Unknown wife of billionaire - Chapter 25
Unknown wife Of Billionaireअभिमन्यु वसुधा को लेकर अंदर चला गया था। लगभग 1 घंटे बाद इशिका को भी अंदर बुलाया गया। उसके साथ आयशा और मालविका भी अंदर जा रही थी। नक्ष उनसे थोड़े पीछे आ रहा था। जैसे ही मालविका ने इशिका को डांटा तो वसुधा ने सुन दिया था। वो गुस्से में उसे पर जोर से चिल्लाई।
अब तक मालविका और आयशा में से किसी की नजर अंदर की तरफ नहीं गई थी। अंदर देखते ही वो दोनों सन्न रह गई। सामने वसुधा बैठी हुई थी। उनके कपड़े बदल दिए गए थे। इस वक्त उन्होंने बहुत महंगी ड्रेस पहनी हुई थी और वो जिस जगह पर बैठी थी, वहां सिर्फ राजवंश फैमिली के हेड ऑफ द मेंबर को बैठने का हक था।
इशिका ने वसुधा को देखकर हल्की मुस्कुराहट दी। फिर उसकी नजर अभिमन्यु पर गई तो उसका मुंह बन गया।
“अजीब मुसीबत है। मैं अब तक इस इंसान को अच्छा समझकर इससे बातें करती रही।” इशिका ने मन ही मन बड़बड़ा कर कहा।
फिर उसकी नजर दूसरी तरफ गई। वहां पर एक लगभग 72 साल के आसपास आदमी बैठा हुआ था, जिसने बैज कलर का सूट पहना हुआ था। उनके सिर पर गिने-चुने बाल थे और मुंह पर गहरी मूंछें थी। शरीर में हल्के से मोटे और चेहरे पर पूरे एटीट्यूट के साथ वो बैठे हुए थे। वो अभिमन्यु के डैड मिस्टर प्रशांत राजवंश थे।
दूसरी तरफ नक्ष के मॉम डैड बैठे हुए थे। उसके डैड नकुल राजवंश लगभग 48 साल के आसपास थे और मॉम उर्वशी राजवंश 45 के करीब। दोनों ही अपनी उम्र के मुकाबले काफी जवान लग रहे थे।
मालविका ने वसुधा की तरफ देखकर हड़बड़ाते हुए कहा, “तुम.. तुम यहां...”
मालविका को समझ नहीं आया कि वो क्या बोले, तो वो अपनी बात भी पूरी नहीं कर पाई थी। वही आयशा तो चौंकते हुए झटका खाकर गिरने वाली थी कि तभी नक्ष ने उसे संभाल लिया।
नक्ष धीरे से बोला, “क्या हुआ? सब ठीक है ना?”
आयशा ने हां में सिर हिलाया। वो गुस्से से इशिका की तरफ देख रही थी। उसने हमेशा से राजवंश खानदान की बहू बनने का सपना देखा था। पूरी फैमिली को इंप्रेस करने के बाद जब बात वसुधा राजवंश की आई, तो दरवाजे पर उन्होंने इशिका की वजह से उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया। कल शॉपिंग मॉल में भी आयशा ने उनकी बहुत इंसल्ट की थी।
आयशा ने गहरी सांस ली और सारा ब्लेम इशिका पर डालते हुए कहा, “तुमने झूठ क्यों बोला इशिका? तुमने कहा था कि ये औरत तुम्हारे पति की दादी है, जबकि ये तो राजवंश फैमिली की मेंबर है? हमारे रिश्ते अच्छे नहीं है। तुम्हारी वजह से हमने दादी के साथ बुरा बर्ताव किया लेकिन वो सब अनजाने में हुआ।”
मालविका ने उसकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “आयशा बिल्कुल ठीक कह रही है। इसने मिसेज राजवंश को अपने पति को दादी बताया। उस पति की दादी, जो पता नहीं कहां आवारागर्दी करते हुए घूमता है। इशिका, तुमने बहुत बड़ी गलती की है। सबसे पहले तुम सबसे माफी मांगोगी।”
इशिका उनकी तरफ अजीब नजरों से देखने लगी। उन लोगों ने अपनी गलती का सारा दोष इशिका पर डाल दिया। सब उसे शक भरी निगाहों से देख रहे थे, तभी वहां कांच टूटने की एक जोरदार आवाज आई। मालविका जोर से चिल्ला पड़ी।
वसुधा ने गुस्से में चाय का प्याला मालविका की तरफ फेंक दिया था। वो अपनी जगह से खड़ी हुई और तेज आवाज में बोली, “चुप हो जाओ तुम दोनों। कब से मेरी बहू को कुछ भी कहे जा रही हो। ये मेरे पोते की पत्नी है।”
“मिसेज राजवंश इसने आपको भी धोखा दिया है। ये आपकी बीमारी का फायदा उठा रही है। इसका पति तो एक आवारा लड़का है।” मालविका अपने दर्द को कंट्रोल करके बोली।
वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। इस तरह सबको लड़ते झगड़ते देखकर उर्वशी उठी और उसने सख्त आवाज में कहा, “बस कीजिए, क्यों ना हम अभिमन्यु से ही पूछ लेते हैं।”
उर्वशी ने अभिमन्यु की तरफ देखा और सीधे-सीधे पूछा, “अभिमन्यु क्या ये लड़की सच कह रही है? ये तुम्हारी वाइफ है क्या, जिसे अब तक तुम हम सब से छुपाने की कोशिश कर रहे थे।”
इशिका ने अभिमन्यु की तरफ देखा और मन ही मन बोली, “सबके सामने मेरी इंसल्ट मत करना प्लीज। हम दोनों शादीशुदा हैं। तुम्हें यकीन ना हो पर आज झूठ बोल दो।”
इशिका मन में प्रार्थना कर रही थी कि अभिमन्यु उस वक्त झूठ ही सही लेकिन उसे अपनी पत्नी स्वीकार कर ले, वरना सब उसे आयशा और मालविका की तरह काफी भला बुरा कहने वाले थे।
इशिका उम्मीद भरी नजरों से अभिमन्यु की तरफ देख रही थी तभी अभिमन्यु ने बिना किसी भाव के कहा, “नहीं, ये वो नहीं है।”
अभिमन्यु के ना कहते ही इशिका ने गुस्से में उसकी तरफ देखकर अपने मन में कहा, “ये इंसान कभी नहीं बदल सकता। घमंडी और एरोगेंट ही रहेगा।”
वही जैसे ही अभिमन्यु ने इशिका को अपनी पत्नी मानने से इंकार किया, मालविका हंसते हुए बोली, “मैंने तो पहले ही कहा था ये लड़की झूठ बोल रही है और इसी की वजह से ये सब कंफ्यूजन क्रिएट हुआ है।”
इशिका उसे कोई जवाब देती उससे पहले अभिमन्यु ने मालविका की तरफ देखकर सख्त आवाज में कहा, “ना तो मिस सिंघानिया झूठ बोल रही है, और ना ही दादी... दादी को अल्जाइमर है और उन्होंने मिस सिंघानिया को अपनी बहू समझ लिया था। दादी मिस सिंघानिया के साथ बेहतर महसूस कर रही थी। इसलिए मैंने ही मिस सिंघानिया को दादी का ख्याल रखने के लिए कहा था।”
अभिमन्यु के सब बताते ही इशिका ने राहत की सांस ली। आधा ही सही लेकिन अभिमन्यु ने सच बता कर उसे बचा लिया था।
दूसरी तरफ अब आयशा की हालत खराब हो रही थी। उसने इशिका की तरफ देखकर कहा, “इशिका अगर ऐसा था तो तुम्हें सच बता देना चाहिए था। तुम बताती तो ना इतनी बड़ी गलतफहमी क्रिएट होती और ना ही ये कंफ्यूजन।”
आयशा अभी भी सारा दोष इशिका पर डालने की कोशिश कर रही थी, तभी अभिमन्यु ने आयशा की तरफ देखकर सर्द आवाज में कहा, “मिस आयशा सिंघानिया, बेहतर होगा कि आप अपनी गलतियों को दूसरों पर डालने की कोशिश ना करें। अगर कोई गलती की है तो उसे एक्सेप्ट करें और उसके लिए सॉरी कहें।”
