आपके घर में घुसने की कोशिश कर रही है। अफसोस की बात है कि ये लड़की हमारे खानदान से बिलॉन्ग करती है।”
“बिल्कुल ठीक कह रही है आंटी, इसने बस आपको सेड्यूस करने के लिए इस बूढी औरत का सहारा लिया और हम इसे रोक रहे हैं, तो ये हम पर मारामारी करने के लिए आ गई।” हमेशा की तरह आयशा ने मासूम बनने का दिखावा किया।
उसकी बातें सुनकर इशिका को अफसोस हो रहा था, वो क्या बकवास कर रही थी। इशिका ने गहरी सांस ली और अपना पक्ष रखने के लिए दूसरी तरफ पलटी तभी अभिमन्यु की नजर वसुधा पर पड़ी। इशिका ने उन्हें बहुत अच्छे से थाम रखा था। वसुधा को उस हाल में देखकर अभिमन्यु की निगाहें सर्द हो गई थी।
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लो भाई आप चाहते थे कि अभिमन्यु और मिल लिए और उन्हें एक दूसरे की सच्चाई का पता चल गया। अब अभिमन्यु कैसे रिएक्ट करता है। पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं।