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Chapter 20

Unknown wife of billionaire - Chapter 20

Unknown wife Of Billionaire

अभिमन्यु इशिका से मिलने के लिए काफी बेचैन हो रहा था। इशिका के एड्रेस देने के बाद वसुधा के चेकअप के बहाने साथ में डॉक्टर को लेकर गया। अभिमन्यु दरवाजा खोलने से हिचकिचा रहा था। फिर भी उसने डोर बेल बजाई तो अंदर से वसुधा की आवाज आई।

वसुधा ने बाहर आकर अभिमन्यु के लिए दरवाजा खोला और उसे देखते ही मुस्कुरा कर बोली, “तुम आ गए यहां मुझसे मिलने के लिए? मुझे पता था तुम जरूर आओगे।”

उसके बाद वसुधा अभिमन्यु से अलग हुई तो उसकी नजर डॉक्टर माथुर पर गई। वसुधा ने उन्हें देखकर आंखें छोटी की और सख्त अंदाज में कहा, “ये एक फैमिली मीटिंग है, जहां मैं अपने पोते और बहू के साथ टाइम स्पेंड करना चाहती हूं। बीच में इनका क्या काम है। तुम इन्हें क्यों लेकर आए हो लड़के।”

गुस्से में वसुधा का बर्ताव काफी एग्रेसिव हो जाता था। उनकी तबीयत खराब ना हो इसलिए अभिमन्यु ने बात संभालते हुए कहा, “ये बस आपको देखना चाहते हैं। आप जानती है ना, आपका रेगुलर चेकअप करना जरूरी है।”

“मुझे इससे कोई चेकअप नहीं करवाना है।” वसुधा ने हल्के गुस्से में कहा। उन्होंने अभिमन्यु का हाथ पकड़ा और उसे भी बाहर की तरफ ले जाने लगी।

अभिमन्यु तुरंत वहां पर रुका और काफी प्यार से कहा, “अच्छा ठीक है दादी, हम डॉक्टर माथुर को वापस भेज देते हैं। मैं आपका चेकअप कर लूंगा। अब तो आप मुझे अंदर आने देंगी ना?”

वसुधा ने हां में सिर हिलाया और कहा, “ठीक है लेकिन मुझे इस आदमी से चिढ़ है। ये अंदर नहीं आ सकता है।”

अभिमन्यु ने डॉक्टर माथुर की तरफ देखा तो उसने लाचारी से अपने कंधे उचका दिए। डॉ माथुर ने कुछ जरूरी इक्विपमेंट अभिमन्यु को दिए और खुद बाहर जाकर बैठ गए।

अभिमन्यु वसुधा के साथ उनके कमरे में आया। रूम में उसे पानी चलने की आवाज आ रही थी, इसका मतलब कोई बाथरूम में था और नहा रहा था। वो कोई और नहीं इशिका ही थी।

अभिमन्यु ने बाथरूम की तरफ देखा तो वसुधा ने मुस्कुरा कर उसका चेहरा अपनी तरफ करके कहा, “उधर क्या देख रहे हो? तुम्हारी पत्नी ही बाथरूम में है। थोड़ी देर पहले ही आई थी। खाना बना दिया है उसने, बस नहाने के लिए गई है।”

“ठीक है चलिए मैं आपका चेकअप कर लेता हूं।” अभिमन्यु बोला और फिर वसुधा को पकड़ कर बेड पर बिठाया।

वो उनके सामने चेयर पर बैठा था। अभिमन्यु ने वसुधा के चेहरे की तरफ देखा तो वो पहले के मुकाबले काफी स्वस्थ और चमकदार लग रहा था। फिर उसने इधर उधर नजरें दौड़ाई। घर काफी साफ सुथरा लग रहा था। इंटीरियर भी काफी एसथेटिकली सेट किया गया था।

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अभिमन्यु धीरे से बड़बड़ा कर बोला, “इसका मतलब वो आपका अच्छे से ख्याल रख रही है।” अचानक ही अभिमन्यु के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट आ गई। उसे एक ऐसी ही लड़की चाहिए थी, जो उसकी दादी का ख्याल रखें वरना आजकल के टाइम में बड़े बुजुर्गों पर कौन ध्यान देता था।

अभिमन्यु ने वसुधा के कुछ जरूरी चेकअप करने शुरू कर दिए, जैसे उनके हार्ट रेट नापना और बीपी चेक करना। सारे टेस्ट बिल्कुल नॉर्मल थे। ब्लड शुगर भी काफी बैलेंस्ड था। ये देखकर अभिमन्यु ने राहत की सांस ली।

वसुधा के सारी रीडिंग्स नॉर्मल देखकर अभिमन्यु बोला, “आप बिल्कुल ठीक है। अब मुझे यहां से चलना चाहिए।”

“अरे ऐसे कैसे चले जाओगे? बहू कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी। इतना कुछ बनाया है और तुम्हारे आने से पहले नहाने तक के लिए गई थी ताकि अच्छे से तैयार हो जाए। तुम उससे बिना मिले नहीं जा सकते हो।” वसुधा ने उसे प्यार से डांटते हुए कहा।

“नहीं दादी, मुझे काम है और जाना पड़ेगा।” अभिमन्यु ने जवाब दिया और जाने से पहले मेडिकल इक्विपमेंट की तरफ देखा। उसने वसुधा से कहा, “मैं इन्हें यहीं पर छोड़कर जा रहा हूं। अपनी बहू को कहिएगा कि आपका टाइम टू टाइम चेकअप करती रहे।”

“अरे उसे ये सब कहां आता होगा? वो तो मासूम सी दिखने वाली लड़की है। ऐसा करो कि तुम ही रोज आकर मेरा चेकअप करना और उस अजीब से दिखने वाले आदमी को मत लेकर आना।” वसुधा ने सिर हिला कर कहा।

अभिमन्यु ने कोई जवाब नहीं दिया। वसुधा ने उसका हाथ पकड़ा और उसकी आंखों में देखते हुए सख्ती से कहा, “तुम आओगे ना लड़के यहां पर?” अल्जाइमर होने की वजह से वसुधा को किसी का नाम याद नहीं रहता था। वो अभिमन्यु को कुछ भी कह कर बुला देती थी।

“हां ठीक है आ जाऊंगा पर आप अपना ख्याल रखिएगा।” अभिमन्यु ने जवाब दिया और फिर वसुधा के फोरहेड पर किस कर दिया।

जाने से पहले उसने एक बार फिर बाथरूम की तरफ देखा तो पानी की आवाज लगातार आ रही थी, जिससे साफ था कि इशिका को बाहर आने में टाइम लगने वाला था।

अभिमन्यु की एक मीटिंग होने वाली थी इसलिए उसने ज्यादा इंतजार नहीं किया और वहां से चला गया।

उसके जाने के बाद वसुधा के चेहरे पर मुस्कुराहट थी वो मन ही मन बोली, “आजकल के बच्चे ना...उनमें बिल्कुल भी पेशेंस नहीं होता है। थोड़ी सी लड़ाई क्या हो गई, दोनों पति-पत्नी अलग रहने लग गए। खैर, जो भी हो, रोजाना आएगा तो सुलह हो ही जाएगी। क्या पता फिर जल्द ही मुझे मेरे परपोते का मुंह देखने को भी मिल जाए।”

वसुधा अपने ख्यालों में खोई हुई थी तभी इशिका बाहर आई। उसने अपने गीले बालों को तौलिए में बांध रखा था। वसुधा को वहां अकेले देखकर इशिका ने हैरानी से पूछा, “अरे दादी, आपका पोता कहां गया? मैंने अंदर से सुना था आप दोनों बातें कर रहे थे।”

“उसे काम था, तो वो चला गया।” वसुधा ने जवाब दिया। उन्हें लगा कि इशिका अभिमन्यु के जाने से परेशान हो गई होगी। ये सोचकर वसुधा ने इशिका का हाथ पकड़ कर धीरे से कहा, “मैं जानती हूं कि तुम उसके इस तरह जाने से उदास हो। वो थोड़ा अलग टाइप का है। बचपन से अकेला रहा है, तो जिद्दी और गुस्सैल है। तुम उसके साथ थोड़ा प्यार से पेश आओगी तो वो खुद को बदल लेगा। तुम ऐसा करोगी ना बहू?”

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वसुधा के मुंह से एक बार फिर अपने लिए बहू शब्द सुनकर इशिका इरिटेट होकर बोली, “दादी मैं आपकी बहू नहीं हूं। आपको कितनी बार समझाऊं।”

“मैंने कहा ना, तुम ही मेरी बहू हो।” वसुधा ने सख्त आवाज में कहा। तुरंत ही उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस गंभीर हो गए थे।

इशिका ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और हार मानते हुए कहा, “अच्छा ठीक है। मैं आप ही की बहू हूं लेकिन आप मेरी बात माना करें। चलिए हम खाना खाते हैं, फिर आपको दवाइयां भी लेनी है।”

वसुधा ने उसकी बात पर हामी भरी। उन्हें खाना खिलाने के बाद इशिका ने उन्हें सुला दिया और रूटीन की तरह उनका वीडियो बनाकर अभिमन्यु को भेज दिया था।

वसुधा को वीडियो में खुश और स्वस्थ देखकर अभिमन्यु को दिल ही दिल में बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी काइंड किडनैपर का एहसान किस तरह चुकाएं।

अभिमन्यु ने तुरंत ही इशिका को मैसेज भेजते हुए कहा, “थैंक यू सो मच, मेरी दादी का इतना ख्याल रखने के लिए। सुबह तुम किसी छोटे बच्चों को लेकर परेशान थी। क्या उस मामले में मैं तुम्हारी कोई हेल्प कर सकता हूं?”

“उसकी कोई जरूरत नहीं है।” इशिका ने जवाब दिया। वो मन ही मन बोली, “तुम मेरी कोई हेल्प नहीं कर पाओगे। हर इंसान तुम्हारी तरह अच्छा नहीं होता है। अगर मेरी तलाक लेने में कोई हेल्प कर सकता है तो वो खुद अभिमन्यु है, जो कि जाकर चेक तक नहीं करना चाहता।”

“फिर भी कभी भविष्य में जरूरत पड़े तो बताना, बिना किसी हिचकिचाहट के।” अभिमन्यु ने जवाब दिया। इशिका की तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया था तो अभिमन्यु समझ गया था कि वो उसे मदद नहीं लेना चाहती है।

अभिमन्यु अपना सारा काम छोड़कर उस काइंड किडनैपर के बारे में सोच रहा था, तभी उसके दिमाग में इशिका का ख्याल आया। अचानक ही उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस काफी हार्श हो गए थे।

वो मन ही मन बोला, “कितना फर्क है ना तुम दोनों में..! तुम मेरी पहचान को नहीं जानती हो, फिर भी मेरी दादी का ख्याल रख रही हो। तुम्हें मुझसे कोई मदद नहीं चाहिए और दूसरी तरफ वो इशिका सिंघानिया है। वो न जाने क्यों खुद को मेरी पत्नी साबित करना चाहती है। मैं अच्छे से जानता हूं, वो ये सब नक्ष को नीचा दिखाने के लिए कर रही है। मेरा नाम यूज करके वो दुनिया के सामने खुद को स्ट्रांग साबित करना चाहती है। ऐसा कभी नहीं होगा इशिका सिंघानिया।”

वही इशिका के दिमाग में भी वसुधा जी का पोता ही चल रहा था। उसे नींद नहीं आ रही थी तो वो सीलिंग की तरफ देखते हुए अपने मन में बोली, “अजीब बात है, वहां वो अभिमन्यु राजवंश है, जो सच सुनने को तैयार नहीं है, तो दूसरी तरफ इन दादी का पोता है, जो बेचारा किसी न किसी तरह से मेरी हेल्प करना चाहता है। उसे कैसे बताऊं कि मेरी हेल्प करने में वो कुछ नहीं कर सकता है। राजवंश फैमिली कुछ ज्यादा ही स्ट्रांग है। अभिमन्यु जैसे शख्स से डील करना दुनिया का सबसे महान काम है, पर कैसे भी करके मुझे उसे मनाना ही होगा। कुछ दिनों में मेरी कंपनी पब्लिक होने की कगार पर है। ऐसे में हमारा डिवोर्स नहीं हुआ, तो मेरे लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है।”

अभिमन्यु और इशिका दोनों ही एक दूसरे की पहचान से अनजान एक दूसरे की तारीफ कर रहे थे। अभिमन्यु के लिए उसकी काइंड किडनैपर तो इशिका के लिए वसुधा जी का पोता काफी दयालु और अच्छे इंसान थे, जबकि वैसे एक दूसरे से वो दोनों इतनी नफरत करने लगे थे।

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देखते है इनकी नफरत जीतती है या प्यार? ये तो वक्त ही बताएगा। पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं। थैंक्स फॉर योर लव एंड सपोर्ट और प्लीज समीक्षा किया करो। यार अच्छा लगता है आप सबके समीक्षा पढ़ कर और कहानी तभी सक्सेसफुल होती है, जब कोई उस पर अच्छा सा रिस्पांस देता है। आई होप यू विल अंडरस्टैंड।

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