अभिमन्यु के शब्द इतनी सख्त और तेज थे कि आयशा की नजरे अपने आप नीचे हो गई। अभिमन्यु के बाद वसुधा ने गुस्से से उसकी तरफ देखकर कहा, “तुम्हें क्या लगता है, मैं बेवकूफ हूं, जो मुझे कुछ दिखाई नहीं देता? हां मैं बातें भूल जाती हूं लेकिन मुझे अच्छे से समझ आता है, कौन कैसा है। तुमने मेरी बहू से कहा कि उसने कुछ बताया क्यों नहीं। मुझे अच्छे से याद आ रहा है, कल तुमने उसे बताने का मौका ही नहीं दिया। बार-बार तुम लोग उसे नीचा दिखाते रहते हो।”
“दादी...” आयशा ने अपनी सफाई पेश करने की कोशिश की, तभी वसुधा ने उसे बीच में काटते हुए कहा, “बस करो अगर गलती की है, तो उसे मानो। लेकिन नहीं, तुम तो बेशर्मों की तरह अभी भी मेरी ही बहू को सुनाए जा रही हो।” अपनी बात खत्म करने के बाद उन्होंने नक्ष की तरफ देखकर सख्त आवाज में कहा, “मुझे ये लड़की पसंद नहीं है। ये इस खानदान की बहू बनने के लायक नहीं है। इसके साथ तुम्हारी शादी नहीं हो सकती है।”
शादी टूटने की बात सुनकर आयशा के कदम लड़खड़ा गए थे। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। उसने नक्ष की तरफ देखकर कहा, “ नक्ष मेरी बात समझने की कोशिश करो। इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी। अगर फिर भी ये शादी टूटती है तो आई प्रॉमिस मैं तुम्हें किया हुआ वादा जरुर निभाऊंगी।” बोलते हुए उसके शब्द इतने धीमे हो गए कि उन्हें सिर्फ नक्ष ही सुन सकता था।
आयशा ने बिल्कुल धीमी आवाज में कहा, “आई प्रॉमिस मैं तुम्हारी डॉक्टर मर्चेंट से मीटिंग करवा कर उन्हें तुम्हारा प्रोजेक्ट में शामिल करवा दूंगी।”
नक्ष ने गहरी सांस ली। डॉक्टर मर्चेंट उसके प्रोजेक्ट के लिए कितने जरूरी थे, ये वही जानता था।
नक्ष वसुधा के सामने गया और बोला, “बड़ी दादी मैं आपकी बहुत रिस्पेक्ट करता हूं, पर ये भी सच है कि मुझे आयशा से प्यार है। हम दोनों ने रिंग्स एक्सचेंज कर ली है। ये बात पब्लिक भी हो चुकी है कि हम दोनों शादी करने वाले हैं। ऐसे में शादी टूटने की बात बाहर आई तो आयशा की बहुत इंसल्ट होगी। हमारे खानदान पर भी सवाल उठेंगे।”
वसुधा ने कोई भी फैसला लेने से पहले एक नजर नक्ष और आयशा की तरफ देखा और फिर बोली, “ठीक है, तुम बड़े हो गए हो। शादी जैसा फैसला बहुत बड़ा होता है। तुम्हारी जिंदगी का सवाल है तो तुम खुद सोच सकते हो। कर लेना इस लड़की से शादी।”
वसुधा ने नक्ष की लाइफ में इंटरफेयर करना सही नहीं समझा। उनके हां कहते ही आयशा ने राहत की सांस ली, तो वही जैसे ही वसुधा ने शादी के लिए ग्रीन सिग्नल दिया, उर्वशी जल्दी से खड़ी होकर बोली, “जरूर दादी, उनकी शादी जल्द ही हो जाएगी। आपको याद है ना कि हम शादी में बच्चों को गिफ्ट देते हैं। आपने तैयारी करवा ली है ना, आयशा और नक्ष को शादी का गिफ्ट देने की?”
“हां ठीक है.. मैं अभिमन्यु को बोलकर कुछ पैसे उनके अकाउंट में ट्रांसफर करवा दूंगी। उन्हें जो लेना होगा ले लेंगे।” वसुधा ने रूखे तरीके से जवाब दिया।
उनकी बात सुनकर उर्वशी के चेहरे का रंग उड़ गया। वो तुरंत बोली, “लेकिन बात पैसों की नहीं हुई थी। आप गिफ्ट में इन दोनों को एक-एक परसेंट शेयर देने वाली थी।”
2% शेयर की बहुत वैल्यू थी और उर्वशी उसे ऐसे ही जाने नहीं देना चाहती थी। वसुधा के पास राजवंश एम्पायर के शेयर्स तो थे ही, उनके मायके की तरफ से भी कंपनी में उनका एक बड़ा सा हिस्सा था, क्योंकि वो अपने पिता की इकलौती बेटी थी।
उर्वशी अभी भी उम्मीद भरी निगाहों से वसुधा की तरफ देख रही थी। उसे लगा वसुधा भूल गई होगी।
वसुधा ने गहरी सांस लेकर हल्का मुस्कुरा कर कहा, “जरूर देती और मुझे याद भी है लेकिन मुझे ये लड़की पसंद नहीं है। शादी में मैं कोई इंटरफेयर नहीं करने वाली लेकिन हां, मैं इसे कोई गिफ्ट भी नहीं दूंगी। शेयर्स तो बिल्कुल नहीं। खानदान की सबसे बड़ी सदस्य होने के नाते एक अच्छी अमाउंट ट्रांसफर कर दूंगी, उनसे ये अपने उस स्टोर के दस जोड़े कपड़े तो खरीद ही सकती है, जहां कल इसने मेरी बहु के हाथ से ड्रेस छीन लिया था।”
आयशा ने शर्म से अपनी नजरें नीची कर ली। वो बुजुर्ग औरत बार बार उसे सबके सामने नीचा दिखा रही थी। वो मन ही मन बहुत अपमानित महसूस कर रही थी।
राजवंश फैमिली में बहुत सारे हाउस हेल्पर्स काम करते थे और जल्द ही फिर ये न्यूज़ बाहर भी पहुंचने वाली थी कि वसुधा राजवंश आयशा को पसंद नहीं करती।
आयशा उन्हें कुछ कह पाती उससे पहले वसुधा खड़ी हुई और अभिमन्यु से बोली, “मुझे घर ले चलो।”
अभिमन्यु ने उनकी बात पर हामी भरी तो वसुधा ने इशिका की तरफ देखकर कहा, “बहू तुम वहां खड़ी होकर क्या कर रही हो? मेरे साथ आओ।”
वसुधा के साथ आने से पहले इशिका ने अभिमन्यु की तरफ देखा तो उसने आंखों ही आंखों मे इशिका को साथ आने की इजाजत दे दी थी। वसुधा अभिमन्यु और इशिका को लेकर अपने घर पर जाने लगी, जो विला के ही बैक साइड एरिया में एक बड़े से गार्डन में बना हुआ था। राजवंश विला काफी एकड़ में फैला हुआ था, तो वसुधा का अलग घर भी काफी बड़ा और खूबसूरती से बनाया हुआ था।
अपने घर के अंदर आते ही अभिमन्यु और इशिका को अकेला छोड़ने के लिए वसुधा ने हल्का मुस्कुरा कर कहा, “मुझे बाथरूम जाना है। थोड़ा टाइम लगेगा, तब तक तुम दोनों बातें करो।”
उन्होंने जानबूझकर उन दोनों को साथ में छोड़ा था और फिर मुस्कुराते हुए बाथरूम में चली गई। वसुधा के घर के लिविंग एरिया में अभिमन्यु और इशिका अकेले थे। वो दोनो एक दूसरे को खा जाने वाली नजरों से घूर रहे थे।
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चलो एक सच सामने आ गया है तो दूसरा भी आ ही जाएगा। बेचारे अभिमन्यु और इशिका कितनी उम्मीद लगा कर बैठे थे, जब चैट करते थे... जब आमने-सामने आए तो पूरी उम्मीदों पर पानी फिर गया। पढ़ कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं।